Karwa Chauth 2025 Live: Karwa Chauth Moonrise time Update 2026 में करवा चौथ कब है
Karwa Chauth 2025 Chand Nikalne Ka Time Live: करवा चौथ व्रत महत्व, पूजा विधि, कथा, शुभ मुहूर्त और देशभर के शहरों में चांद निकलने का सटीक समय. करवा चौथ 2025 पूजा मुहूर्त मून टाइम लाइव अपडेट यहां देखें.
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Karwa Chauth 2025 Live Blog: आज 10 अक्टूबर को पूरे भारत में सुहागिनें अखंड सौभाग्य की कामना से करवा चौथ व्रत रख रही हैं. सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला...More
अगले वर्ष, द्रिक पंचांग के अनुसार, करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा. 2026 में करवा चौथ पूजा मुहूर्त 29 अक्टूबर 2026 को शाम 05:38 बजे से 06:56 बजे तक रहेगा.
- लाभ-उन्नति मुहूर्त-09:02 पी एम से 10:35 पी एम
- शुभ-उत्तम मुहूर्त- 12:08 ए एम से 01:41 ए एम, अक्टूबर 11
- अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 01:41 ए एम से 03:14 ए एम, अक्टूबर 11
- चर-सामान्य मुहूर्त: 03:14 ए एम से 04:47 ए एम, अक्टूबर 11
करवा चौथ पर माता करवा की आरती करें. रात में चंद्रमा के उदय होने पर छलनी से चांद का दर्शन करें. इसके बाद उसी छलनी से अपने पति को देखें और चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करें. अंत में पति के हाथ से जल या मिठाई ग्रहण कर व्रत का पारण करें और उनका आशीर्वाद लें.
करवा चौथ का व्रत पूरा दिन निर्जला रहने के कारण शरीर पर असर डाल सकता है. इसलिए व्रत खोलने के बाद हल्का और पचने में आसान भोजन करना चाहिए. पारण के समय आप नारियल पानी या जूस पी सकते हैं. इसके बाद खिचड़ी, दलिया या सूप जैसी हल्की चीजें खाना पाचन के लिए अच्छी रहती हैं. ध्यान रखें कि पारण के बाद भारी तली-भुनी चीजें, ज्यादा मिठाई या कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करें. ऐसा करने से शरीर को आराम मिलता है और व्रत का फल भी अच्छा माना जाता है.
करवा चौथ का व्रत खोलने से पहले पूजा की थाली तैयार करें. थाली में जल से भरा गिलास, दीपक, रोली, अक्षत, करवा, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री रखें. व्रत पारण के लिए चंद्रमा का दर्शन जरूरी होता है. इसलिए महिलाएं चंद्र उदय का इंतजार करती हैं. चंद्रमा निकलने के बाद सबसे पहले भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी, करवा माता और चंद्र देव की पूजा करें.
इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें और मिठाई या हलवे का भोग लगाएं. फिर महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखें, उसके बाद अपने पति का चेहरा देखकर उनके दीर्घायु और सुखी जीवन की प्रार्थना करें. अंत में पति के हाथों से जल या मिठाई ग्रहण करके व्रत का पारण करें. व्रत पारण के बाद घर के बड़ों से आशीर्वाद लेना भी शुभ माना जाता है.
पंचांग के अनुसार, 10 अक्टूबर को शाम 8 बजकर 10 मिनट पर होगा. शहर के अनुसार थोड़ा समय में बदलाव हो सकता है.
करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है. मान्यता है कि चंद्रमा की पूजा करने से दीर्घायु, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है. हिन्दू संस्कृति में चंद्रमा का विशेष महत्व है, इसे शांति, स्थिरता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है.
ओम जय करवा मैया , माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया
ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी..ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती
ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे
ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे
ओम जय करवा मैया।
करवा चौथ का व्रत इस बार 10 अक्टूबर को रखा जाएगा. कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 09 अक्टूबर की रात 10:54 बजे से शुरू होगी और 10 अक्टूबर की शाम 7:38 बजे इसका समापन होगा.
करवा चौथ 2025 की तिथि: हिन्दू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ 2025 की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर 2025 रात 10:54 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2025 शाम 7:38 बजे तक रहेगी. चूंकि तिथि 10 अक्टूबर को उदय होगी, इसलिए इस साल करवा चौथ का व्रत शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा.
करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: इस वर्ष करवा चौथ पूजा का शुभ समय शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक रहेगा. इस दौरान महिलाएं पूरी विधि के साथ देवी-देवताओं की पूजा और व्रत संपन्न करती हैं.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करवा चौथ का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा और मंगल ग्रह की पूजा का विशेष महत्व होता है.
- चंद्रमा को मन, सौंदर्य, आरोग्यता, सौम्यता और भावनाओं का कारक माना गया है.
- मंगल को पति, दीर्घायु और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.
करवा चौथ के दिन चंद्रमा और मंगलदेव की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और दांपत्य संबंधों में मजबूती आती है. शास्त्रानुसार, चंद्रमा के निकलने से पहले मंगल देव की पूजा करना विशेष फलदायी होता है.
करवा चौथ व्रत कथा पत्नी के अपने पति के प्रति प्रेम, समर्पण और दीर्घायु एवं समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है. इस कथा को सुनने या पढ़ने से दंपतियों को उनके पवित्र संबंध और आपसी विश्वास की याद दिलती है.
करवा चौथ के दिन दान और पुण्य कर्मों का विशेष महत्व होता है. इस बार करवा चौथ शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इस दिन शुक्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है.
आप इस दिन आटा, चावल, दूध, दही, मिश्री या सफेद मिठाई का दान कर सकते हैं. इसके साथ ही, गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र एवं धन देना भी अत्यंत फलदायी होता है. ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और दांपत्य जीवन में सौहार्द बना रहता है.
प्राचीन समय में एक गांव में करवा नाम की पतिव्रता स्त्री रहती थी. एक दिन उसका पति स्नान करने नदी गया, तभी मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। पति की पुकार सुनकर करवा वहां पहुंची और कच्चे धागे से मगर को बांध दिया। फिर वह यमराज के पास जाकर बोली, “मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ा है, उसे दंड दीजिए.”
यमराज ने कहा कि मगर की आयु अभी बाकी है, इसलिए वह ऐसा नहीं कर सकते. तब करवा ने दृढ़ता से कहा कि यदि आप न्याय नहीं करेंगे, तो मैं आपको श्राप दूंगी। करवा की निष्ठा और साहस देखकर यमराज ने मगर को यमपुरी भेज दिया और उसके पति को दीर्घायु का वरदान दिया.
इसी कारण करवा चौथ के दिन महिलाएं करवा माता की पूजा करती हैं और उनसे अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.
करवा चौथ की पूजा थाली में तांबे का लोटा, फल-फूल, सीक (कटारी), करवा, चलनी, आटे का दीपक, पानी, मिठाई, रोली, सुहाग से जुड़ी वस्तुएं, करवा माता की तस्वीर, चंदन, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल) और सिंदूर शामिल होते हैं.
शाम 05:57 मिनट से शाम 07:11 मिनट तक
पूजन अवधि- 1 घंटा 14 मिनट
करवा चौथ व्रत समय- सुबह 06:19 मिनट से शाम 08:13 मिनट तक
करवा चौथ व्रत अवधि- 13 घंटे 54 मिनट
करवा चौथ पर आज चंद्रोदय का समय ( Karwa Chauth 2025 Moonrise Timing)
आज करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय शाम 8 बजकर 13 मिनट पर होगा. हालांकि, देश के विभिन्न शहरों में चांद के निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर देखने को मिल सकता है.
कुछ ही घंटों में करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त आरंभ होने वाला है. इस दिन सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर करवा माता की पूजा-अर्चना करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं. पारंपरिक रूप से महिलाएं सोलह श्रृंगार करके एक स्थान पर एकत्रित होती हैं और करवा माता की आराधना करती हैं. इसके बाद चंद्रदेव के उदय का इंतजार किया जाता है ताकि उन्हें अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जा सके. आइए जानते हैं करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय.
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय (चांद निकलने) का विशेष महत्व होता है। जब रात को चांद दिखे, तब महिलाएं पूजा-अर्चना कर चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस समय निम्न मंत्रों का जाप अवश्य करें—
- मंत्र 1: ऊं श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
- मंत्र 2: ऊं श्रीं श्रीं चंद्रमसे नमः
करवा चौथ की पूजा से पहले व्रत कथा को सुने.
रात में चंद्रमा की पूजा के लिए एक थाली तैयार करें जिसमें कलश, रोली, चावल, छलनी, आटे का दीपक और मिठाई रखी जाए.
