Hindu Traditions: भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल शरीर के पोषण का साधन नहीं, बल्कि एक पवित्र कर्म माना गया है. यही कारण है कि सनातन परंपरा में रसोईघर को घर का सबसे शुभ स्थान माना जाता है.

Continues below advertisement

धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं में भोजन बनाने और ग्रहण करने से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन आज भी लाखों लोग श्रद्धा के साथ करते हैं.

Continues below advertisement

विशेष रूप से कुछ तिथियां ऐसी मानी जाती हैं, जब भोजन की प्रकृति और खान-पान के नियम सामान्य दिनों से अलग हो जाते हैं. इन दिनों में आध्यात्मिक साधना, उपवास, पूजा-पाठ और आत्मसंयम को अधिक महत्व दिया जाता है.

यही वजह है कि कई परिवारों में रोटी या अनाज से बने भोजन के स्थान पर फलाहार या सात्विक आहार ग्रहण करने की परंपरा देखने को मिलती है.

यह भी पढ़ें-Aaj Ka Panchang 22 June 2026: आज धूमावती जयंती और सोमवार का संयोग, देखें शुभ मुहूर्त, पूरा पंचांग

एकादशी पर क्यों नहीं खाते अनाज?

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और अनाज का सेवन नहीं करते. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन फल, दूध, मेवे और व्रत में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक शुभ माना जाता है. यही कारण है कि कई घरों में इस दिन रोटी या अन्य अनाज से बने व्यंजन नहीं बनाए जाते.

यह भी पढ़ें- Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी 24 या 25 जून कब ? किस दिन करें व्रत-पूजा ? जानें सही डेट

महाशिवरात्रि पर भी रखा जाता है विशेष संयम

महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व है. इस दिन भक्त उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और पूजा-अर्चना करते हैं. कई लोग पूरे दिन केवल फलाहार ग्रहण करते हैं. इसी वजह से अनेक परिवारों में महाशिवरात्रि पर रोटी और सामान्य भोजन बनाने से परहेज किया जाता है तथा सात्विक व्रत आहार को प्राथमिकता दी जाती है.

अमावस्या पर भी निभाई जाती हैं विशेष परंपराएं

अमावस्या तिथि को पितरों, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. देश के कई क्षेत्रों में इस दिन उपवास रखने और साधारण भोजन से दूरी बनाने की परंपरा है. कुछ लोग केवल फलाहार ग्रहण करते हैं, जबकि कई परिवारों में भोजन बनाने के नियम स्थानीय परंपराओं के अनुसार निर्धारित होते हैं.

श्राद्ध पक्ष में क्यों बदल जाते हैं भोजन के नियम?

श्राद्ध पक्ष पूर्वजों को समर्पित विशेष अवधि मानी जाती है. इस दौरान लोग तामसिक भोजन से दूरी बनाकर सात्विक आहार ग्रहण करते हैं. कई स्थानों पर पितरों के निमित्त विशेष भोग तैयार किए जाते हैं और भोजन से जुड़े नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है.

हालांकि रोटी बनाना पूरी तरह निषिद्ध नहीं माना गया है, लेकिन खान-पान में सादगी और पवित्रता को प्राथमिकता दी जाती है.

क्या धर्म में रोटी बनाना पूरी तरह वर्जित है?

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इन तिथियों पर रोटी बनाना सार्वभौमिक रूप से निषिद्ध नहीं है. अधिकांश नियम व्रत, उपवास और स्थानीय परंपराओं से जुड़े हुए हैं. इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनका पालन अलग-अलग तरीके से किया जाता है. मुख्य उद्देश्य भोजन में संयम, सात्विकता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना बनाए रखना है.

इसलिए यदि आपके परिवार में इन तिथियों को लेकर कोई विशेष परंपरा है, तो उसका पालन श्रद्धा के साथ किया जा सकता है. वहीं जिन लोगों के यहां ऐसी मान्यता नहीं है, वे अपनी सुविधा और धार्मिक विश्वास के अनुसार भोजन संबंधी निर्णय ले सकते हैं.

 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.