कौन-कौन से केमिकल मिलाकर बनता है परफ्यूम, इसमें एथेनॉल का क्या काम?
एसेंशियल ऑयल और सिंथेटिक केमिकल से मिलकर बनता है आपका पसंदीदा परफ्यूम. जानिए इसमें खुशबू को हवा में उड़ाने और लंबे समय तक टिकाए रखने में एथेनॉल क्यों निभाता है सबसे अहम रोल.

भीड़ में अलग पहचान बनानी हो या किसी खास मौके पर जाना हो, परफ्यूम हमारी लाइफस्टाइल का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है. एक अच्छी खुशबू न सिर्फ हमारे मूड को तरोताजा करती है, बल्कि हमारे आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शीशे की छोटी सी बोतल में बंद यह मनमोहक खुशबू फैक्ट्री में कैसे तैयार होती है? इसमें कौन-कौन से केमिकल मिलाए जाते हैं?
परफ्यूम में क्या-क्या मिलाया जाता है
किसी भी परफ्यूम को बनाने में तीन बुनियादी चीजें इस्तेमाल होती हैं, सुगंधित तेल यानी एरोमैटिक कंपाउंड्स, फिक्सेटिव और एथेनॉल जैसा सॉल्वेंट. सुगंधित तेल परफ्यूम को उसकी खास खुशबू देते हैं, फिक्सेटिव उस खुशबू को लंबे समय तक टिकाए रखने में मदद करते हैं, और एथेनॉल इन सबको आपस में घोलकर एक तरल रूप देता है, जिसे त्वचा पर आसानी से लगाया जा सके.
सुगंधित तेल यानी एरोमैटिक कंपाउंड्स की भूमिका
एरोमैटिक कंपाउंड्स दो तरह के होते हैं, प्राकृतिक और सिंथेटिक. प्राकृतिक तेल फूलों, फलों, मसालों, लकड़ी और पत्तियों से निकाले जाते हैं, जैसे गुलाब, चंदन, या नींबू का तेल. वहीं सिंथेटिक कंपाउंड्स लैब में केमिकल रिएक्शन के जरिए तैयार किए जाते हैं, जो कई बार प्राकृतिक खुशबू जैसे ही महकते हैं, लेकिन इनकी लागत कम होती है और इन्हें बड़े पैमाने पर बनाना आसान रहता है. यही तेल परफ्यूम की असली पहचान तय करते हैं.
फिक्सेटिव खुशबू को टिकाए रखने का काम करते हैं
सुगंधित तेल बेहद हल्के और उड़नशील होते हैं, यानी हवा में जल्दी उड़ जाते हैं. इसी वजह से परफ्यूम में फिक्सेटिव नाम के केमिकल मिलाए जाते हैं, जो खुशबू को धीरे-धीरे और लंबे समय तक छोड़ने में मदद करते हैं. पहले के समय में कस्तूरी जैसे प्राकृतिक फिक्सेटिव इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब ज्यादातर परफ्यूम में सिंथेटिक फिक्सेटिव का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि खुशबू दिनभर टिकी रहे.
यह भी पढ़ें: बारिश के बाद घर में सीलन की बदबू, जानें इसे दूर करने का तरीका
एथेनॉल का परफ्यूम में क्या काम है
एथेनॉल किसी भी परफ्यूम का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, आमतौर पर 70 से 90 प्रतिशत तक. इसका सबसे पहला काम है, गाढ़े सुगंधित तेलों को घोलकर एक पतला और लगाने लायक तरल बनाना. इसके अलावा एथेनॉल तेजी से हवा में उड़ता है, जिससे त्वचा पर लगाने के बाद खुशबू तुरंत फैलनी शुरू हो जाती है. यह एक तरह के प्रिजर्वेटिव का भी काम करता है, जो तेलों को खराब होने या बदबू आने से बचाता है. साथ ही यह परफ्यूम को त्वचा पर लगाने के लिए सुरक्षित बनाता है, क्योंकि सीधे गाढ़े तेल लगाने से जलन या एलर्जी हो सकती है.
परफ्यूम की अलग-अलग कैटेगरी में फर्क
बाजार में मिलने वाले परफ्यूम, ओ डी परफ्यूम और ओ डी टॉयलेट के बीच फर्क भी इसी एथेनॉल और सुगंधित तेल के अनुपात से तय होता है. जिस प्रोडक्ट में सुगंधित तेल की मात्रा ज्यादा और एथेनॉल की मात्रा कम होती है, वह ज्यादा गाढ़ा, महंगा और देर तक टिकने वाला होता है. वहीं जिसमें तेल कम और एथेनॉल ज्यादा होता है, वह हल्का और सस्ता होता है, लेकिन उसकी खुशबू भी जल्दी उड़ जाती है.
यह भी पढ़ें: आयोडीन की कमी से हैं परेशान? डाइट में शामिल करें ये 4 चीजें





















