<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>Heel Pain Is A Big Problem: सुबह उठते ही एड़ियों में होता है तेज दर्द, जानें यह किस बीमारी का संकेत?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/health/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Sun, 31 May 2026 22:21:38 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[Pankaj Bhadouria Breast Cancer:मास्टरशेफ विनर पंकज भदौरिया को ब्रेस्ट कैंसर, 50 के पार महिलाओं में क्यों बढ़ जाता है खतरा?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/masterchef-winner-pankaj-bhadouria-breast-cancer-why-is-risk-higher-for-women-over-50-breast-cancer-early-signs-3138134</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/masterchef-winner-pankaj-bhadouria-breast-cancer-why-is-risk-higher-for-women-over-50-breast-cancer-early-signs-3138134#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 21:28:06 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/masterchef-winner-pankaj-bhadouria-breast-cancer-why-is-risk-higher-for-women-over-50-breast-cancer-early-signs-3138134</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;MasterChef Winner Pankaj Bhadouria Breast Cancer: &lt;/strong&gt;मास्टरशेफ इंडिया सीजन 1 की विजेता और मशहूर सेलिब्रिटी शेफ पंकज भदौरिया ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर बताया कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला है. इस पोस्ट के सामने आने के बाद उनके फैंस में चिंता बढ़ गई है. पंकज भदौरिया ने लोगों से अपनी सेहत के लिए स्पोर्ट की अपील भी की है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ब्रेस्ट कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है. हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं, हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 50 साल की उम्र के बाद इसका खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल और जैविक बदलाव इसकी बड़ी वजह बनते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ब्रेस्ट कैंसर क्या है, 50 साल के बाद महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा क्यों हो जाता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या होता है ब्रेस्ट कैंसर?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें ब्रेस्ट की कुछ कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं. समय के साथ ये कोशिकाएं एक गांठ या ट्यूमर का रूप ले सकती हैं. अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो कैंसर कोशिकाएं शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकती हैं. यही वजह है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान और समय पर इलाज को बेहद जरूरी मानते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;50 &amp;nbsp;के बाद महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा क्यों हो जाता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1. विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम भी बढ़ता जाता है. खासतौर पर 50 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई ऐसे बदलाव होते हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;2.महिलाओं में एक उम्र के बाद पीरियड्स बंद हो जाते हैं, जिसे मेनोपॉज कहा जाता है. इस दौरान शरीर में हार्मोन का संतुलन बदलने लगता है. हार्मोन में होने वाले अंतर ब्रेस्ट के टिशू को प्रभावित कर सकते हैं और असामान्य कोशिकाओं के विकसित होने का खतरा बढ़ा सकते हैं. यही कारण है कि मेनोपॉज के बाद ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;3. हमारे शरीर की कोशिकाएं लगातार काम करती रहती हैं.बढ़ती उम्र के साथ डीएनए में छोटी-छोटी परेशानियां जमा होने लगती हैं.सामान्य परिस्थितियों में शरीर इनकी मरम्मत कर लेता है, लेकिन उम्र बढ़ने पर यह क्षमता कमजोर होने लगती है. इससे खराब कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने और कैंसर में बदलने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;4. 50 वर्ष के बाद महिलाओं में वजन बढ़ने की समस्या आम हो जाती है.विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में अतिरिक्त चर्बी एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकती है. जब शरीर में फैट ज्यादा होता है तो सूजन की स्थिति भी बनी रहती है, जो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने के लिए तैयार कर सकती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/new-ebola-strain-declared-a-global-emergency-how-concerned-should-india-be-3137976&quot;&gt; E&lt;/a&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/new-ebola-strain-declared-a-global-emergency-how-concerned-should-india-be-3137976&quot;&gt;bola Virus: इबोला का नया स्ट्रेन ग्लोबल इमरजेंसी घोषित, इससे भारत को कितना डरना चाहिए?