<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>Skin Whitening Cream: रातोंरात गोरा बनाने वाली क्रीमों में मिला जरूरत से ज्यादा मरकरी और लेड, इससे कितना नुकसान?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/health/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Thu, 16 Jul 2026 13:13:50 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[Monsoon Health Care Tips: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/children-fall-ill-easily-during-monsoon-season-know-health-tips-3160390</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/children-fall-ill-easily-during-monsoon-season-know-health-tips-3160390#respond</comments><pubDate>Thu, 16 Jul 2026 11:44:35 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/children-fall-ill-easily-during-monsoon-season-know-health-tips-3160390</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Monsoon Health Care Tips:&lt;/strong&gt; बच्चे कितने जिद्दी होते हैं यह तो हम सब जानते है और खेलने के मामले में तो वे किसी की नहीं सुनते. बस जब मन करें घर से खेलने निकल जाते हैं. चाहें बारिश हो या धूप, उनको बस खेलने से मतलब हैं. ऐसे में पेरेंट्स के सामने सबसे बड़ी परेशानी होती है बदलते मौसम में बच्चों को बारिश में भीगने से रोकना. क्योंकि बारिश के पानी में भीगने के बाद बच्चे कई बार तो बिना कपड़े बदले और बिना नहाऐ ही दूसरे कामों में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में पेरेंट्स को बारिश के मौसम में बच्चों का ज्यादा ख्याल रखना होता है. आइए जानता है पेरेंट्स को क्या करना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मानसून में कैसे रखें बच्चों का ख्याल?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बारिश के मौसम में नमी और दूषित पानी के वजह से बुखार, खांसी, डेंगू, और पेट सम्बन्धी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसका असर बच्चों पर ज्यादा देखने को मिलता है. ऐसे में बच्चों के खान-पान और पानी का पूरा ख्याल रखना जरूरी होता है. साथ ही बच्चों को बाहर के खान-पान से दूर रखें और उन्हें हमेशा साफ और उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ ही पानी पिलाएं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यदि बच्चे बारिश में भीग जाएं तो तुरंत उन्हें सूखे तौलिये से साफ करके सूखे कपड़े पहनाएं क्योंकि नमी के कारण बच्चों में फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही बारिश के दौरान मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में इस समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाना चाहिए. इसके अलावा बच्चों की डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल और विटामिन C से भरपूर चीजें शामिल करें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/food/healthy-millet-khichdi-kids-will-love-know-full-recipe-here-3159917&quot;&gt;&lt;strong&gt;Healthy Millet Khichdi Kids Will Love: घर में रखे इन मोटे अनाजों से ऐसे बनाएं हेल्दी और स्वादिष्ट खिचड़ी, उंगलियां चाटने लगेंगे बच्चे&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;साफ-सफाई का रखें पूरा ख्याल&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बारिश के मौसम में साफ-सफाई का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि कई सारी बिमारियों का असली कारण गंदगी ही होता है. इसलिए ध्यान रखें कि बारिश के मौसम में घर के आसपास पानी इकट्टा न होने दें, क्योंकि इससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां का खतरा बड़ जाता है. हमेशा ध्यान रखें की बच्चे गीले मोजे और गीले कपड़े न पहनें, क्योंकि इससे शरीर ठंडा रहता है जिससे निमोनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;अगर आप बारिश के मौसम में इन सब चीजों का ख्याल रखते है और अपने बच्चों को सिखाते हैं कि बारिश के मौसम उन्हें किन-किन बातों का सबसे ज्यादा ख्याल रखना है, तो आप इस बारिश के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में अपने बच्चों के लिए स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर निर्णय ले पाएंगे.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-monsoon-pregnancy-care-tips-for-mother-to-be-3159501&quot;&gt;Pregnancy in Monsoon: मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p class=&quot;article-pg-title&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/15/52f32fb9390e5a22ec7613b4ab3f613717841084448461474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[AIIMS Delhi ने रचा इतिहास! 4 महीने के मासूम की दुनिया की सबसे दुर्लभ लंग सर्जरी सफल]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/aiims-delhi-successfully-performs-rare-cpam-lung-surgery-on-4-month-old-baby-3160602</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/aiims-delhi-successfully-performs-rare-cpam-lung-surgery-on-4-month-old-baby-3160602#respond</comments><pubDate>Thu, 16 Jul 2026 06:47:19 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ उज्ज्वल कुमार ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/aiims-delhi-successfully-performs-rare-cpam-lung-surgery-on-4-month-old-baby-3160602</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;AIIMS दिल्ली के डॉक्टरों ने महज चार महीने के एक बच्चे की बेहद जटिल फेफड़ों की सर्जरी सफलतापूर्वक की. बच्चे में जन्म से पहले ही दोनों फेफड़ों से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी कंजेनिटल पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (CPAM) का पता चला था. डॉक्टरों ने पूरे फेफड़े का हिस्सा निकालने के बजाय सिर्फ खराब हिस्से को हटाया, जिससे बच्चे के स्वस्थ फेफड़े के हिस्से को बचाया जा सका. इस सर्जरी की खास बात यह रही कि ऑपरेशन के महज दो दिन बाद ही बच्चे को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;AIIMS के मुताबिक, 4 महीने के इतने छोटे बच्चे में इस तरह की सेगमेंटेक्टॉमी (फेफड़े के सिर्फ प्रभावित हिस्से को हटाने की सर्जरी) दुनिया में सामने आए सबसे कम उम्र के और बेहद दुर्लभ मामलों में शामिल है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है CPAM बीमारी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डॉक्टरों के मुताबिक, कंजेनिटल पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (CPAM) फेफड़ों की एक जन्मजात बीमारी है. इसमें गर्भ में बच्चे के फेफड़े का कोई हिस्सा ठीक से विकसित नहीं हो पाता और वहां सिस्ट यानी छोटी-छोटी थैली जैसी संरचनाएं बन जाती हैं. यह हिस्सा सामान्य फेफड़े की तरह काम नहीं कर पाता.