AIIMS SurgeryWaitingTime:कल्पना कीजिए कि पेट में तेज दर्द हो रहा है, डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैंऔर आप राहत की उम्मीद में देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एम्सपहुंचते हैं. लेकिन वहां आपकोजवाबमिलताहै कि"अभी दो महीने की वेटिंग है. अब सोचिए, एक ऐसा समय जब शरीर दर्द से परेशान है और इलाजकारास्ता कुछ दिनों तक नहीं दिखाई दे रहातोएकआममरीजक्याकरे?
यहीहकीकतहैआजएम्स अस्पताल की, जहांसामान्यसर्जरीकेलिएभीमहीनोंतकइंतजारकरनापड़रहाहै. इलाजकीउम्मीदलेकरआएहजारोंमरीजोंकेलिएयहइंतजारअबमानसिकऔरशारीरिकदोनोंहीरूपोंमेंएकनईचुनौतीबनताजारहाहै.
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दो महीने की प्रतीक्षाक्यों?
एम्स में हर दिन हजारों मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं. सीमित संसाधनों और विशेषज्ञों की तय संख्या के कारण हर मरीज को तत्काल सर्जरी उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पाता. ओटी (ऑपरेशनथिएटर) की संख्या, डॉक्टरों की ड्यूटीशेड्यूल, गंभीर मामलों की प्राथमिकता जैसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से सामान्य सर्जरी के केस पीछे खिसकते जाते हैं. इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ता है जो अपेंडिक्स, हर्निया या गॉलब्लैडर जैसे सामान्य तकलीफदेह मामलों में राहत चाहते हैं.
मरीजों की परेशानी बढ़ी
गांव-कस्बों से आने वाले कई मरीज महीनों तक दिल्ली में रहना अफोर्ड नहीं कर पाते. इलाज की तारीख मिलने के बाद उन्हें वापस जाना और फिर दोबारा तय समय पर लौटना एक बड़ी चुनौती होती है. इसके अलावा जब दर्द और परेशानी बनी रहती है, तब मानसिक तनाव भी बढ़ जाता है. कई बार निजी अस्पतालों में महंगे इलाज की मजबूरी बन जाती है.
समाधान क्या हो सकता है?
- अस्पतालों में सर्जरी स्लॉट बढ़ाना
- प्राथमिक स्तर पर सर्जरी के लिए अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों से सहयोग
- एम्स जैसे संस्थानों का बोझ कम करने के लिए रीजनलAIIMS और जिला अस्पतालों की सर्जरी सुविधाओं को मजबूत करना
एम्स में इलाज एक सपना है, लेकिन अगर उस सपने तक पहुंचने के लिए लंबी लाइन और महीनों का इंतजार करना पड़े तो वह सपना कई लोगों के लिए तकलीफ बन जाता है. सरकार और स्वास्थ्य मंत्रियों को मिलकर ऐसे समाधान खोजने होंगे जिससे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े. इलाज का अधिकार हर नागरिक का हक है और यह हक समय पर मिलना भी जरूरी है.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
