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Diabetes Shoulder: कंधे के दर्द से लेकर जकड़न तक, ये लक्षण न करें इग्नोर, डॉक्टर ने डायबिटीज को लेकर दी चेतावनी

Frozen Shoulder Causes: डायबिटीज से जुड़ी एक ऐसी समस्या भी है जिसके बारे में कम लोग जानते हैं, लेकिन यह काफी आम है. इसे आम बोलचाल में डायबिटीज शोल्डर कहा जाता है.

Why Diabetes Increases The Risk Of Frozen Shoulder: अगर आपको डायबिटीज है और पिछले कुछ समय से कंधे में दर्द, जकड़न या हाथ घुमाने में परेशानी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डायबिटीज से जुड़ी एक ऐसी समस्या भी है जिसके बारे में कम लोग जानते हैं, लेकिन यह काफी आम है. इसे आम बोलचाल में डायबिटीज शोल्डर कहा जाता है, जबकि मेडिकल टर्म में इसे फ्रोजन शोल्डर कहा जाता है. यह स्थिति धीरे-धीरे कंधे की गतिविधियों को सीमित कर सकती है और रोजमर्रा के कामों को मुश्किल बना सकती है.

इस संबंध में जर्नल ऑफ डायबिटीज इन्वेस्टिगेशन में पब्लिश एक स्टडी में पाया गया कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों में कंधे संबंधी समस्याओं की दर लगभग 27.5 प्रतिशत थी, जबकि सामान्य मरीजों में यह आंकड़ा केवल 5 प्रतिशत के आसपास देखा गया. यह अंतर बताता है कि डायबिटीज और फ्रोजन शोल्डर के बीच गहरा संबंध है.

क्या है फ्रोजन शोल्डर?

फ्रोजन शोल्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ के आसपास मौजूद कनेक्टिव टिश्यू मोटे और कड़े हो जाते हैं. इसके कारण कंधे को हिलाना-डुलाना मुश्किल होने लगता है. शुरुआत में दर्द महसूस होता है और समय के साथ कंधे की मूवमेंट काफी सीमित हो सकती है.

डायबिटीज में क्यों बढ़ जाता है इसका खतरा?

एक्सपर्ट के अनुसार लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने से शरीर के टिश्यू में बदलाव आने लगते हैं. अतिरिक्त ग्लूकोज कोलेजन नामक प्रोटीन को प्रभावित कर सकता है, जिससे टिश्यू अपनी लचक खोने लगते हैं. यही प्रक्रिया कंधे के जोड़ को भी प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा लगातार रहने वाली सूजन और टिश्यू तक कम ब्लड फ्लो भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं.

फ्रोजन शोल्डर के तीन चरण

यह समस्या आमतौर पर तीन चरणों में विकसित होती है. पहला चरण फ्रीजिंग स्टेज कहलाता है, जिसमें दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और कंधे की मूवमेंट कम होने लगती है. इसके बाद फ्रोजन स्टेज आता है, जहां दर्द कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन जकड़न बनी रहती है. अंतिम चरण थॉइंग स्टेज होता है, जिसमें धीरे-धीरे कंधे की गतिशीलता वापस आने लगती है. पूरी प्रक्रिया कई महीनों से लेकर दो साल तक चल सकती है.

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कैसे होती है पहचान?

डॉक्टर आमतौर पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, खासकर डायबिटीज की जानकारी, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या एमआरआई जैसे इमेजिंग टेस्ट की मदद से इस समस्या का निदान करते हैं. समय पर पहचान होने से स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है.

क्या है इसका इलाज?

फ्रोजन शोल्डर के इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द कम करना और कंधे की सामान्य गतिविधि को वापस लाना होता है. इसके लिए दर्द और सूजन कम करने वाली दवाएं दी जा सकती हैं. फिजियोथेरेपी और नियमित स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज रिकवरी में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं. इसके साथ ही ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है. गंभीर मामलों में डॉक्टर इंजेक्शन या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की सलाह दे सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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