Mrityu Panchak 2026: पंचक पांच दिन का वो समय होता है जिसमें सावधानी रखना बेहद जरूरी है नहीं तो कष्ट खत्म साए की तरह साथ रहते हैं. आज 4 जुलाई से मृत्यु पंचक की शुरुआत हो रही है, इसका समापन 8 जुलाई 2026 को होगा.

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मुहूर्त चिंतामणि और धर्म सिंधु के अनुसार मृत्यु पंचक को सभी पंचक में सबसे खतरनाक माना गया है. इस अवधि में जरा सी चूक मृत्यु तुल्य पीड़ा देती है. ऐसे में जान लें मृत्यु पंचक के पांच दिन क्या करें और क्या नहीं.

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मृत्यु पंचक कब से कब तक

पंचांग में नई दिल्ली के समयानुसर पंचक 4 जुलाई 2026 (शनिवार) की रात 12:48 बजे से शुरू हो रहा है और यह 8 जुलाई 2026 (बुधवार) की शाम 4:00 बजे समाप्त होगा.

क्यों खतरनाक है मृत्यु पंचक

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार मृत्यु पंचक में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो ये बेहद संवेदनशील माना जाता है. धार्मिक विश्वास है कि ऐसी स्थिति में परिवार या कुल पर अन्य संकट आने की आशंका हो सकती है. इसी कारण अंतिम संस्कार से पहले कुछ विशेष धार्मिक अनुष्ठान और शांति कर्म करने की परंपरा बताई गई है. माना जाता है कि इन उपायों से संभावित दोषों का निवारण किया जा सकता है और मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है. इस दौरान कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें करनी की भूल नहीं करनी चाहिए नहीं तो मृत्यु के समान कष्ट झेलने पड़ सकते हैं.

मृत्यु पंचक में क्या नहीं करें

  • कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. जैसे विवाह, सगाई, गृहप्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य प्रमुख शुभ संस्कारों के लिए सामान्यतः पंचक समाप्त होने की प्रतीक्षा करने की सलाह दी जाती है.
  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा टालने की सलाह दी जाती है, यदि यात्रा अत्यावश्यक न हो.
  • वास्तु और मुहूर्त परंपरा के अनुसार पंचक में घर की छत डालना या निर्माण का महत्वपूर्ण चरण शुरू करना शुभ नहीं होता. इससे घर की शांति भंग हो सकती है.
  • पंचक के दौरान संपत्ति से जुड़े बड़े निर्णय टालना बेहतर होता है.
  • मुहूर्त ग्रंथों में पंचक के दौरान नई चारपाई या पलंग बनवाने से बचने का उल्लेख मिलता है.
  • विशेष रूप से निर्माण या बड़े उपयोग के लिए लकड़ी एकत्र करना वर्जित है.

मृत्यु पंचक में क्या करें

मुहूर्त मातर्ण्ड के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान सामान्य रूप से पूजा, जप, तप, दान, व्रत आदि किए जा सकते हैं. बड़े धार्मिक अनुष्ठान, हवन यज्ञ करने से बचें.

अगर इस समय किसी की मृत्यु हो जाए तो आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर शव के साथ उनकी भी विधिवत अंतिम संस्कार की प्रक्रिया करें. इससे दोष नहीं लगता, परिवार पर संकट आने से बचता है ऐसी मान्यता है.

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