Mauni Amavasya 2026 Highlight: मौनी अमावस्या पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने लगाई संगम पर लगाई डुबकी, शाम में करें ये काम
Mauni Amavasya 2026 Snan Daan Ka Muhurat Highlight: मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी. ये साल की पहली अमावस्या होगी ऐसे में पुण्य प्राप्ति के लिए इस दिन कौन-कौन से कार्य करना चाहिए.

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Mauni Amavasya 2026 Highlight: साल की पहली मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को है. शास्त्रों के अनुसार रविवार को अमावस्या तिथि हो तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है. मान्यता है...More
मौनी अमावस्या पर आज माघ मेले का तीसरा शाही स्नान किया गया. इस दौरान संगम तट पर आस्था का सैलाब दिखा. रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम तट पर डुबकी लगाई.
मौनी अमावस्या से भूलवश व्रत टूट जाए काले तिल, सप्तधान्य या अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान करें. व्रत टूटने के बाद मुख से केवल भजन-कीर्तन ही करें.
आप सूर्यास्त के बाद पीपल वृक्ष के नीचे, तुलसी के पास, घर के मुख्य द्वार, दक्षिण दिशा और नदी-सरोवर या मंदिर के प्रांगण में दीप जलाना चाहिए.
धार्मिक व पौराणिक मान्यता है कि, माघी अमावस्या से ही ब्रह्माजी ने स्वयंभुव मनु को उत्पन्न कर सृष्टि बनाने के कार्य की शुरुआत की थी.
एक मान्यता यह भी है कि, मानव जाति के पहले पुरुष मनु महाराज ने इसी दिन मौन रहकर भगवान की तपस्या की थी और अपने मन को शुद्ध किया था. मनु के नाम पर माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं
मौनी अमावस्या मौन व्रत या अनावश्यक बातचीत का नियम है. जो लोग आज पूरे दिन मौन व्रत नहीं रख सकते वे कम से सवा घंटे का मौन व्रत जरूर रखें.
मौनी अमावस्या पर बन रहे पंचग्रही योग के प्रभाव से सिंह राशि वालों की मन की कई इच्छाएं पूरी होंगी और कार्यों को लेकर आपके अंदर जुनून बना रहेगा.अटके काम पूरे होंगे. इस समय अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएंगे और कई फायदे मिलेंगे.
मौनी अमावस्या मिथुन राशि वालों के लिए खास है, आपको धन लाभ होगा और नए निवेश से भी अच्छे रिटर्न संभव है. प्रेम और दांपत्य जीवन में भी मधुरता और सामंजस्य बढ़ेगा.
- अमावस्या के दिन भूलकर भी किसी व्यक्ति को बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से आपके पितृ नाराज हो सकते हैं और आपको पितृ दोष लग सकता है.
- इसके अलावा अमावस्या के दिन बाल धोना भी वर्जित माना गया है. मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानी आती है.
मौनी अमावस्या पर पितृ कवच पाठ
कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।
तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥
तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।
तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥
प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।
यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥
उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।
यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥
ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।
अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।
अग्नेष्ट्वा तेजसा सादयामि॥
- ब्रह्म मुहूर्त: 05:32 AM से 06:23 AM तक
- प्रात: संध्या: 05:58 AM से 07:15 AM तक
- अभिजीत मुहूर्त: 12:27 PM से 01:11 PM तक
नी अमावस्या पर काले तिल का दान बहुत शुभ माना जाता है. इससे शनि दोष के प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है. साथ ही काले तिल दान से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
मौनी अमावस्या के दिन कुछ खास उपाय करने से शनि पीढ़ा के साथ साढ़े साती और राहु-केतु दोष से मुक्ति मिलती है. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन किसी भी शिव मंदिर जाएं और भगवान शिव को रुद्राक्ष की माला अर्पित करें.
मौनी अमावस्या के अवसर पर चंद्रमा धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे. मकर राशि में पहले से सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल मौजूद हैं, ऐसे में चंद्रमा के शामिल होने से पंचग्रही योग बनेगा.
ज्योतिष के अनुसार यह गोचर मेष, कर्क और तुला राशि के लिए लाभकारी रहेगा. इन राशियों के जातकों को पारिवारिक जीवन में सुख मिलेगा और करियर में आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. साथ ही मानसिक शांति और सकारात्मक सोच में भी वृद्धि होने की संभावना है.
- ॐ नम: शिवाय – भगवान शिव को प्रणाम करने का मंत्र.
- ॐ सर्व पितृ देवाय नम: – सभी पितृ देवताओं को नमन.
- ॐ सूर्याय नम: या ॐ घृणि सूर्याय नम: – सूर्य देव को प्रणाम.
मौनी अमावस्या के दिन आपको नीचे दिए गए कार्य करें-
- मौनी अमावस्या के दिन मौन धारण करना शुभ माना जाता है. इससे मन शांत होता है और ईश्वर की भक्ति में एकाग्रता बढ़ती है.
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना जाता है.
- पितरों की शांति के लिए इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं, जिससे पूर्वजों को शांति मिलती है.
- मौनी अमावस्या पर गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, दवाइयां या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखते हैं तो इसका पारण अमावस्या तिथि खत्म होने के बाद करें. मौन व्रत का पारण गायत्री मंत्र या फिर महामृत्युंजय मंत्र का जप करने के बाद करें.
क्या करें:
- दिनभर मौन रखें और आत्मचिंतन करें.
- सुबह पवित्र जल से स्नान करें.
- श्रद्धा भाव से तर्पण और पितृ कर्म करें.
- दान-पुण्य करें और जरूरतमंदों की मदद करें.
क्या न करें:
- ऊंची आवाज में बोलने, झगड़े या क्रोध से बचें.
- नकारात्मक विचार और गलत व्यवहार न करें.
- ऐसे भोग-विलास से दूर रहें जो ध्यान और साधना में बाधा डालें.
साल 2026 में मौनी अमावस्या का पर्व रविवार, 18 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट से होगी और यह 19 जनवरी को रात 1 बजकर 21 मिनट तक रहेगी.
मेष: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं
वृषभ: शिवलिंग पर दूध अर्पित करें
मिथुन: तुलसी को जल दें
कर्क: काले तिल से तर्पण करें
सिंह: सूर्य को जल अर्पित करें
कन्या: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं
तुला: मां लक्ष्मी को कमल पुष्प अर्पित करें
वृश्चिक: शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाएं
धनु: पीले वस्त्र दान करें
मकर: शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं
कुंभ: जरूरतमंद को काले तिल दान करें
मीन: विष्णु भगवान को पीले पुष्प चढ़ाएं
माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर, दूर-दूर से भक्त पवित्र संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा हुए.
साधु स्वामी अभय चैतन्य कहते हैं, "बांग्लादेश में, जहाँ हिंदुओं के खिलाफ़ अमानवीय अत्याचार हो रहे हैं, ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन चुप हैं. हम माँ गंगा से प्रार्थना करते हैं कि उन नौ लोगों को, जिनकी असमय मौत हो गई, ईश्वर का सानिध्य मिले. मैं बांग्लादेश के हिंदुओं से अपील करता हूँ: हथियार उठाओ और इन अधर्मी अपराधियों को सज़ा दो."
मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन मौन व्रत रखने का विधान है हालांकि गृहस्थ लोगों के लिए दिन भर मौन रह पाना थोड़ा मुश्किल है. ऐसे में गृहस्थ लोग पूजा-पाठ करने के बाद अपना मौन व्रत खोल सकते हैं.
मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन का धार्मिक महत्व अधिक है. मौनी अमावस्या के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को दान करना चाहिए. इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना चाहिए. ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है.
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस दिन तेल, कंबल, दूध ,चीनी, अनाज तथा अपने आवश्यकता अनुसार पैसों का दान करना चाहिए. इसके अलावा मौनी अमावस्या के दिन पशु-पक्षियों को भोजन करना चाहिए। ऐसा करते श्री पित्र प्रसन्न होते हैं और जीवन में आ रही तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलती है.
थूथुकुडी, तमिलनाडु थाई अमावस्या के मौके पर, हज़ारों लोगों ने न्यू पोर्ट बीच इलाके में अपने पूर्वजों के रीति-रिवाज पूरे किए, समुद्र में पवित्र डुबकी लगाई और प्रार्थना की. देखें वीडियो-
मौनी अमावस्या के दिन मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन केवल सादा भोजन ही करें. साथ ही जितना हो सके मौन रहने की कोशिश करें.
मौनी अमावस्या के दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए. इसका उल्टा प्रभाव आपके जीवन में पड़ने की संभावना रहती है. मौनी अमावस्या के दिन देर तक सोने से बचना
इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें. यदि आप गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं, तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
स्नान के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य जरूर दें। ध्यान रहे स्नान करने से पहले तक कुछ बोलें नहीं.
मौनी अमावस्या के दिन ज्यादा से ज्यादा ध्यान, प्रार्थना व अन्य धार्मिक क्रिया करें. इस दिन दान जरूर करें. जरूरतमंद लोगों की मदद करें.
