Kheer Bhawani Mela 2026: कश्मीर घाटी के गांदरबल जिले के तुलमुल्ला स्थित प्रसिद्ध माता खीर भवानी मंदिर में वार्षिक मेले की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा है. दो दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में जम्मू-कश्मीर समेत देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा तथा सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं.

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हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में लगाई हाजिरी

माता खीर भवानी का यह मेला कश्मीरी पंडित समुदाय की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है. इस वर्ष मेले को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. प्रशासन द्वारा जम्मू से यात्रियों को लाने के लिए 225 बसों की व्यवस्था की गई, जिसके माध्यम से हजारों भक्त मंदिर परिसर तक पहुंचे. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और प्रदेश तथा देश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.

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अधिकारियों के अनुसार मेले के पहले दिन ही लगभग 30 से 35 हजार श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए. दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.

सुरक्षा के मजबूत घेरे में आयोजित हो रहा मेला:

इस बार मेले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था विशेष रूप से मजबूत की गई है. गांदरबल जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वप्रमुख है.

रहस्यमयी जलकुंड से जुड़ी है सदियों पुरानी मान्यता:

माता खीर भवानी मंदिर का धार्मिक महत्व सदियों पुराना माना जाता है. कश्मीरी पंडित समुदाय माता राग्न्या देवी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजता है. मंदिर परिसर में स्थित पवित्र जलकुंड श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है.

इस जलकुंड का रंग समय-समय पर बदलता रहता है और इसके रंगों को भविष्य के संकेतों से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक विश्वास के अनुसार यदि जल का रंग गहरा या लाल दिखाई दे तो उसे अशुभ संकेत माना जाता है, जबकि हल्का हरा, नीला या स्वच्छ रंग शुभता, शांति और आशावाद का प्रतीक माना जाता है.

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इस बार जलकुंड का रंग दे रहा आशावाद संकेत:

इस वर्ष जलकुंड का रंग सामान्य और शांत दिखाई दे रहा है, जिसे श्रद्धालु प्रदेश और देश के लिए शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं. यही कारण है कि मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह और पॉजिटिविटी का माहौल महसूस किया जा रहा है.

जहां आस्था से मजबूत होती है हिंदू-मुस्लिम एकता:

खीर भवानी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि कश्मीर की गंगा-जमुनी संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है. मेले की तैयारियों से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक, स्थानीय मुस्लिम समुदाय की महत्वपूर्ण भागीदारी देखने को मिलती है.

पूजा सामग्री की व्यवस्था, सफाई, यातायात प्रबंधन और अन्य सेवाओं में स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और कश्मीर की सांस्कृतिक एकता को मजबूत बनाती है.

कश्मीरी पंडितों की पहचान और भावनाओं से जुड़ा है यह उत्सव:

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए गेस्ट हाउस, सराय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव भी देखने को मिल रहा है. इसके बावजूद प्रशासन और मंदिर प्रबंधन सभी श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए लगातार प्रयत्नशील हैं.

खीर भवानी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कश्मीरी पंडितों की सांस्कृतिक पहचान, उनकी परंपराओं और कश्मीर से उनके गहरे भावनात्मक संबंध का प्रतीक है. हर वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन श्रद्धा, विश्वास, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा है, जो कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखता है.

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