Caause of Ovarian Cancer: कई बार जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी कुंजी होती है, बीमारी को समय रहते पहचान लेना. लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जो चुपचाप बढ़ती रहती हैं और जब तक पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है. अंडाशय का हाई-ग्रेड सीरियस कार्सिनोमा (HGSC) भी ऐसा ही एक कैंसर है, जो महिलाओं में सबसे घातक रूपों में से एक माना जाता है. हालांकि अब वैज्ञानिकों ने इसकी जड़ को पहचान लिया है. 

महिलाओं में मौत का एक बड़ा कारण

अंडाशय का कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के मामले में छठे नंबर पर आता है. ज्यादातर महिलाएं इसकी डायग्नोसिस के बाद पांच साल से ज्यादा नहीं जी पाती हैं. वजह यह है कि, शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण लगभग न के बराबर होते हैं और इसके लिए कोई भरोसेमंद टेस्ट मौजूद नहीं हैं.

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कैंसर की जड़ क्या है 

वैज्ञानिक लंबे समय से शक कर रहे थे कि HGSC असल में अंडाशय में नहीं, बल्कि फैलोपियन ट्यूब में शुरू होता है. लेकिन ठीक-ठीक कहां और कैसे, यह साफ नहीं था. लेकिन कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के डॉ. अलेक्जेंडर निकिटिन की  रिसर्च में पता चला कि फैलोपियन ट्यूब की एक खास किस्म की कोशिका, प्री-सिलिएटेड ट्यूबल एपिथीलियल सेल्स, इस कैंसर की असली शुरुआत करती हैं. ये कोशिकाएं स्टेम सेल और पूरी तरह विकसित सिलिएटेड सेल के बीच का ट्रांजिशन स्टेज होती हैं. 

प्री-सिलिएटेड सेल्स से होता है कैंसरट

पहले माना जाता था कि, स्टेम सेल ही इस कैंसर के जिम्मेदार हैं. लेकिन इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब कैंसर रोकने वाले दो अहम जीन, TP53 और RB1 को स्टेम सेल्स में बंद किया गया, तो वे कैंसरग्रस्त नहीं हुए, बल्कि मर गए. इसके विपरीत, जब यही जीन प्री-सिलिएटेड सेल्स में बंद किए गए, तो कैंसर बनने लगा. 

चूहों पर हुआ सफल प्रयोग

वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए चूहों की फैलोपियन ट्यूब की अलग-अलग कोशिकाओं में इन जीन को साइलेंस किया है. नतीजा साफ था, सिर्फ प्री-सिलिएटेड सेल्स में ही कैंसर विकसित हुआ. 

कैंसर पहचानने की नई चाबी कौनसी है

रिसर्च में यह भी पता चला कि Krt5 नामक जीन प्री-सिलिएटेड सेल्स में काफी एक्टिव रहता है.  जब इस जीन के उच्च स्तर वाली कोशिकाओं में Trp53 और Rb1 को बंद किया गया, तो चूहों में जल्दी ही हाई-ग्रेड अंडाशय कैंसर विकसित हो गया. इससे साफ हो गया कि यही सेल्स कैंसर की जड़ हैं.

भविष्य में संभावनाएं 

  • इस खोज से कई नई संभावनाएं खुल सकती हैं
  • जल्दी पहचान: प्री-सिलिएटेड सेल्स को पहचानकर कैंसर बनने से पहले ही पता लगाया जा सकता है
  • नया इलाज: सिलियोगेनेसिस (सिलिया बनने की प्रक्रिया) को टारगेट करके कैंसर को शुरू होने से रोका जा सकता है
  • बेहतर टेस्ट: Krt5 जैसे जीन को मार्कर के रूप में इस्तेमाल कर शुरुआती स्टेज में रिस्क का पता लगाया जा सकता है

यह स्टडी चूहों पर हुई है, लेकिन इंसानों की फैलोपियन ट्यूब की संरचना काफी मिलती-जुलती है. आगे इंसानी टिश्यू पर रिसर्च करके इस खोज को पुख्ता किया जा सकता है. अगर ये नतीजे इंसानों में भी साबित होते हैं, तो यह अंडाशय के कैंसर के खिलाफ जंग में एक बड़ी जीत हो सकती है. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.