Skin Itch After Bathing: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का एक लड़का अपना अधिकांश समय तालाब में बिताता है. यह चीज वह करीब 5 साल से करता आ रहा है, जब भी वह पानी से बाहर निकलता है, शरीर पर तेज जलन और बैचेनी होने लगती है और पानी में जाते ही उसे सुकून और राहत मिलती है. डॉक्टरों के मुताबिक, इस परेशानी के पीछे 'एक्वाजेनिक प्रुरिटस' नामक एक दुर्लभ बीमारी हो सकती है. 

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यह एक अनोखी बीमारी है. इस बमारी में पानी के संपर्क में आने के बाद शरीर में तेज खुजली, चुभन, जलन या दर्द होने लगता है. इस बीमारी को पहचानना इसलिए बहुत कठिन है क्योंकि इतनी तेज तकलीफ होने के बावजूद त्वचा ऊपर से बिल्कुल सामान्य दिखती है. 

एक्वाजेनिक प्रुरिटस क्या है?

एक्वाजेनिक प्रुरिटस एक दुर्लभ बीमारी है. पुणे की त्वचा विशेषज्ञ डॉ. कृतिका शर्मा का मानना है कि एक्वाजेनिक प्रुरिटस के बारे में सबसे उलझाने वाली बात यह है कि त्वचा ऊपर से बिल्कुल साफ और सामान्य दिखती है, फिर भी मरीज को बहुत तेज तकलीफ होती है. आम एलर्जी की तरह यह जरूरी नहीं कि पानी में मिली किसी खराबी या केमिकल के कारण ही हो, बल्कि यह सामान्य पानी से भी हो सकती है. 

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जलन क्यों होती है?

डॉक्टरों के पास अभी तक इस बात का कोई पक्का जवाब नहीं है कि यह बीमारी क्यों होती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी के संपर्क में आते ही त्वचा की नसें एक अजीब तरह से काम करने लगती हैं, जिससे तेज खुजली, चुभन या जलन महसूस होने लगती है. यह समस्या किसी भी तरह के पानी और किसी भी तापमान के पानी से हो सकती है. इसका मतलब है कि ठंडे पानी के बदले गर्म पानी से नहाने से भी इस बीमारी में कोई आराम नहीं मिलता. इस बीमारी में त्वचा पर पानी पड़ते ही तकलीफ तो शुरू हो जाती है, लेकिन इसमें आम एलर्जी की तरह त्वचा पर कोई लक्षण नहीं दिखते. 

क्या यह किसी और बीमारी का संकेत है?

कभी भी पानी से होने वाली लगातार खुजली को सिर्फ सूखी त्वचा समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. एक्वाजेनिक प्रुरिटस अपने आप भी हो सकता है, लेकिन कभी-कभी यह खून की कुछ बीमारियों जैसे पॉलीसिथेमिया वेरा से भी जुड़ा होता है. इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि पानी से खुजली महसूस करने वाले हर इंसान को खून की कोई गंभीर बीमारी हो. ऐसे में डॉक्टर मरीज के लक्षणों, उसकी पुरानी सेहत और जांच के आधार पर ही आगे के टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. डॉ. कृतिका ने कहा, पानी से होने वाली खुजली का यह मतलब नहीं है कि शरीर के अंदर कोई गंभीर बीमारी छुपी हुई है. 

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क्या इसका इलाज संभव है

एक्वाजेनिक प्रुरिटस से पीड़ित सभी मरीजों के लिए कोई एक इलाज काम नहीं करता है. तकलीफ कितनी गंभीर है और इसके पीछे कोई और बीमारी तो नहीं है, यह जानने के बाद ही डॉक्टर इलाज के अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. इलाज का मुख्य मकसद इस तकलीफ और जलन को कम करना होता है. इसके साथ ही, अगर जांच में कोई दूसरी बीमारी सामने आती है, तो उसका इलाज भी जरूरी हो जाता है. चूंकि यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है और हर मरीज में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं, इसलिए इसका इलाज भी हर व्यक्ति के हिसाब से अलग-अलग किया जाता है.

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