आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहां लोग बीमारियों के 'त्वरित समाधान' ढूंढ रहे हैं, वहीं योग गुरु बाबा रामदेव ने एक बार फिर पारंपरिक योग और अनुशासन की ओर लौटने का आह्वान किया है. अपने दैनिक फेसबुक लाइव सत्र के दौरान दर्शकों को संबोधित करते हुए, रामदेव ने जोर देकर कहा कि योग केवल शरीर को हिलाना-डुलाना नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी जीवनशैली है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाती है.

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संतुलन ही है असली स्वास्थ्य रामदेव ने आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए बताया कि आधुनिक जीवनशैली की अधिकांश समस्याओं की जड़ शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन है. उन्होंने कहा कि 'पावर योग' और 'एंटी-एजिंग योग' जैसी पद्धतियां शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं. जब ये तीन तत्व संतुलित रहते हैं, तो शरीर पुरानी बीमारियों, थकान और लाइफस्टाइल विकारों से लड़ने में अधिक सक्षम होता है. उनके अनुसार, "योग जीवन की नींव है, जो हमें अनुशासन और आंतरिक स्थिरता प्रदान करता है."

योग में 'तीव्रता' से ज्यादा मायने रखती है 'निरंतरता'

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दैनिक अभ्यास और खान-पान पर जोर सत्र के दौरान उन्होंने सूर्य नमस्कार और प्राणायाम जैसे सरल अभ्यासों का प्रदर्शन किया. उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात यह कही कि योग में 'तीव्रता' से ज्यादा 'निरंतरता' मायने रखती है. स्वास्थ्य केवल चटाई पर योग करने से नहीं, बल्कि रसोई के अनुशासन से भी आता है.

रामदेव ने खान-पान के प्रति सचेत रहने की सलाह देते हुए कहा कि हमें पैकेज्ड फूड के बजाय प्राकृतिक और घर के बने भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए. उन्होंने प्रोटीन के लिए मूंगफली, दालें और दूध जैसे सुलभ विकल्पों का सुझाव दिया. साथ ही, उन्होंने चीनी के स्थान पर शहद का उपयोग करने और खाना पकाने में पाम ऑयल से बचने की सख्त हिदायत दी.

अनुशासित जीवनशैली को सही पोषण देना भी जरूरी

वेलनेस और सप्लीमेंट्स की भूमिका कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बताया कि एक अनुशासित जीवनशैली को सहारा देने के लिए सही पोषण भी जरूरी है. उन्होंने पतंजलि के वेलनेस और पोषण उत्पादों का जिक्र करते हुए कहा कि जब इन उत्पादों को नियमित योग और संतुलित आहार के साथ जोड़ा जाता है, तो बेहतर और लंबे समय तक टिकने वाले स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं.