कान्हा की छठी क्यों मनाई जाती है, जन्म के 6 दिन बाद इस परंपरा का क्या महत्व
Krishna Chhathi 2026:कान्हा की छठी 9 और 10 सितंबर दोनों दिन क्षेत्रीय पंरपरा के अनुसार मनाएंगे. जन्म के बाद छठी परंपरा क्यों निभाते हैं. इस दिन क्या किया जाता है, शिशु के लिए क्यों जरुरी है ये परंपरा.

Krishna Chhathi 2026: जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाने की परंपरा है. साल 2026 में कान्हा की छठी 9 और 10 सितंबर दोनों दिन मनाई जा रही है, क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार तारीख में अंतर है. अधिकतर लोग 10 सितंबर को मनाएंगे. हिंदू परिवारों में बच्चे के जन्म के छठे दिन होने वाली छठी की तरह ही श्रीकृष्ण की छठी भी श्रद्धा और उत्साह से मनाई जाती है. इस दिन बाल गोपाल का विशेष पूजन, श्रृंगार और भोग लगाया जाता है.
कौन हैं छठी माता?
धार्मिक परंपरा में छठी माता को षष्ठी देवी कहा जाता है। मार्कण्डेय पुराण के देवीमाहात्म्य से जुड़ी परंपरा में षष्ठी का उल्लेख मिलता है कि सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है. इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं. वो बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं, इन्हें संतान प्राप्ति और संतान की दीर्घायु से जोड़कर पूजा जाता है. बिहार को लोकपर्व छठ के दिन भी छठी मैया की पूजा का विधान है.
कान्हा की छठी पूजा कैसे करें
- सुबह स्नान करके घर और पूजा स्थान की सफाई करें.
- बाल गोपाल को स्नान कराकर नए पीले या सुंदर वस्त्र पहनाएं.
- चंदन, रोली, अक्षत, फूल और तुलसी दल से पूजा करें.
- दीपक और धूप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें.
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें.
- माखन-मिश्री, दूध, दही, फल और घर में बने सात्विक पकवानों का भोग लगाएं.
- श्रीकृष्ण की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
- प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटें.
छठी के दिन किन बातों का रखें ध्यान?
- कान्हा की छठी पर सात्विक भोजन करने और पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
- भोग में प्याज-लहसुन तथा तामसिक खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करना बेहतर माना जाता है.
- पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है, लेकिन तुलसी दल साफ होना चाहिए.
FAQ
- कान्हा की छठी 2026 में कब मनाई जाएगी?
कान्हा की छठी 2026 में 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी. जन्माष्टमी के बाद बाल गोपाल की छठी मनाने की परंपरा है. - छठी माता कौन हैं?
छठी माता को षष्ठी देवी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता में उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाली देवी माना गया है. संतान की प्राप्ति और उसकी दीर्घायु के लिए भी उनकी पूजा की जाती है. - कान्हा की छठी पर क्या भोग लगाएं?
कान्हा की छठी पर माखन-मिश्री, दूध, दही, फल और सात्विक पकवान भगवान श्रीकृष्ण को भोग में अर्पित किए जा सकते हैं. भोग में तुलसी दल रखना भी शुभ माना जाता है. - कान्हा की छठी पर कौन-सा मंत्र पढ़ें?
कान्हा की छठी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप किया जा सकता है. इसके साथ श्रीकृष्ण की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
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