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Mrityu Panchak: साल 2026 में कब-कब मंडराएगा पंचक का साया? गरुड़ पुराण के इन कड़े नियमों को जानना है बेहद जरूरी

Mrityu Panchak: पंचक में दाह संस्कार से पहले शव के साथ आटे या कुश के 5 पुतले बनाकर उनका भी विधि-विधान से अंतिम संस्कार करें. गरुड़ पुराण के अनुसार, ऐसा करने से परिवार पर आने वाला बड़ा संकट टल जाता है.

Mrityu Panchak: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी 16 संस्कारों का विशेष महत्व है. व्यक्ति की मृत्यु किस समय और किस नक्षत्र में हुई है, इसका गहरा प्रभाव उसके परिवार और मृत आत्मा की आगे की यात्रा पर पड़ता है. इसी संदर्भ में 'पंचक' काल को मृत्यु के लिए अत्यंत संवेदनशील और कष्टकारी माना गया है.

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पंचक में मृत्यु होना वास्तव में अशुभ है? इस दौरान किसी प्रियजन का निधन हो जाए, तो परिवार को क्या करना चाहिए और इसके दाह संस्कार के नियम क्या हैं?

अंतिम यात्रा के इस विशेष लेख में हम पंचक में मृत्यु के पीछे के धार्मिक व ज्योतिषीय कारणों, शास्त्रों के कड़े नियमों और दोष निवारण के अचूक उपाय....

वर्ष 2026 के आगामी महीनों में पंचक की तिथियां और समय

जून 2026: जून के महीने में पंचक की शुरुआत 06 जून 2026, शनिवार को शाम 07:03 बजे से होगी. यह अशुभ अवधि 11 जून 2026, बृहस्पतिवार को सुबह 08:16 बजे समाप्त हो जाएगी.

जुलाई 2026 (प्रथम): जुलाई महीने में पंचक का योग दो बार बन रहा है. पहली बार पंचक का प्रारंभ 04 जुलाई 2026, शनिवार को दोपहर 12:48 बजे से होगा, जो 08 जुलाई 2026, बुधवार को शाम 04:00 बजे तक रहेगा.

जुलाई-अगस्त 2026 (द्वितीय): जुलाई के आखिरी दिन यानी 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 06:38 बजे से दूसरी बार पंचक शुरू होगा. यह काल अगले महीने की शुरुआत तक खींचते हुए 04 अगस्त 2026, मंगलवार को रात 09:54 बजे समाप्त होगा.

अगस्त-सितंबर 2026: अगस्त के अंत में पंचक काल 27 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार को दोपहर 01:35 बजे से प्रभावी होगा. यह काल सितंबर की शुरुआत तक चलते हुए 01 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 03:23 बजे तक बना रहेगा.

सितंबर 2026: सितंबर महीने में पंचक की समय अवधि रात के समय शुरू होगी. यह 23 सितंबर 2026, बुधवार को रात 09:57 बजे से प्रारंभ होकर 28 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 10:16 बजे तक रहेगा.

अक्टूबर 2026: पंचांग के अनुसार, अक्टूबर के महीने में पंचक की शुरुआत 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को सुबह 07:00 बजे से होने जा रही है. इस काल का समापन 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शाम 07:22 बजे होगा.

नवंबर 2026: नवंबर के महीने में पंचक काल दोपहर के समय दस्तक देगा. यह 17 नवंबर 2026, मंगलवार को दोपहर 03:30 बजे से शुरू होकर 22 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 05:54 बजे समाप्त होगा.

दिसंबर 2026: साल के अंतिम महीने में पंचक की शुरुआत 14 December 2026, सोमवार को रात 10:35 बजे से होगी. इसके बाद 19 दिसंबर 2026, शनिवार को दोपहर 03:58 बजे पंचक काल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.

