हाल ही में एक फेसबुक लाइव सत्र के दौरान योग गुरु और पतंजलि के संस्थापक स्वामी रामदेव ने देश के विभिन्न हिस्सों में पड़ रही भीषण ठंड पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने न केवल इस मौसम में शरीर को सुरक्षित रखने के उपाय बताए, बल्कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य को राष्ट्रहित और 'स्वदेशी' अभियान से भी जोड़ा.
ठंड से बचाव और स्वास्थ्य सुरक्षा
रामदेव ने बताया कि अत्यधिक ठंड के लंबे समय तक संपर्क में रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो जाती है. इसके कारण खांसी, जुकाम और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि सर्दियों में केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली और खान-पान में समय रहते बदलाव करना चाहिए.
उन्होंने शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, गर्म तरल पदार्थों के सेवन और नियमित शारीरिक व्यायाम पर जोर दिया. रामदेव के अनुसार, सर्दियों में रक्त संचार को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है. इसके लिए उन्होंने विशेष रूप से प्राणायाम और सांस से जुड़े योगाभ्यास की सलाह दी, जो श्वसन तंत्र को मजबूत बनाते हैं.
सेहत के साथ स्वदेशी का संकल्प
स्वास्थ्य चर्चा को आगे बढ़ाते हुए रामदेव ने इसे 'स्वदेशी' जीवनशैली से जोड़ा. उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों का चयन करना केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. उनके अनुसार, जब हम स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करते हैं, तो हम देश में रोजगार सृजन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की मजबूती में योगदान देते हैं.
पतंजलि की भूमिका और राष्ट्र सेवा
सत्र के दौरान उन्होंने पतंजलि के मेगास्टोर और बढ़ते रिटेल नेटवर्क का उल्लेख करते हुए बताया कि ये पहल आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आम जनता तक सुलभ बनाने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और राष्ट्र सेवा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.
सत्र के अंत में रामदेव ने लोगों से अपील की कि वे बीमारियों के प्रति सक्रिय होने के बजाय निवारक दृष्टिकोण अपनाएं. उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्वस्थ नागरिक ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण कर सकता है.