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आमतौर पर यह बीमारी एक ही फेफड़े में होती है, लेकिन इस बच्चे के दोनों फेफड़े प्रभावित थे. ऐसे में डॉक्टर पूरे फेफड़े का बड़ा हिस्सा नहीं निकाल सकते थे, क्योंकि इससे भविष्य में बच्चे के पास पर्याप्त स्वस्थ फेफड़ा नहीं बचता. ऐसे में डॉक्टरों ने सिर्फ बीमारी वाले हिस्से को हटाने का फैसला किया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्यों मुश्किल थी यह सर्जरी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फेफड़े कई छोटे-छोटे हिस्सों में बंटे होते हैं, जिन्हें सेगमेंट कहा जाता है. पूरे हिस्से को निकालना आसान होता है, लेकिन सिर्फ खराब हिस्से को निकालना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि फेफड़े के अंदर मौजूद नसों और सांस की नलियों को बहुत सावधानी से अलग करना पड़ता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस बच्चे के दाएं फेफड़े के निचले हिस्से के सेगमेंट-9 और सेगमेंट-10 को हटाया गया. डॉक्टरों के मुताबिक, ये फेफड़े के सबसे मुश्किल हिस्सों में माने जाते हैं, क्योंकि इनकी नसें और सांस की नलियां फेफड़े के अंदर काफी गहराई में होती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;AIIMS की टीम ने किया ऑपरेशन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस सर्जरी का नेतृत्व AIIMS दिल्ली के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर विशेष जैन ने किया. ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अभिषेक ने बच्चे की सांस को सुरक्षित रखने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;AIIMS के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि इतने छोटे बच्चे में इस तरह की सर्जरी करना बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने बताया कि यह सफलता पूरी टीम की मेहनत और AIIMS की आधुनिक सुविधाओं की वजह से संभव हो पाई. AIIMS के मुताबिक, ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्चे को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. सर्जरी के दो दिन बाद ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुछ महीने बाद होगी बाएं फेफड़े की सर्जरी&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डॉक्टरों के मुताबिक, अभी बच्चे के दाएं फेफड़े का इलाज किया गया है, क्योंकि बीमारी दोनों फेफड़ों में थी, इसलिए बाएं फेफड़े के प्रभावित हिस्से की सर्जरी कुछ महीनों बाद की जाएगी. तब तक डॉक्टर बच्चे की लगातार निगरानी करेंगे. डॉक्टरों को उम्मीद है कि फेफड़े के स्वस्थ हिस्से को बचाने वाली इस सर्जरी से बच्चे की आगे की जिंदगी में फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-increase-fiber-without-eating-salad-add-these-4-homemade-foods-to-your-daily-diet-for-clean-stomach-and-better-digestion-3160220&quot;&gt;बिना सलाद खाए फाइबर कैसे बढ़ाएं? रोज के खाने में इन 4 देसी चीजों को मिलाकर पेट रखें एकदम साफ&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/15/59a25aba020ded992f5037836cd194d017841373783911257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Dengue Outbreak in Mumbai: बारिश के साथ बढ़ा बीमारियों का खतरा! मुंबई में डेंगू-स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़े]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/mumbai-dengue-leptospirosis-swine-flu-cases-rise-in-this-monsoon-know-how-to-stay-safe-3160487</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/mumbai-dengue-leptospirosis-swine-flu-cases-rise-in-this-monsoon-know-how-to-stay-safe-3160487#respond</comments><pubDate>Thu, 16 Jul 2026 01:05:40 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/mumbai-dengue-leptospirosis-swine-flu-cases-rise-in-this-monsoon-know-how-to-stay-safe-3160487</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Dengue Outbreak in Mumbai:&lt;/strong&gt; देश भर में मानसून ने अपना आगमन शुरू कर दिया है, लेकिन मुंबई में इसका असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है. मुंबई में लगातार धाराधार बारिश की खबरें सामने आती जा रही हैं. यह परेशानी अभी खत्म हुई नहीं थी कि अब नई परेशानी ने अपना आगमन दे दिया है.&amp;nbsp; वह है डेंगू, लेप्टोस्पायरोसिस और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा, जो फिर से बढ़ गया है.&amp;nbsp; इसका कारण साफ है कि शहर भर में भारी बारिश के कारण जगह-जगह पानी और गंदगी का इकट्ठा हो जाना. यही वजह है कि इन बीमारियों के मामले बढ़ने लगे हैं. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि इन बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखा जाए. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&lt;/p&gt;
