Navgrah Katha 2: इंद्रसभा में चंद्रमा ने बताई अपनी महिमा, नवग्रहों में पढ़ें चंद्र देव की दिव्य कथा
Navgrah Chandrama Katha: इंद्र सभा में चंद्र देव ने कहा, मेरे शुभ होने पर मैं सुख, सौंदर्य और यश देता हूं, जबकि अशुभ होने पर मानसिक तनाव और रोग बढ़ते हैं. सोमवार व्रत व शिव पूजा से मेरी कृपा मिलती है.

Navgrah Chandrama Katha: एक समय स्वर्गलोक के सत्ता सिंहासन पर आसीन इन्द्रदेव ने सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से अनुरोध किया कि आप लोग क्रमशः अपने मुख से अपना-अपना शुभ, अशुभ, आकृति-प्रकृति, व्यक्तित्व, प्रभाव, शक्ति, पराक्रम और गरिमा का वर्णन करें. तब नव ग्रहों में सबसे सूर्य ने अपने गुणों का गुणगान किया, जिसकी कथा हमने कल आपको बताई थी. यहां पढ़ें- Navgrah Katha 1: नवग्रहों में पढ़ें राजा सूर्य देव की दिव्य कथा, मैं सूर्य देव हूं....
सूर्य ने अपने मुख से स्वयं का गुणगान किया तो चंद्रमा भी उठ खड़े हुए और इंद्र से कहने लगे- राजन क्षमा करें! मुझसे सूर्य का अभिमान और स्वयं की प्रशंसा सहन नहीं हुई, इसलिए मैं अपने आसन से उठ खड़ा हुआ हूं. मेरी बात भी सुनें राजन. ये तपने वाले सूर्य स्वयं अपनी अग्नि में जलते रहते हैं और उसी ताप से दूसरों को भी तपाते रहते हैं. सभा में इस प्रकार अपनी महिमा का वर्णन कर रहे हैं मानो समस्त चराचर जगत पर केवल उन्हीं का आधिपत्य हो और यहां बैठे हम सभी उनके सामने तुच्छ हों.
यह न भूलें कि संसार के प्राणियों का मन मैं ही हूं. मेरे कारण ही प्रत्येक जीव के मन में शुभ और अशुभ विचार उत्पन्न होते हैं. कल्पना शक्ति, भावना और चिंतन का उदय भी मेरे प्रभाव से ही होता है. हे सूर्य! आपके ताप से पीड़ित लोगों को मैं ही शीतलता प्रदान करता हूं और उनके दुख-दर्द को कम करता हूं. मेरे दर्शन से लोगों के मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है.
मैं सबसे तेज गति से चलता हूं, इसलिए प्राणियों का मन भी तीव्र गति से विचार करता और दौड़ता रहता है. जहां आपकी किरणें भी नहीं पहुंच पातीं, वहां भी मेरे प्रभाव से लोगों का मन पहुंच जाता है. इसी तीव्र गति के कारण मेरा नाम आशुगामी पड़ा.
यदि मैं अशुभ हो जाऊं तो मनुष्य का मन अस्थिर हो जाता है. वह अपने विचारों और भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता. उसके भीतर भय, भ्रम और मानसिक अशांति उत्पन्न होने लगती है. इसलिए यह मत समझिए कि केवल तेज और प्रकाश ही सबसे बड़ा बल है, क्योंकि मन और भावना के बिना संसार का कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता.
यदि मैं अशुभ हो जाऊं तो मनुष्य अपने मन को नियंत्रित नहीं रख पाता और पतन की ओर बढ़ने लगता है. ऐसे लोगों में भोग-विलास की इच्छा अत्यधिक बढ़ जाती है. जिन स्त्रियों पर मेरा शुभ प्रभाव पड़ता है, उन्हें सौंदर्य, आकर्षण, कांति और कलात्मक गुण प्राप्त होते हैं. मेरे पास सोलह कलाएं हैं और उन्हीं कलाओं से संसार के लोग प्रेरणा, ज्ञान और रचनात्मक शक्ति प्राप्त करते हैं. मेरी कृपा से व्यक्ति को केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि यश और सम्मान भी प्राप्त होता है.
