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बछ बारस 2026: पुत्र की लंबी उम्र के लिए 8 सितंबर को करें गौ-बछड़ा पूजन, जानें उद्यापन विधि

बछ बारस 2026, 8 सितंबर को रखा जाएगा व्रत; जानें गौ-बछड़ा पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और खान-पान के जरूरी नियम. पुत्र की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए माताएं करेंगी विशेष पूजा.

Bach Baras (Govatsa Dwadashi) 2026: सनातन धर्म में संतान के सुख, आरोग्य और दीर्घायु के लिए रखे जाने वाले व्रतों में बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का विशेष महत्व है. इस दिन माताएं बछड़े सहित गौमाता की पूजा-अर्चना करती हैं और अपने पुत्रों के सुखी जीवन की कामना करती हैं. यह पर्व मुख्य रूप से राजस्थानी संस्कृति में विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.

बछ बारस 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर-जोधपुर) के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, पंचांग गणना:

  • द्वादशी तिथि प्रारंभ: 7 सितंबर 2026, सायं 05:03 बजे से
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 8 सितंबर 2026, दोपहर 02:42 बजे तक
  • उदयातिथि नियम: द्वादशी तिथि का सूर्योदय 8 सितंबर को होने के कारण यह व्रत मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को ही रखा जाएगा.
  • जन्माष्टमी से संबंध: यह पर्व प्रतिवर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक चार दिन बाद भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है.

धार्मिक महत्व: गौमाता में विराजते हैं समस्त देवी-देवता

भगवान श्रीकृष्ण को गायों और बछड़ों से अगाध प्रेम था. मान्यता है कि बछ बारस के दिन बछड़े सहित गाय की पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण सहित गौमाता में निवास करने वाले सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

भविष्य पुराण के अनुसार:

गौमाता के पृष्ठभाग में ब्रह्म, गले में श्रीहरि विष्णु और मुख में भगवान रुद्र का वास है.

मध्य भाग में समस्त देवता, रोमकूपों में महर्षिगण, पूंछ में अनंत नाग और खुरों में समस्त पर्वत वास करते हैं.

गौमूत्र में गंगादि पवित्र नदियां, गोबर (गौमय) में मां लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चंद्र विराजते हैं.

इस दिन गौमाता को एक ग्रास खिलाने से समस्त देवी-देवताओं व पितरों तक तृप्ति पहुंच जाती है.

भोजन और खान-पान के विशेष नियम

बछ बारस के दिन रसोई में विशेष संयम बरता जाता है:

  • वर्जित चीजें: इस दिन गेहूं, चावल, गाय का दूध, दही और घी का सेवन पूरी तरह वर्जित रहता है. साथ ही चाकू से कटी हुई किसी भी सब्जी का उपयोग नहीं किया जाता.
  • क्या खाएं: इस दिन विशेष रूप से बाजरे या ज्वार का सोगरा (ठंडी रोटी), अंकुरित अनाज (चना, मोठ) की सूखी सब्जी या कढ़ी बनाई जाती है. भोजन में भैंस या बकरी के दूध का ही इस्तेमाल किया जाता है.

पूजा सामग्री और प्रामाणिक पूजा विधि

आवश्यक सामग्री: भैंस का कच्चा दूध और दही, भीगा हुआ चना, मोठ, बाजरा, घी, चीनी, रोली, मौली, धूप-दीप, रुपया (दक्षिणा), मिट्टी और गोबर.

  • मिट्टी की तलैया निर्माण: सुबह स्नान के बाद घर के आंगन या सामूहिक रूप से मिट्टी व गोबर से एक छोटी तलैया (बावड़ी) सजाएं.
  • दूध-जल अर्पण: तलैया में कच्चा दूध और पानी भरें. इसके बाद कुमकुम, मौली और धूप-दीप से इसकी पूजा करें.
  • गौ-बछड़ा पूजन: बछड़े सहित गाय की विधिवत पूजा करें. गाय को रोली का टीका लगाएं और चावल की जगह बाजरा चढ़ाएं. यदि गाय उपलब्ध न हो, तो पाटे पर मिट्टी से बछबारस और गोल बावड़ी बनाकर उसमें थोड़ा दूध-दही भरकर पूजन करें. गीली मिट्टी की गाय, बछड़ा, बाघ और बाघिन की मूर्तियां बनाकर भी पाटा पूजा जाता है.
  • कथा श्रवण: हाथ में मोठ और बाजरे के दाने लेकर बछबारस की पावन कथा सुनें. इसके बाद श्री गणेश जी की कथा अवश्य सुनें.
  • प्रसाद: माताएं अपने पुत्रों को तिलक लगाकर, तलैया फोड़ने के बाद मोई या लड्डू का प्रसाद देती हैं.

