Oats And Mineral Absorption Issues: ओट्स को आजकल हेल्दी खाने का सबसे बड़ा प्रतीक मान लिया गया है. सुबह के नाश्ते से लेकर रात के हल्के खाने तक, हर जगह इसकी मौजूदगी दिखती है. पैकेट पर लिखी जानकारी इसे फाइबर से भरपूर बताती है और फिटनेस रूटीन की शुरुआत भी अक्सर ओट्स से ही होती है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ओट्स हर व्यक्ति के लिए उतने ही फायदेमंद हैं? डॉक्टरों के अनुसार इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. ओट्स के फायदे जरूर हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं जिन पर कम चर्चा होती है. 

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क्या ओट्स सबके लिए फायदेमंद है?

ओट्स को "सुपरफूड" का दर्जा इसलिए मिला क्योंकि इसमें बीटा-ग्लूकन नाम का घुलनशील फाइबर पाया जाता है. यह डाइजेशन को धीमा करता है और समय के साथ कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है. इसी वजह से इसे दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.  डॉ. आलोक कुमार सिंह ने TOI को बताया कि  "बीटा-ग्लूकन कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है, लेकिन इसका असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप ओट्स किस रूप में खा रहे हैं और आपकी शरीर की संवेदनशीलता कैसी है." 

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 रिसर्च भी इसे सही मानती है कि नियमित सेवन से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है.  न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अंशुल सिंह कहते हैं कि इसमें मौजूद फाइबर पाचन सुधारता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है. 

ओट्स कैसे करता है काम?

लेकिन हर तरह के ओट्स एक जैसे काम नहीं करते.  खासकर इंस्टेंट ओट्स जल्दी पच जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. डॉ. सिंह के अनुसार, ज्यादा प्रोसेस्ड होने की वजह से ये शरीर में ग्लूकोज तेजी से बढ़ाते हैं. वहीं फ्लेवर्ड ओट्स में अतिरिक्त शक्कर भी होती है, जो समस्या बढ़ा सकती है. डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है. इसके मुकाबले स्टील-कट या रोल्ड ओट्स बेहतर माने जाते हैं क्योंकि ये धीरे पचते हैं.

फाइबर हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं

ओट्स में फाइबर ज्यादा होता है, जो हर किसी के लिए आरामदायक नहीं होता. अचानक ज्यादा मात्रा में लेने से पेट फूलना, गैस या दर्द जैसी दिक्कत हो सकती है. डॉ. सिंह बताते हैं कि कुछ लोगों को इससे पाचन संबंधी परेशानी होती है. इसके अलावा ओट्स में फाइटेट्स भी होते हैं, जो आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स के अब्जॉर्व को कम कर सकते हैं. अंशुल सिंह के मुताबिक, अगर रोजाना जरूरत से ज्यादा ओट्स खाए जाएं और खाने में विविधता न हो, तो यह समस्या बढ़ सकती है.

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सबके लिए सुरक्षित नहीं 

ओट्स ग्लूटेन-फ्री होते हैं, लेकिन फिर भी हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं. कई बार इन्हें ऐसी जगह प्रोसेस किया जाता है जहां गेहूं भी होता है, जिससे मिलावट की संभावना रहती है। सीलिएक बीमारी या ग्लूटेन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है. इसके अलावा जिन लोगों का पाचन कमजोर है या ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता, उन्हें भी सावधानी रखनी चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.