Bhootnath Temple, Mandi: देश और प्रदेशभर में श्रावण मास का उल्लास देखने को मिल रहा है, शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ रहा है और श्रद्धालु भोलेनाथ की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं, वहीं मण्डी जिला मुख्यालय पर स्थित प्राचीन भूतनाथ मंदिर में भी श्रावण में श्रद्धालु बाबा भूतनाथ के दर्शन करते हुये नजर आये.

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श्रावण मास के चलते शिमन्दिरों में भोलेनाथ के दर्शनों के लिये श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ रही है, मान्यता है कि श्रावण मास में भोलेनाथ के दर्शन करने से हर प्रकार मनोकामनायें पूर्ण होती हैं.

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मनोकामना सिद्ध करने वाले महादेव!

श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा भूतनाथ स्वंभू शिवलिंग के रूप में मंदिर में विद्यमान हैं और उनके मूल स्वरूप के दर्शन करने से मन की शांति और सुख का अहसास होता है, बाबा भूतनाथ हर प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करते हैं.

वहीं मंदिर के पुजारी स्वामी देवानन्द सरस्वती के अनुसार श्रावण मास को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, सूबह से सैंकड़ों श्रद्धालु मंदिर में पंहुचकर बाबा भूतनाथ के दर्शन कर चुके हैं. श्रावण मास में भोलेनाथ के दर्शन करने से भोलेनाथ श्रद्धालुओं की सभी मनोंकामनाओं को पूर्ण करते हैं. 

मंडी के भूतनाथ मंदिर का इतिहास

मंडी शहर के इतिहास में बाबा भूतनाथ मंदिर का विशेष स्थान माना जाता है. मान्यता अनुसार 1527 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण हुआ था.कहा जाता है कि उस समय ब्यास नदी के दूसरी ओर बस्ती थी, जबकि आज का मंडी क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था.

कहते हैं कि एक ब्राह्मण की गाय प्रतिदिन जंगल के एक स्थान पर स्वयं ही अपना दूध अर्पित कर देती थी. इस अनोखी घटना की जानकारी मिलने पर तत्कालीन शासक राजा अजबर सेन स्वयं ब्राह्मण के साथ उस स्थान पर पहुंचे. वहां उन्होंने गाय को बिना किसी कारण उसी स्थान पर दूध अर्पित करते हुए देखा. इस रहस्यमयी घटना के बाद उसी रात राजा को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन देकर वहां मंदिर निर्माण का निर्देश दिया.

स्वप्न को दैवीय संकेत मानते हुए राजा अजबर सेन ने 1527 ईस्वी में बाबा भूतनाथ मंदिर का निर्माण कराया. आज बाबा भूतनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. वर्षभर यहां भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, जबकि सावन में मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और भक्तों का तांता लगा रहता है. 

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