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कुछ महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सामान्य से ज्यादा हो सकता है. जैसे परिवार में किसी को पहले ब्रेस्ट कैंसर रहा हो, &amp;nbsp;ज्यादा वजन या मोटापे की समस्या, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, देर से मेनोपॉज होना, अस्वस्थ खानपान और लाइफस्टाइल, धूम्रपान और शराब का सेवन इन स्थितियों में नियमित जांच कराना और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर दर्द नहीं होता, इसलिए कई महिलाएं इसके संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं. हालांकि कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. &amp;nbsp;जैसे स्तन या बगल में गांठ, स्तन के आकार में बदलाव, स्किन में बदलाव, निप्पल में बदलाव, निप्पल से असामान्य डिसचार्ज. डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का जितना जल्दी पता चल जाता है, उसका इलाज उतना ही आसान और सफल होता है. शुरुआती अवस्था में कैंसर आमतौर पर ब्रेस्ट तक ही सीमित रहता है. ऐसे में सर्जरी, दवाओं और अन्य ट्रीटमेंट से बचाव किया जा सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें - &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/if-you-avoid-sugar-for-losing-weight-for-sweet-need-healthy-sugar-option-list-3137950&quot;&gt;Best Sugar Options: वजन घटाने के लिए छोड़ रहे हैं शुगर, मीठे की जरूरत के लिए ये हैं हेल्दी ऑप्शन&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/31/2572f7e84d5e860e9f61a9b3d792b75617802310789401120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Food Choking: कुरकुरे के टुकड़े ने ली युवक की जान! Food Choking कितना खतरनाक, कैसे बचाई जा सकती है जान?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/himachal-man-dies-after-kurkura-choking-know-food-choking-risks-and-first-aid-steps-3138109</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/himachal-man-dies-after-kurkura-choking-know-food-choking-risks-and-first-aid-steps-3138109#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 17:48:35 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ कविता गाडरी ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/himachal-man-dies-after-kurkura-choking-know-food-choking-risks-and-first-aid-steps-3138109</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Food Choking:&lt;/strong&gt; हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. यहां 28 वर्षीय युवक की मौत सिर्फ इसलिए हो गई, क्योंकि कुरकुरे का एक टुकड़ा उसकी सांस की नली में फंस गया था. इस हादसे के बाद न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा गांव सदमे में है. एक्सपर्ट का कहना है कि खाने के दौरान की गई छोटी सी लापरवाही भी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि फूड चोकिंग कितना खतरनाक है और इससे कैसे जान बचाई जा सकती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुरकुरा खाते ही बिगड़ी थी तबीयत&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जानकारी के अनुसार, अर्की उपमंडल की घनागुघाट पंचायत के ताल गांव निवासी हेमंत शर्मा कसौली के एक निजी होटल में काम करते थे. परिजनों के अनुसार, वह घर पर कुरकुरे खा रहे थे, तभी उनका एक टुकड़ा गले में फंस गया. कुछ ही देर में उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और हालत गंभीर होती चली गई. परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया. पीजीआई में डॉक्टरों ने इलाज किया लेकिन तमाम कोशिशें के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. युवक की मौत की खबर मिलते ही गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या होता है फूड चोकिंग?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई खाने का पदार्थ सांस की नली में फंस जाता है और फेफड़ों तक हवा पहुंचने का रास्ता बाधित कर देता है तो इस स्थिति को फूड चोकिंग कहा जाता है. यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, क्योंकि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर कुछ ही मिनट में गंभीर नुकसान हो सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-postmortem-reveals-the-real-cause-of-death-what-human-organs-tell-experts-3132751&quot;&gt;Postmortem: पोस्टमॉर्टम से कैसे पता लगती है मौत की वजह, जानिए क्या संकेत देते हैं शरीर के ऑर्गन?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गले में क्यों फंस जाता है खाना?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डॉक्टर बताते हैं कि हमारे गले में एपिग्लॉटिस नाम का एक हिस्सा होता है, जो खाने और सांस की नली के बीच संतुलन बनाए रखना है. जब कोई व्यक्ति खाना खाते समय बात करता है, हंसता है या बहुत तेजी से निगलता है तो खाने का टुकड़ा गलत रास्ते में जाकर श्वास नली में फंस सकता है. ऐसी स्थिति में सांस लेने में कठिनाई शुरू हो जाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किसी के गले में खाना फंस जाए तो क्या करें?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के गले में खाना फंस जाए और वह खांस पा रहा है तो उसे लगातार खांसने के लिए कहना चाहिए. क्योंकि कई बार इससे फंसी हुई वस्तु बाहर निकल आ जाती है. अगर स्थिति गंभीर हो तो व्यक्ति को आगे की ओर झुकाकर पीठ के ऊपरी हिस्से पर जोरदार थपकी दी जा सकती है. इसके अलावा एक्सपर्ट व्यक्ति हेमलिच मैनूवर का इस्तेमाल भी कर सकता है. इस प्रक्रिया में पीड़ित के पीछे खड़े होकर पेट के ऊपरी हिस्से पर दबाव डाला जाता है, जिससे फेफड़ों में मौजूद हवा के दबाव से फंसी हुई वस्तु बाहर निकल सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/swollen-gums-and-poor-oral-health-could-raise-infertility-risk-new-study-warns-3137966&quot;&gt;Oral Health: बार-बार सूज रहे मसूड़े या खराब रहती है ओरल हेल्थ तो न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं बांझपन की शिकार&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/31/d762df2133a9b1b0d75be3ad21d53c1617802282685741094_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Best Sugar Options: वजन