चांद निकलते ही सबसे पहले छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें, फिर उसी छलनी से अपने पति के दर्शन करें.
इसके बाद कलश से चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें और दीपक दिखाएं.
चांद को मिठाई का भोग लगाकर उनकी आरती करें.
परंपरा के अनुसार, चंद्रमा की ओर सात बार गेहूं की बालियां या चावल फेंके और अंत में पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का समापन करें.
करवा चौथ पर सुनें करवा माता की पूरी आरती.
- करवा चौथ पर अगर गलती से व्रत टूट जाए तो खुद को दोषी ना मानें.
- व्रत टूटने के बाद भगवान गणेश, माता पार्वती और रात में चंद्र को फूल अर्पित कर के क्षमा मांग लें.
- व्रत का दोष दूर करने के लिए किसी सुहागिन महिला को फल, मिठाई और लाल रंग की श्रृंगार की वस्तुएं अपने क्षमता अनुसार दान करके आशीर्वाद प्राप्त करें.
- दिल्ली- रात 8 बजकर 13 मिनट
- जोधपुर- रात 8 बजकर 37 मिनट
- भोपाल- 8 बजकर 26 मिनट
- इंदौर- 8 बजकर 34 मिनट
- पटना- 7 बजकर 48 मिनट
- प्रयागराज- 8 बजकर 01 मिनट
- कोलकाता- 7 बजकर 42 मिनट
- अहमदाबाद- 8 बजकर 44 मिनट
- कानपुर- 8 बजकर 06 मिनट
आज के दिन भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शंकर और चंद्र देव की विशेष पूजा की जाती है.
करवा चौथ पर चांद की पूजा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है. 10 अक्टूबर को आज देश की राजधानी दिल्ली में 8 बजकर 13 मिनट के बाद चांद देखा जा सकेगा.
- श्रीगणेश का मंत्र - ॐ गणेशाय नमः
- शिव का मंत्र - ॐ नमः शिवाय
- पार्वतीजी का मंत्र - ॐ शिवायै नमः
- स्वामी कार्तिकेय का मंत्र - ॐ षण्मुखाय नमः
- चंद्रमा का पूजन मंत्र - ॐ सोमाय नमः
मम सुख सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये
नमस्तेस्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे
करवा चौथ पर पूजा का शुभ समय शाम के 05:57 बजे से रात 07:11 बजे तक का है.
यह अवधि कुल 1 घंटे 14 मिनट की होगी.
- करवा चौथ के दिन सूर्योदय के बाद कुछ भी ना खाएं-पीएं.
- किसी भी वाद-विवाद से दूर रहें और कोई भी नकारात्मक खयाल अपने दिमाग में न आने दें.
- आज के दिन काले या सफेद रंग के कपड़े को ना पहने, इससे अशुभ माना जाता है. लाल, पिले या सुनहरे रंग को पहनना शुभ रहेंगे.
- अपने से बड़े या बुजुर्ग का सम्मान करें, किसी का भी अपमान करने से बचें.
अगर किसी के यहां से चांद दिखाई न दें, तो पंचांग के अनुसार बताए गए समय पर चंद्रमा निकलने की दिशा की ओर पूजा कर लेनी चाहिए और चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए. इससे व्रत भी संपन्न हो जाता है और ऐसा करने से दोष नहीं लगता.
करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवा (घड़ा) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. इस मिट्टी के करवे को पूजा में प्रयोग करने का विधान है और इसके बिना करवा चौथ का व्रत अधूरा माना जाता है. जिस प्रकार मानव जीवन पंचतत्वों से बना है, उसी प्रकार यह करवा भी मिट्टी से निर्मित होता है.
इसलिए मिट्टी का करवा पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को आत्मिक स्तर पर जोड़ते हुए जन्म-जन्मांतरों तक साथ रखता है.
करवा चौथ में चांद को अर्घ्य देते समय महिलाएं थाली में पूजन सामग्री रखती हैं. इस थाली में पानी से भरा कलश, छलनी, दीपक, सिंदूर, मिट्टी के पांच डेलिये और कांस की तीलियों के साथ मिठाई रखती हैं.
| दिल्ली | 08 बजकर 13 मिनट |
| नोएडा | 08 बजकर 13 मिनट |
| फरीदाबाद | 08 बजकर 13 मिनट |
| गाजियाबाद | 08 बजकर 11 मिनट |
| गुरुग्राम | 08 बजकर 14 मिनट |
करवा चौथ के दिन महिलाओं को पूजा 16 श्रृंगार में करना चाहिए.