&lt;h2 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मुंबई में क्यों बढ़ रहा है बीमारियों का खतरा?&lt;/h2&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मुंबई में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसके कारण शहर के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक जमे हुए पानी में चलने से लोगों के बीच लेप्टोस्पायरोसिस होने का खतरा ज्यादा होता है, खासकर तब अगर उनके शरीर पर कट, घाव या मामूली खरोंच हो. यही वजह है कि हाल ही में BMC &amp;nbsp;(Brihanmumbai Municipal Corporation) ने चेतावनी देते हुए लोगों से अपील की है कि वे इन बीमारियों से खुद को बचाएं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस बात को गंभीरता से लेने के पीछे इसके बढ़ते आंकड़े हैं.&amp;nbsp; बता दें कि पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार जुलाई के आखिरी हफ्तों में डेंगू के मामलों में करीब 58 प्रतिशत और लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में करीब 79 प्रतिशत तक की तेज बढ़ोतरी देखी गई थी. इस साल भी मानसून के दौरान ऐसे ही हालात बनने का खतरा बना हुआ है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/fashion/nita-ambani-banarasi-saree-fortune-most-powerful-women-event-3159220&quot;&gt;&lt;strong&gt;Nita Ambani Saree: नीता अंबानी ने हीरों के गहनों संग दिखाई शाही शान, 2 महीने में तैयार हुई यह बनारसी साड़ी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h2 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;BMC की तैयारी और सावधानी की सलाह&lt;/h2&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;BMC ने लोगों को सतर्क रहने के साथ-साथ मानसून से पहले ही इस समस्या से निपटने के लिए बड़ा अभियान शुरू कर दिया था.&amp;nbsp; जिसमें निगम के कीटनाशक विभाग ने कुछ महीनों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में हजारों बार दौरा किया और 30 लाख से ज्यादा घरों के आसपास फॉगिंग करवाई, ताकि मच्छरों के पैदा होने की जगहों को खत्म किया जा सके.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि जो लोग जमा हुए बारिश के पानी या कीचड़ से होकर गुजरे हैं, वे 24 से 72 घंटों के भीतर डॉक्टर की सलाह लें. साथ ही विभाग ने यह भी कहा कि मानसून के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे में उन्हें घरेलू उपाय करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/fashion/how-to-look-classy-and-attractive-without-spending-a-fortune-know-5-grooming-tips-3159596&quot;&gt;&lt;strong&gt;Grooming Tips : बिना ज्यादा पैसे खर्च किए कैसे दिखें एकदम क्लासी और अट्रैक्टिव? ग्रूमिंग के 5 अचूक टिप्स&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/15/8a97adde00c3ad87dc78d194efa8270d17841155483691381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Fiber Rich Foods : बिना सलाद खाए फाइबर कैसे बढ़ाएं? रोज के खाने में इन 4 देसी चीजों को मिलाकर पेट रखें एकदम साफ]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-increase-fiber-without-eating-salad-add-these-4-homemade-foods-to-your-daily-diet-for-clean-stomach-and-better-digestion-3160220</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-increase-fiber-without-eating-salad-add-these-4-homemade-foods-to-your-daily-diet-for-clean-stomach-and-better-digestion-3160220#respond</comments><pubDate>Wed, 15 Jul 2026 20:25:36 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-increase-fiber-without-eating-salad-add-these-4-homemade-foods-to-your-daily-diet-for-clean-stomach-and-better-digestion-3160220</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Fiber Rich Foods : &lt;/strong&gt;आजकल ज्यादातर लोग पेट साफ न होना, कब्ज, गैस और पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं. ऐसे में अक्सर सबसे पहले सलाद खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि कई लोग रोजाना सलाद खाना पसंद नहीं करते या फिर इसे अपनी डाइट में नियमित रूप से शामिल नहीं कर पाते हैं. ऐसे में शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ाने के लिए सिर्फ सलाद पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. डेली के खाने में मौजूद कुछ आसान और देसी चीजों की मदद से भी पूरी मात्रा में फाइबर लिया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करता है, बल्कि कब्ज से राहत देने, लंबे समय तक पेट भरा रखने और दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के खतरे को कम करने में भी जरूरी होता है. तो आइए जानते हैं कि बिना सलाद खाए किन 4 चीजों को डाइट में शामिल करके फाइबर बढ़ाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शरीर के लिए फाइबर क्यों जरूरी है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फाइबर एक तरह का कार्बोहाइड्रेट है, जो पौधों से मिलने वाले फूड प्रोडक्ट्स में पाया जाता है. यह फल, सब्जियां, दालें, बीन्स, मटर, आलू, चावल, ब्रेड, पास्ता, मेवे और बीज जैसी चीजों में मौजूद होता है. फाइबर पाचन तंत्र को हेल्दी रखने, कब्ज से बचाने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. कई रिसर्च में यह भी बताया गया है कि फाइबर से भरपूर डाइट दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, रोज लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना जरूरी है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आजकल बाजार में फाइबर पाउडर और सप्लीमेंट आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन इन्हें हमेशा सबसे अच्छा ऑप्शन नहीं माना जाता है. कई बार इनके सेवन से पेट फूलना या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है. वहीं फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसे नेचुरल फाइबर वाले फूड प्रोडक्ट्स शरीर को फाइबर के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल भी देते हैं. इसलिए फाइबर की जरूरत पूरी करने के लिए नेचुरल फूड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/can-teeth-regrow-naturally-new-research-on-dental-stem-cells-explained-3124430&quot;&gt; Tooth Regeneration: क्या खत्म होने वाली है नकली दांतों की जरूरत? शरीर खुद उगा सकेगा अपने दांत!&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बिना सलाद खाए फाइबर बढ़ाने वाली 4 देसी चीजें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;1. चिया सीड्स -&lt;/strong&gt; अगर आप बिना ज्यादा मेहनत के फाइबर बढ़ाना चाहते हैं, तो चिया सीड्स अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं. सिर्फ 2 बड़े चम्मच चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर होता है. इन्हें पानी में भिगोकर, दही में मिलाकर या स्मूदी में डालकर खाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;2. लें और बीन्स -&lt;/strong&gt; चना, राजमा, लोबिया, मटर और मसूर जैसी दालें फाइबर और प्रोटीन दोनों का अच्छा स्रोत हैं. लगभग 1 कप पकी हुई दाल या बीन्स में 12 से 15 ग्राम तक फाइबर मिल सकता है. इन्हें दाल, करी, चाट, सूप या सलाद में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;3. ओट्स या जौ -&lt;/strong&gt; ओट्स और जौ भी फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं. 1 कप पके हुए ओट्स या जौ में लगभग 5 से 6 ग्राम फाइबर होता है. ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकॉन नाम का फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है. इन्हें नाश्ते में दलिया, ओवरनाइट ओट्स या दूसरे तरीकों &amp;nbsp;से खाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;4. इसबगोल -&lt;/strong&gt; इसबगोल (Psyllium Husk) फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है. 1 बड़ा चम्मच इसबगोल में लगभग 7 से 10 ग्राम फाइबर होता है. यह मल को नरम बनाने और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है. इसे रात में गुनगुने पानी या दूध के साथ लिया जा सकता है. इसबगोल को सिर्फ पानी या दूध के साथ ही नहीं, बल्कि ब्रेड, रोटी, केक और अन्य बेक की जाने वाली रेसिपी में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है, जबकि टेस्ट पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;फाइबर बढ़ाने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फाइबर बढ़ाने के लिए आप अपनी डाइट में ब्राउन राइस, होल व्हीट ब्रेड, ओट्स और होल व्हीट पास्ता भी शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा रोजाना फल, हरी सब्जियां, बीन्स, मटर, दालें, मेवे और बीज खाने से भी शरीर को भरपूर फाइबर मिलता है, जिससे पाचन बेहतर रहता है और पेट स्वस्थ रहता है. साथ ही फलों, सब्जियों और आलू के छिलके हटाने की जगह अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें. इनके छिलकों में भी अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है.&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/gen-z-vs-millennials-is-gen-z-healthier-than-millennials-a-new-report-reveals-3157012&quot;&gt;क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/15/b69914fd5f2f4548d71aeb5d89b74ae917840963465791120_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[India-UK Trade Deal: यूके से कौन-कौन सी दवाएं आयात करता है भारत, जानें अब कितना कम हो जाएगा इनका दाम?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/india-uk-trade-deal-which-medicines-imported-from-uk-to-india-will-become-cheaper-3160261</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/india-uk-trade-deal-which-medicines-imported-from-uk-to-india-will-become-cheaper-3160261#respond</comments><pubDate>Wed, 15 Jul 2026 12:43:24 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/india-uk-trade-deal-which-medicines-imported-from-uk-to-india-will-become-cheaper-3160261</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;India-UK Trade Deal : &lt;/strong&gt;भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से जिस व्यापार समझौते का इंतजार किया जा रहा था, वह अब लागू हो चुका है. इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच कारोबार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. इसका असर सिर्फ लग्जरी कारों, स्कॉच व्हिस्की या फैशन प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हेल्थकेयर सेक्टर पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खासकर ब्रिटेन से भारत आने वाले मेडिकल डिवाइसेस और कुछ विशेष दवाओं की कीमतों में आने वाले समय में कमी आ सकती है. आइए जानते हैं कि भारत यूके से कौन-कौन सी दवाएं और मेडिकल प्रोडक्ट्स आयात करता है और नई ट्रेड डील के बाद अब इनका दाम कितना कम हो जाएगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत-यूके ट्रेड डील क्या है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है. करीब साढ़े तीन साल तक चली बातचीत और 14 दौर की चर्चा के बाद यह समझौता अंतिम रूप में पहुंचा. इस डील का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, आयात-निर्यात को आसान बनाना और कई प्रोडक्ट्स पर लगने वाले आयात शुल्क को कम या खत्म करना है. इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत प्रोडक्ट्स को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. वहीं ब्रिटेन से आने वाले कई प्रोडक्ट्स पर भारत में आयात शुल्क तरीके से कम किया जाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/skin-whitening-cream-mercury-lead-health-risks-gora-banane-wali-cream-3159111&quot;&gt;Skin Whitening Cream: रातोंरात गोरा बनाने वाली क्रीमों में मिला जरूरत से ज्यादा मरकरी और लेड, इससे कितना नुकसान?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यूके कौन-कौन सी दवाएं और मेडिकल प्रोडक्ट्स आयात होती हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत मुख्य रूप से ब्रिटेन से स्पेशलाइज्ड जेनेरिक दवाएं और कई तरह के मेडिकल डिवाइसेस आयात करता है. इनमें सर्जिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक मशीनें, ईसीजी मशीन, एक्स-रे मशीन और अन्य एडवांस हेल्थकेयर डिवाइस शामिल हैं. नई ट्रेड डील के बाद इन प्रोडक्ट्स पर लगने वाला आयात शुल्क कम होने से इनके भारतीय बाजार में सस्ते होने की संभावना है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या घट जाएंगे इनके दाम?