निस्वार्थ कार्य करना इस दिन शुभ फलदायी होता है. मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाएं ताकि शरीर और आत्मा दोनों शुद्ध हो जाएं.
मौनी अमावस्या के दिन उपवास करें, ऐसा करना शुभ फल देता है.
मौनी अमावस्या तब मनाई जाती है जब माघ महीने के दौरान चंद्रमा और सूर्य मकर राशि में एक साथ आते हैं. मौनी अमावस्या के दिन चंद्रमा और सूर्य दोनों की संयुक्त ऊर्जा के प्रभाव से इस दिन का महत्व और भी अधिक हो जाता है.
मकर राशि चक्र की दसवीं राशि है और कुंडली के दसवें घर में सूर्य मजबूत है. ज्योतिष में सूर्य को पिता और धर्म का कारक माना जाता है, इसलिए जब सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में मिलते हैं तो मौनी अमावस्या का त्योहार मनाया जाता है.
माघ अमावस्या की अंधेरी रात को इन तीन जगहों पर दीपदान करना चाहिए. मान्यता है कि अमावस्या पर दीपदान करने से तीन पीढ़ियों का उद्धार होता है.
- पहला दीपदान पवित्र नदियों, तीर्थों और देवालयों में करना चाहिए.
- दूसरा दीपदान पीपल या तुलसी वृक्ष के नीचें.
- तीसरा दीपदान सूर्योदय के बाद गंगा, यमुना, सरयू नर्मदा जैसी पवित्र नदियों के तट पर करना चाहिए.
माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर, दूर-दूर से भक्त पवित्र संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा हुए. श्रद्धालुओं की भीड़ में, एक छह साल का लड़का, जो खुद को शिरीष बाहुबली बाबा बता रहा था, अलग दिख रहा था क्योंकि वह भगवान शिव की महिमा का गुणगान कर रहा था. आप भी देखें प्यारा-सा ये वीडियो-
मौनी अमावस्या के दिन विधिवत रूप से पूजा-पाठ करना बेहद जरूरी है. इसके लिए सुबह ब्रह्म मुहू्र्त में उठकर स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें.
पूजा घर में शांत मन के साथ बैठें, घी या तेल का दीपक जलाएं और मौन व्रत का संकल्प लें. इसके बाद विधिवत रूप से भगवान शिव की पूजा अर्चना शुरू करें.
भगवान शिव के नामों का जाप करें या फिर दिए गए मंत्र का 108 जाप करें.
मंत्र- रूपं देहि , यशो देहि , भोगं देहि च शंकर. भुक्ति मुक्ति फलं देहि , गृहीत्वार्घ्यम नमोस्तुते”
आज के दिन कोशिश करें कि, जितना कम से कम बोल सकते हैं, बोलें.
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के मौके पर संगम घाट पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं. देखें वीडियो-
आज मौनी अमावस्या पर स्नान-दान करने के लिए 4 शुभ मुहूर्त है-
पहला मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त 5.27 मिनट से लेकर 6.21 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग मुहूर्त- सुबह 5.14 मिनट से लेकर 7.30 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से लेकर 12.45 मिनट तक
अमावस्या मुहूर्त- 18 जनवरी को शाम 4.41 मिनट से लेकर 19 जनवरी अर्धरात्रि 1.35 मिनट तक
हालांकि आज राहुकाल को छोड़कर पूरे दिन स्नान कर सकते हैं.
मौनी अमावस्या को लेकर मान्यता है कि, इस दिन पूर्ण रूप से मौन रहकर स्नान-दान, व्रत और धार्मिक कार्यों को करने से सेहत, मानसिक शांति और धन की प्राप्ति होने के साथ शनि, राहु-केतु दोष में सुधार होने के साथ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
आज मौनी अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान करने के लिए श्रद्धालु कोहरे और ठंड का सामना करते हुए बड़ी संख्या में प्रयागराज के संगम घाट पर पहुंच रहे हैं.
आज मौनी अमावस्या पर कई शुभ योगों के साथ राहुकाल जैसे अशुभ योग भी रहेंगे. राहुकाल प्रत्येक दिन 1 घंटा 36 मिनट का होता है. आज राहुकाल का समय शाम 4 बजकर 29 मिनट से लेकर 5 बजकर 49 मिनट तक है. इस दौरान किसी भी तरह का धार्मिक अनुष्ठान या पवित्र कार्य करने से बचें.
मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 05 बजे से लेकर 7 बजे तक का समय बेहद शुभ माना जाता है. वहीं दोपहर में स्नान करने के लिए 12.10 मिनट से लेकर 12.53 मिनट का समय शुभ है. पवित्र स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें. इसके बाद पितरों को तर्पण दें और क्षमतानुसार दान दें.
मौनी अमावस्या पर दान का विशेष महत्व है. इस दिन आप जरूरतमंदों में अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल, गरम कपड़े आदि का दान कर सकते हैं. साथ ही इस तिथि पर दीपदान भी करना चाहिए.
मौनी अमावस्या पर 18 जनवरी को पंचग्रही योग रहेगा. चंद्रमा का गोचर धनु उपरांत मकर राशि में होगा, मंगल, सूर्य, बुध और शुक्र पहले से ही इसी राशि में हैं. ऐसे में मकर राशि में पंचग्रही योग बनेगा.
- ब्रह्म मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में स्नान करें
- पीपल वृक्ष की पूजा करें
- मौन व्रत रखें. मौन व्रत न भी रख रहे हैं तो वाद-विवाद में न उलझें.
- पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करें.
- दान-पुण्य करें
- दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं
- पंचबली दें
- क्रोध, लोभ और लालच से दूर रहें.
- पशु-पक्षियों को नुकसान न पहुंचाएं.
- वाद-विवाद और अंहकार न करें.
- मांस-मदिरा और मांसाहार सेवन न करें.
मौनी अमावस्या पर स्नान, दान, तर्पण के साथ ही तुलसी, पीपल और बेल वृक्ष की पूजा का भी महत्व है. साथ ही इन पौधों को इस दिन लगाना भी शुभ होता है.
मकर संक्रांति के बाद माघ मेला में मौनी अमावस्या पर 18 जनवरी को तीसरा स्नान किया जाएगा. इस दौरान लाखों श्रद्धालु संगम पर आस्था की डुबकी लगाते हैं.
मौनी अमावस्या न केवल धार्मिक परंपरा, पर्व या कोई विशेष तिथि है, बल्कि यह आध्यात्मिक अनुशासन, आत्म-निरीक्षण और सामाजिक दान का संदेश भी देती है.
माघ महीने की अमावस्या में मौन व्रत का महत्व है. इस दिन साधु-संत से लेकर साधक मौन व्रत का संकल्प लेते हैं. मान्यता है कि, मौन व्रत से इंद्रियां वश में रहती है और मन में सुविचार आते हैं.
माघ अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को रात 12:03 से होगी और 19 जनवरी को रात 01:21 तक रहेगी.
माघ या मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद दीपदान करें. साथ ही पितरों को जल अर्पित करें. इससे पूर्वजों की आत्मा शांत होगी और पितृ आशीर्वाद देते हैं.
मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अर्धोदय योग भी बन रहा है. साथ ही इस दिन पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा.
मौनी अमावस्या की शाम ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाना होगा. दीपक में रूई की जगह लाल धागे की बत्ती और केसर की पत्तियां डालने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. ऐसा करने से जीवन में धन प्राप्ति होती है.
मौनी अमावस्या पर तुलसी की तरह पीपल के पेड़ की पूजा भी अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है. ऐसे में मौनी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में दूध मिला जल अर्पित करने के साथ दीपदान और परिक्रमा अवश्य करें. मान्यता है इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है साथ ही नौकरी में आ रही परेशानी दूर होती है.
मौनी अमावस्या की पौराणिक कथा के अनुसार, कांचीपुरी में देवस्वामी का एक ब्राह्मण परिवार रहता था. उसकी पत्नी का नाम धनवती था. दोनों के 7 बेटे थे और एक बेटी थी, जिसका नाम गुणवती थी. गुणवती जब बड़ी हुई तो उसके पिता ने सबसे छोटे बेटे को उसकी कुंडली दी और ज्योतिषी के पास भेजा, ताकि उसकी विवाह के लिए लड़का देखा जाए. ज्योतिषी ने बताया कि गुणवती विवाह के बाद विधवा हो जाएगी. यह जानकर उसके पिता देवस्वामी और माता धनवती दुखी हो गए. उस ज्योतिषाचार्य ने बचने का उपाय बताया.
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि सिंहल द्वीप में सोमा धोबिन रहती है, जो बहुत ही पतिव्रता है. यदि सोमा धोबिन तुम्हारे घर आकर पूजा करे और अपना अर्जित पुण्य दान कर दे तो गुणवती का सुहाग बच जाएगा ओर वह दोष मिट जाएगा. यह जानकर देवस्वामी ने बेटी गुणवती को सबसे छोटे बेटे के साथ सोमा धोबिन के घर सिंहल द्वीप भेजा. दोनों भाई और बहन घर से निकलकर सोमा के घर की ओर चल दिए. दोनो समुद्र के किनारे पहुंचे और उसे पार करने के बारे में सोचने लगे.