आज विवाहित महिलाओं को एक साथ पूजा करनी चाहिए.
गणेश जी और करवा माता की पूजा का विशेष महत्व है.
रात में चांदमा को अर्घ्य देने के बाद ही जल या भोजन ग्रहण करें.
- मिट्टी का एक कलश रखें या तो चंदन और तांबे का लोटा भी रख सकते हैं.
- पूजा के लिए फूल, फूल माला, रोली, धूप दीपक, चावल, मिठाई, फल लें.
- इसके बाद करवा चौथ की कथा की पुस्तक के साथ छलनी, शुद्ध जल, दूध और दान का सामान भी रखें.
चांद को छलनी से देखते समय छलनी पर आगे की तरफ एक दीया रखने की परंपरा है. इसका कारण यह है कि दीए की रोशनी को पवित्र माना जाता है, जो सभी तरह की नकारात्मक या शाप को दूर करता है.
आज करवा चौथ पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 05:57 बजे से रात 07:11 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 14 मिनट की होगी. चंद्रोदय का समय रात 08:12 बजे निर्धारित है.
व्रत की शुरुआत प्रातःकाल सूर्योदय के साथ निर्जला उपवास से की जाती है और इसका पारण रात में अर्घ्य अर्पण के बाद किया जाता है. निर्धारित मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया.. ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती.. ओम जय करवा मैया।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे.. ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे.. ओम जय करवा मैया।
- करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति के लिए किया जाता है.
- यह त्योहार पति-पत्नी के बीच प्रेम, समर्पण और आस्था का प्रतीक है.
- इस दिन व्रत रखने से जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली का संचार होता है.
- महिलाओं द्वारा रखा गया यह व्रत परिवार की एकता को मजबूत करता है और घर में प्रेम, अपनापन और सद्भाव बढ़ाता है.
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाओं को कथा सुनने के बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देते समय कलश में दूध, अक्षत और जल मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए.
करवा चौथ के दिन व्रत की शुरुआत सुबह स्नान कर तन और मन को शुद्ध करें. इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ़-सुथरा करके वहां बैठें. भगवान शिव और माता पार्वती के सामने हाथ में अक्षत (चावल) और पुष्प लेकर मन में यह संकल्प लें कि आप पूरे दिन विधि-विधान से निर्जला व्रत रखेंगी और चंद्र दर्शन को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का समापन करेंगी.
संकल्प लेने के बाद फूल और अक्षत को भगवान के चरणों में अर्पित करें. इसके साथ व्रत का पालन पूरे दिन श्रद्धा, संयम और परंपराओं का पालन करते हुए करें.
राहुकाल: प्रातः 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12:30 तक
शुक्र ग्रह को प्रेम, आकर्षण और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है. इसलिए आज दिन में सुगंधित इत्र या चंदन का प्रयोग करें. शाम को शुद्ध घी का दीपक जलाकर "ॐ शुक्राय नमः" मंत्र का जप करें. मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहती हैं और आपसी संबंधों में मिठास बढ़ती है.
करवा चौथ की शाम को माता पार्वती और भगवान शिव के साथ-साथ माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी पूजा करनी चाहिए. पूजा के समय अपने सामने 11 गोमती चक्र रखें और "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करें.
पूजा पूरी होने के बाद इन गोमती चक्रों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पर्स में रख दें. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में धन-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य के बाद, पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई खाकर ही अपना व्रत खोलें.
आज देशभर में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रख रही हैं. यह व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना पानी और भोजन के उपवास करती हैं और रात को चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं.
इस बार करवा चौथ और भी खास है क्योंकि इस दिन सिद्धि योग और शिववास योग बन रहे हैं. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इन योगों में व्रत करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है.
ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि पूजा कब करनी है, चांद निकलने का समय क्या है, व्रत कथा क्या है और पूजा की सामग्री में क्या-क्या लगेगा. आइए, इस पावन अवसर से जुड़ी सारी जरूरी बातें जानते हैं.
