Alzheimer Symptoms:  ब्रेन बॉडी का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट होता है. इस ऑर्गन की कोशिश होती है कि बॉडी में सब कुछ सही ढंग से काम करें. मगर ब्रेन में डिस्टर्बेंस हो जाये तो परेशानी अधिक हो सकती है. ब्रेन बॉडी का बेहद महत्वपूर्ण ऑर्गन है. इसको संभाले रखना बेहद जरूरी है. आज बात अल्जाइमर डिसीज की है तो ये बीमारी भी व्यक्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इस बीमारी में व्यक्ति उम्र के साथ अपनी समस्याओं के प्रति और अधिक गंभीर हो सकता है. ऐसे में अल्जाइमर के बचाव और लक्षणों को जानना बहुत जरूरी हैं.
 

क्या होता है अल्जाइमर

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन में एक सौ अरब से अधिक न्यूरोंस होते हैं.  हर न्यूरोंस अन्य बहुत सारे न्यूरोंस से संपर्क कर एक नेटवर्क बनाता है. इस नेटवर्क का काम विशेष होता है. ये सोचने, सीखने, याद रखने का काम करते हैं.  अन्य न्यूरोंस हमें देखने, सुनने, सूंघने आदि में मदद करती हैं.  इसके अलावा अन्य न्यूरोंस हमारी मांसपेशियों को चलाने में मदद करती हैं. ये काम एक स्माल इंडस्ट्री के तौर पर चलता है. ये एनर्जी पैदा करती हैं और उसे सप्लाई करने का काम करती हैं. बॉडी के नए अंगों को बनाने का काम करती है. न्यूरोंस सूचनाओं को जमा करता हैं. उन्हें फैलाने का काम भी करता है. बस उम्र बढ़ने, ब्रेन में चोट लगने, ब्रेन में किसी तरह का कैंसर होने पर यही प्रक्रिया बाधित होने लगती है. धीरे धीरे व्यक्ति सोचना, समझना, पहचानना तक बंद कर देता है. यही अल्जाइमर की गंभीर स्टेज कहलाती है.

उम्र बढ़ने पर गंभीर होती बीमारी

अल्जाइमर को लेकर कई स्टडीज सामने आए हैं. अध्ययनों के अनुसार, उम्र बढ़ने पर अल्जाइमर होने का गंभीर खतरा रहता है. जल्दी होने वाली अल्जाइमर की स्थिति को अर्ली ऑनसेट के तौर पर जाना जाता है. हालांकि यह रोग 40 से 50 साल की उम्र में अधिक देखने को मिलता है. उम्र बढ़ने पर यह समस्या और अधिक गंभीर होनी शुरू हो जाती है. 80 साल से अधिक उम्र होने पर एक तिहाई लोगों को इस बीमारी के होने का खतरा रहता है.

लक्षण और बचाव

अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हर व्यक्ति में अलग अलग हो सकते हैं. इसके लक्षणों को देखें तो चीजों को याद न रखना, किसी भी सवाल को बार बार दोहराना, किसी भी समस्या को हल करने में परेशानी होना, दिन, तारीख, समय तक भूल जाना, कोई सही डिसीजन न ले पाना, व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आना, निगलने और खाने में भी परेशानी होने लगना शामिल है.

वैसे तो अल्जाइमर बीमारी का कोई बचाव नहीं है. मगर लक्षणों के आधार पर इस बीमारी को मैनेज किया जाता है. डॉक्टर बीमारी बढ़ने से रोकने के लिए दवा देते हैं. इसके अलावा शुरुआती अवस्था में बीमारी पर गौर बीमारी के फैलने की दर को बेहद कम किया जा सकता है. परेशानी बढ़ रही है तो तुरंत डॉक्टर को दिखााना चाहिए.  

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.