डूंगरपुर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन प्राचीन और ऐतिहासिक भुवनेश्वर महादेव मंदिर में हुआ।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026: डूंगरपुर के भुवनेश्वर शिवालय में उमड़ा श्रद्धा का ज्वार, हज़ारों महिलाओं ने निकाली मंगल कलश यात्रा
Bhuvaneshwar Mahadev: डूंगरपुर में आस्था का सैलाब! भुवनेश्वर महादेव में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' पर उमड़ा भक्तों का हुजूम. कलश यात्रा और PM मोदी के संबोधन से शिवमय हुई वागड़ की धरा। देखिए खास रिपोर्ट.

- डूंगरपुर के भुवनेश्वर महादेव मंदिर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया।
- हजारों महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली, भक्तिमय माहौल रहा।
- पीएम मोदी के संबोधन ने सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर जोर दिया।
- यह आयोजन आस्था, अस्मिता और राष्ट्रभक्ति का संगम था।
डूंगरपुर में आस्था का महासंगम: भारतीय संस्कृति के इतिहास में 'पुनरुत्थान' का एक नया अध्याय आज उस समय लिखा गया, जब देश के साथ-साथ वागड़ की पवित्र भूमि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रंग में रंग गई.
डूंगरपुर जिले के प्राचीन और ऐतिहासिक भुवनेश्वर महादेव मंदिर में आस्था का ऐसा महासंगम देखने को मिला, जिसने त्रेतायुगीन भक्ति और आधुनिक भारत के स्वाभिमान को एक सूत्र में पिरो दिया.
भव्य कलश यात्रा: भक्ति का मंगल शंखनाद
उत्सव का शुभारंभ एक अभूतपूर्व कलश यात्रा के साथ हुआ. पारंपरिक वागड़ी परिधानों में सजी हज़ारों महिलाओं ने जब अपने शीश पर मंगल कलश धारण किया, तो दृश्य ऐसा था मानो देवलोक से गंगा धरती पर उतर आई हो. 'हर-हर महादेव' और 'जय सोमनाथ' के गगनभेदी जयकारों से डूंगरपुर की गलियाँ गूंज उठीं. यह कलश यात्रा केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि अपनी विरासत के प्रति अटूट विश्वास का प्रदर्शन थी.
शिवमय हुआ भुवनेश्वर शिवालय
प्रशासन और देवस्थान विभाग के समन्वय से भुवनेश्वर मंदिर परिसर को भव्यता प्रदान की गई. मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक, फूलों की महक और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को अलौकिक बना दिया.
- विधि-विधान से पूजन: जिला कलेक्टर देषल दान और भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल ने मुख्य यजमान के रूप में भगवान भुवनेश्वर का जलाभिषेक किया.
- प्रशासनिक सहभागिता: इस पावन अवसर पर विधायक शंकरलाल डेचा, ADM दिनेश चंद्र धाकड़ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए महादेव की आराधना की.
प्रधानमंत्री का संबोधन: गौरव और संकल्प की गूंज
मंदिर परिसर में लगाई गई विशाल स्क्रीन्स के माध्यम से श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों ने सोमनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को सुना. प्रधानमंत्री के शब्दों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल पत्थरों का जोड़ नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है. बच्चों के चेहरों पर झलकता उत्साह इस बात का प्रमाण था कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए आतुर है.
आयोजन का आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 के माध्यम से डूंगरपुर ने देश को यह संदेश दिया कि भक्ति और राष्ट्रभक्ति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
| विशेषता | विवरण |
| मुख्य केंद्र | भुवनेश्वर महादेव मंदिर, डूंगरपुर |
| प्रमुख आकर्षण | भव्य कलश यात्रा एवं पीएम मोदी का लाइव संबोधन |
| भागीदारी | हज़ारों की संख्या में भक्त, महिलाएं और स्कूली छात्र |
| मुख्य भाव | सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विरासत पर गर्व |
आस्था और अस्मिता का संगम
भुवनेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित यह 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' केवल एक दिवस का अनुष्ठान नहीं था, यह वागड़ वासियों की उस चेतना का जागरण था, जो सदियों से अपनी संस्कृति की रक्षा करती आई है. जब शाम की आरती के साथ दीपों की लौ जली, तो हर भक्त की आँखों में एक ही संकल्प था— अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखना.
यह महासंगम सिद्ध करता है कि भारत अब अपनी आध्यात्मिक शक्ति के बल पर विश्व पटल पर अपनी पहचान को पुन: स्थापित कर रहा है. डूंगरपुर की इस पावन धरा से उठा भक्ति का यह स्वर सोमनाथ की लहरों के साथ मिलकर 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार कर रहा है.
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Frequently Asked Questions
डूंगरपुर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन कहाँ हुआ?
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ कैसे हुआ?
उत्सव का शुभारंभ पारंपरिक वागड़ी परिधानों में सजी हज़ारों महिलाओं द्वारा मंगल कलश धारण करने के साथ एक भव्य कलश यात्रा से हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के संबंध में क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है और नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ रही है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
यह पर्व भक्ति और राष्ट्रभक्ति को एक साथ जोड़ता है, और भारत की आध्यात्मिक शक्ति के बल पर अपनी पहचान को पुन: स्थापित करने का संदेश देता है।























