Dwijpriya sankashti Chaturthi 2026: फाल्गुन कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करती हैं. रात्रि में चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा के दर्शन और पूजन के बाद ही व्रत खोला जाता है. इसलिए आज व्रती महिलाओं को बेसब्री से चांद का इंतजार रहता है.

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आज चंद्रोदय का समय (Aaj Chandroday ka samay)

सूर्यास्त के बाद से ही संकष्टी चतुर्ती का व्रत रखने वालों की निगाहें आसमान में होती है. आपको बता दें कि, आज 5 फरवरी 2026 को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर रात लगभग 9 बजकर 35 मिनट पर होगा. हालांकि शहर के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

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चंद्र दर्शन न हो तो क्या करें?

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है. जिन स्थानों पर चंद्र दर्शन हो, वे चंद्रमा को शुद्ध जल से अर्घ्य देकर फूल, अक्षत, कुमकुम आदि से पूजा करें और फिर अपना व्रत खोलें. लेकिन कई बार खराब मौसम, आसमान में काले बादल के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है. ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, क्या चंद्र दर्शन के बिना व्रत अधूरा रह जाएगा? जी नहीं, आपका व्रत अधूरा नहीं रहेगा. ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर आप शास्त्रों में बताए गए इन उपायों को कर अपना व्रत पूरा कर सकते हैं.

चंद्र दर्शन न हो तो करें ये 3 काम

  • आज किसी कारण चंद्र दर्शन न हो पाए तो चंद्रोदय वाले समय में ही, जिस दिशा में चंद्रोदय होता है, उस दिशा की ओर खड़े होकर श्रद्धापूर्व मानसिक रूप से चंद्रमा की पूजा कर सकते हैं. इस उपाय से भी व्रत-पूजा का पूरा फल मिल जाता है.
  • बारिश या खराब मौसम के कारण चंद्र दर्शन न हो तो एक चौकी स्थापित कर उसमें लाल या पीला कपड़ा बिछाकर अक्षत से चंद्रमा की आकृति बना ले. फिर चंद्र देव के मंत्रों का जाप करते हुए विधि-विधान से पूजा कर लें.
  • चंद्र दर्शन न हो तो भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के दर्शन कर पूजा करें.

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