घटाने के लिए छोड़ रहे हैं शुगर, मीठे की जरूरत के लिए ये हैं हेल्दी ऑप्शन]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/if-you-avoid-sugar-for-losing-weight-for-sweet-need-healthy-sugar-option-list-3137950</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/if-you-avoid-sugar-for-losing-weight-for-sweet-need-healthy-sugar-option-list-3137950#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 17:15:57 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ लक्ष्य शर्मा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/if-you-avoid-sugar-for-losing-weight-for-sweet-need-healthy-sugar-option-list-3137950</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Best Sugar Options:&lt;/strong&gt; आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान के कारण बढ़ता वजन एक गंभीर समस्या बन चुका है. ऐसे में वजन घटाने के क्रम में सबसे पहला और जरूरी कदम सफेद चीनी को अपनी डाइट से पूरी तरह बाहर करना होता है. इस शुगर को एम्प्टी कैलोरी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोई पोषक तत्व नहीं होते और यह शरीर में सीधे फैट के रूप में जमा होती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब हम अचानक चीनी छोड़ देते हैं तो शरीर में शुगर क्रेविंग्स यानी मीठा खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है. इस स्थिति में खुद को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है और कई लोग अपनी वेट लॉस जर्नी बीच में ही छोड़ देते हैं. यहां ये बात ध्यान देने वाली है कि वजन घटाने का मतलब मीठे से हमेशा के लिए नाता तोड़ना नहीं है, बल्कि समझदारी से सही और सेहतमंद ऑप्शन चुनना है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ नेचुरल और हेल्दी ऑप्शन्स के बारे में, जो बिना वजन बढ़ाए आपके इस स्वीट लव को पूरा करते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/getting-pimples-before-your-period-your-body-could-be-sending-an-important-signal-3137090&quot;&gt;Pimples Before Periods: पीरियड्स से पहले चेहरे पर आने लगते हैं पिंपल्स, समझिए शरीर का ये खास इशारा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;1. स्टीविया-&lt;/strong&gt; स्टीविया एक नेचरल प्लांट है, जिसकी पत्तियों से मीठा पाउडर या ड्रॉप्स तैयार की जाती हैं. यह चीनी से लगभग 200 गुना अधिक मीठा होता है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट बिल्कुल नहीं होते हैं. वहीं, यह ब्लड शुगर और इंसुलिन के लेवल को भी प्रभावित नहीं करता है. वजन घटाने वाले लोगों और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह चीनी का सबसे सुरक्षित और बेहतरीन ऑप्शन है. इसे आप अपनी सुबह की चाय, कॉफी या नींबू पानी में आसानी से मिलाकर यूज कर सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;2. ताजे और &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt;ी फल-&lt;/strong&gt; जब भी दोपहर या शाम को मीठा खाने की तेज इच्छा हो, तो पेस्ट्री, चॉकलेट या बिस्कुट खाने के बजाय एक कटोरी ताजे फल खाएं. सेब, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, संतरा, अमरूद और पपीता जैसे फलों में नेचुरल स्वीट्नेस (फ्रुक्टोज) होती है. इसके साथ ही इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. फाइबर के कारण ये फल धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और पेट लंबे समय तक भरा रहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;3. खजूर-&lt;/strong&gt; ये बात तो आप जानते ही होंगे कि खजूर को प्रकृति का अनमोल उपहार माना जाता है. यह न केवल मीठा होता है बल्कि फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन का एक बेहतरीन सोर्स भी है. वजन घटाने के दौरान अगर आपको मीठे की तेज क्रेविंग हो, तो आप 1 या 2 खजूर खा सकते हैं. इसके अलावा, घर पर वजन घटाने वाली स्मूदी, ओट्स या हेल्दी शेक बनाते समय चीनी की जगह खजूर के पेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. &amp;nbsp;क्योंकि इसमें नेचुरल कैलोरी होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना ठीक रहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;4. कच्चा शहद-&lt;/strong&gt; सीमित मात्रा में लिया गया शुद्ध या जैविक शहद चीनी का एक बहुत अच्छा ऑप्शन है. सफेद चीनी के उलट, शहद में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर को पाचन क्षमता को दुरुस्त करते हैं.&amp;nbsp; सुबह गुनगुने पानी में आधा चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर के फैट को बर्न करने में मदद मिलती है. हालांकि, शहद में कैलोरी होती है, इसलिए इसका उपयोग केवल स्वाद बदलने के लिए कम मात्रा में ही करना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;5. गुड़-&lt;/strong&gt; सफेद चीनी के मुकाबले गुड़ एक बिना केमिकल प्रोसेस के तैयार किया गया बेहतर ऑप्शन है. वहीं, गुड़ में आयरन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी मिनरल्स होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं. भोजन करने के बाद अक्सर लोगों को मीठा खाने की आदत होती है, ऐसे में चीनी की बनी मिठाई की जगह एक छोटा टुकड़ा गुड़ खाने से मीठे की इच्छा भी शांत होती है और खाना भी आसानी से पच जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;6. मेवे-&lt;/strong&gt; बादाम, काजू और अखरोट जैसे मेवे प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर होते हैं ऐसे में इनका सेवन जरूर करना चाहिए साथ ही मीठे की तलब मिटाने के लिए मुट्ठी भर भुने हुए मेवों के साथ थोड़ी सी किशमिश मिलाकर खाने से काफी फायदा होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/which-mistake-not-doing-during-swimming-precaution-during-swimming-summer-3137264&quot;&gt;Precautions During Swimming: गर्मियों में स्वीमिंग करते वक्त कभी न करना ये गलती, वरना शरीर को हो जाएगा बड़ा नुकसान&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/31/800080c42602329a1766114df26a19e617802149708531417_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Ebola Virus: इबोला का नया स्ट्रेन ग्लोबल इमरजेंसी घोषित, इससे भारत को कितना डरना चाहिए?