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नई ट्रेड डील के तहत ब्रिटेन से आने वाले मेडिकल डिवाइसेस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी चरणबद्ध तरीके से कम की जाएगी. पहले जहां इन प्रोडक्ट्स पर आमतौर पर 7.5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, वहीं इसे घटाकर लगभग 3 प्रतिशत तक लाया जाएगा. इसमें इमेजिंग सिस्टम, डायग्नोस्टिक डिवाइस, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स शामिल हैं. उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि इससे भारत में आधुनिक मेडिकल डिवाइस पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो सकेंगे. आयात शुल्क कम होने से ब्रिटेन से आने वाले हेल्थकेयर डिवाइस और कुछ विशेष दवाओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है. इसके अलावा अगले 10 सालों में करीब 85 प्रतिशत ऐसे प्रोडक्ट्स पूरी तरह टैरिफ-फ्री हो जाएंगे. इससे अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और मरीजों को आधुनिक मेडिकल डिवाइस पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/omega-3-supplements-not-effective-for-brain-health-study-3159980&quot;&gt;Omega-3 Supplements: क्या दिमाग तेज करने के लिए खा रहे हैं ओमेगा-3 कैप्सूल? इस नई रिसर्च को जरूर पढ़ लें&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/15/fb7fbc85f0d039bf16db2285361180d117840993998831120_original.jpeg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Omega-3 Supplements: क्या दिमाग तेज करने के लिए खा रहे हैं ओमेगा-3 कैप्सूल? इस नई रिसर्च को जरूर पढ़ लें]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/omega-3-supplements-not-effective-for-brain-health-study-3159980</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/omega-3-supplements-not-effective-for-brain-health-study-3159980#respond</comments><pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:44:12 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/omega-3-supplements-not-effective-for-brain-health-study-3159980</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Alzheimer And Dementia Prevention Study 2026:&lt;/strong&gt; दिमाग को तेज बनाने और अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए कई लोग ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक क्लिनिकल स्टडी ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिसर्च के मुताबिक, केवल ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेने से याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता या दिमाग की सेल्स को होने वाले नुकसान में कोई खास फायदा नहीं मिला.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या सेहत के लिए फायदेमंद है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिसर्चर का कहना है कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स को दिमाग की सेहत सुधारने का आसान उपाय नहीं माना जा सकता. स्टडी के दौरान जिन लोगों को ओमेगा-3 सप्लीमेंट दिए गए, उनके दिमाग में ओमेगा-3 का स्तर तो बढ़ा, लेकिन इससे उनकी मानसिक क्षमता में कोई उल्लेखनीय सुधार देखने को नहीं मिला. यानी केवल सप्लीमेंट लेना पर्याप्त नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन चीजों पर ध्यान देना जरूरी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्टडी के प्रमुख राइटर डॉ. हुसैन यासीन के मुताबिक,का मानना है कि अगर दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखना है, तो सिर्फ एक सप्लीमेंट पर निर्भर रहने की बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है. नियमित व्यायाम, तनाव कम करना, भरपूर नींद लेना और पौधों पर आधारित संतुलित आहार अपनाना दिमाग की सेहत के लिए कहीं अधिक असरदार माना गया है. इसके साथ ही सैल्मन, मैकेरल, सार्डिन जैसी फैटी फिश, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी जैसे प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला ओमेगा-3 ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heart-fights-cancer-new-study-explains-protection-mechanism-know-how-heart-prevention-cancer-3121322&quot;&gt;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कब होता है इसका असर?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिसर्चर ने मेडिटेरेनियन डाइट का भी उदाहरण दिया. उनका कहना है कि वहां रहने वाले लोग सिर्फ सप्लीमेंट्स पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि मछली, मेवे और बीजों से प्राकृतिक रूप से ओमेगा-3 लेते हैं. इसके साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि करते हैं, तनाव कम रखते हैं और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाते हैं. यही कारण है कि वहां ओमेगा-3 का बेहतर असर देखने को मिलता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन लोगों पर किया गया स्टडी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह स्टडी 55 से 80 वर्ष की उम्र के 365 लोगों पर किया गया, जिनमें डिमेंशिया का खतरा बढ़ाने वाले एक या अधिक जोखिम कारक मौजूद थे. दो साल तक एक समूह को रोजाना उच्च मात्रा में ओमेगा-3 सप्लीमेंट दिया गया, जबकि दूसरे समूह को प्लेसीबो दिया गया. एमआरआई स्कैन, रक्त जांच और मानसिक क्षमता से जुड़े टेस्ट के बाद पाया गया कि सप्लीमेंट लेने वालों के शरीर और दिमाग में ओमेगा-3 का स्तर बढ़ने के बावजूद उनकी याददाश्त या सोचने-समझने की क्षमता में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं आया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heart-fights-cancer-new-study-explains-protection-mechanism-know-how-heart-prevention-cancer-3121322&quot;&gt;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या सच में यह फायदेमंद नहीं है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकिग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ईपीए एंड डीएचए ओमेगा-3 यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि ओमेगा-3 शरीर के लिए जरूरी नहीं है. यह हार्ट, सेल्स और ब्रेन के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है. लेकिन अगर खानपान असंतुलित