How To Thicken Watery Dal: दाल भारतीय घरों के रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है. चावल हो या रोटी, दाल के साथ खाने का स्वाद तभी अच्छा लगता है जब उसकी कंसिस्टेंसी सही हो. लेकिन कई बार दाल बनाते समय पानी थोड़ा ज्यादा पड़ जाता है और तैयार होने के बाद दाल जरूरत से ज्यादा पतली हो जाती है. ऐसे में स्वाद तो ठीक रहता है, लेकिन दाल की बनावट मन मुताबिक नहीं लगती.
कई बार पानी की मात्रा का अंदाजा गलत हो जाता है, तो कभी दाल को पकाने के समय में हुई छोटी सी गलती इसकी कंसिस्टेंसी बिगाड़ देती है. हालांकि, पतली दाल को ठीक करने के लिए आपको दोबारा पूरी दाल बनाने या बहुत सारी चीजें मिलाने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान तरीकों से इसकी कंसिस्टेंसी वापस सही की जा सकती है.
दाल पतली क्यों हो जाती है?
दाल के ज्यादा पतले होने की सबसे आम वजह इसमें जरूरत से ज्यादा पानी डाल देना है. दाल को प्रेशर कुकर में पकाते समय पानी की मात्रा का सही अंदाजा लगाना कई बार मुश्किल हो जाता है. पकने के दौरान दाल से स्टार्च निकलता है, जो उसकी ग्रेवी को गाढ़ा बनाने में मदद करता है. लेकिन अगर पानी बहुत ज्यादा हो, तो दाल का यह प्राकृतिक स्टार्च भी उसे मनचाही कंसिस्टेंसी नहीं दे पाता.
दाल के ठीक से न गलने की वजह से भी यह पतली रह सकती है. जब दाल पूरी तरह नरम नहीं होती और अच्छी तरह टूटती नहीं है, तो उसका स्टार्च पानी में सही तरह से नहीं मिल पाता. इसके अलावा दाल को पकने के बाद कुछ देर धीमी आंच पर रखने या उसे अच्छी तरह मैश करने से बचना भी इसकी कंसिस्टेंसी को पतला छोड़ सकता है. दाल की किस्म का भी इसमें थोड़ा फर्क पड़ता है. मूंग दाल आमतौर पर हल्की कंसिस्टेंसी वाली होती है, जबकि अरहर या मसूर दाल अच्छी तरह पकने पर ज्यादा गाढ़ी बेस तैयार कर सकती हैं.
30 सेकंड का आसान तरीका करेगा काम
अगर दाल बनकर तैयार हो चुकी है और उसमें पानी ज्यादा हो गया है, तो सबसे आसान तरीका है कि उसे दोबारा लंबे समय तक पकाने के बजाय पहले थोड़ा मैश करें. इसके लिए दाल के बर्तन में ही कलछी या चम्मच के पिछले हिस्से से दाल का एक हिस्सा अच्छी तरह दबाएं. इससे दाल के अंदर मौजूद प्राकृतिक स्टार्च बाहर निकलकर पानी में मिल जाता है और कंसिस्टेंसी धीरे-धीरे गाढ़ी होने लगती है.
इसके बाद दाल को करीब 30 सेकंड तक मध्यम आंच पर उबालें. इस दौरान उसे हल्के हाथ से चलाते रहें. इससे पानी और दाल अच्छी तरह मिल जाएंगे और दाल की बनावट पहले से ज्यादा गाढ़ी हो जाएगी. यह तरीका खासतौर पर तब काम आता है जब दाल पहले से पक चुकी हो और उसमें सिर्फ पानी ज्यादा रह गया हो. इसमें अलग से कोई सामग्री डालने की जरूरत नहीं पड़ती.
दाल को थोड़ा और पकाना भी है असरदार
अगर दाल बहुत ज्यादा पतली है, तो उसे कुछ समय तक बिना ढके मध्यम या धीमी आंच पर पकाया जा सकता है. इससे अतिरिक्त पानी भाप बनकर निकल जाएगा और दाल की कंसिस्टेंसी गाढ़ी होने लगेगी. इस दौरान दाल को बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह बर्तन के नीचे चिपके नहीं. खासकर ज्यादा देर तक पकाते समय आंच बहुत तेज रखने से बचें. धीमी या मध्यम आंच पर पकाने से दाल धीरे-धीरे अपनी मनचाही कंसिस्टेंसी में आ सकती है. हालांकि, अगर दाल पहले से ही अच्छी तरह गल चुकी है, तो बहुत ज्यादा देर तक पकाने की जरूरत नहीं है. कुछ मिनट का अतिरिक्त सिमर भी कई बार पर्याप्त होता है.
दाल को अच्छी तरह मैश करना न भूलें
दाल को पकाने के बाद अगर उसके दाने पूरी तरह अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं, तो उसे हल्के हाथ से मैश करने से भी कंसिस्टेंसी बेहतर हो सकती है. दाल के कुछ हिस्से को अच्छी तरह दबाने पर उसका स्टार्च ग्रेवी में मिल जाता है और पानी अलग-अलग दिखाई देने के बजाय दाल के साथ अच्छी तरह घुल जाता है. यही वजह है कि सिर्फ पानी कम करने के बजाय दाल को थोड़ा मैश करके फिर कुछ देर पकाना ज्यादा बेहतर तरीका हो सकता है.
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अगली बार पानी की मात्रा का रखें ध्यान
दाल को गाढ़ा या पतला बनाने में पानी की मात्रा सबसे अहम भूमिका निभाती है. इसलिए अगली बार दाल बनाते समय पानी एक साथ ज्यादा डालने के बजाय जरूरत के हिसाब से डालें. दाल की किस्म और पकाने के तरीके के अनुसार पानी की जरूरत अलग हो सकती है. अगर प्रेशर कुकर में दाल बना रहे हैं, तो यह भी ध्यान रखें कि पकने के बाद दाल की कंसिस्टेंसी कुछ अलग हो सकती है. जरूरत पड़ने पर बाद में थोड़ा पानी मिलाना आसान है, लेकिन बहुत ज्यादा पानी पड़ जाने के बाद उसे गाढ़ा करने में अतिरिक्त समय लग सकता है.
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