Janmashtami 2026: कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को है. इस दिन घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल की विशेष पूजा और सेवा की जाती है. जिन घरों में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण की नियमित सेवा होती है, वहां जन्माष्टमी से पहले उनकी पूजा से जुड़ी वस्तुओं को जांच लेना चाहिए ताकि पूजा में कोई भूल न हो. 

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  1. लड्डू गोपाल के वस्त्र साफ हैं या नहीं - सबसे पहले भगवान के वस्त्रों को देखें. अगर पोशाक पुरानी, गंदी या बहुत अधिक खराब हो गई है, तो जन्माष्टमी से पहले उसे बदल दें. 
  2. मुकुट और श्रृंगार की वस्तुएं जांचें - लड्डू गोपाल के मुकुट, बांसुरी, माला, कंगन, पायल और अन्य श्रृंगार सामग्री को अच्छी तरह साफ कर लें. टूटी हुई या खराब हो चुकी वस्तुओं को पूजा में इस्तेमाल न करें. जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है, इसलिए पहले से सभी सामग्री व्यवस्थित कर लेना बेहतर रहता है.
  3. झूले की सफाई जरूर करें - जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को झूला झुलाने की परंपरा है. अगर घर में पहले से झूला रखा है, तो उसे साफ कर लें. झूले पर लगी धूल या पुराने फूलों को हटाकर उसे अच्छी तरह सजाएं.
  4. पूजा स्थल की स्वच्छता पर ध्यान दें - लड्डू गोपाल जिस स्थान पर विराजमान हैं, वहां सफाई जरूर करें. चौकी, आसन और आसपास की जगह को साफ रखें. पूजा स्थल पर लंबे समय से रखे सूखे फूल, खराब हो चुके प्रसाद या अनावश्यक वस्तुएं जमा न होने दें.
  5. भोग की सामग्री - जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को माखन मिश्री, पंचामृत, फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक प्रसाद अर्पित किया जाता है. घर में रखी भोग सामग्री ताजा होनी चाहिए. भगवान को बासी या खराब हो चुका भोजन अर्पित नहीं किया जाता है.
  6. पूजा के बर्तन और दीपक जांचें - लड्डू गोपाल की सेवा में इस्तेमाल होने वाले जलपात्र, थाली, चम्मच, दीपक और अन्य पूजा सामग्री को साफ कर लें. दीपक या पूजा का कोई बर्तन टूट गया हो, तो उसे बदल देना बेहतर है.
  7. भगवान की सेवा का नियम तय करें - जन्माष्टमी से पहले ये भी तय कर लें कि पूजा, भोग, वस्त्र परिवर्तन और आरती किस तरह करनी है. घर में लड्डू गोपाल की नियमित सेवा होती है तो अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार नियमों का पालन करें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेवा दिखावे के बजाय श्रद्धा, स्वच्छता और प्रेम से हो.

रात में क्यों होती है पूजा 

जन्माष्टमी की पूजा में मध्यरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि धार्मिक परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में मध्यरात्रि के समय हुआ था.

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