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/new-ebola-strain-declared-a-global-emergency-how-concerned-should-india-be-3137976</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/new-ebola-strain-declared-a-global-emergency-how-concerned-should-india-be-3137976#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 16:50:00 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/new-ebola-strain-declared-a-global-emergency-how-concerned-should-india-be-3137976</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Should India Be Worried About Ebola Virus:&lt;/strong&gt; दुनिया एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर सतर्क हो गई है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है और शुरुआती जेनेटिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह वायरस कई हफ्तों, संभव है कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस नए स्ट्रेन के व्यवहार और इसकी क्षमता को लेकर अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. ऐसे में दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस वायरस से डरने की जरूरत है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे फैलता है इबोला वायरस?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट &amp;nbsp;के अनुसार इबोला उन वायरसों में शामिल नहीं है जो हवा के जरिए तेजी से फैलते हैं. यह वायरस शरीर में तभी प्रवेश करता है जब इंफेक्टेड व्यक्ति के खून, लार, मल, यूरिन या अन्य शारीरिक द्रव के सीधे संपर्क में आया जाए. लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉ. डेविड हेमन, जिन्होंने 1976 में पहली बार इबोला पर स्टडी किया था, बताते हैं कि यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में मुख्य रूप से शारीरिक लिक्यूड के जरिए फैलता है. यही कारण है कि मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शरीर में कैसे फैलता है यह?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे इम्यून सिस्टम पर हमला करता है. जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ मेंज के वायरोलॉजी प्रोफेसर डॉ. बोडो प्लाख्टर के अनुसार वायरस पहले लसीका ग्लैंड में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर खून के जरिए शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच जाता है. &amp;nbsp;यह उन सेल्स को निशाना बनाता है जो सामान्य परिस्थितियों में शरीर को इंफेक्शन से बचाती हैं. जब यही इन्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है तो वायरस तेजी से पूरे शरीर में फैलने लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहचानना क्यों होता है मुश्किल?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इबोला की सबसे बड़ी चुनौती इसके शुरुआती लक्षण हैं. शुरुआत में मरीज को सामान्य बुखार, सर्दी, इंफेक्शन या मलेरिया जैसी परेशानी महसूस हो सकती है. कई बार मरीज को कुछ समय के लिए राहत भी महसूस होती है, लेकिन इसके बाद बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. डॉ. डेविड हेमन के अनुसार बाद के चरण में शरीर के विभिन्न हिस्सों से ब्लड निकलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. यही वह समय होता है जब मरीज सबसे ज्यादा संक्रामक होता है और इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत में क्या स्थिति है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब सवाल यह है कि भारत को कितना डरना चाहिए. मई 2026 तक भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट clinikk के एक्सपर्ट के आकलन के मुताबिक भारतीय आबादी के लिए फिलहाल सीधा खतरा कम है. देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निगरानी व्यवस्था, स्वास्थ्य जांच, बड़े अस्पतालों में त्वरित जांच सुविधाएं और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की चेतावनी सिस्टम संभावित मामलों की पहचान में मदद कर रही हैं. हालांकि अफ्रीकी देशों के साथ यात्रा और व्यापारिक संबंधों को देखते हुए सतर्कता बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/31/257d6220e4198af3828d34c7b4ddd4c117802138919871257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Oral Health: बार-बार सूज रहे मसूड़े या खराब रहती है ओरल हेल्थ तो न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं बांझपन की शिकार]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/swollen-gums-and-poor-oral-health-could-raise-infertility-risk-new-study-warns-3137966</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/swollen-gums-and-poor-oral-health-could-raise-infertility-risk-new-study-warns-3137966#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 15:47:40 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/swollen-gums-and-poor-oral-health-could-raise-infertility-risk-new-study-warns-3137966</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Poor