अक्षय तृतीया 2026 को आयुष्मान योग, रवि योग और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। त्रिपुष्कर योग में किए गए कार्यों का फल तीन गुना मिलता है।
Akshaya Tritiya 19 April 2026: आयुष्मान और त्रिपुष्कर योग का महा-संयोग, जानें कुबेर की कृपा पाने का सटीक मुहूर्त और गुप्त उपाय
Akshaya Tritiya: ज्योतिषी पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया पर त्रिपुष्कर योग का संयोग है.सोना न सही, जौ व सेंधा नमक घर लाएं. शुभ मुहूर्त में दान-पूजन से अक्षय वैभव मिलेगा.

- अक्षय तृतीया पर आयुष्मान, रवि और त्रिपुष्कर योग का संगम.
- इस दिन सतयुग, त्रेतायुग का आरंभ, गंगा अवतरण हुआ.
- सोने के अलावा जौ, नमक, सरसों, घड़ा, कौड़ी शुभ.
- क्रोध, द्वेष से बचें, दान करें, पितरों को करें तृप्त.
Akshaya Tritiya 2026: सनातन धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष महत्व है, जिसे हम 'अक्षय तृतीया' या 'आखा तीज' के नाम से जानते हैं.
विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार, यह तिथि 'युगादि तिथि' है, जिससे काल के नए चक्र का जन्म हुआ था. इस वर्ष 19 अप्रैल को बनने वाले विशिष्ट योग इस दिन को निवेश और पूजन के लिए अत्यंत शुभ बना रहे हैं.
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शुभ मुहूर्त और ग्रहों का महासंयोग
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर आयुष्मान योग, रवि योग और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ मिलन हो रहा है. त्रिपुष्कर योग में किए गए कार्यों का फल तीन गुना प्राप्त होता है.
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पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय: 19 अप्रैल को सुबह 10:50 से दोपहर 12:10 तक.
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महत्व: यह एक 'अबूझ मुहूर्त' है, जिसमें किसी भी मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती. इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में होते हैं.
अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
इसे 'युगादि तिथि' भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था. इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण घटनाएं इस दिन से जुड़ी हैं:
- गंगा अवतरण: माँ गंगा का धरती पर आगमन.
- परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का प्राकट्य.
- अक्षय पात्र: पांडवों को सूर्यदेव से कभी न खत्म होने वाला अक्षय पात्र प्राप्त हुआ.
- सुदामा-कृष्ण मिलन: सुदामा की दो मुट्ठी चावल की भेंट के बदले कृष्ण ने उन्हें असीम वैभव दिया.
सोना नहीं खरीद सकते? तो लाएं ये 5 'गुप्त' चीजें
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन यदि आप सोना नहीं खरीद पा रहे हैं, तो ये वस्तुएं भी उतना ही लाभ प्रदान करती हैं:
- जौ: शास्त्रों में जौ को सोने के समान शुद्ध माना गया है. इसे खरीदकर पूजन के बाद लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें.
- सेंधा नमक और पीली सरसों: सेंधा नमक घर के वास्तु दोष मिटाता है और पीली सरसों नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सुख-समृद्धि लाती है.
- मिट्टी का घड़ा: जल से भरा मिट्टी का पात्र खरीदना भूमि तत्व के आशीर्वाद और शीतलता का प्रतीक है.
- कौड़ी और गोमती चक्र: इन्हें मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुएं माना जाता है. पूजन के बाद इन्हें तिजोरी में रखने से धन की स्थिरता बनी रहती है.
- एकांक्षी नारियल: कार्यक्षेत्र में उन्नति के लिए इसे कार्यस्थल पर स्थापित करना चमत्कारिक होता है.
धन और ऐश्वर्य के लिए विशेष मंत्र
कुबेर जी को इसी दिन 'धनपति' का वरदान मिला था. धन वृद्धि के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें: “ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यादि पतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा..”
मां लक्ष्मी की कृपा के लिए इस बीज मंत्र का जाप करें: “ऊँ श्रीं हृं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः“
पितृ शांति और दान का महत्व
अक्षय तृतीया पर किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता. पितरों की तृप्ति के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे पितृसूक्त का पाठ करें और सफेद मिठाई का भोग लगाएं. शीतल जल से भरे कलश का दान करने से जीवन के कष्टों का निवारण होता है.
क्या न करें? (सावधानियां)
इस दिन जितना महत्व शुभ कार्यों का है, उतना ही वर्जनाओं का भी है.
- लोहा, प्लास्टिक या धारदार वस्तुएं न खरीदें.
- काले कपड़े पहनने या खरीदने से बचें.
- मन में क्रोध, द्वेष या किसी का अपमान न करें, क्योंकि इस दिन किया गया नकारात्मक कर्म भी 'अक्षय' (कभी न खत्म होने वाला) हो जाता है.
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Frequently Asked Questions
अक्षय तृतीया 2026 को कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
अक्षय तृतीया को 'युगादि तिथि' क्यों कहा जाता है?
इसे 'युगादि तिथि' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। साथ ही, गंगा अवतरण और परशुराम जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है।
अगर सोना नहीं खरीद सकते तो अक्षय तृतीया पर क्या खरीदना शुभ होगा?
यदि सोना नहीं खरीद पा रहे हैं, तो जौ, सेंधा नमक, पीली सरसों, मिट्टी का घड़ा, कौड़ी, गोमती चक्र या एकांक्षी नारियल खरीदना भी लाभकारी हो सकता है।
अक्षय तृतीया पर दान का क्या महत्व है?
इस दिन किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता। पितरों की तृप्ति के लिए दान करना और शीतल जल से भरे कलश का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर किन चीजों को खरीदने से बचना चाहिए?
इस दिन लोहा, प्लास्टिक या धारदार वस्तुएं नहीं खरीदनी चाहिए। काले कपड़े पहनने या खरीदने से भी बचना चाहिए।





















