झपकी न सिर्फ शिशुओं के लिए है बल्कि व्यस्कों के लिए भी फायदेमंद है. दिन की नींद में शामिल होने के लिए आलस्य महसूस करने की आवश्यकता नहीं है. दोपहर को कुछ देर सोना याद्दाश्त तेज कर सकता है, काम का प्रदर्शन बेहतर कर सकता है, मिजाज खुशगवार बना सकता है, आपको ज्यादा सजग रख सकता और तनाव में कमी लाता है. रिसर्च से पता चला है कि नींद यादों को स्टोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

दोपहर में थोड़ी देर के लिए सोना क्या फायदेमंद है?

दोपहर की नींद दिन भर में सीखे गए को याद रखने में पूरी रात की नींद की तरह मदद कर सकती है. झपकी लेना आपको भूलने से बचाने का काम करता है. ये न सिर्फ सीखे गए को याद रखने में मदद कर सकता है बल्कि दिमाग को उन चीजों के बीच संबंध बनाने में भी मददगार है जो आप सीखते हैं. एक रिसर्च से पता चला कि दोपहर को सोने के आदी लोगों को दिन भर की सूचना को व्यवस्थित रखना आसान हो जाता है. जब आप दिन भर में एक ही काम करते हों तो प्रदर्शन दिन गुजरन के साथ बदतर होती चली जाती है. रिपोर्ट बताती है कि दिन कुछ मिनट की झपकी प्रदर्शन की निरंतरता को बरकरार रखने में मदद देती है. अगर आप चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो दोपहर को कुछ देर की नींद मूड ठीक करने के लिए लें.

नींद या बस आराम भी मूड पर असर डाल सकता है

नींद या बस आराम भी मूड पर असर डाल सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ देर सुकून से लेटकर आराम करना मूड बूस्टर है, चाहे आप सोएं या नहीं. अगर दोपहर के खाने के बाद सुस्ती या औंघ आ रही है, तो आप अकेले नहीं हैं. लंच के बाद का संघर्ष वास्तविक है. 20 मिनट की हल्की नींद उसका मुकाबला करने में मदद देता है. 10 मिनट की संक्षिप्त नींद भी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन दोपहर में सोने का समय 30 मिनट या कम रखें ताकि जागने पर आपको थकान का एहसास न हो. आप जितना देर सोएंगे, आपके एहसास की संभावना भी बढ़ती जाएगी. 

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