Sleeping Tips: अक्सर लोग खर्राटों की समस्या से परेशान रहते हैं लेकिन ज्यादातर इसे केवल गहरी और सुकून भरी नींद का संकेत मानकर इग्नोर कर देते हैं. जबकि, असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है. रात को सोते समय तेजी से खर्राटे लेना न सिर्फ आपके साथ सोने वाले पार्टनर की नींद में खलल डालता है, बल्कि यह आपके खराब स्वास्थ्य की ओर भी इशारा करता है.

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मेडिकल साइंस के अनुसार, जब सोते समय हमारे श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में हवा का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता तो वहां की मांसपेशियां वाइब्रेट करने लगती हैं. इसी वाइब्रेशन से तेज आवाज निकलती है, जिसे हम खर्राटे कहते हैं. ऐसे में आइए अब जान लेते हैं कि खर्राटे आने के असली कारण क्या हैं और इनसे हमेशा के लिए छुटकारा कैसे पाया जा सकता है. 

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गलत पोजीशन में सोना- पीठ के बल लेटने पर जीभ और गले की मांसपेशियां पीछे की ओर झुक जाती हैं, जिससे सांस की नली आंशिक रूप से बंद हो जाती है.

बढ़ता हुआ वजन- गले और गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी (फैट) जमा होने से वायु मार्ग छोटा हो जाता है और खर्राटे आने लगते हैं. 

नाक की बनावट में गड़बड़ी- नाक की हड्डी का टेढ़ा होना या नाक के अंदर मांस बढ़ना हवा के रास्ते को रोकता है, जिससे खर्राटे आने की समस्या होने लगती है.

नशीले पदार्थों का सेवन- वहीं, सोने से ठीक पहले शराब पीना गले की मांसपेशियों को जरूरत से ज्यादा लूज कर देता है, जिससे रुकावट पैदा होती है और खर्राटे आने शुरू हो जाते हैं. 

सर्दी (क्रॉनिक साइनसाइटिस)- इसके साथ ही नाक बंद होने, एलर्जी या सर्दी-जुकाम के कारण व्यक्ति को मुंह से सांस लेनी पड़ती है, जो खर्राटे आने का बड़ा कारण बनती है.  

बढ़ती उम्र- वहीं, उम्र बढ़ने के साथ गले के ऊतक (टिशू) ढीले होने लगते हैं, जिससे खर्राटों की आवृत्ति (फ्रीक्वन्सी) बढ़ जाती है.

खर्राटों से ऐसे मिलेगा छुटकारा 

करवट लेकर सोएं- अगर आप चाहते हैं कि आपको खर्राटे न आएं तो कोशिश करें कि हमेशा बाईं या दाईं ओर करवट लेकर सोएं क्योंकि यह पोज सांस की नली को पूरी तरह खुला रखने में सहायक होता है. 

नियमित एक्सरसाइज- साथ ही रोज कम से कम 30 मिनट योग या कार्डियो वर्कआउट करें. जिससे वजन कम होने लगेगा और गले की मांसपेशियों का प्रेशर अपने आप कम हो जाएगा.

सिरहाना ऊंचा रखें- सोते समय एक अतिरिक्त तकिया लगाकर अपने सिर को करीब 4 इंच ऊपर उठाएं. इससे ग्रैविटी के कारण सांस की नली ब्लॉक नहीं होती.

हाइड्रेटेड रहें- इसके साथ ही दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं. क्योंकि शरीर में पानी की कमी से नाक और गले के अंदर का बलगम चिपचिपा होकर रुकावट पैदा करता है. 

सोने से पहले भाप लें- अगर आपकी नाक बंद रहती है, तो रात को बिस्तर पर जाने से पहले गर्म पानी की भाप (स्टीम) लें.

एंटी-स्नोरिंग गैजेट्स- इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर आप नेजल स्ट्रिप्स या सीपैप मशीन का उपयोग कर सकते हैं, जो वायु मार्ग को साफ रखती हैं

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