Rangbhari Ekadashi Kashi Holi 2026: काशी में होली की शुरुआत हो चुकी है. रंगभरी एकादशी से पर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी होली के रंग में रंगी नजर आई. इस दिन शिव-पार्वती की पालकी यात्रा निकाली जाती है.  इसी पालकी यात्रा के साथ काशी में होली की शुरुआत मानी जाती है. दरअसल महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती को पहली बार अपने घर काशी लाते हैं. इसे ही माता पार्वती का ‘गौना’ कहा जाता है.

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इस साल भी रंगभरी एकादशी पर काशी का नजारा देखने लायक था. काशी यानी बनारस में गुलाल, अबीर और फूलों से होली खेली गई. फिर बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया. इस भव्य नजारे को देख वहां मौजूद हर व्यक्ति झूम उठा. शिव-पार्वती संग होली खेलने और उन्हें गुलाल लगाने के लिए लाखों की भीड़ पालकी यात्रा में शामिल हुई.

बाबा विश्वनाथ की पालकी यात्रा में क्या होता है

रंगभरी एकादशी के साथ ही काशी में होली का उत्सव आधिकारिक रूप से शुरू हो जाता है. पालकी यात्रा के दौरान बाबा विश्वनाथ और माता गौरी का भव्य स्वागत किया जाता है. भक्त रास्ते भर अबीर-गुलाल, रंग और गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित करते हैं. भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है.

यह एकमात्र एकादशी है जो भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव से भी जुड़ी है. रंगभरी एकादशी केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह दांपत्य प्रेम, भक्ति और जीवन में आनंद के स्वागत का प्रतीक है.,

रंगभरी एकादशी के अगले दिन मसान होली की परंपरा

रंगभरी एकादशी के अगले दिन काशी में राख से होली खेलने की परंपरा बरसों पुरानी और अद्भुत है, जिसे मसान होली के नाम से जाना जाता है. काशी का मणिकर्णिका घाट पर अघोरी, साधु-संत और शिव भक्त चिता की भस्म को शरीर पर लगाकर और हवा में उड़ाकर होली खेलते हैं. ताडंव करते हैं, ढोल नगाड़ों की धुन पर मग्न होकर शिव साधना करते हैं, हर हर महादेव के जयकारे से वातावरण शिवमय हो जाता है. 28 फरवरी को मसान होली खेली जाएगी. 

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