वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में शिवजी की पूजा की जाती है।
Budh Pradosh Vrat 2026 Paran: बुध प्रदोष व्रत पारण 15 या 16 अप्रैल कब करें, 99% लोग नहीं जानते सही नियम
Budh Pradosh Vrat 2026 Paran Timing: बुध प्रदोष व्रत आज 15 अप्रैल को है. व्रत की पूर्णता के लिए सही समय और विधि से पारण करना बेहद जरूरी है, इसलिए जान लें प्रदोष व्रत का पारण कब और कैसे किया जाएगा.

Budh Pradosh Vrat 2026 Paran Timing: वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आज बुध प्रदोष व्रत है. शिव पूजन के लिए यह तिथि सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है. प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में पूजा का विधान है. आज बुधवार 15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत रखा गया है और शाम में सूर्यास्त के बाद शिवजी की पूजा की जाएगी.
किसी भी व्रत की पूर्णता के लिए यह बेहद जरूरी है कि, पारण (व्रत खोलना) सही तरीके से और सही समय पर किया जाए. पारण में यदि किसी तरह की गलती हो जाती है तो इससे व्रत खंडित भी माना जाता है. इसलिए यह जान लीजिए कि बुध प्रदोष व्रत का पारण कब किया जाएगा.
बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को
आज 15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत रखा गया है. पंचांग (Panchang) के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि देर रात 12 बजकर 12 मिनट से शुरू हो चुकी है जो 15 अप्रैल की रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. आमतौर पर व्रत-त्योहारों में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है, लेकिन प्रदोष व्रत की पूजा उस दिन होती है, जब प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) त्रयोदशी तिथि विद्यमान होती है और व्रत भी इसी दिन रखा जाता है. इसलिए आज 15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत है.
लेकिन प्रदोष व्रत के पारण को लेकर अधिकतर लोगों के मन में यह संशय रहता है कि, पारण उसी दिन करें या फिर अगली तिथि पर. अगर आपके मन में भी बुध प्रदोष व्रत के पारण को लेकर किसी तरह की कंफ्यूजन हैं तो, पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक 'डॉक्टर अनीष व्यास से जानिए प्रदोष व्रत सही पारण की विधि और समय.
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बुध प्रदोष व्रत पारण कब (Budh Pradosh Vrat 2026 Paran Kab Hoga)
प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन चतुर्दशी तिथि पर सूर्योदय के बाद करना सही माना जाता है. इसलिए बुध प्रदोष व्रत पर भी सुबह 16 अप्रैल को व्रत का पारण किया जाएगा. 16 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर सूर्योदय होगा. आप इसके बाद पारण कर सकते हैं.
बुध प्रदोष व्रत पारण विधि (Pradosh Vrat Paran Vidhi)
लेकिन कई लोग फलाहार व्रत भी रखते हैं. ऐसे लोग बुध प्रदोष व्रत की पूजा के बाद फल-प्रसाद आदि ग्रहण कर सकते हैं. लेकिन चतुर्दशी तिथि पर सुबह स्नानादि और पूजा के बाद भी विधिपूर्वक पारण करना चाहिए और इसके बाद अन्न ग्रहण करना चाहिए. पारण से पहले स्नान करें, शिवजी की पूजा करें और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें. इसके बाद ही स्वयं भोजन करें. साथ ही पारण वाले दिन भी तामसिक या मांसाहार भोजन से परहेज करें.
बुध प्रदोष व्रत महत्व
बुधवार के दिन पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर बुध प्रदोष व्रत होता है, जोकि भगवान शिव के साथ बुध ग्र से भी जुड़ा होता है. इसलिए बुध प्रदोष व्रत को मनोकामना पूर्ति के साथ ही बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता दिलाने वाला व्रत माना जाता है. संतान की कामना, शिक्षा में सफलता और बिजनेस में मुनाफा और संचार में कौशल की इच्छा रखने वालों के लिए यह व्रत उत्तम है.
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Frequently Asked Questions
बुध प्रदोष व्रत 2026 कब रखा जाएगा?
बुध प्रदोष व्रत का पारण कब किया जाएगा?
बुध प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन चतुर्दशी तिथि पर सूर्योदय के बाद, यानी 16 अप्रैल 2026 को सुबह 05 बजकर 54 मिनट के बाद किया जाएगा।
बुध प्रदोष व्रत का पारण कैसे करें?
पारण से पहले स्नान करें, शिवजी की पूजा करें और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें। इसके बाद ही अन्न ग्रहण करें। इस दिन तामसिक या मांसाहार भोजन से परहेज करें।
बुध प्रदोष व्रत का क्या महत्व है?
बुध प्रदोष व्रत मनोकामना पूर्ति, बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। संतान, शिक्षा और व्यवसाय में सफलता के लिए यह उत्तम है।
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