Oral Health May Increase Infertility Risk:&lt;/strong&gt; महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले कारणों की बात होती है तो आमतौर पर हार्मोन, उम्र, लाइफस्टाइल या किसी बीमारी का जिक्र किया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके मसूड़ों की सेहत भी मां बनने की क्षमता पर असर डाल सकती है? हाल ही में सामने आए एक रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. रिसर्चर का कहना है कि मुंह में लंबे समय तक रहने वाली सूजन महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है और कुछ मामलों में बांझपन का खतरा भी बढ़ा सकती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे यह फर्टिलिटी को प्रभावित करता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के रिसर्चर ने अपने इस स्टडी में पाया गया कि मुंह में लगातार बनी रहने वाली सूजन केवल दांतों और मसूड़ों तक सीमित नहीं रहती. यह शरीर में इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को बढ़ाकर दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकती है, जिनमें ओवरी भी शामिल हैं. स्टडी के एनालिसिस जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च में पब्लिश किए गए हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किस चीज पर किया गया रिसर्च?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिसर्च के दौरान साइंटिस्ट ने चूहों पर स्टडी किया और दांतों से जुड़ी सूजन की स्थिति का एनालिसिस किया. जांच में सामने आया कि मुंह में होने वाली सूजन से निकलने वाले संकेत पूरे शरीर में फैल जाते हैं और ओवरी तक पहुंच सकते हैं. इसका रिजल्ट ओवरी में सूजन बढ़ाने वाले केमिकल का स्तर अधिक पाया गया. इसके साथ ही इम्यून सिस्टम में बदलाव, टिश्यू को नुकसान और एग्स की क्वालिटी में गिरावट भी देखी गई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानवरों पर किए गए रिसर्च का किया निकला रिजल्ट?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिसर्चर ने यह भी पाया कि जिन एग्स पर सूजन का असर पड़ा, वहां एग्स के विकास की प्रक्रिया प्रभावित हो गई. ओवरी में मौजूद छोटी थैलियां, जिनमें एग्स विकसित होते हैं, उनकी वृद्धि सामान्य नहीं रही. इसके कारण एग्स की क्वालिटी कमजोर हुई और सफल प्रेग्नेंसी की संभावना कम होती दिखाई दी. स्टडी में शामिल जानवरों में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या भी कम दर्ज की गई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;लंबे समय तक रहने वाले सूजन का क्या होता है असर?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि एग्स में डीएनए को नुकसान पहुंचने और जीन के काम करने के तरीके में बदलाव के संकेत भी मिले. रिसर्चर के अनुसार ये बदलाव काफी हद तक वैसे ही थे जैसे बढ़ती उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में गिरावट के दौरान देखे जाते हैं. इससे संकेत मिलता है कि लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन महिलाओं की फर्टिलिटी क्षमता को समय से पहले प्रभावित कर सकती है. स्टडी &amp;nbsp;का नेतृत्व करने वाले माइकल क्लटस्टाइन ने कहा कि अक्सर सूजन को केवल स्थानीय समस्या माना जाता है, लेकिन हमारे एनालिसिस बताते हैं कि इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि मुंह में लगातार बनी रहने वाली सूजन महिलाओं में बांझपन का एक ऐसा कारण हो सकती है, जिस पर अभी तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/31/7435e93fdc43b44e221f2c6cda4e66c417802130877281257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Medicine MRP rules India: सरकार ने तय किए 30 जरूरी दवाओं के दाम, अब MRP से ज्यादा नहीं वसूल सकेंगे दुकानदार]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/govt-fixes-mrp-of-30-essential-medicines-nppa-diabetes-bp-india-3137924</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/govt-fixes-mrp-of-30-essential-medicines-nppa-diabetes-bp-india-3137924#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 12:05:41 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ वरुण भसीन ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/govt-fixes-mrp-of-30-essential-medicines-nppa-diabetes-bp-india-3137924</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आप या आपके घर में कोई डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या हड्डियों की कमजोरी से जूझ रहा है तो यह खबर आपके काम की है. सरकार ने ऐसी 30 जरूरी दवाओं के अधिकतम दाम तय कर दिए हैं, जो रोज या लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं. इसका मतलब है कि अब कोई भी दवा दुकानदार इन दवाओं पर तय MRP से एक रुपया भी ज्यादा नहीं ले सकता. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA ने 27 मई 2026 अब आदेश जारी कर किया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;महंगी दवाओं की असली समस्या क्या है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत में दवाओं की कीमत को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यह रहती है कि एक ही दवा अलग-अलग ब्रांड के नाम पर बाजार में बहुत अलग दामों पर बिकती है. जो दवा एक दुकान पर 15 रुपये में मिलती है, वही दूसरी दुकान पर 40 रुपये में मिलती है. मरीज को पता नहीं चलता कि सही दाम क्या है और डॉक्टर जो ब्रांड लिखे वही खरीदने की मजबूरी होती है. इसके अलावा जो दवाएं नई होती हैं, या जिनका अभी तक सरकारी दाम तय नहीं हुआ होता, उन्हें कंपनियां अपनी मर्जी से जितना चाहें उतने दाम पर बेच सकती हैं. यही वजह है कि डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसी लंबी चलने वाली बीमारियों में हर महीने दवाओं का बिल हजारों रुपये तक पहुंच जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अब क्या बदलेगा?