क्या होता है पंचक? (What is Panchak?)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो उस समयावधि को ‘पंचक’ कहा जाता है. यह काल मुख्य रूप से पाँच नक्षत्रों के मेल से बनता है:

  • धनिष्ठा (इसका उत्तरार्ध भाग)
  • शतभिषा
  • पूर्वाभाद्रपद
  • उत्तराभाद्रपद
  • रेवती

पंचक का सीधा अर्थ है 'पांच का समूह'. ज्योतिष की दृष्टि से इसे एक अशुभ अवधि माना गया है. मान्यता है कि इस दौरान किए गए किसी भी कार्य का प्रभाव पांच गुना बढ़ जाता है, यही वजह है कि इसमें अंतिम संस्कार लेकर सभी शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं.

पंचक में मृत्यु को अशुभ क्यों माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं और गरुड़ पुराण के अनुसार, पंचक काल में शरीर का त्याग करना सामान्य नहीं माना जाता. इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

जनहानि की आशंका (पांच का योग): गरुड़ पुराण के अनुसार, पंचक में किसी की मृत्यु होने पर परिवार, खानदान या कुल में पांच अन्य लोगों पर गंभीर संकट, बीमारी या मृत्यु तुल्य कष्ट आने की आशंका रहती है. यह “पांच का योग” ही लोगों के मन में भय का मुख्य कारण है.

आत्मा की सद्गति में बाधा: शास्त्रों के अनुसार, पंचक में प्राण त्यागने वाली आत्मा को सीधे उच्च लोकों में स्थान मिलने में कठिनाई होती है, जिससे उसकी आध्यात्मिक यात्रा में बाधा आती है.

लकड़ी से जुड़े कार्यों की मनाही: चूंकि पंचक के दौरान लकड़ी इकट्ठा करना या इससे जुड़े कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस काल में शवदाह (जिसमें लकड़ी का उपयोग होता है) करने के लिए विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य हो जाता है.

पंचक दोष निवारण के उपाय 

यदि किसी प्रियजन का निधन पंचक काल में हो गया है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है. गरुड़ पुराण और ज्योतिष शास्त्र में इस दोष को पूरी तरह शांत करने के स्पष्ट और बेहद सरल उपाय बताए गए हैं:

1. कुश या आटे के 5 पुतले (पंचक विधान)

यह पंचक दोष दूर करने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है. दाह संस्कार के समय शव के साथ कुश (एक पवित्र घास) या आटे से बने पाँच पुतले अर्थी पर रखे जाते हैं. अंतिम संस्कार के समय इन पुतलों का भी शव के साथ पूरे विधि-विधान से दाह किया जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से पंचक का दोष उन पुतलों के साथ ही भस्म हो जाता है और परिवार सुरक्षित रहता है.

2. शांति विधान और विशेष दान

पंचक के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए सपिंडीकरण (या तेरहवीं) के दिन विशेष दान का नियम है. इस दिन मृतक के निमित्त योग्य ब्राह्मणों को काले तिल, अनाज, स्वर्ण (सोना), चांदी या घी से भरा हुआ कांस्य पात्र (छाया पात्र) दान करना चाहिए.

3. गरुड़ पुराण का पाठ और मंत्र जाप

मृत्यु के पश्चात घर में लगातार 10 या 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ रखना चाहिए. इसके साथ ही परिवार के सदस्यों द्वारा गायत्री मंत्र का निरंतर जाप करना मृत आत्मा को सद्गति प्रदान करता है और दोषों का प्रभाव कम करता है.

4. नक्षत्र शांति पूजन

कुछ क्षेत्रों में अंतिम संस्कार के समय या दसवें/तेरहवें दिन अनुभवी पंडितों द्वारा विशेष नक्षत्र शांति पूजा आयोजित की जाती है, जो ग्रह-नक्षत्रों के नकारात्मक प्रभाव को दूर करती है.

