Muharram 2026: मोहर्रम के पवित्र महीने की पांचवीं तारीख पर अजमेर के दरगाह क्षेत्र में रविवार को अकीदत, श्रद्धा और धार्मिक उत्साह के साथ अलमों का भव्य जुलूस निकाला गया. इस दौरान पूरा इलाका ढोल, ताशे और झांझ की गूंज से सराबोर रहा. हजारों की संख्या में शामिल अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए हजरत अब्बास अलमदार की वफादारी, बहादुरी और कुर्बानी को याद किया.

Continues below advertisement

मोहर्रम के इस विशेष अवसर पर निकले जुलूस में मुख्य अलम के साथ 100 से अधिक छोटे-बड़े अलम शामिल रहे. विभिन्न मोहल्लों और परिवारों से लोग अपने-अपने अलम लेकर पहुंचे और धार्मिक परंपरा का हिस्सा बने. जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था.

Continues below advertisement

इमाम बारगाह से पारंपरिक तरीके से हुआ जुलूस का आगाज:

असर की नमाज के बाद छतरी गेट स्थित इमाम बारगाह से अलमों का जुलूस रवाना हुआ. पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हुए इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. जुलूस में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र वे अलम रहे, जिन्हें श्रद्धालु अपने हाथों और कंधों पर उठाकर चल रहे थे.

मोहर्रम की पांचवीं तारीख का हजरत अब्बास अलमदार से विशेष संबंध माना जाता है. इसी कारण कई परिवार वर्षों पुरानी परंपरा निभाते हुए अपने घरों से अलम लेकर जुलूस में शामिल हुए. पूरे रास्ते में मर्सियाख्वानी और सलाम पेश करने का सिलसिला जारी रहा, जिससे जिससे हर तरफ अकीदत और श्रद्धा का माहौल नजर आया.

आशिकान-ए-हुसैन ने जताई गहरी अकीदत:

जुलूस में हरे रंग के लिबास पहने आशिकान-ए-हुसैन और आशिकान-ए-ख्वाजा विशेष रूप से नजर आए. श्रद्धालु कर्बला के शहीदों की याद में नौहा और सलाम पढ़ते हुए आगे बढ़ रहे थे. कई लोगों ने अपनी बांहों पर इमाम जामिन बांध रखा था, जबकि कुछ श्रद्धालु पैरों में बेड़ियां पहनकर अपनी गहरी आस्था और समर्पण का प्रदर्शन कर रहे थे.

इस धार्मिक आयोजन में बच्चों की बड़ी संख्या में भागीदारी भी देखने को मिली. परिवारों के साथ शामिल बच्चे अलम लेकर चलते नजर आए, जिससे धार्मिक परंपराओं के प्रति नई पीढ़ी की भागीदारी भी स्पष्ट दिखाई दी.

पंजेतनी पाक का पंजा बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र:

जुलूस के दौरान शामिल 'पंजेतनी पाक का पंजा' विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. रास्ते भर श्रद्धालु अदब और सम्मान के साथ इसकी जियारत करते दिखाई दिए. कई लोगों ने यहां अपनी मन्नतें मांगीं और दुआएं कीं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंजेतनी पाक का पंजा अहले बैत के प्रति प्रेम, सम्मान और आस्था का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से मोहर्रम के दौरान इसकी विशेष अहमियत रहती है.

महिलाओं ने झरोखों और छतों से की जियारत:

जुलूस मार्ग पर स्थित मकानों की छतों और झरोखों पर बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु मौजूद रहीं. महिलाओं ने पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ अलमों की जियारत की और दुआएं मांगीं.

लंगर खाना गली और सोलह सीढ़ी होते हुए जुलूस निर्धारित मार्ग से गुजरकर रोशनी के समय से पहले फिर से इमाम बारगाह पहुंचा. यहां अलमों को नसब किया गया और शोहदा-ए-कर्बला की शान में सलाम पेश किया गया. कार्यक्रम के समापन पर अंजुमन सैयदजादगान की ओर से तबर्रुक का वितरण किया गया.

दरगाह में जारी है मिनी उर्स का माहौल:

इस बीच अजमेर दरगाह में मिनी उर्स का धार्मिक माहौल भी बना हुआ है. रविवार को बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह शरीफ पहुंचे. बाबा फरीद के चिल्ले पर जियारत का सिलसिला लगातार जारी रहा, जिससे देर रात तक दरगाह क्षेत्र में रौनक देखने को मिली.

बाबा फरीद के उर्स के अवसर पर खादिम मोहल्ले में विशेष नियाज का आयोजन किया गया, जहां खिचड़ा तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया गया.

अंजुमन सैयदजादगान के नायब सदर सैयद वदर मुस्तफा किबरिया के अनुसार मोहर्रम की 6वीं तारीख को गरीब नवाज की महिना छठी मनाई जाएगी. इस अवसर पर सोमवार सुबह 9 बजे दरगाह के अहाता-ए-नूर में कुरान शरीफ की तिलावत से कार्यक्रम की शुरुआत होगी. इसके बाद शिजराख्वानी, सलातो-सलाम और देश-दुनिया में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की जाएगी.

यह भी पढ़े-  Astrology: लियोनेल मेसी को क्यों कहा जाता है फुटबॉल का महारथी? क्या उनकी राशि और मूलांक हैं वजह?

यह भी पढ़े- Muharram 2026: मुहर्रम का 10वां दिन 'आशूरा' कब ? क्यों मुस्लिमों के लिए खास है ये दिन

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.