Pain killers: जब शरीर में किसी प्रकार का दर्द होता है, तो लोग अक्सर पेन किलर का रुख करते हैं. खास बात यह है कि दवा लेने के कुछ ही समय बाद दर्द कम होना शुरू हो जाता है. आखिर यह कैसे संभव हो पाता है? शरीर में दर्द उठते ही यह एक प्रकार का संकेत होता है कि कहीं न कहीं कोई समस्या, चोट या सूजन हुई है. जब भी यह दर्द होता है, तो शरीर में Prostaglandius नामक केमिकल बनते हैं, जो नसों के जरिए दिमाग को संकेत देते हैं कि कहां दर्द हो रहा है.

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कैसे काम करती है पेन किलर?

अधिकांश पेन किलर जैसे paracetamol और ibuprofen, शरीर में इन दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स के निर्माण को कम करने में सहायक होती हैं. ये दवाइयां Prostaglandius के बनने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करती हैं. जब ये केमिकल कम बनते हैं, तो नसों तक दर्द का संकेत कम पहुंचता है. परिणामस्वरूप, हमें दर्द में राहत महसूस होने लगती है.

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क्यों दिखता है इतनी जल्दी असर?

ये दवाइयां पेट में जाते ही जल्दी से खून में जाकर घुल जाती हैं. खून के जरिए ये फिर तेजी से पूरे शरीर में पहुंचती हैं. ये खास रूप से दिमाग और दर्द वाले हिस्से पर अपना असर दिखाती हैं. आमतौर पर, अधिकांश पेन किलर 20 से 30 मिनट के भीतर ही असर दिखाना शुरू कर देती हैं.

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कितने प्रकार के होते हैं पेन किलर?

पेन किलर अलग-अलग प्रकार के होते हैं और उनका काम करने का तरीका भी अलग-अलग होता है.

  • Analgesics - आम पेन किलर जैसे paracetamol, दर्द और बुखार को कम करती हैं, लेकिन सूजन पर ज्यादा असर नहीं डाल पातीं.
  • NSAIDs - ibuprofen जैसी दवाइयां, जो दर्द के साथ-साथ सूजन पर भी असर दिखाती हैं.
  • Opioids - ये तब दिए जाते हैं जब दर्द नियंत्रित नहीं हो पा रहा हो, क्योंकि ये सीधे दिमाग पर असर डालती हैं. लेकिन इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना हानिकारक हो सकता है.

पेन किलर को सही मात्रा और जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करना चाहिए. ज्यादा या बार-बार लेने से पेट में जलन या अल्सर, किडनी या लिवर पर असर और ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

सावधानियां बरतनी हैं जरूरी

  • हमेशा निर्धारित मात्रा में ही दवा लें.
  • खाली पेट पेन किलर लेने से बचें.
  • अगर दर्द लंबे समय तक रहे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
  • बच्चों और बुजुर्गों को दवा देते समय विशेष सावधानी बरतें.

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