करवा चौथ का व्रत इस बार शुक्रवार के दिन पड़ने का विशेष संयोग बना है. ज्योतिष के अनुसार, शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है,जो प्रेम, सौंदर्य, दांपत्य सुख, आकर्षण और समृद्धि के कारक हैं. करवा चौथ व्रत जोकि सौभाग्य और पति की दीर्घायु से जुड़ा व्रत है, ऐसे में इसका शुक्र के दिन पड़ना दुर्लभ संयोग माना जा रहा है.
आज चतुर्थी तिथि रात 08 बजकर 03 मिनट तक रहेगी, उसके बाद पंचमी तिथि लग जाएगी.
व्रत के दिन ही अगर पीरियड आ जाए तो टेंशन न लें. आप पूरे 16 श्रृंगार करें और इस दिन का आनंद उठाएं. अपना व्रत जारी रखें, लेकिन पूजा-पाठ न करें. हां, आप मानसिक तौर पर करवा माता का ध्यान करते हुए अपने मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना कर सकती हैं.
करवा चौथ पर आज 10 अक्टूबर को राहुकाल सुबह 10:40 से 12:08 तक रहेगा. इस समय कोई शुभ काम न करें.
करवा चौथ पर आज 10 अक्टूबर 2025 को शुक्रवार का दिन है. पंचांग के मुताबिक आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है. आज के दिन सुहागिनों का प्रिय करवा चौथ त्योहार मनाया जा रहा है. आज शाम चंद्रोदय का समय रात 08:12 (मानक समय) पर रहेगा.
करवा चौथ पर आज सरगी करने का मुहूर्त सुबह 04:35 से 05:23 तक रहेगा. इसके बाद निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा.
करवा चौथ (Karwa Chauth 2025) के दिन माता करवा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस पूजा में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया जाता है और पीतल या मिट्टी के टोंटी वाले करवे का उपयोग किया जाता है. करवे की टोंटी में कांसे की सींक लगाई जाती है, जिसे शक्ति का प्रतीक माना गया है. माना जाता है कि करवा का संबंध भगवान श्री गणेश से भी जुड़ा होता है.
इस साल करवा चौथ के दिन सिद्धि योग और शिवावास योग बन रहे हैं. इसके अलावा बुधादित्य, शुक्रादित्य, कुलदीपक और नवपंचम जैसे शुभ राजयोग भी इस दिन बनेंगे, जिससे यह तिथि और भी मंगलमय मानी जा रही है.
करवा चौथ के अवसर पर अगर आप अपनी सास के लिए कोई उपहार देना चाहती हैं, तो यह एक सुंदर परंपरा का हिस्सा माना जाता है. जैसे सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, वैसे ही बहू भी सास को शगुन स्वरूप कुछ भेंट करती है. इस दिन आप अपनी सास को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं, लाल रंग की साड़ी, बिछिया, पायल या सोने के आभूषण जैसे उपहार दे सकती हैं.
करवा चौथ की सरगी सास की ओर से दी जाती है, जिसे विवाहित महिलाएं व्रत शुरू करने से पहले ग्रहण करती हैं. इस सरगी में आमतौर पर सूखे मेवे, फल, मिठाइयां, खीर, सेवईं, कपड़े और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं शामिल होती हैं. यह परंपरा सास-बहू के रिश्ते को और भी मधुर बनाती है तथा सास का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष करवा चौथ के दिन चंद्रोदय 10 अक्टूबर को शाम 8:10 बजे होगा. हालांकि, विभिन्न शहरों में चंद्रमा के उदय का समय कुछ मिनटों का अंतर ले सकता है.
करवा चौथ का व्रत बिना कुछ आवश्यक वस्तुओं के अधूरा माना जाता है. इस दिन पूजन के लिए घी या सरसों के तेल का दीपक, मिट्टी का करवा, रोली, कुमकुम, चावल (अक्षत), चंदन, काजल, अर्घ्य देने के लिए लोटा, मिष्ठान, फल, मेवे, कपूर, शहद, धूपबत्ती, लाल और पीले फूल, कच्चा दूध, दही, शक्कर, लकड़ी की चौकी, पैसे, छन्नी और मिठाइयों की आवश्यकता होती है. ये सभी सामग्री पूजा और व्रत की परंपरा को पूर्ण बनाती हैं.
