Famous Ganesha Temples in South India: हर साल की तरह इस साल भी गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. मगर देश के दक्षिण हिसों में कुछ गणेश मंदिर ऐसे हैं जो इसे और खास बनाते हैं. इस समय दक्षिण भारत के मंदिरों में पत्थर और सोने की भव्य मूर्तियां, स्थापत्य कला और सजावट देखने लायक होती हैं.

भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इन मंदिरों में दूर-दूर से पूजा, भजन-कीर्तन और आरती में हिस्सा लेने आते हैं. भक्त भगवान गणेश की पूजा करके सुख-समृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना करते हैं. दक्षिण भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक गणेश मंदिर मौजूद हैं, जिनकी पहचान और परंपराएँ उन्हें अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग बनाती हैं. आइए जानते हैं तीन प्रमुख मंदिरों के बारे में-

कनिपकम विनायक मंदिर-चित्तूर, आंध्र प्रदेशकनिपकम विनायक मंदिर अपने आप में ही खास है. इस मंदिर में बनी गणेश प्रतिमा को स्वयूंभू माना जाता है, मतलब यह प्रतिमा अपने आप बनी है. यहां एक अनोखा कुआं भी है, मान्यता है कि इसका पानी पापों को धो देता है. इस जगह झूठ बोलना मना है और ऐसा करने पर शपथ नहीं ली जा सकती है.

  • विशेषता: काले पत्थर से बनी स्वयंभू गणेश प्रतिमा.
  • दर्शन समय: सुबह 6:00 बजे-दोपहर 1:00 बजे, शाम 4:00 बजे-रात 8:00 बजे.
  • कैसे पहुंचे: चित्तूर शहर और रेलवे स्टेशन, दोनों से लगभग 12 किमी दूरी पर है.

श्री मदनंतेश्वर सिद्धिविनायक मंदिर-कासरगोड, केरलकेरल के कासरगोड का यह मंदिर अपने निर्माण और योजनाओं के लिए जाना जाता है. मान्यता के मुताबिक कहा जाता है कि यहाँ भगवान गणेश दीवार से प्रकट हुए थे. इस मंदिर के तीन बड़े-बड़े गुंबद इसे अलग पहचान दिलाते हैं.

  • दर्शन समय: सुबह 5:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे, शाम 5:30 बजे से रात 8:15 बजे
  • कैसे पहुंचे: कासरगोड शहर से मात्र 7 किमी दूरी, जहाँ तक किसी भी वाहन से आसानी से जाया जा सकता है.

अरुल्मिगु मुंथी विनयगर मंदिर-कोयंबटूर, तमिलनाडुकोयंबटूर का यह मंदिर विशालता और भव्यता का अद्भुत उदाहरण है. यहां स्थापित गणेश प्रतिमा लगभग 19 फीट ऊंची और करीब 190 टन वजन की है. काले पत्थर से बनी यह मूर्ति अपनी गरिमा और सुंदरता से सभी को मंत्रमुग्ध कर देती है.

विशेष बात यह है कि प्रतिदिन मूर्ति का श्रृंगार अलग-अलग ढंग से किया जाता है, जिससे यह और भी खास बन जाता है.

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