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Ganesh Chaturthi 2026: 66 Kg गोल्ड से श्रृंगार, 703 करोड़ का बीमा, देश के सबसे अमीर गणपति का अनोखी कहानी

Ganesh Chaturthi 2026: मुंबई के GSB सेवा मंडल की गिनती देश के सबसे अमीर गणपति पंडालों में होती है. इस साल यहां गणेश प्रतिमा 66 किलो सोने, 335 किलो चांदी से बनाई गई है.

GSB Ganpati 2026: गणेश चतुर्थी से गणपति उत्सव का आरंभ हो चुका है. गणेश उत्सव की रौनक मुंबई में देखने लायक होती है. यहां लालबागचा राजा की भव्यता का जवाब नहीं लेकिन इस साल सबसे ज्यादा चर्चा है किंग्स सर्कल स्थित GSB सेवा मंडल के महागणपति की, जिनकी गिनती देश के सबसे अमीर गणपति में होती है. 2026 में ये गणपति एक बार फिर चर्चा में है. क्या है इस बार जीएसबी के महागणपति की खासियत जानें.

66 किलो से ज्यादा सोना, 335 किलो चांदी से श्रृंगार

इस साल GSB महागणपति की करीब 24 फीट ऊंची प्रतिमा को 66 किलो से ज्यादा सोने के आभूषणों, लगभग 335 किलो चांदी और कीमती रत्नों से सजाया गया है. खास बात ये है कि मंडल ने इस वर्ष 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है. 2025 में ये 474 करोड़ का था. बप्पा यहां सिर्फ पांच दिनों के लिए विराजते हैं, लेकिन उनकी सेवा के लिए दुनिया के कई देशों से NRI सेवादार मुंबई पहुंचते हैं. 

 
 
 
 
 
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महागणपति के ये आभूषण किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वर्षों से भक्तों और सेवादारों की ओर से दिए गए दान और भेंट का हिस्सा हैं. मंडल के मुताबिक यह भव्यता कई दशकों की श्रद्धा का परिणाम है. साथ ही 703.27 करोड़ रुपये का बीमा प्रतिमा की कीमत नहीं है. ये गणेशोत्सव के दौरान भक्तों की सुरक्षा, आभूषणों, संपत्तियों और आयोजन से जुड़े निर्धारित जोखिमों को कवर करने के लिए लिया गया व्यापक इंश्योरेंस है.

72 साल पुराना है GSB का गणेशोत्सव

GSB सेवा मंडल की शुरुआत वर्ष 1951 में विजयादशमी के दिन हुई थी. कुछ समाजसेवी सदस्य अंतिम संस्कार और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए एक साथ आए थे. बाद में यही समूह भजन और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ता गया और सेवा मंडल का विस्तार हुआ.

गणेशोत्सव की परंपरा मंडल ने 1955 से शुरू की और 2026 में इसका 72वां गणेशोत्सव मनाया जा रहा है. इस बार उत्सव 14 से 18 सितंबर तक रहेगा. 

यहां DJ नहीं, गूंजते हैं वैदिक मंत्र

GSB गणपति की सबसे खास पहचान सिर्फ सोना-चांदी नहीं है. यहां गणेशोत्सव का वातावरण वैदिक परंपराओं से जुड़ा रहता है. मंडप में विशेष हवन कुंड बनाए जाते हैं, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की परंपरा निभाई जाती है. 

मन्नत पूरी होने पर होती है तुलाभर सेवा

GSB गणपति से जुड़ी तुलाभर सेवा भी बेहद खास है. किसी भक्त की मनोकामना पूरी होने के बाद वह अपने बच्चे को विशेष तराजू में बैठाकर उसके वजन के बराबर चावल, दाल या अन्य अनाज दान करता है. ये अनाज बाद में जरूरतमंदों की सेवा और अन्नदान में इस्तेमाल होता है. GSB सेवा मंडल की प्रमुख सेवाओं में अन्नदान और तुलाभर दोनों शामिल हैं.

FAQs

  1. GSB महागणपति कितने सोने-चांदी से सजे हैं?
    2026 में 24 फीट ऊंची प्रतिमा को 66 किलो से ज्यादा सोने, 335 किलो चांदी और रत्नों से सजाया गया है.
  2. GSB गणपति का बीमा कितना हुआ है?
    2026 में उत्सव के लिए 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया गया है.
  3. GSB गणपति उत्सव कितना पुराना है?
    मंडल की स्थापना 1951 में हुई और गणेशोत्सव 1955 से शुरू हुआ. 2026 में 72वां उत्सव है.
  4. तुलाभर सेवा क्या है?
    मनोकामना पूरी होने पर भक्त बच्चे के वजन के बराबर अनाज दान करते हैं, जिसका उपयोग अन्नदान में होता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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