हो, शारीरिक गतिविधि न हो और लाइफस्टाइल अस्वस्थ हो, तो सिर्फ ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स से दिमाग को तेज बनाने या अल्जाइमर के खतरे को कम करने की उम्मीद करना सही नहीं होगा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;&lt;a title=&quot;क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/14/3a7b294713fcf0b8717f9753864ced9f17840335908271257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[9 हजार का खर्च अब सिर्फ 91 रुपये! सैंपल ले जा रहा ड्रोन और दवा भी करेगा डिलीवर]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/telangana-tb-test-drone-service-icmr-healthcare-news-3160047</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/telangana-tb-test-drone-service-icmr-healthcare-news-3160047#respond</comments><pubDate>Tue, 14 Jul 2026 20:51:00 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/telangana-tb-test-drone-service-icmr-healthcare-news-3160047</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना हमेशा से बड़ी चुनौती रही है. खासतौर पर टीबी जैसी गंभीर बीमारी के मामले में, जहां सही समय पर जांच और इलाज ही जान बचा सकता है. इसी मुश्किल को हल करने के लिए तेलंगाना में बेहद शानदार और आधुनिक शुरुआत हुई है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले में टीबी की जांच को आसान, तेज और सस्ता बनाने के लिए ड्रोन सेवा की शुरुआत की है. यह पहल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) बीबीनगर के सहयोग से की गई. आइए समझते हैं कि यह तकनीक कैसे आम आदमी की जिंदगी बदल रही है?&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;9451 रुपये का खर्च सिर्फ 91 रुपये हुआ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गौरतलब है कि गांवों में रहने वाले मरीजों को अपनी टीबी की जांच कराने के लिए पहले शहर के बड़े अस्पतालों या जांच केंद्रों तक जाना पड़ता था. इसमें उनका पूरा दिन बर्बाद होता था. यात्रा में पैसे खर्च होते थे और कई बार दिहाड़ी भी छूट जाती थी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंकड़ों के मुताबिक, पहले एक मरीज को जांच के लिए औसतन ₹9451 खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब ड्रोन सेवा शुरू होने से यह खर्च घटकर महज 91 रुपये रह गया है. मरीज अब अपने घर के पास वाले छोटे स्वास्थ्य केंद्र में ही बलगम का सैंपल दे देते हैं और वहां से ड्रोन इन सैंपल्स को हवा के रास्ते बड़े जांच केंद्रों तक पहुंचा देता है. इससे मरीजों के पैसे और मेहनत दोनों बच रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;15 दिन का काम अब 5 दिन में&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टीबी के इलाज में सबसे जरूरी होता है कि बीमारी का पता जल्दी चले. पहले दूर के गांवों से सैंपल लैब तक पहुंचने और फिर उसकी रिपोर्ट वापस गांव तक आने में 15 दिन तक का समय लग जाता था. इतने लंबे इंतजार में मरीज की हालत और खराब होने का डर रहता था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ड्रोन तकनीक ने इस समय को सीधे 15 दिन से घटाकर सिर्फ 5 दिन कर दिया है. ताजा रिपोर्ट बताती है कि 76 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को उनकी जांच के नतीजे अगले ही दिन मिल रहे हैं. रिपोर्ट जल्दी आने का सीधा मतलब है कि मरीज का इलाज जल्दी शुरू हो पाता है, जो उसकी जान बचाने के लिए सबसे अहम है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे काम करता है यह सिस्टम?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस योजना को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया गया है. AIIMS बीबीनगर में मेन कंट्रोल सेंटर बनाया गया है, जो जिले के 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और 60 छोटे उपकेंद्रों से सीधा जुड़ा हुआ है. ड्रोन इसी नेटवर्क के बीच उड़ान भरते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में हब एंड स्पोक मॉडल कहा जाता है. इसके तहत छोटे-छोटे केंद्रों से सैंपल इकट्ठे किए जाते हैं और उन्हें मुख्य लैब तक तेजी से पहुंचाया जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दवाइयां भी ला रहा ड्रोन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह ड्रोन सेवा सिर्फ सैंपल भेजने तक सीमित नहीं है. जब मुख्य केंद्र में मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है और डॉक्टरों दवा लिखते हैं तो वही ड्रोन वापसी की उड़ान में दूरदराज के गांवों तक टीबी की जरूरी दवाइयां भी पहुंचाता है. इसका मतलब यह है कि मरीज को दवा लेने के लिए भी शहर भागने की जरूरत नहीं है. आसमान से उड़कर दवा उनके गांव के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/gen-z-vs-millennials-is-gen-z-healthier-than-millennials-a-new-report-reveals-3157012&quot;&gt;क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/14/118d0f23584aee7714c9890b0cf4302217840424356361257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Pregnancy in Monsoon: मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-monsoon-pregnancy-care-tips-for-mother-to-be-3159501</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-monsoon-pregnancy-care-tips-for-mother-to-be-3159501#respond</comments><pubDate>Mon, 13 Jul 2026 22:24:55 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-monsoon-pregnancy-care-tips-for-mother-to-be-3159501</guid><description><![CDATA[Pregnancy in Monsoon: मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/13/a0456e0e168cfdf522493390803ff7ab17839591766171381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[UP से लेकर महाराष्ट्र-आंध्र प्रदेश तक मिले कोरोना के केस, क्या 2026 में दोबारा लौटेगा कोविड-19?