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Jitiya Vrat 2026: मां निर्जला हों तो अष्टमी श्राद्ध का खाना कौन बनाए?

Jitiya Vrat 2026: आज 3 अक्टूबर को जितिया व्रत और अष्टमी श्राद्ध साथ हैं. मां निर्जला हों तो श्राद्ध का भोजन कौन बनाए? जानें रसोई की जिम्मेदारी और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें.

Jitiya Vrat 2026: मां जितिया का निर्जला व्रत रखेंगी और उसी दिन घर में अष्टमी का श्राद्ध भी है. ऐसे में भोजन कौन बनाएगा? पिता, बेटा या परिवार का दूसरा सदस्य रसोई की जिम्मेदारी संभाल सकता है.

श्राद्ध का भोजन मां के हाथों ही बने, इसे अनिवार्य धार्मिक नियम मानने का प्रमाणित आधार नहीं मिला है. भोजन की तैयारी में अपने परिवार की परंपरा और श्राद्ध कराने वाले पुरोहित के निर्देश ध्यान में रखें.

आज जितिया का निर्जला व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस दिन अष्टमी श्राद्ध भी है. जिन परिवारों में दोनों अनुष्ठान होते हैं, वहां पूजा की तैयारी के साथ रसोई का काम बढ़ जाता है. अक्सर खाना बनाने वाली मां ही व्रत रख रही होती हैं. समस्या यहीं से शुरू होती है कि क्या हर बार दोनों जिम्मेदारियां उन्हीं को निभानी होंगी?

मां का व्रत, परिवार की जिम्मेदारी

जितिया में माताएं संतान की दीर्घायु और कुशलता की कामना से अन्न और जल ग्रहण किए बिना उपवास करती हैं. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई परिवारों में यह व्रत विशेष आस्था के साथ रखा जाता है. नहाय-खाय, निर्जला उपवास और पारण इसकी प्रमुख परंपराएं हैं. 

ऐसे दिन परिवार पहले ही काम बांट ले. कौन सामग्री लाएगा, कौन भोजन बनाएगा और कौन परोसने की व्यवस्था करेगा, यह सुबह की भागदौड़ से पहले तय हो जाए. मां से पकवानों की विधि पूछी जा सकती है, लेकिन पूरा समय उन्हें चूल्हे के सामने खड़ा रखना जरूरी नहीं.

क्या पुरुष श्राद्ध का खाना बना सकते हैं?

घर में आम दिनों में महिलाएं खाना बनाती हैं, इसलिए कई लोग श्राद्ध के भोजन को भी उन्हीं की जिम्मेदारी समझ लेते हैं. लेकिन घरेलू व्यवस्था को धार्मिक अनिवार्यता मान लेना सही नहीं.

पिता या बेटा भोजन तैयार करें तो पहले परिवार में प्रचलित सामग्री और पकवानों की जानकारी ले लें. जिन घरों में खीर, पूरी, चावल या दूसरे निर्धारित व्यंजन बनते हैं, वहां उसी परंपरा के अनुसार तैयारी की जा सकती है. श्राद्ध के भोजन संबंधी रीति में क्षेत्र और कुलाचार का अंतर मिलता है, इसलिए अपनी ओर से नया नियम जोड़ने से बचें.

मां भोजन बनाएं तो क्या व्रत टूट जाएगा?

खाना बनाना और खाना खाना अलग क्रियाएं हैं. निर्जला उपवास का संबंध अन्न-जल ग्रहण न करने से है. केवल रसोई में जाने या भोजन बनाने को व्रत टूटने का कारण बताने के लिए अलग प्रमाण चाहिए. व्रती मां भोजन तैयार कर रही हों तो स्वाद जांचने के लिए चखने का काम कोई दूसरा सदस्य संभाले.

फिर भी मां बना सकती हैं का मतलब यह नहीं कि सारी तैयारी उन्हीं से कराई जाए. बिना अन्न-जल के उपवास के बीच रसोई, सफाई और मेहमानों की व्यवस्था परिवार के दूसरे सदस्य संभालें.

तैयारी कैसे करें?

एक दिन पहले सामग्री खरीद लें और बर्तन तैयार कर लें. श्राद्ध में कितने लोगों के भोजन की व्यवस्था होगी, यह तय कर लें. पूजा और भोजन कराने का क्रम पुरोहित से पूछ लें, ताकि अंतिम समय में मां को बार-बार उठना न पड़े.

पितरों के प्रति श्रद्धा निभाते हुए व्रत रखने वाली मां का ध्यान भी रखा जा सकता है. इस बार बेटा केवल मां के व्रत का लाभ चाहने वाला न बने, रसोई की जिम्मेदारी भी उठाए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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