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Male Infertility: क्या पुरुषों में बढ़ रही इनफर्टिलिटी बनी IVF बूम की वजह, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े?

Fertility Test for Men: एक्सपर्ट के मुताबिक, आज पुरुषों से जुड़े कारण अकेले या महिलाओं के साथ मिलकर करीब 40 से 50 प्रतिशत  इन्फर्टिलिटी के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं.

Causes Of Male Infertility In Young Adults: भारत में अब इन्फर्टिलिटी को केवल महिलाओं की समस्या मानने की सोच तेजी से बदल रही है. फर्टिलिटी एक्सपर्ट का कहना है कि अब बड़ी संख्या में पुरुष भी जांच और इलाज के लिए आगे आ रहे हैं. बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव और देर से परिवार शुरू करने की प्रवृत्ति के कारण पुरुषों में प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. इसका असर देश के आईवीएफ इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई दे रहा है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट के मुताबिक, आज पुरुषों से जुड़े कारण अकेले या महिलाओं के साथ मिलकर करीब 40 से 50 प्रतिशत  इन्फर्टिलिटी के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं. यही वजह है कि फर्टिलिटी क्लीनिक अब पुरुषों की जांच और इलाज से जुड़ी सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रहे हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड कोलकाता के नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रोहित गुटगुटिया के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में उनके केंद्र पर पुरुषों मेंइन्फर्टिलिटी के मामलों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सबसे ज्यादा जांच कराने वाले पुरुषों की उम्र 30 से 35 साल के बीच है.

बढ़ रहा है इसका बिजनेस

इसी के साथ भारत का इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है. करीब 1.4 अरब डॉलर के इस इंडस्ट्री में देशभर में 2,000 से अधिक आईवीएफ क्लीनिक संचालित हैं. वर्तमान में भारत में हर साल लगभग 2 लाख से 2.5 लाख आईवीएफ साइकिल किए जाते हैं. एक्सपर्ट का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर करीब 4 लाख तक पहुंच सकती है. इस वृद्धि में टियर-2 और टियर-3 शहरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है.

इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट के अनुसार, कई छोटे और मध्यम आईवीएफ सेंटरों की कुल आय का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़ी जांच, परामर्श और उपचार से आता है. दिल्ली के एक आईवीएफ सेंटर के अधिकारी के मुताबिक, आईसीएसआई जैसी एडवांस तकनीक के एक साइकिल का खर्च लगभग 1.2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक हो सकता है. वहीं शुरुआती परामर्श, जांच और टेस्ट पर भी उम्र और क्लीनिक के आधार पर 20 हजार रुपये या उससे अधिक का खर्च आ सकता है.

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पहले की तुलना में बढ़ रही है दिक्कत?

गौडियम आईवीएफ की चेयरपर्सन डॉ. मणिका खन्ना बताती हैं कि पहले चार में से एक दंपती में पुरुष कारण सामने आता था, लेकिन अब यह आंकड़ा लगभग तीन में से एक तक पहुंच गया है. इसकी एक वजह जागरूकता बढ़ना है, वहीं दूसरी ओर स्पर्म की संख्या कम होना, उनकी गति कमजोर होना और उनकी बनावट में असामान्यता जैसी समस्याएं भी पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं.

बढ़ते इन्फर्टिलिटी के पीछे क्या कारण है जिम्मेदार?

डॉक्टरों का कहना है कि पुरुषों में बढ़ते इन्फर्टिलिटी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. मोटापा, डायबिटीज, धूम्रपान, लगातार तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और घंटों बैठे रहकर काम करना प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है. लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखकर काम करना, बहुत तंग कपड़े पहनना और लगातार बैठने की आदत भी टेस्टिकल्स के तापमान को बढ़ाकर स्पर्म बनने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है.

गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है

इसके अलावा प्लास्टिक, कीटनाशकों, फूड पैकेजिंग और औद्योगिक प्रदूषण में मौजूद कुछ रसायन शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. वहीं मांसपेशियां बढ़ाने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के एनाबॉलिक स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए नुकसानदायक माना जा रहा है. एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि करियर और आर्थिक कारणों से देर से शादी या देर से परिवार शुरू करने का फैसला भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर डाल रहा है. बढ़ती उम्र के साथ स्पर्म की क्वालिटी में गिरावट आने लगती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है.

अब केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगर ही नहीं, बल्कि वाराणसी, गोरखपुर, भोपाल जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी पुरुष फर्टिलिटी जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि इन्फर्टिलिटी केवल महिला या पुरुष की समस्या नहीं, बल्कि दंपती दोनों से जुड़ा विषय है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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