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;NPPA के इस आदेश के बाद इन 30 दवाओं का MRP सरकार ने खुद तय कर दिया है. अब चाहे कोई भी कंपनी हो चाहे कोई भी दुकान हो इन दवाओं पर तय दाम से ज्यादा नहीं लिया जा सकता. अगर कोई दुकानदार ज्यादा वसूलता है तो वह कानून तोड़ रहा है और उस पर कार्रवाई हो सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किस बीमारी की कौन-सी दवा कितने में मिलेगी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डायबिटीज के मरीजों के लिए Vildagliptin और Metformin की कॉम्बो टैबलेट अब 9.79 रुपये प्रति टैबलेट से ज्यादा पर नहीं बिकेगी.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;Sitagliptin, Glimepiride और Metformin की टैबलेट 10.39 से 11.91 रुपये प्रति टैबलेट पर तय हुई है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;Teneligliptin और Dapagliflozin की कॉम्बो टैबलेट 10.17 रुपये तय हुई है. यह दवाएं रोज लेनी पड़ती हैं इसलिए महीने में 30 गोलियों का हिसाब लगाएं तो तय दाम पर 300 से 360 रुपये से ज्यादा नहीं देना होगा.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दिल और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए Bisoprolol और Amlodipine की कॉम्बो 7.31 से 9.40 रुपये प्रति टैबलेट पर तय हुई है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;Cilnidipine और Telmisartan की टैबलेट 12.98 से 14.95 रुपये पर तय हुई है. Atorvastatin और Fenofibrate की कोलेस्ट्रॉल की दवा 18.46 रुपये प्रति टैबलेट पर तय हुई है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हड्डियों और पोषण की कमी के लिए Vitamin D3 Oral Solution 14.91 से 15.88 रुपये प्रति ml पर तय हुई है. कैल्शियम, Vitamin D3, Methylcobalamin और L-Methylfolate Calcium की मिलीजुली टैबलेट 19.78 रुपये पर तय हुई है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट के बाद दी जाने वाली Tacrolimus Prolonged Release Capsule की MRP 127 रुपये प्रति कैप्सूल तय हुई है जो काफी महंगी दवा मानी जाती है और इसका दाम तय होना ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए बड़ी राहत है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एलर्जी और दमे की Bilastine और Montelukast टैबलेट 21.22 रुपये पर और बुखार-दर्द की Paracetamol, Phenylephrine और Chlorpheniramine की टैबलेट मात्र 5.15 रुपये पर तय हुई है.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आप क्या कर सकते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दवा खरीदते वक्त पट्टी या डिब्बे पर लिखा MRP जरूर देखें. अगर दुकानदार MRP से ज्यादा मांग रहा है तो मना कर सकते हैं. NPPA के नियमों के मुताबिक, हर दवा दुकान पर प्राइस लिस्ट लगाना जरूरी है. शिकायत करनी हो तो NPPA की वेबसाइट nppa.gov.in पर जा सकते हैं या राज्य के ड्रग कंट्रोलर दफ्तर में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. यह आदेश Akums Drugs, Alkem Wellness, Zydus Lifesciences, Ipca Laboratories, Dr. Reddy's Laboratories, Intas Pharmaceuticals, Mankind Pharma और Macleods Pharmaceuticals जैसी बड़ी कंपनियों पर लागू है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-postmortem-reveals-the-real-cause-of-death-what-human-organs-tell-experts-3132751&quot;&gt;पोस्टमॉर्टम से कैसे पता लगती है मौत की वजह, जानिए क्या संकेत देते हैं शरीर के ऑर्गन?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/31/a9c6f72c4b7d2ce8b802359602ccb23517802093258141257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Postmortem: पोस्टमॉर्टम से कैसे पता लगती है मौत की वजह, जानिए क्या संकेत देते हैं शरीर के ऑर्गन?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-postmortem-reveals-the-real-cause-of-death-what-human-organs-tell-experts-3132751</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-postmortem-reveals-the-real-cause-of-death-what-human-organs-tell-experts-3132751#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 10:32:32 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-postmortem-reveals-the-real-cause-of-death-what-human-organs-tell-experts-3132751</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;How Doctors Find Cause Of Death In Postmortem:&lt;/strong&gt; पोस्टमॉर्टम यानी ऑटोप्सी सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह मौत के पीछे छिपी असली वजह तक पहुंचने का सबसे अहम तरीका मानी जाती है. जब किसी व्यक्ति की अचानक, संदिग्ध या असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है, तब डॉक्टर शरीर के हर महत्वपूर्ण अंग की बारीकी से जांच करते हैं. इसी जांच के जरिए यह समझा जाता है कि आखिर मौत कैसे और किन कारणों से हुई.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे पता चलता है मौत के बारे में?