Islam: इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है जो कुरान और मुहम्मद की शिक्षाओं पर आधारित है. यहां जायज और नाजायज का बेहद महत्व होता है, लेकिन फिर भी मन में ये सवाल उठता है कि बहुत सारे लोग ताबीज पहनते हैं और इन ताबीजों को अपनी सुरक्षा या कामयाबी हासिल करने में मदद के लिए उपयोगी मानते हैं.
मुस्लिम समाज में ताबीज पहनने का चलन सबसे अधिक देखने को मिलता है, लेकिन क्या सच में ये ताबीज सुरक्षा या सफलता दिलाते हैं. आइए जानते हैं विस्तार से.
ताबीज पहनना जायज है
इस्लाम में ताबीज पहनना जायज नहीं है (हराम) यदि इसमें जादुई शक्तियों पर विश्वास हो या कुरान की आयतों के अलावा कुछ और लिखा हो. कुछ विद्वान मानते हैं कि केवल कुरान की आयतें होने पर भी ताबीज पहनना शिर्क (मूर्ति पूजा) माना जा सकता है.
क्योंकि यह अल्लाह के बजाय किसी वस्तु पर भरोसा करने जैसा है.
- कई विद्वान ताबीज को "शिर्क" मानते हैं, खासकर जब यह विश्वास किया जाता है कि कोई ताबीज अपने आप में सुरक्षा या लाभ दे सकता है, जो कि अल्लाह की एकता तौहीद के विश्वास के खिलाफ है.
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ताबीज पहनने वाला यह विश्वास करे कि केवल अल्लाह ही रक्षा और उपचार प्रदान करता है, और ताबीज सिर्फ एक माध्यम है, न कि कोई शक्ति का स्रोत.
- इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, आध्यात्मिक सुरक्षा के लिए कुरान की आयतों का पाठ करना या पैगंबर की दुआओं का पाठ करना एक अनुमेय प्रथा है, बजाय ताबीज के.
- कुरान की आयत सूरा अल-अराफ (7:188) में अल्लाह कहता है कि किसी को भी नुकसान या हानि फायदा पहुंचाने की शक्ति नहीं है, सिवाय उसके जो अल्लाह चाहता है. यह दर्शाता है कि केवल अल्लाह ही संरक्षक है, न कि कोई ताबीज.
- पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ताबीज को शिर्क कहा है. एक हदीस के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि "जिसने ताबीज पहना है, उसने शिर्क किया है".
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