नई दिल्ली: हाल ही में एक खबर खूब चर्चा में रही कि नवी मुंबई के खारघर के एक प्ले स्कूल में दस महीने की छोटी बच्ची को बुरी तरह से पीटने की वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है. पीड़ित बच्ची अस्पताल में भर्ती है. उसे मारने का आरोप प्ले स्कूल में काम करने वाली बाई पर है.

ना हो बेपरवाह ये सुनकर बेशक आप हैरान होंगे कि कोई इतनी छोटी बच्ची को कैसे मार सकता है?  लेकिन ये सच है. आजकल के नौकरीपेशा मां-बाप के पास बच्चों को डे केयर या क्रेच में डालने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होता. लेकिन क्या आप जानते हैं बच्चों को डेकेयर में डालने के बाद आपको बेपरवाह नहीं होना चाहिए.

जी हां, आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे जानें क्रेच में आपके बच्चों के साथ सही सलूक किया जा रहा है या नहीं. इस बाबत एबीपीन्यूज ने गंगाराम हॉस्पिटल की चाइल्ड केयर एक्सपर्ट डॉ. आरती आनंद से बात की.

क्रेच की जांच-पड़ताल

  • डॉ. आरती का कहना है कि सबसे पहले तो आप जिस भी डे केयर में बच्चों को रखने जा रहे हैं वहां की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल कर लें. उस क्रेच की क्रैडिबिलिटी है या नहीं. उसके रिव्यूज कैसे हैं. इस बारे में जान लें.
  • दूसरा, ये भी ध्यान रखें कि उस क्रेच में कैमरे है या नहीं?
  • वहां का एन्वॉयन्मेंट कैसा है?
  • मेल और फीमेल स्टाफ कितना है. इन छोटी-छोटी चीजों की जांच-पड़ताल करें.

रोजाना करें ये काम

  • रोजाना बच्चा जब घर आएं तो चैक करें उसके बदन पर कोई निशान तो नहीं है या फिर शरीर में कोई सूजन तो नहीं है.
  • बच्चे के बदलते बिहेवियर को ध्यान रखें. अगर आपका बच्चा बहुत एक्टिव है और अचानक अब गुमसुम रहने लगा है तो मतलब कुछ गड़बड़ है.
  • बच्चे से बातचीत करें और जानने की कोशिश करें कि क्रेच में या स्कूल में उसे कोई तकलीफ तो नहीं है.
  • बच्चे से रोजाना बात करें और उसने दिनभर क्रेच में क्या किया ये जानें.

बच्चे को बिहेवियर को समझें- अगर आपका बच्चा दो साल या इससे छोटा है और आपके बच्चे का बिहेवियर अचानक बदल रहा है या फिर बच्चा मां-बाप से बिल्कुल अलग नहीं होना चाह रहा. या फिर क्रेच में जाते ही रोने लगे तो समझ लें कोई गड़बड़ है.

बच्चे के इशारों को समझें- कई बार बच्चे‍ इशारों से अपनी बातें कहते हैं. आप इन संकेतों को पहचानें. यदि बच्चा क्रेच के नाम से डर जाता है या फिर डे केयर के किसी व्यक्ति को देखकर एकदम छुपने लगता है या फिर मां-बाप के पास आते ही खूब रोता है, या फिर क्रेच जाने के नाम से खूब ट्रैन्ट्रम्स करता है तो भी समझ लें आपका बच्चा सुरक्षित नहीं है.

मोबाइल ऐप डालें- आजकल टैकनोलॉजी खूब हाईफाई हो गई है तो आप अपने एंड्रॉयड मोबाइल में ऐसी ऐप डाउनलोड करें जिससे क्रेच के कैमरे के जरिए आप बच्चे पर नजर रख पाएं.

बच्चे की बातें ना करें इग्नोर- अगर आपका बच्चा चार-पांच साल का है तो उसकी बात सुनें. उसे सपोर्ट करें. बच्चे की बातों को इग्नोर ना करें. बच्चे को कॉन्फिडेंस में लेकर बात करें. अगर बच्चा बार-बार कहता है कि दीदी मारती हैं या फिर कोई क्रेच में तंग करता है, डराता है या बच्चे को कहीं दर्द है तो बच्चों की इन बातों को बिल्कुल इग्नोर ना करें.

बच्चे को कॉन्फिडेंस में लें- आप भी बच्चे से बीच-बीच में बात करते रहें. कि कैसा माहौल है क्रेच का? क्या डे डेयर पसंद आ रहा है या नहीं? बच्चे को महसूस करवाएं कि आप उसके साथ हैं और कोई उसको कुछ कहेगा तो आप उसे डाटेंगे. इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और बच्चा मन की बातें कहेगा. बच्चे को बताएं कि हम आपके साथ हैं. जो भी आपको तंग करता है तो हम आपके साथ हैं.

क्रेच में जाने से पहले- क्रेच में जाने से पहले बच्चे को समझाएं कि अगर आपको कोई तंग कर रहा है तो आप चिल्लाओं, किसी की हेल्प  मांगों. चुप मत रहो. अपने प्राइवेट पार्ट को किसी को टच ना करने दें.