Desi Freezer: बारिश का मौसम आते ही गांव हो या शहर, हर घर की एक बड़ी परेशानी है बिजली का चले जाना. ऐसे में सबसे बड़ी चिंता फ्रीज में रखी फल और सब्जियों की रहती है. लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. बता दें कि आप बिना बिजली के सिर्फ बांस, बोरी और पानी से ही एक देसी फ्रीजर बना सकते हैं, जो सब्जियों को हफ्तों तक ताजा रखेगा. सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह तरीका सदियों पुराना है और आज भी वैज्ञानिक इसे कारगर मानते हैं. आइए जानते हैं यह देसी जुगाड़ काम कैसे करता है और इसे कैसे बनाया जाता है.
इवेपोरेटिव कूलिंग तकनीक से कैसे मिलती है प्राकृतिक ठंडक
इस देसी फ्रीजर के पीछे का विज्ञान बहुत सीधा है, जिसे इवेपोरेटिव कूलिंग कहते हैं. जब पानी हवा में भाप बनकर उड़ता है, तो वह आसपास की गर्मी को अपने साथ खींच लेता है, जिससे तापमान अपने आप कम हो जाता है. यही वजह है कि गीले कपड़े या मटके का पानी ठंडा रहता है. इसी तरह बांस की टोकरी को बोरी से ढककर एक ठंडा बक्सा बनाया जाता है. इसमें बांस का ढांचा तैयार करके उसके चारों तरफ गीली बोरी लपेट दी जाती है, और ऊपर से भी पानी डालकर उसे लगातार गीला रखा जाता है. जैसे ही बोरी का पानी भाप बनकर उड़ता है, अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले काफी कम हो जाता है और नमी भी बढ़ जाती है, जो सब्जियों को ताजा रखने में मदद करती है.
एक रिसर्च में इस बांस और बोरी वाले कूलर की जांच की गई, जिसमें वैज्ञानिकों ने इसमें टमाटर रखकर टेस्ट किया. जिस पर सामने आया कि सामान्य कमरे के तापमान पर रखे टमाटर सिर्फ पांच दिन में खराब हो गए, जबकि बांस-बोरी कूलर में रखे टमाटर पूरे उन्नीस दिन तक ताजा बने रहे. यह कूलर करीब 82 प्रतिशत तक ठंडक देने में सक्षम पाया गया.
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घर पर कैसे बनाए यह देसी फ्रीजर?
इस जानकारी के बाद अक्सर कई लोगों के दिमाग में यह सवाल आता है कि आखिर इसको बनाने का सही तरीका क्या है. ऐसे में बता दें कि इस देसी फ्रीजर को बनाना बहुत आसान और सस्ता है. इसके लिए बस आपको बांस की डंडियां, टाट या बोरी का कपड़ा, थोड़ी रस्सी और पानी की जरूरत होती है. सबसे पहले बांस से एक टोकरी या बक्से जैसा ढांचा तैयार करें, फिर उसके चारों तरफ बोरी को कसकर लपेट दें. ऊपर एक बर्तन में पानी रखें ताकि वह धीरे-धीरे बोरी में गिरता रहे, या दिन में दो-तीन बार बोरी पर पानी छिड़कते रहें. ध्यान रखें इसे हमेशा छांव में और हवादार जगह पर रखें, ताकि हवा आसानी से अंदर-बाहर हो सके और बोरी कभी सूखने न पाए, वरना ठंडक का असर कम हो जाएगा.
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