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/covid-19-new-cases-india-up-maharashtra-andhra-pradesh-2026-lockdown-truth-3159486</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/covid-19-new-cases-india-up-maharashtra-andhra-pradesh-2026-lockdown-truth-3159486#respond</comments><pubDate>Mon, 13 Jul 2026 20:59:04 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/covid-19-new-cases-india-up-maharashtra-andhra-pradesh-2026-lockdown-truth-3159486</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;देश के कई शहरों में कोरोना के मामले मिलने के बाद सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस की वापसी और भारत में लॉकडाउन 2026 जैसी चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं. इन वायरल मैसेजेस ने लोगों के मन में फिर से डर पैदा कर दिया है कि क्या हम एक बार फिर 2020 जैसी भयावह स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं. हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आम जनता को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसे में जानते हैं कि देश के किन शहरों में कोरोना के मामले मिले हैं और इस पर एक्सपर्ट्स की क्या राय है?&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;देश में कहां-कहां मिले कोरोना के नए केस?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;देश के कुछ राज्यों में मिले कोरोना के नए मामलों ने हेल्थ डिपार्टमेंट को अलर्ट कर दिया है. आइए जानते हैं कि देश में इस वक्त कोरोना के मामले कहां-कहां से सामने आए हैं?&lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;उत्तर प्रदेश (वाराणसी):&lt;/strong&gt; हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी कोरोना का नया मामला सामने आया है. वाराणसी के आशापुर इलाके के रहने वाले 27 वर्षीय एक युवक को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी. जब उसे काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल के चेस्ट एंड टीबी विभाग में दिखाया गया और कोरोना जांच की गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई. फिलहाल, इस युवक को बीएचयू अस्पताल में ही भर्ती करके उसका इलाज किया जा रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला बताता है कि वायरस की रफ्तार भले ही धीमी पड़ गई है, लेकिन यह अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आंध्र प्रदेश:&lt;/strong&gt; सबसे ज्यादा चिंताजनक मामले दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश से सामने आए हैं. फिलहाल राज्य में कोरोना के 8 एक्टिव केस रिकॉर्ड किए गए हैं. पिछले कुछ हफ्तों के भीतर आंध्र प्रदेश में कोरोना से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. हाल ही में कडप्पा के मासापेटा इलाके के रहने वाले 46 वर्षीय एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से जान चली गई. वहीं, एक अन्य मामला अन्नमैया जिले के राजमपेटा से भी सामने आया था. इन मामलों के बाद मरीजों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, ताकि कोरोना के वैरिएंट का पता लगाया जा सके.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;महाराष्ट्र (मुंबई):&lt;/strong&gt; देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी कोरोना वायरस का एक नया मामला मिला है. इसके अलावा जाने-माने सिंगर कुमार सानू के बेटे जान कुमार सानू भी हाल ही में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. उनका इलाज चल रहा है.&amp;nbsp;&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या कहता है मेडिकल साइंस?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मेडिकल साइंस के अनुसार, &lt;a title=&quot;कोरोना वायरस&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/coronavirus-covid-19&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;कोरोना वायरस&lt;/a&gt; अब एंडेमिक स्टेज में पहुंच चुका है. इसका सीधा मतलब यह है कि यह वायरस अब हमारे वातावरण से पूरी तरह कभी खत्म नहीं होगा. जैसे &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; बदलने पर सर्दी, खांसी या आम फ्लू होता है, वैसे ही कोरोना के भी छिटपुट मामले समय-समय पर सामने आते रहेंगे. हमारे शरीर में अब वैक्सीन और पहले के इंफेक्शन की वजह से एंटीबॉडी बन चुकी है, जिससे यह वायरस अब पहले जैसा जानलेवा नहीं रहा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की क्या है तैयारी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इन नए मामलों को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकारें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं. राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने तुरंत रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है और स्थिति पर नजर रखने के लिए खास कोविड कंट्रोल रूम भी चालू किए गए हैं. वहीं, अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां कम से कम 10 बेड वाला अलग आइसोलेशन वॉर्ड हमेशा तैयार रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को भर्ती किया जा सके. सभी सरकारी और बड़े प्राइवेट अस्पतालों को आदेश दिया गया है कि वे कोरोना की जांच के लिए टेस्टिंग किट, जरूरी दवाइयां, डॉक्टरों और स्टाफ के लिए PPE किट और N95 मास्क का पर्याप्त स्टॉक हर समय उपलब्ध रखें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है लॉकडाउन की अफवाहों का सच&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सोशल मीडिया पर चल रही 2026 में लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वायरस के इक्का-दुक्का मामले भविष्य में भी आते रहेंगे. अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी तरह का पैनिक न फैलाएं. देश में अभी यात्रा करने, स्कूल-कॉलेज जाने या काम करने पर कोई पाबंदी नहीं है. सरकार ने मास्क पहनना भी अनिवार्य नहीं किया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे करें अपना बचाव?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कमजोर इम्युनिटी वाले रहें सतर्क:&lt;/strong&gt; बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी जैसे शुगर, बीपी या हार्ट प्रॉब्लम से जूझ रहे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;लक्षण दिखने पर जांच:&lt;/strong&gt; अगर आपको तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें और कोरोना की जांच कराएं.&lt;/li&gt;