बछ बारस की पौराणिक व्रत कथा

प्राचीन काल में एक गांव में एक साहूकार अपने सात बेटों और पोतों के साथ रहता था. साहूकार ने गांव में एक बड़ा तालाब बनवाया, लेकिन बारह वर्षों तक उसमें पानी नहीं भरा. कारण जानने के लिए उसने पंडितों को बुलाया. पंडितों ने कहा कि तालाब में पानी तभी रुकेगा जब वह अपने बड़े बेटे या बड़े पोते की बलि देगा. साहूकार ने अपनी बड़ी बहू को पीहर भेज दिया और पीछे से बड़े पोते की बलि दे दी. इसके बाद मूसलाधार बारिश हुई और तालाब पूरी तरह भर गया.

इसके बाद जब बछ बारस आई, तो परिवार तालाब पूजने की तैयारी करने लगा. साहूकार ने दासी से कहा कि "गेहुला को पका लेना." साहूकार का तात्पर्य गेहूं के धान से था, लेकिन दासी समझ नहीं पाई और उसने 'गेहुला' नाम के गाय के बछड़े को ही पका दिया.

पीहर से बड़ी बहू भी तालाब पूजने आ चुकी थी. पूजा संपन्न होने के बाद जब उसने अपने बड़े बेटे को याद किया, तभी तालाब की मिट्टी में लिपटा हुआ उसका बड़ा बेटा जीवित बाहर निकल आया और बोला, "मां, मुझे भी प्यार करो." सास ने भावुक होकर बहू को बलि की पूरी सच्चाई बताई और कहा कि बछबारस माता ने हमारे कुल की लाज रख ली.

लेकिन घर लौटने पर जब साहूकार ने बछड़े के बारे में पूछा, तो दासी ने बताया कि उसने गेहुला को पका दिया है. साहूकार ने व्यथित होकर पके हुए बछड़े को मिट्टी में दबा दिया. शाम को जब चरकर गाय लौटी, तो वह अपने बछड़े को ढूंढते हुए मिट्टी खोदने लगी. कुछ ही पलों में बछड़ा मिट्टी से जीवित बाहर निकल आया और गाय का दूध पीने लगा. इस चमत्कार को देखकर साहूकार ने पूरे गांव में घोषणा करवाई कि हर पुत्रवती मां को बछबारस का व्रत रखना चाहिए.

बायना निकालने की विधि

  • एक कटोरी में भीगा मोठ और बाजरा रखकर उस पर दक्षिणा (रुपया) रखें.
  • कटोरी पर रोली और बाजरे के दानों से छींटा दें.
  • दोनों हाथ जोड़कर कटोरी को अपनी साड़ी के पल्ले से ढकें और चार बार उसके ऊपर हाथ फेरें.
  • स्वयं को तिलक लगाएं और यह बायना अपनी सास के चरण स्पर्श करके उन्हें सादर भेंट करें.

बछ बारस उद्यापन नियम

जिस वर्ष परिवार में पुत्र का जन्म हो या जिस वर्ष पुत्र का विवाह संपन्न हो, उस वर्ष बछ बारस का उद्यापन किया जाता है:

विधि: सामान्य पूजा हर वर्ष की भांति ही संपन्न करें.

सामग्री व चढ़ावा: थाली में सवा सेर भीगे मोठ-बाजरे की 13 कुड्डियां (ढेरियां) बनाएं.

मोई व फल: बाजरे के आटे में घी व चीनी मिलाकर गूंथे हुए आटे (मोई) की दो-दो मुट्ठी और खीरे के दो-दो टुकड़े प्रत्येक कुड्डी पर रखें.

सुहाग पिटारी: इसके ऊपर तियल (दो साड़ियां और ब्लाउज पीस) और रुपया रखकर हाथ फेरें और सास के पैर छूकर उन्हें आशीर्वाद सहित सौंपें.

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पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक 'डॉक्टर अनीष व्यास' देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य हैं. पाल बालाजी के भक्त के रूप में इन्हें जाना जाता है. वैदिक ज्योतिष पर इनका कार्य सराहनीय है. इनकी भविष्यवाणियां काफी सटीक होती हैं. इनके लेख विभिन्न मंचों पर प्रकाशित होते रहते हैं, इन्हें भविष्यफल और दैनिक राशिफल बताने में महारत प्राप्त है. इन्हें हस्तरेखा और वास्तु विशेषज्ञ के रूप में भी जाना जाता है. देश के अलावा विदेशों में भी उनके काफी संख्या में फॉलोअर्स है. सोशल मीडिया पर भी यह एक्टिव रहते हैं.  इनकी अब तक 497 से अधिक भविष्यवाणियां सच साबित हो चुकी हैं.डॉक्टर अनीष व्यास को बचपन से ही कर्मकांड और ज्योतिष की शिक्षा-दीक्षा विरासत में प्राप्त हुई. एम.ए. पत्रकारिता में गोल्ड मेडल प्राप्त कर पीएचडी की उपाधि हासिल कर चुके हैं. डॉ. अनीष व्यास के ज्योतिष विषय पर आधारित लेख देश के प्रमुख समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं. इसके साथ ही विभिन्न न्यूज चैनल में लाईव शो में प्रतिभाग करते रहते हैं.
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