ॐ गणेशाय नमः
ॐ नमः शिवायः
ॐ शिवायै नमः
ॐ षण्मुखाय नमः
ॐ सोमाय नमः
‘मम सुख सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’
‘नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।’
करवा चौथ के व्रत का संकल्प प्रातः सरगी ग्रहण करने के बाद लिया जाता है.इस वर्ष करवा चौथ पर सरगी खाने का शुभ मुहूर्त 10 अक्टूबर को सुबह 4:40 बजे से लेकर 5:30 बजे तक रहेगा. इस दौरान ब्रह्म मुहूर्त भी रहेगा, जो अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात 10:54 बजे शुरू होकर 10 अक्टूबर की शाम 7:38 बजे तक रहेगी. उदया तिथि 10 अक्टूबर को होने के कारण करवा चौथ का व्रत शुक्रवार, 10 अक्टूबर को रखा जाएगा.
शहरों में करवा चौथ की पूर्व संध्या पर बाजारों की रौनक देखते ही बनती है. हर ओर मेहंदी की खुशबू, चूड़ियों की छनक और लाल परिधानों की झलक है.
महिलाएं अपने पति के नाम की मेहंदी लगवा रही हैं और पूजा के लिए मिट्टी के करवे खरीद रही हैं. ज्योतिषीय मान्यता है, इस दिन का व्रत हर मनोकामना को पूर्ण करता है और वैवाहिक जीवन में स्थिरता लाता है.
कल अखंड सौभाग्य का पर्व करवा चौथ मनाया जाएगा. देशभर में महिलाएं पूजा थालियां सजा रही हैं और श्रृंगार पूरा कर रही हैं. बाजारों में करवे, दीपक और लाल साड़ियों की खरीदारी जोरों पर है. इस बार चतुर्थी तिथि शुक्रवार को पड़ने से शुभ योग बन रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा और सिद्धि योग का संयोग इस व्रत को अत्यंत फलदायी बनाएगा.
करवा चौथ 2025 से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उत्सव का माहौल है. महिलाएं अपनी मेहंदी डिज़ाइन और पारंपरिक परिधानों की तस्वीरें साझा कर रही हैं.
#KarwaChauth2025 और #SargiDiaries ट्रेंड कर रहे हैं. कल पूरे दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी और चांद निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत तोड़ेंगी. इस बार चांद वृषभ राशि में रहेगा, जो स्थिरता और प्रेम का योग दर्शाता है.
करवा चौथ की पूर्व संध्या पर मंदिरों में शिव-पार्वती और गणेश की विशेष आरती की जा रही है. कई जगहों पर महिला मंडलों द्वारा करवा चौथ कथा पाठ का आयोजन किया गया है.
पूरे देश में सुहागिनें कल के व्रत की तैयारी में जुटी हैं, नए वस्त्र, श्रृंगार और पूजा सामग्री के साथ. धर्मगुरुओं का कहना है कि इस व्रत में श्रद्धा, संयम और प्रेम, यही तीनों सबसे बड़ा आभूषण हैं.
सुबह से ही घरों में सर्गी थालियां सजाई जा रही हैं, मेवे, फल, हलवा और आशीर्वाद से भरी हुई. यह परंपरा सास और बहू के पवित्र संबंध का प्रतीक मानी जाती है.
कल यानी 10 अक्टूबर को महिलाएं सूर्योदय से लेकर चांद निकलने तक निर्जला उपवास रखेंगी. पंडितों के अनुसार इस बार चांद का पूजन सिद्धि योग में होगा, जो हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला योग है.
करवा चौथ से एक दिन पहले ही देशभर में भक्ति और प्रेम का माहौल है. महिलाएं पूजा की थालियां सजा रही हैं, करवे रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजे हैं. सासें बहुओं को सर्गी दे रही हैं.
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार चतुर्थी तिथि पर वृषभ राशि में चंद्रमा रहेगा, जो प्रेम और स्थिरता का प्रतीक है. महिलाओं के लिए यह व्रत न केवल श्रद्धा बल्कि आत्मबल की भी परीक्षा है.
कल यानी 10 अक्टूबर 2025 को देशभर में करवा चौथ का पवित्र व्रत रखा जाएगा. सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से निर्जला उपवास करेंगी.
आज से ही बाजारों में मेहंदी, चूड़ियों और पूजा-सामग्री की चहल-पहल बढ़ गई है. घरों में सासें बहुओं के लिए सर्गी थाली सजा रही हैं. इस बार व्रत पर सिद्धि योग बन रहा है, जबकि दिल्ली में चंद्रोदय रात 8:13 बजे रहेगा.
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