जब मैं शुभ फल देता हूं तो व्यक्ति को उज्ज्वल यश, मान-सम्मान और समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, लेकिन अशुभ होने पर मैं मनुष्य को अपमान, लज्जा और बदनामी का सामना भी करवाता हूं. गर्भ में पल रहे शिशु की रक्षा भी मैं ही करता हूं. मानव शरीर में रक्त का संचार मेरे ही प्रभाव से होता है. समुद्र में ज्वार-भाटा भी मेरे कारण आता है.
यदि मैं अशुभ या क्रोधित हो जाऊं तो मनुष्य को मानसिक विकार, उन्माद, सिरदर्द, शीत रोग, सांस संबंधी समस्याएं और कफ रोग होने लगते हैं. मेरे भीतर स्थित जल तत्व पूरे संसार को प्रभावित करता है. मैं माता का प्रतिनिधित्व करता हूं. जिस व्यक्ति पर मेरा शुभ प्रभाव होता है, उसे लंबे समय तक मातृसुख प्राप्त होता है, लेकिन यदि मैं अशुभ हो जाऊं तो व्यक्ति को बाल्यावस्था में ही मातृवियोग का दुख झेलना पड़ सकता है.
स्त्री रोग, गर्भपात और मासिक धर्म की प्रक्रियाएं भी मेरे प्रभाव से संचालित होती हैं. सोमवार के दिन मेरी उपासना, व्रत और मेरे इष्ट भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना गया है. पूर्णिमा, प्रदोष और चतुर्थी के दिन मेरी तथा भगवान शिव की आराधना करने से मनुष्य के दुख, दरिद्रता और रोग दूर होते हैं. ऐसे लोगों को मैं स्वास्थ्य, यश और संपत्ति प्रदान करता हूं.
शुक्ल पक्ष की द्वितीया और चतुर्थी को जो महिलाएं व्रत रखकर गणेश जी और मेरी पूजा करती हैं, अर्घ्य देती हैं और चावल, घी तथा शक्कर का प्रसाद अर्पित करती हैं तथा उसका आधा भाग गाय को खिलाकर शेष स्वयं ग्रहण करती हैं, उन्हें मैं धन, धान्य, संतान सुख और लक्ष्मी का आशीर्वाद देता हूं.
जो लोग प्रतिदिन मेरा दर्शन कर मेरे मंत्रों का जाप करते हैं, उनके समस्त कष्ट दूर करना और उन्हें प्रसन्न रखना मेरा परम कर्तव्य होता है. मेरे दिन अर्थात सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति चतुर, शांतचित्त, संतुलित, धैर्यवान और यशस्वी होता है. वह शासन और समाज में सम्मान प्राप्त करता है.
यदि मैं शुभ स्थिति में रहूं तो व्यक्ति को जीवन के विशेष वर्षों में लाभ और सफलता मिलती है, लेकिन अशुभ होने पर उन्हीं वर्षों में कष्ट और हानि का सामना करना पड़ सकता है. मेरी कृपा से व्यक्ति दीर्घायु और सुखमय जीवन प्राप्त करता है.
मेरे दिन बीज बोना, पौधे लगाना, कृषि कार्य आरंभ करना, यात्रा करना, नया व्यवसाय शुरू करना तथा शुभ कार्य करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है. मेरी शुभता व्यक्ति के भीतर कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को बढ़ाती है. ऐसा व्यक्ति साहित्य, कविता और कला के क्षेत्र में यश प्राप्त करता है. मैं कुंडली के कई भावों में शुभ फल देने वाला ग्रह माना जाता हूं. कर्क मेरी स्वराशि है, वृष मेरी उच्च राशि और वृश्चिक मेरी नीच राशि कही गई है.
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