पंचक में अंतिम संस्कार के जरूरी नियम

अगर पंचक के दौरान अंतिम संस्कार करना हो, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • अंतिम संस्कार में देरी न करें: पंचक दोष के डर से कभी भी शवदाह को रोकना नहीं चाहिए. शास्त्र कहते हैं कि आवश्यक शांति प्रक्रिया (पुतले बनाने की विधि) के साथ संस्कार समय पर ही पूर्ण करना श्रेयस्कर है.

  • विद्वान पुरोहित की सलाह: दाह संस्कार से पहले किसी योग्य पंडित से नक्षत्र की सही गणना करवा लें ताकि पुतले बनाने और मंत्रोच्चार की विधि बिल्कुल सटीक हो.

  • घर का शुद्धिकरण: अंतिम संस्कार के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और शुद्धि मंत्रों का प्रयोग करें.

अंतिम यात्रा: इस कठिन समय में आपकी सेवा में समर्पित

मृत्यु एक अटल सत्य है, और दुख के इन अत्यंत कठिन क्षणों में धार्मिक शुद्धता और शास्त्रों के अनुसार रीति-रिवाजों का सही पालन करना परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. लेकिन भारी शोक के बीच इन व्यवस्थाओं को संभालना मुश्किल हो सकता है.

अंतिम यात्रा समझता है कि आपके प्रियजन की सम्मानजनक विदाई कितनी महत्वपूर्ण है. हम न केवल अंतिम संस्कार की समस्त व्यवस्थाएं करते हैं, बल्कि पंचक जैसी विशिष्ट स्थितियों में अनुभवी और योग्य पंडितों के माध्यम से आवश्यक शांति पूजा, पुतले निर्माण की सामग्री और समस्त धार्मिक अनुष्ठानों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करते हैं.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हर्षिका मिश्रा, एस्ट्रोलॉजर

हर्षिका मिश्रा ABP Live में ‘ज्योतिष और धर्म’ बीट को कवर करने वाली एक डिजिटल पत्रकार हैं. ज्योतिष शास्त्र में 3 वर्षों के अनुभव के साथ, वे पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में समझाने और पाठकों तक सटीक एवं संतुलित जानकारी पहुंचाने पर काम करती हैं.

नई दिल्ली स्थित AIMC से ‘टेलीविजन और रेडियो प्रोडक्शन’ में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद, हर्षिका ने मीडिया जगत में अपनी एक विशिष्ट और प्रगतिशील पहचान बनाई है. पिछले एक वर्ष में उन्होंने ज्योतिष और धर्म से जुड़े विषयों पर निरंतर कार्य करते हुए एक स्पष्ट, सरल और भरोसेमंद लेखन शैली विकसित की है.

हर्षिका का कार्य पारंपरिक ज्योतिष को आज के समय की जरूरतों से जोड़ना है. वे वैदिक ज्योतिष, अंक ज्योतिष (Numerology), वास्तु शास्त्र और शकुन शास्त्र जैसे विषयों को केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें Gen-Z की सोच, करियर से जुड़े निर्णयों और रिलेशनशिप की समझ के साथ एकीकृत करती हैं. उनका फोकस जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को सरल, व्यावहारिक और उपयोगी रूप में प्रस्तुत करने पर रहता है.

वे मानती हैं कि ज्योतिष का उद्देश्य भय फैलाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सही समय (Timing) की समझ देकर बेहतर और संतुलित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है. अपनी स्क्रिप्ट लेखन और वीडियो प्रोडक्शन की समझ के जरिए वे ग्रहों के गोचर और धार्मिक विश्लेषणों को एक ‘प्रैक्टिकल गाइड’ के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे पाठक उन्हें अपने जीवन में उतार सकें.

उनका लेखन श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत से प्रेरित है, जो जीवन में संतुलन और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है. ज्योतिष और पत्रकारिता के अलावा, हर्षिका की रुचि संगीत, साहित्य और यात्राओं में है, जो उनके दृष्टिकोण को गहराई और विविधता प्रदान करती हैं.

हर्षिका का उद्देश्य ज्योतिष को अंधविश्वास के दायरे से बाहर निकालकर एक समझदारीपूर्ण, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करना है.

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