नई दिल्ली: भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली कोमल दूब को आयुर्वेद में महाऔषधि माना जाता है. पौष्टिक आहार और औषधीय गुणों से भरपूर दुर्वा यानी दूब को हिन्दू संस्कारों और कर्मकांडों में उपयोग के साथ ही यौन रोगों, लीवर रोगों, कब्ज के उपचार में रामबाण माना जाता है. पतंजलि आयुर्वेद हरिद्वार के आचार्य बाल कृष्ण ने कहा कि दूब की जड़ें, तना, पत्तियां सभी को आयुर्वेद में अनेक असाध्य रोगों के उपचार के लिए सदियों से उपयोग में लाया जा रहा है.

आयुर्वेद के अनुसार, चमत्कारी वनस्पति दूब का स्वाद कसैला-मीठा होता है जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, पोटाशियम पर्याप्त मात्रा में विद्यमान होते हैं जो कि विभिन्न प्रकार के पित्त और कब्ज विकारों को दूर करने में राम बाण का काम करते हैं. यह पेट के रोगों, यौन रोगों, लीवर रोगों के लिए असरदार मानी जाती है.
  • आचार्य बालकृष्ण के अनुसार दूब और चूने को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसें और इसे चेहरे पर लेप करने से लाभ होता है. इसी तरह दूब को पीसकर पलकों पर बांधने से आंखों की समस्या में लाभ होता है, आंखों से मल का आना भी बंद हो जाता है.
  • अनार फूलों के रस को दूब के रस के साथ या हरड़ के साथ मिलाकर कर 1-2 बूंद नाक में डालने से नकसीर में आराम मिलता है. दूब के रस को 1 से 2 बूंद नाक में डालने से नाक से खून आना बंद हो जाता है.
  • दूब के काढ़े से कुल्ला करने से मुंह के छालों में लाभ होता है. इसी तरह एब्डोमिनल डिजीज में 5 मिली. दूब का रस पिलाने से उल्टी में लाभ होता है. दूब का ताजा रस पुराने डायरिया में उपयोगी होता है. दूब को सोंठ और सौंफ के साथ उबालकर पिलाने से आम डायरिया मिटता है.
  • दूब के रस को पीसकर दही में मिलाकर लें और इसके पत्तों को पीसकर बवासीर पर लेप करने से लाभ होता है. दूब को 30 मिली पानी में पीसें और इसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पीने से पथरी में लाभ होता है.
  • दूब की मूल का काढ़ा बनाकर 10 से 30 मिली मात्रा में पीने से यूरिन इंफेक्शन खत्म होता है. इसके अलावा दूब को मिश्री के साथ घोंट छान कर पिलाने से पेशाब के साथ खून आना बंद हो जाता है. 1 से 2 ग्राम दूब को दुध में पीस छानकर पिलाने से पेशाब में जलन मिटती है.
  • गर्भपात में भी दूब उपयोगी है. दूब के रस में सफेद चंदन का चूर्ण और मिश्री मिलाकर पिलाने से लाभ होता है. रक्तस्त्राव और गर्भपात में इसका प्रयोग करने से रक्त बहना रुक जाता है. गर्भाशय को शक्ति और पोषण मिलती है. श्वेत दूब वीर्य को कम करती है और काम शक्ति को घटाती है.

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