मेलानोमा स्किन कैंसर का एक खतरनाक किस्म है. अब इसके इलाज को लेकर मॉडर्न और मर्कक की एक पर्सनलाइज्ड एमआरएनए थेरेपी चर्चा में है. इसे कैंसर के इलाज में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. यह वैक्सीन मर्क और मॉडर्ना नाम की दो दवा कंपनियों ने तैयार की है. इसका नाम इंतिसमेरण औटोगेनए  (4157/V940) है. खास बात यह है कि इसे हर मरीज के लिए उसके ट्यूमर की जानकारी के मुताबिक पर तैयार किया जाता है. इसका मकसद शरीर की इम्यून सिस्टम को कैंसर की उन खास पहचान वाली चीजों को पहचानने में मदद करना है, जो उस मरीज के ट्यूमर में मौजूद हैं. 

Continues below advertisement

 ट्यूमर के हिसाब से होगी थेरेपी

इसका तरीका सामान्य वैक्सीन से काफी अलग है. मरीज के ट्यूमर का सैंपल लेकर उसमें मौजूद बदलावों का पता लगाना है. इसके बाद ऐसे नेओंटीगेन्स चुने जाते हैं, जिन्हें इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स की पहचान के लिए इस्तेमाल कर सकता है. इसी जानकारी के मुताबिक पर्सनलाइज्ड एमआरएनए थेरेपी तैयार की जाती है. इसका मकसद शरीर की अपनी इम्यून सिस्टम को ट्रेन करना है, ताकि वह कैंसर से जुड़ी इन खास पहचान को समझ सके और ऐसी कोशिकाओं पर हमला करने में मदद कर सके. यह कोई ऐसी वैक्सीन नहीं है जिसे स्वस्थ लोगों को कैंसर से बचाने के लिए सामान्य टीके की तरह लगाया जाए. 

यह भी पढ़ें: घर में किसी को H1N1 है तो बाकी लोग कैसे बचें? इन बातों का रखें ध्यान

Continues below advertisement

मिला है बेहतर रिजल्ट

इस थेरेपी को मर्कककी  केतरुदा  पेम्बरोलीजुमब के साथ हाई रिस्क स्टेज III और IV मेलानोमा के मरीजों में जांचा हाय है, जिनका ट्यूमर सर्जरी से पूरी तरह निकाल दिया गया था. 2026 में जारी करीब 5 साल के फॉलो अप डेटा में V940 और केतरुदा  के कॉम्बिनेशन ने अकेले केतरुदा  की तुलना में कैंसर के दोबारा लौटने या मरीज की मौत के जोखिम को 49 फीसदी कम किया है . दूर तक कैंसर फैलने या मौत के जोखिम में 59 फीसदी कमी दर्ज हुई है. 

आम मरीजों के लिए मंजूरी नहीं मिली

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. V940 अभी इंवेस्टिगटीगेशनल थेरपी है. यानी इस पर क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है और इसे हर मेलानोमा मरीज के लिए आम इलाज के तौर पर मंजूरी नहीं मिली है. फेज 3 का INTerpath 001 ट्रायल हाई रिस्क मेलानोमा में इसकी सुरक्षा और असर की जांच हो रहा है. इस स्टडी में करीब 1,089 मरीजों को शामिल करने का लक्ष्य है. 

कैंसर को कैसे पहचानेगा शरीर?

इस थेरेपी को लेकर सबसे खास बात इसका पर्सनलाइज्ड तरीका है. एक ही दवा हर मरीज के लिए बिल्कुल एक जैसी तैयार करने की जगह ट्यूमर में मिले खास बदलावों को देखकर इसका डिजाइन किया जाता है. यही वजह है कि इसे कैंसर के इलाज में एक नई दिशा के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि अभी इसे  मेलानोमा की पक्की वैक्सीन  कहना जल्दबाजी होगी. आगे के ट्रायल से ही पता चलेगा कि यह अलग अलग मरीजों में कितना असर और कितनी बेहतर साबित हा सकती है.

यह भी पढ़ें: 4 साल से छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती हैं कफ सिरप, सरकार ने लगाई सख्त पाबंदी