बोस्टन: हाल में हुई एक रिसर्च में पाया गया है कि ऑस्टियोऑर्थराइटिस के खतरे को बढ़ाने और लंबाई घटाने से जुड़े एक जीन ने हिम युग के दौर में इंसानों को जिंदा रहने में मदद की थी. अमेरिका में स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दिखाया कि जोड़ों से जुड़ी इस दर्द देने वाली बीमारी से जुड़े होने के बावजूद इस आनुवांशिक प्रकार ने अफ्रीका से बाहर आये इंसानों को ठंडी उत्त री जलवायु में जिंदा रहने में मदद की. कम से कम आधे यूरोपीय और एशियाई लोगों में यह आनुवांशिक प्रकार मिलता है जो अफ्रीकी आबादी में अपेक्षाकृत दुर्लभ है. शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि छोटी हड्डियों की वजह से हमारे पूर्वजों को ठंड का कहर का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद मिली और गिरने की वजह से हड्डियों के टूटने का जोखिम भी कम हो गया. बेहद ठंडे तापमान और बर्फीली सतह से निपटने के लिये इन फायदों से ऑस्टियोऑर्थराइटिस का खतरा कम हो गया जो आम तौर पर फर्टाइल उम्र के बाद होता है. नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.
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गठिया से संबंधित जीन ने इंसानों को जिंदा रहने में की थी मदद
एजेंसी | 07 Jul 2017 10:46 AM (IST)
