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Edible Oil Adulteration: एडिबल ऑयल में हो रही मिलावट से शरीर हो रहा खोखला, जानिए कैसे मौत के नजदीक जा रहे आप

एक्सपर्ट्स के अनुसार नकली सरसों तेल बनाने में बटर येलो डाई जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक कार्सिनोजेनिक तत्व माना जाता है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है.

Edible Oil Adulteration: देश भर में खाने में मिलावट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अब खाने के तेल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले सरसों, रिफाइंड तेल और दूसरे खाद्य तेल कई जगह पर मिलावटी पाए जा रहे हैं, जो धीरे-धीरे लोगों के शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कुछ कारोबारी तेल में ऐसे रसायन और सस्ते तेल तत्व मिला देते हैं, जो लीवर, किडनी, दिल और इम्यूनिटी सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एडिबल ऑयल में मिलावट से शरीर कैसे खोखला हो रहा है और इससे आप मौत के नजदीक कैसे जा रहे हैं. 

शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है मिलावटी तेल 

एक्सपर्ट्स के अनुसार नकली सरसों तेल बनाने में बटर येलो डाई जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक कार्सिनोजेनिक तत्व माना जाता है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है. इसके अलावा आर्जीमोन नामक जहरीले बीज का तेल भी सरसों तेल में मिलाया जाता है. यह बीज खरीदने में सरसों जैसा होता है जो पेराई के दौरान आसानी से मिल जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आर्जीमोन मिला तेल शरीर के कई अंगों पर बुरा असर डालता है. इससे ड्रॉप्सी जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें शरीर में सूजन, सांस लेने में परेशानी और दिल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ जाती है. भारत में पहले भी सरसों तेल में मिलावट के कारण कई लोगों की मौत और गंभीर बीमारी के मामले सामने आ चुके हैं. 

नकली तेल में क्या-क्या मिलाया जाता है? 

जानकारी के अनुसार नकली तेल तैयार करने के लिए पाम ऑयल, राइस ब्राउन तेल, सिंथेटिक रंग, अल्कोहल और एसेंस का इस्तेमाल किया जाता है. तेल को सरसों जैसा रंग देने के लिए केमिकल मिलाए जाते हैं, जबकि उसकी गंध बदलने के लिए अलग से एसेंस डाला जाता है. कई बार सस्ते तेलों को मिलाकर उन्हें शुद्ध सरसों तेल के नाम पर बाजार में बेच दिया जाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार लगातार मिलावटी तेल खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. कुछ तेलों को बार-बार गर्म करने से उनमें जहरीले तत्व बनने लगते हैं जो शरीर में सूजन और कैंसर जैसी बीमारियों की वजह बन सकते हैं. 

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किन तेलों को लेकर बढ़ रही चिंता? 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ तेलों का अत्यधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. पाम तेल में सैचुरेटेड फैट ज्यादा मात्रा में होता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का काम करता है. वहीं कनोला और सनफ्लावर ऑयल को बहुत ज्यादा तापमान पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे उनमें हानिकारक तत्व पैदा हो सकते हैं. हालांकि डॉक्टर कहते हैं कि हर तेल नुकसानदायक नहीं होता, सीमित मात्रा में शुद्ध घी, सरसों तेल और एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. इनमें मौजूद ओमेगा 3, विटामिन ए और दूसरे पोषक तत्व दिल और पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करते हैं. 

घर बैठे ऐसे पहचाने तेल असली है या नकली 

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटी तेल पहचान के कुछ आसान घरेलू तरीके बताएं. अगर सरसों तेल को कुछ देर फ्रिज में रखने पर नीचे सफेद परत जमने लगे तो उसमें पाम तेल की मिलावट हो सकती है. शुद्ध सरसों तेल सामान्य तौर पर ठंड में भी तरल बना रहता है. तेल की कुछ बूंदे हाथ पर रगड़ने पर अगर रंग निकलने लगे तो समझ जाना चाहिए तो उसमें सिंथेटिक रंग मिलाया गया है. वहीं असली सरसों तेल की गंध तेज होती है और गर्म करने पर आंखों में हल्की जलन महसूस होती है. 

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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