मेलबर्न: वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिन छात्रों की आंख कमजोर होती है, उनका अकादमिक स्कोर अच्छा नहीं होता है. आंखों की समस्या बच्चे की सीखने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है. क्या कहती है रिसर्च- ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (क्यूयूटी) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि अगर आंखों की समस्या दूर नहीं होती है तो वह अकादमिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है. क्या कहते हैं शोधकर्ता- ऑपटोमेट्रिक जांच के लिए भेजे गए बच्चे उल्लेखनीय ढ़ंग से पढ़ने, शब्द विन्यास, गणना, व्याकरण और विराम चिन्ह में कमजोर होते हैं. क्यूयूटी की वरिष्ठ फेलो सोनिया व्हाइट ने बताया कि आंखों की जांच प्राथमिक स्कूल और पूरी पढ़ाई के दौरान किए जाने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि स्कूल शुरू करने वाले बच्चों में मौजूदा समय में आखों की जांच कराना अनिवार्य नहीं है. इसका मतलब यह है कि कुछ बच्चों में देखने और विजुअल को लेकर दिक्कत रहती है, जिसके बारे में माता-पिता और शिक्षक नहीं जान पाते. यह रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एजुकेशन रिसर्च में प्रकाशित हुआ है.

नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.