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नेशनल हेल्थ सर्विस के मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शरीर का हर ऑर्गन मौत से पहले की स्थिति के बारे में कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है. उदाहरण के लिए अगर दिल की आर्टरीज में ब्लॉकेज, सूजन या खून का थक्का दिखाई दे, तो हार्ट अटैक की संभावना मानी जाती है. वहीं लंग्स में पानी भरना, इंफेक्शन या जलन जैसे संकेत सांस रुकने, जहरीली गैस या फेफड़ों की बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं. &amp;nbsp;ब्रेन की जांच भी पोस्टमॉर्टम का बेहद अहम हिस्सा होती है. यदि दिमाग में ब्लीडिंग, सूजन या चोट के निशान मिलते हैं, तो एक्सपर्ट्स इसे स्ट्रोक, सिर पर चोट या किसी बाहरी हमले से जोड़कर देखते हैं. इसी तरह लीवर और किडनी की स्थिति से शरीर में जहर, ड्रग्स या लंबे समय से चली आ रही बीमारी का अंदाजा लगाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;रिपोर्ट में क्यों लगता है समय?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दरअसल, पोस्टमॉर्टम के दौरान सिर्फ आंखों से देखकर ही फैसला नहीं लिया जाता. कई बार ऑर्गन और टिश्यू के छोटे सैंपल लेकर उन्हें लैब में भेजा जाता है. वहां माइक्रोस्कोप और केमिकल टेस्ट के जरिए बीमारी, इंफेक्शन, जहर या शरीर के अंदरूनी नुकसान का पता लगाया जाता है. यही वजह है कि कई मामलों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने में कई हफ्तों का समय लग जाता है. ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स और ह्यूमन टिश्यू अथॉरिटी के मानकों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम सिर्फ मौत की वजह जानने के लिए ही नहीं, बल्कि बीमारियों को बेहतर तरीके से समझने और भविष्य में इलाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी किया जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;छोटे- छोटे जांच होते हैं जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट्स बताते हैं कि शरीर पर मौजूद छोटे-छोटे निशान भी जांच में बेहद अहम साबित होते हैं. त्वचा का रंग बदलना, नाखूनों का नीला पड़ना, शरीर पर चोट या गला दबने के निशान जैसे संकेत मौत के तरीके को समझने में मदद करते हैं. कई बार अंदरूनी अंगों की स्थिति और बाहरी चोटों के बीच तुलना करके यह तय किया जाता है कि मौत नेचुरल थी, हादसा था या फिर किसी अपराध से जुड़ी हुई. पोस्टमॉर्टम के बाद पैथोलॉजिस्ट अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिसमें मौत की संभावित वजह, शरीर के अंदर मिले संकेत और लैब टेस्ट के नतीजे शामिल होते हैं. यही रिपोर्ट बाद में पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/20/5d50836ae43a5118774d68f968496de217792685307711257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[65 Minute Max For 10000 Steps: पार्क या जिम जाने का नहीं है टाइम? घर पर ऐसे पूरे करें 10000 स्टेप, वह भी महज 65 मिनट में]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-complete-your-10000-steps-at-your-home-3137745</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-complete-your-10000-steps-at-your-home-3137745#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 10:25:19 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-complete-your-10000-steps-at-your-home-3137745</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;65 Minute Max For 10000 Steps: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना हर किसी की को अच्छा लगता है. लेकिन समय की कमी और ऑफिस के लंबे काम की वजह से रोजाना 10,000 कदम चलना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है. अगर आप भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फिटनेस कोचों ने एक ऐसा आसान तरीका बताया है, जिसकी मदद से आप घर के अंदर ही सिर्फ 65 मिनट में 10,000 कदम पूरे कर सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;10,000 कदम चलने से क्या होता है?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्वास्थ्य जानकारों के अनुसार रोजाना 10,000 कदम चलने से शरीर पूरे दिन एक्टिव रहता है. इससे वजन नियंत्रित रखने, कैलोरी बर्न करने, दिल को स्वस्थ रखने और शरीर की फिटनेस सही रखने में मदद मिलती है. रोजाना चलने से तनाव भी कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-lose-extra-body-weight-decreases-extra-belly-fat-slim-body-zero-size-figure-exercise-health-tips-3135853&quot;&gt;Fix the Fitness: रोज कसरत करने के बावजूद भी नहीं घट रहा वजन? अपनाएं ये तीन तरीके, जीरो साइज हो जाएगा फिगर&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर पर कैसे पूरे कर सकते हैं 10,000 कदम?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर सही गति से चला जाए तो 65 मिनट में 10,000 कदम पूरे करने के लिए आपको लगभग 167 कदम हर मिनट चलना होगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे पहले शरीर को एक्टिव करें.&amp;nbsp; 5 मिनट तक हल्का वार्म-अप करें. इससे शरीर तैयार हो जाता है और चोट लगने का खतरा भी कम हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके बाद एक जगह पर खड़े होकर घुटनों को ऊपर उठाते हुए तेज गति से मार्च करें. यह एक्सरसाइज तेजी से स्टेप्स बढ़ाने में मदद करती है और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर में मौजूद किसी मजबूत सीढ़ी या स्टेप का इस्तेमाल करके चढ़ें और उतरें. इससे कम समय में ज्यादा कदम पूरे किए जा सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चलते हुए लंज करना भी एक शानदार तरीका है. इससे न सिर्फ कदम बढ़ते हैं बल्कि पैरों और कमर की अच्छी एक्सरसाइज भी हो जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रोजाना सीढ़ियां चढ़ने की आदत बनाएं, अगर आपके घर में सीढ़ियां हैं तो उनका इस्तेमाल जरूर करें. सीढ़ियां चढ़ना और उतरना तेजी से स्टेप्स बढ़ाने का सबसे आसान तरीका माना जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/what-is-digital-detox-ignore-it-now-and-your-home-could-slowly-turn-into-a-stress-trap-3136210&quot;&gt;Digital