How To Calm Mind Before Sleep: इंसान के लिए जिंदगी में सबसे जरूरी जो चीजें होती हैं, उनमें से एक है नींद. यह कितना जरूरी है आप मिर्जा गालिब की शायरी से समझ सकते हैं कि "कोई उम्मीद बर नहीं आती, कोई सूरत नजर नहीं आती,मौत का एक दिन मुअय्यन है, नींद क्यूं रात भर नहीं आती ". अगर इसे आसान शब्दों में समझें, तो  जिसे रात की गहरी और सुकून भरी नींद मिल जाए, वही सच में खुशनसीब है. बाकी लोगों के लिए सोने से पहले, सोते वक्त और नींद टूटने के बाद भी मन को चैन नहीं मिलता.

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ऑफिस के पेंडिंग ईमेल, रिश्तों की उलझनें और दिनभर दबे हुए विचार रात में और ज्यादा तेज हो जाते हैं. करवटें बदलते-बदलते नींद को बुलाने की कोशिश करना कई लोगों की रोज की कहानी है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो जान लीजिए आप अकेले नहीं हैं.  एंग्जायटी यूके के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत लोग रात के समय एंग्जायटी यानी बेचैनी महसूस करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है, क्या किया जाए?. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर क्या किया जाए. 

सबसे पहले सोने का टाइम तय करें

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सबसे पहले, सोने से पहले वॉरी टाइम तय करें. यह अजीब लग सकता है, लेकिन रात को सोने से पहले 20 से 30 मिनट सिर्फ अपने मन की चिंताएं लिखने के लिए रखें. जो भी दिमाग में घूम रहा है, उसे कागज पर उतार दें. इसके बाद हल्के काम करें जैसे किताब पढ़ना, बिस्तर ठीक करना या हल्की स्ट्रेचिंग. इससे दिमाग को संकेत मिलता है कि दिन खत्म हो गया है और अब आराम का वक्त है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि एक छोटा-सा रूटीन दिमाग को शांत करने में मदद करता है. दूसरा, फोन से दूरी बनाएं. यह सलाह आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन इसकी वजह भी उतनी ही मजबूत है. बेवजह स्क्रॉल करना तनाव और बेचैनी को और बढ़ाता है. कई लोग रात में नींद खुलते ही फोन उठाने लगते हैं, जिससे दिमाग और एक्टिव हो जाता है. बेहतर है कि फोन को बिस्तर से दूर रखें, अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल करें और जरूरी काम कागज पर लिख लें.

नींद न आए तो क्या करें?

अगर नींद नहीं आ रही है, तो बिस्तर पर लेटकर बेचैन होने की बजाय कोई शांत काम करें. जैसे कपड़े फोल्ड करना, हल्का पढ़ना, ड्रॉइंग करना या अपनी सांसों को गिनना. इससे विचारों की रफ्तार टूटती है. बस ध्यान रखें कि ऐसा कुछ न करें जिसे दिमाग रोमांचक माने, और स्क्रीन से पूरी तरह बचें. मन बहुत ज्यादा भाग रहा हो तो फाइव-सेंसेज मेडिटेशन आजमाएं। अपने बिस्तर की बनावट, कमरे का तापमान, आसपास की आवाज़ें, खुशबू और पानी का स्वाद इन सब पर ध्यान दें. शरीर को शांत करने से दिमाग भी धीरे-धीरे ठहरने लगता है. इससे आप वर्तमान में लौट आते हैं और बीते या आने वाले कल की चिंताओं से दूरी बनती है. दिन में बाहर की रोशनी और ताजी हवा लेना भी जरूरी है. दिनभर की छोटी-छोटी देखभाल जैसे ब्रेक लेना, सही खाना, हल्की एक्सरसाइज और दोस्तों से बात करना रात की एंग्जायटी को कम कर सकता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दिन की रोशनी शरीर की घड़ी को संतुलित रखती है, जिससे रात में आराम करना आसान हो जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.