Kartarpur Sahib: पंजाब विधानसभा में करतारपुर साहिब कॉरिडोर दोबारा खोलने की मांग वाला प्रस्ताव पारित होने के बाद श्रद्धालुओं की उम्मीदें बढ़ी हैं. हालांकि, प्रस्ताव पास होने का मतलब कॉरिडोर खुल जाना नहीं है. फिलहाल इस रास्ते से यात्रा निलंबित है. श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू होने के लिए केंद्र सरकार के अगले फैसले और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा. 

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प्रस्ताव में क्या मांग की गई?

मंगलवार 27 अक्टूबर को पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया. इसमें केंद्र से कॉरिडोर जल्द खोलने, इसे नियमित रूप से चालू रखने और यात्रा प्रक्रिया आसान बनाने की अपील की गई.

पाकिस्तान सरकार से बातचीत करके श्रद्धालुओं की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए रास्ता खोलने पर जोर दिया. खासकर बुजुर्ग और बीमार श्रद्धालुओं की सुविधा का मुद्दा उठाया गया. 

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क्या अब बिना वीजा जा सकेंगे?

अभी नहीं. गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर स्पष्ट सूचना है कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाएं अगले निर्देश तक निलंबित हैं. इसलिए विधानसभा के प्रस्ताव को यात्रा शुरू करने की अनुमति समझना गलत होगा. प्रस्ताव केंद्र से कार्रवाई का आग्रह है; इसके आधार पर श्रद्धालु सीधे सीमा पार नहीं जा सकते. 

हालांकि कॉरिडोर की मूल व्यवस्था वीजामुक्त यात्रा की है. भारत और पाकिस्तान के बीच 2019 में हुए समझौते के तहत पात्र भारतीय श्रद्धालु बिना पाकिस्तानी वीजा गुरुद्वारा दरबार साहिब जा सकते हैं. यह सुविधा कॉरिडोर के संचालन और निर्धारित शर्तों के अधीन है. दोबारा खुलने पर लागू नियमों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी.

पासपोर्ट और अनुमति क्यों जरूरी हैं?

वीजामुक्त यात्रा का अर्थ दस्तावेजों से छूट नहीं है. निर्धारित व्यवस्था में वैध पासपोर्ट, ऑनलाइन पंजीकरण और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन यानी ईटीए जरूरी हैं. केवल पंजीकरण करने से यात्रा का अधिकार नहीं मिलता. अनुमति मिलने के बाद ईटीए जारी होता है. यात्रियों को उसी दिन लौटना होता है और अनुमति सिर्फ करतारपुर साहिब जाने की होती है, पाकिस्तान में अन्य स्थानों पर घूमने की नहीं.

कब से बंद है कॉरिडोर?

कॉरिडोर की सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं. पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर और सुरक्षा परिस्थितियों के बीच यात्रा रोकी गई थी. यह मार्ग पंजाब के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब से जोड़ता है, जहां गुरु नानक देव जी ने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.