Musical Pillars of Hampi: कर्नाटक के हम्पी में स्थित विट्ठल मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और अद्भुत शिल्प कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यह हम्पी की सबसे बड़ी और सबसे भव्य इमारतों में गिना जाता है.

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मंदिर हम्पी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में तुंगभद्रा नदी के पास स्थित है. यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विजयनगर साम्राज्य की समृद्ध कला और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है.

खंडहरों के बीच खड़ा यह स्मारक आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. पत्थर से बना विशाल रथ और संगीतमय स्तंभ इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देते हैं. हम्पी आने वाला हर पर्यटक इस मंदिर को देखना जरूरी मानता है.

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संगीतमय स्तंभों का रहस्य

विट्ठल मंदिर द्रविड़ शैली की वास्तुकला में बना है. इसकी दीवारों, स्तंभों और मंडपों पर की गई नक्काशी अत्यंत बारीक और कलात्मक है. मंदिर का रंगा मंडप इसका सबसे बड़ा आकर्षण है. रंगा मंडप में कुल 56 संगीतमय स्तंभ हैं.

इन्हें सारेगामा स्तंभ भी कहा जाता है. जब इन स्तंभों को हल्के से थपथपाया जाता है तो अलग-अलग संगीतमय स्वर निकलते हैं. प्रत्येक मुख्य स्तंभ के चारों ओर 7 छोटे स्तंभ होते हैं. ये सात अलग-अलग सुर उत्पन्न करते हैं.

इन सुरों की ध्वनि ताल वाद्य, तार वाद्य और पवन वाद्य जैसी लगती है. यह आज भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए एक रहस्य बना हुआ है कि पत्थरों से संगीत कैसे निकलता है. 

अंग्रेजों की जिज्ञासा और आज का आकर्षण

विट्ठल मंदिर के संगीतमय स्तंभों ने ब्रिटिश शासन के दौरान भी सबको चौंका दिया था. अंग्रेज अधिकारी इन स्तंभों के रहस्य को समझना चाहते थे. उन्होंने यह जानने के लिए दो स्तंभों को काटकर देखा कि कहीं अंदर कोई धातु या उपकरण तो नहीं है. लेकिन स्तंभों के अंदर कुछ भी नहीं मिला. यह रहस्य आज भी बरकरार है.

माना जाता है कि यह पूरी संरचना एक ही पत्थर से तराशी गई थी. आज विट्ठल मंदिर ऐतिहासिक स्थल होने के साथ-साथ भारत की प्राचीन वैज्ञानिक समझ और कला कौशल का प्रतीक है. आज तक दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने इसके स्तंभ से संगीतमय ध्वनि का पता लगाने के लिए रिसर्च किया लेकिन आज भी यह रहस्य बना हुआ है.

इतिहास से जुड़ा वैभव

विट्ठल मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ था. इसे विजयनगर साम्राज्य के शासक राजा देवराय द्वितीय के शासनकाल में बनवाया गया था. बाद में विजयनगर के सबसे प्रतापी राजा कृष्णदेवराय के समय में मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण किया गया.

कृष्णदेवराय ने मंदिर को उसका वर्तमान भव्य स्वरूप दिया. उनके शासनकाल में कला, संगीत और स्थापत्य को विशेष संरक्षण मिला. यही कारण है कि विट्ठल मंदिर उस युग की तकनीकी और कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाता है. आज यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की गौरवशाली विरासत का प्रतीक माना जाता है.

भगवान विट्ठल से जुड़ी मान्यता

इस मंदिर को श्री विजय विट्ठल मंदिर भी कहा जाता है. यह भगवान विष्णु के विट्ठला रूप को समर्पित है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विट्ठला की प्रतिमा स्थापित है. एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के लिए यह मंदिर बनाया गया था.

लेकिन मंदिर की भव्यता उन्हें बहुत अधिक लगी और वे अपने साधारण निवास में लौट गए. इस कथा के कारण यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ जिज्ञासा का भी विषय बना हुआ है. भक्तों के लिए यह मंदिर आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.