&lt;li style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मास्क और साफ-सफाई:&lt;/strong&gt; भीड़भाड़ वाली जगहों, अस्पतालों या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में जाते समय मास्क पहनना अच्छी आदत है. यह आपको कोरोना के साथ-साथ प्रदूषण और अन्य बीमारियों से भी बचाता है. अपने हाथों को समय-समय पर धोते रहें.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/cancer-survivor-care-quality-of-life-after-treatment-3158516&quot;&gt;कैंसर से जिंदा बचना काफी नहीं, अब बेहतर जिंदगी जीना भी जरूरी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/13/fe90172eed3864764b8148edd4328edf17839565204491257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Skin Whitening Cream: रातोंरात गोरा बनाने वाली क्रीमों में मिला जरूरत से ज्यादा मरकरी और लेड, इससे कितना नुकसान?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/skin-whitening-cream-mercury-lead-health-risks-gora-banane-wali-cream-3159111</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/skin-whitening-cream-mercury-lead-health-risks-gora-banane-wali-cream-3159111#respond</comments><pubDate>Mon, 13 Jul 2026 12:50:46 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/skin-whitening-cream-mercury-lead-health-risks-gora-banane-wali-cream-3159111</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Maharashtra FDA Warning On Fairness Creams:&lt;/strong&gt; त्वचा को कुछ ही दिनों में गोरा और चमकदार बनाने का दावा करने वाली कई क्रीमों पर अब गंभीर सवाल उठ गए हैं. महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने ऐसी पांच कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में तय सीमा से कई गुना ज्यादा मरकरी और लेड पाए जाने के बाद लोगों को इनके इस्तेमाल से बचने की चेतावनी दी है. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ उत्पादों पर निर्माण और एक्सपायरी डेट जैसी जरूरी जानकारी तक नहीं दी गई थी. इसके बाद इन उत्पादों के निर्माण और बिक्री को लेकर जांच शुरू कर दी गई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन प्रोडक्ट को लेकर उठे सवाल?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;FDA की जांच में जिन प्रोडक्ट्स के नाम सामने आए हैं, उनमें Goree Beauty Cream, Goree Beauty Whitening Body Lotion, Goree Whitening Soap, Face Fresh Gold Plus तथा Golden Star Beauty Cream शामिल हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ये भारी धातुएं शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इससे कितना खतरा होता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डॉ. तुषार पलवे के मुताबिक, मरकरी को अवैध रूप से स्किन व्हाइटनिंग क्रीम में इसलिए मिलाया जाता है क्योंकि यह मेलानिन बनने की प्रक्रिया को रोक देता है. इसकी वजह से 10 से 15 दिनों के भीतर त्वचा पहले से ज्यादा गोरी दिखाई देने लगती है. हालांकि इसका लगातार इस्तेमाल किडनी, दिमाग और शरीर के दूसरे अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. उनका कहना है कि अगर क्रीम में मरकरी की मात्रा बहुत ज्यादा हो तो 10 से 12 दिनों में ही किडनी पर असर शुरू हो सकता है, जबकि कम मात्रा होने पर भी कई महीनों तक रोजाना इस्तेमाल करने से नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता रहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heart-fights-cancer-new-study-explains-protection-mechanism-know-how-heart-prevention-cancer-3121322&quot;&gt;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सिर्फ स्किन ही नहीं, इनको भी होता है नुकसान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि इसका असर केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहता. मरकरी त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर किडनी और बोन मेरो में जमा हो सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, इससे किडनी की काम करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है और गंभीर मामलों में डायलिसिस तक की नौबत आ सकती है. इसके अलावा हाथ कांपना, याददाश्त कमजोर होना, चिंता, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं. कुछ मामलों में सुनने और देखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt; किसी भी क्रीम का इस्तेमाल करने से बचें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जांच में लेड भी तय सीमा से अधिक पाया गया. एक्सपर्ट के अनुसार, लेड का त्वचा को गोरा करने में कोई साइंटफिक उपयोग नहीं है. इसकी मौजूदगी खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल या असुरक्षित निर्माण प्रक्रिया की ओर इशारा करती है. लेड शरीर में जमा होकर दिमाग, किडनी, ब्लड बनाने वाले अंगों और प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि लेड की कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती और अगर मरकरी के साथ इसका संपर्क हो तो स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ जाता है. स्किन एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि केवल गोरा दिखने के लिए किसी भी क्रीम का इस्तेमाल करने से बचें. अगर चेहरे पर दाग-धब्बे या पिग्मेंटेशन की समस्या है तो पहले स्किन एक्सपर्ट से जांच कराएं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;&lt;a title=&quot;क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/from-fatigue-to-weak-nails-warning-signs-of-nutrient-deficiency-3122052&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;क्या पूरी नींद लेने के बाद भी छाई रहती है थकान? इग्नोर किया तो हो सकती है गंभीर बीमारी!&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/13/8e7192b11c6280d4885cacf792055e5617839223327821257_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>