Detox: क्या है डिजिटल डिटॉक्स? जल्द नहीं समझे तो घेर लेंगी बीमारियां, नर्क बन जाएगा घर&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/30/c55318e359580309ce63b070f62c7fa317801556420771424_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[क्या खराब ओरल हेल्थ बन रही मां बनने में दिक्कत? फर्टिलिटी को लेकर नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-new-study-reveals-link-between-poor-oral-health-and-female-fertility-problems-3137672</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-new-study-reveals-link-between-poor-oral-health-and-female-fertility-problems-3137672#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 09:03:50 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ कविता गाडरी ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-new-study-reveals-link-between-poor-oral-health-and-female-fertility-problems-3137672</guid><description><![CDATA[क्या खराब ओरल हेल्थ बन रही मां बनने में दिक्कत? फर्टिलिटी को लेकर नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/30/9923339ab3a58dfccb8efd6d36735c6917801420291161094_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Heel Pain Is A Big Problem: सुबह उठते ही एड़ियों में होता है तेज दर्द, जानें यह किस बीमारी का संकेत?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/do-not-take-lightly-your-heel-pain-3137772</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/do-not-take-lightly-your-heel-pain-3137772#respond</comments><pubDate>Sun, 31 May 2026 08:26:07 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/do-not-take-lightly-your-heel-pain-3137772</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;HEEL Pain Is A Big Problem:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह बिस्तर से नीचे पैर रखते ही एड़ी में सुई चुभने जैसा तेज दर्द होता है? सुबह के कुछ कदम चलना आपके लिए एक सजा जैसा बन जाता है? &amp;nbsp;तो इसे मामूली थकान या कमजोरी समझकर भूलने की गलती बिल्कुल न करें. यह आपके शरीर में हो रही एक खास बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसे मेडिकल साइंस में प्लांटर फैशियटिस कहा जाता है. आइए समझते हैं इस बीमारी के बारे में और इससे बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्यों होता है सुबह-सुबह एड़ियों में दर्द?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हमारे पैर के तलवे में एड़ी की हड्डी से लेकर उंगलियों तक एक मोटी और मजबूत टिशू की पट्टी होती है, जिसे प्लांटर फैशिया कहते हैं. यह पट्टी चलते या दौड़ते समय हमारे पैरों को झटके से बचाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब इस पट्टी पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, तो इसमें छोटे-छोटे बारीक कट लग जाते हैं और सूजन आ जाती है. रात को सोते समय हमारे पैर आराम की मुद्रा में होते हैं, जिससे यह टिशू सिकुड़ जाता है. जैसे ही सुबह उठकर आप पहला कदम जमीन पर रखते हैं, यह सिकुड़ा हुआ टिशू अचानक से दोबारा खिंच जाता है और आपको बहुत तेज दर्द का अहसास होता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किस वजह से होती है यह बीमारी?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;शरीर का बढ़ा हुआ मोटापा एड़ियों पर सीधा और बहुत ज्यादा दबाव डालता है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बहुत पतले या बिना आर्च सपोर्ट वाले चप्पल-जूते पहनने से भी तलवों को नुकसान पहुंचता है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यदि आपका काम ऐसा है जिसमें आपको घंटों लगातार खड़े रहना पड़ता है, तो भी आपको यह दिक्कत हो सकती है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&amp;nbsp;शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने, हड्डियों के कमजोर होने या विटामिन डी की कमी से भी एड़ियों में दर्द बढ़ जाता है.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/what-we-do-for-better-sleep-in-night-tips-for-better-sleep-3136192&quot;&gt;Tips for Comfortable Sleep: रात को नहीं आ रही नींद, करें ये काम और चैन से सो जाएं&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह घरेलू उपाय जिनसे मिल सकता है राहत&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&amp;nbsp;दिन में 2 से 3 बार अपनी एड़ी पर 15 मिनट के लिए बर्फ से सिकाई करें, इससे सूजन कम होगी.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बिस्तर से उठने से पहले अपने पैरों और उंगलियों को आगे-पीछे स्ट्रेच करें ताकि पैर एकाएक न खिंचे.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हमेशा मोटे कुशन वाले और आरामदायक फुटवियर पहनें. घर के अंदर भी नंगे पैर चलने से बचें.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&amp;nbsp;यदि यह दर्द लगातार कई दिनों तक बना रहे और चलने-फिरने में ज्यादा दिक्कत होने लगे, तो तुरंत किसी आर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लें.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heatwave-alert-doctors-warn-extreme-heat-can-trigger-brain-eye-and-kidney-complications-3135540&quot;&gt;Heatwave Health Risks: हीटवेव से ब्रेन और किडनी पर हो रहा असर, गर्मी के इन खतरनाक लक्षणों को कतई न करें इग्नोर&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/30/b02b7138b6c978f265a071fa0daa300017801599047301424_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>