Akshaya Tritiya 2026: इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को है. भारतीय ज्योतिष में कुछ अति विशिष्ट तिथियों में अक्षय तृतीया का उल्लेख प्रमुखता से किया जाता है. ये तिथि ऐसी तिथि के रूप में मान्य है जिसका कभी क्षय या विनाश नहीं होता, इसलिए इस दिन सभी पुण्य कार्य किए जाते हैं.

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अक्षय तृतीया की तिथि भगवान विष्णु के तीन अवतारों से घनिष्ठ रूप से संबंधित है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर यानि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम, नर नारायण अवतार, हयग्रीव अवतार हुए थे.

अक्षय तृतीया पर प्लान कर रहे हैं डिलीवरी ?

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आज के दौर में सिजेरियन डिलीवरी आम बात हो गई है. ऐसे में कुछ लोग तिथि, नक्षत्र, शुभ तारीख और शुभ दिन देखकर पहले से ही डिलीवरी की डेट प्लान कर लेते हैं. ऐसे में अगर आप भी अपने डिलीवरी अक्षय तृतीया पर कराने की सोच रहे हैं तो जान लें अक्षय तृतीया पर जन्मा बच्चा कैसा होता है. 

अक्षय तृतीया पर बच्चा जन्मा बच्चा कैसा होता है ?

  • हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का बहुत महत्‍व है. इस‍ दिन को मां लक्ष्‍मी से जोड़कर देखा जाता है. कहते हैं कि इस शुभ दिन पर अगर आपके घर में बेटी का जन्‍म हो जाए तो उसे स्‍वयं मां लक्ष्‍मी का रूप ही समझना चाहिए, क्योंकि बेटियों को लक्ष्मी के रूप माना जाता है. आर्थिक उन्नति पाने और कर्ज से छुटकारे के लिए अक्षय तृतीया पर देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. इसे उत्तरायण की दिवाली भी कहा जाता है.
  • अक्षय तृतीया परशुराम जी की जन्म तिथि है, भगवान परशुराम वीरता, शक्ति और भक्ति के प्रतीक है. ऐसे में इस दिन होने वाली संतान में ये गुण आने के योग बनते हैं. साथ ही ये तिथि अक्षय तिथि जिसका कभी नाश नहीं होता ऐसे में इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे को दीर्धायु का वरदान मिलता है.
  • एक पौराणिक कथा के अनुसार, अक्षय तृतीया से ही सत्य युग यानी स्वर्ण युग की शुरुआत हुआ था. माना जाता है कि इसी दिन से वेद व्यास जी ने गणेश जी के साथ मिलकर महाभारत लिखना आरंभ किया था. ये दिन ज्ञान और बुद्धि के महत्व को दर्शाता है.
  • ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया पर जन्म लेने वाले बच्चे को जीवन भर धन, संतोष और उपलब्धि का आशीर्वाद मिलता है, क्योंकि ये धनदायक दिन है.

नक्षत्र का शुभ संयोग

अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र रहता है. रोहिणी नक्षत्र में जन्मे लोग आमतौर पर दयालु, सहानुभूतिपूर्ण, रचनात्मक, और सौंदर्यबोध वाले होते हैं. वे भौतिक सुखों का आनंद लेते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं. वेदों का जन्म भी रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. भगवान कृष्ण का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था.

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