दोनों को भूख और प्यास लगी थी, दोनों एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए. उस पेड़ पर एक गिद्ध का परिवार भी रहता था. गिद्ध के बच्चों ने गुणवती और उसके भाई की बातों को सुन लिया. गिद्ध के बच्चों ने अपनी मां को गुणवती और उसके भाई के बारे में बताया. तब गिद्धों की माता ने अपने बच्चों को भोजन कराया और गुणवती के पास गई. उसने कहा कि तुम्हारी समस्या का हल हो जाएगा. परेशान मत हो, तुम्हें सोमा धोबिन के घर पहुंचा दूंगी. गिद्ध माता की बातें सुनकर दोनों भाई और बहन खुश हो गए. अगली सुबह गिद्ध माता ने गुणवती और उसके भाई को समुद्र पार कराया और सोमा धोबिन के पास ले गई.
गुणवती सोमा धोबिन के घर के पास ही रहने लगी. रोज सुबह सोमा के घरवालों के उठने से पहले ही गुणवती उसके घर को लीप देती थी. एक दिन सोमा ने अपनी बहू से पूछा कि रोज घर कौन लीपता है? तब उसने कहा कि उसके अलावा ये काम कौन करेगा. सोमा को विश्वास नहीं हुआ और वह पूरी रात जागती रही. सुबह होते ही उसने देखा कि एक युवती उसके आंगन में आई और आंगन की सफाई करके लीपने लगी.
तभी सोमा उसके पास आई और पूछा कि तुम कौन हो और ऐसा क्यों कर रही हो? तब गुणवती ने अपने आने का कारण बताया और पूरी बात बताई. इस पर सोमा ने कहा कि तुम्हारे पति की रक्षा के लिए मैं तुम्हारे साथ घर चलूंगी. एक दिन सोमा गुणवती के घर गई, उस दिन गुणवती का विवाह हुआ. ज्योतिषाचार्य के बताए अनुसार विवाह होते ही गुणवती के पति की मृत्यु हो गई. तब सोमा ने पूजा पाठ किया और अपने पुण्य को गुणवती को दान कर दिया. इसे उपाय से गुणवती का पति जीवित हो गया.
उधर सोमा के पति और बेटे की मृत्यु हो गई. जब तक सोमा घर पहुंची, तब तक उसके पति और बेटे के शव को रखा गया था. रास्ते में सोमा ने एक जगह पर रुककर पीपल के पेड़ के नीचे श्रीहरि भगवान विष्णु की पूजा की थी और 108 बार उस पेड़ की परिक्रमा की थी. इससे अर्जित पुण्य से सोमा के पति और बेटे जीवित हो गए थे. वे अकाल मृत्यु से मुक्त हो गए थे.
जो भी व्यक्ति विधि विधान से मौनी अमावस्या का व्रत करता है, उसे भगवन विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन में सुख और समृद्धि आती है.
पुराणों और ज्योतिष के अनुसार, मौन व्रत से मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन में स्थिरता आती है. इस दिन लोग सूर्योदय से मौन व्रत रखें. इस दौरान मौन रहकर ही पूजा, पाठ करें, मंत्रों का जाप भी मन ही मन करें. अमावस्या की तिथि खत्म होने पर ही मौन व्रत को तोड़ें.
- मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन जैसे- मांस, मछली, लहसुन, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.
- मौनी अमावस्या पर ब्रह्मचर्य का पालन करें. तन-मन से किसी को दुख न पहुंचाएं.
- घर में क्लेश न करें. भूलकर भी कुत्ता, गाय, कौवा आदि जानवरों को परेशान नहीं करना चाहिए.
मौनी अमावस्इया के दिन अन्न जल ग्रहण किए बिना किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उड़द, तिल, गेहूं, और चावल का दान करें, इसके अलावा, आप कंबल और गर्म वस्त्र भी दान कर सकते हैं. साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराने का महत्व है.
मौनी अमावस्या के शिव वास योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग एक साथ बन रहे हैं, जिससे यह पर्व और भी शुभ हो गया है. शिववास और अमावस्या के संयोग में शिवलिंग पूजा करना श्रेष्ठ होता है. मान्यता है इस दौरान की गई शिव साधना सभी मनोकामना को पूरी करने वाला माना जाता है. वहीं रविवार के दिन आने वाली अमावस्या सौभाग्य लेकर आती है.
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