Dhul Hijjah 2026: जिलहिज्जा के पहले 10 दिन सबसे बेहतर, जानें इस दौरान क्या करते हैं मुसलमान
Dhul Hijjah 2026: जिल हिज्जा की शुरुआत भारत में 19 मई से हो चुकी है और 28 मई को बकरीद मनाई जाएगी. इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का आखिरी महीना होता है, जिसके शुरुआत 10 दिनों को सबसे बेहतर माना गया है.

Dhul Hijjah 2026: भारत में इस्लामिक चंद्र कैलेंडर जिल हिज्जा की शुरुआत 19 मई से हो चुकी है. 18 मई को मुल्क में जिलहिज्जा चांद नजर आया और 10 दिन बाद 28 मई जुमेरात (गुरुवार) को भारत में बकरीद मनाई जाएगी.
जुलहिज्जा इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का आखिरी महीना होता है, जिसके बाद मुहूर्रम की शुरुआत होती है. जुलहिज्जा के पहले 10 दिनों (1-10 तारीख) को इस्लाम में बेहतर बताया गया है. इसे पाक और बरकत वाले दिन माने गए हैं, जिसमें खासकर अल्लाह की इबादत करना श्रेष्ठ माना जाता है.
जिलहिज्जा के पहले 10 दिनों को लेकर पैगंबर मुहम्मद ने कहा- नेक कर्म करने के लिए इन दस दिनों से अधिक प्रिय कोई और दिन नहीं हैं. हदीस। सहीह अल-बुखारी
जिलहिज्जा का इस्लामिक महत्व
जिलहिज्जा का अर्थ तीर्थ से है. इसी महीने हज यात्रा की शुरुआत होती है. इसलिए इस्लाम में जिलहिज्जा महीने की खास फजीलत मानी जाती है. हज के साथ ही इस महीने इस्लाम का महत्वपूर्ण त्योहार बकरीद (ईद-उल-अजहा) भी मनाई जाती है. बकरीद ऐसा त्योहार है जो अल्लाह के प्रति भरोसे को दर्शाता है और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए जाना जाता है.
जिलहिज्जा के महत्वपूर्ण 10 दिन
- जिल हिज्जा के पहले दस दिनों को पूरे साल के सबसे बेहतर दिनों में अच्छे दिन माना जाता है. यह रमजान के बाद रहमत और बरकत पाने का दूसरा मौका होता है.
- जिलहिज्जा के पहले 10 दिनों में मुसलमान कुरआन पढ़ने का संकल्प लेते हैं. माना जाता है कि, इन 10 दिनों में की गई अल्लाह की इबादत का कई गुणा अधिक लाभ होता है.
- पैगंबर मुहम्मद (पैगंबर) जिल हिज्जा के पहले 9 दिनों और आशूरा के दिन और हर महीने 3 दिन, महीने के पहले सोमवार और 2 गुरुवार को उपवास रखते थे. हदीस। अबू दाऊद, 2/462
- मुसलमानों के लिए धुल हिज्जा के पहले 9 दिनों तक रोज़ा रखना सुन्नत है, जिससे सवाब मिलता है और गुनाहों की माफ़ी होती है. लेकिन जो लोग पूरे 9 दिन रोजा नहीं रखते तब भी जुलहिज्जा के 9वें दिन यानी अरफ़ा के रोज़ा जरूर रखना चाहिए.
- जिलहिज्जा महीने की 9वीं तारीख को 'यौम-ए-अरफा' कहा जाता है. इस दिन का रोजा (उपवास) रखना बहुत ही पुण्य का कार्य माना जाता है. पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया है- अरफ़ाह के दिन रोज़ा रखने से दो साल के गुनाह (बीते साल के और आने वाले साल) माफ हो जाते हैं.
जिलहिज्जा के 10 दिन इन कामों से बचें मुसलमान
इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, बकरीद में जो लोग कुर्बानी में भाग लेते हैं उन्हें जिल हिज्जा के पहले दिन से लेकर कुर्बानी दिए जाने तक अपने नाखून और बाल कटवाने से परहेज करना चाहिए.
हालांकि जो लोग स्वयं कुर्बानी नहीं कर रहे, उनके लिए बाल और नाखून न काटने पर कोई विशेष नियम नहीं है. वे सामान्य दिनों की तरह इन्हें काट सकते हैं.
यह भी मान्यता है कि, कुर्बानी देने की अवधि के दौरान अपने बाल और नाखून काटना हराम माना जाता है. हालांकि इसके लिए जानकार या अपने मत के अनुसार सलाह लेना ही सबसे अच्छा है.
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