Alzheimer Early Detection: आज के वक्त में एआई का हर क्षेत्र में जमकर उपयोग किया जा रहा है. क्योंकि यह भारी कामों को कम समय में पूरा करने की क्षमता रखता है. ऐसे में एआई ने अब हेल्थ सेक्टर में भी अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी का पता बहुत पहले और बेहद आसानी से लगाया जा सकेगा. इस नई खोज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है. इस तकनीक के आने से मरीजों को महंगे मेडिकल स्कैन और दर्दनाक टेस्ट से बड़ी राहत मिल जाएगी.
क्या है अल्जाइमर बीमारी और इसकी चुनौती?
दरअसल अल्जाइमर दिमाग से जुड़ी एक खतरनाक बीमारी है, जिसमें इंसान की याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. इस बीमारी में इंसान छोटी-छोटी बातें, जैसे लोगों के नाम, रास्ते या रोजमर्रा के काम भूलने लगता है और उम्र बढ़ने के साथ यह बीमारी और गंभीर होती जाती है. अब तक इस बीमारी को पकड़ना बहुत मुश्किल काम था. क्योंकि जब तक मरीज के लक्षण गंभीर नहीं हो जाते, तब तक बीमारी का सही पता नहीं चल पाता था. इसके लिए मरीजों को पीईटी स्कैन या रीढ़ की हड्डी का टेस्ट कराना पड़ता है. ये टेस्ट न सिर्फ बहुत महंगे होते हैं. ये टेस्ट न सिर्फ बहुत महंगे होते हैं, बल्कि छोटे शहरों या अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध भी नहीं होते हैं.
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कैसे काम करेगा नया एआई टेस्ट?
वैज्ञानिकों ने जो नया एआई मॉडल तैयार किया है, वह बेहद एडवांस है और यह टेस्ट मुख्य रूप से दो तरह से काम करता है. सबसे पहले यह एआई सिस्टम मरीज के सामान्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड, जैसे ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट, उम्र और काम से जुड़े डेटा को देखता है. इसके बाद दूसरे तरीके में एआई दिमाग के शुरुआती बदलावों को बहुत बारीकी से पहचान लेगा, जिन्हें डॉक्टर सामान्य स्कैन में आसानी से नहीं देख पाते हैं. यह एआई सिस्टम केवल कुछ ही मिनटों में बता देता है कि किसी व्यक्ति को आने वाले समय में अल्जाइमर होने का कितना खतरा है. भारत में इसका खर्च लगभग 1 लाख से 2 लाख रुपये प्रति स्कैन तक होता है. वहीं अब सिर्फ 7 हजार से 10 हजार रुपये में बिना किसी दर्द के 18 मिनट के भीतर इसकी सटीक जांच हो जाती है.
मरीजों को कैसे मिलेगी राहत?
इस नए टेस्ट के आने से मेडिकल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इसके आने से अल्जाइमर जैसी खतरनाक बीमारियों का वक्त रहते पता लगाया जा सकेगा. अल्जाइमर को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन अगर इसका पता बहुत शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो दवाओं और सही लाइफस्टाइल से इसके असर को बहुत धीमा किया जा सकता है. साथ ही महंगे एमआरआई या पीईटी स्कैन कराने में हजारों रुपये खर्च होते हैं. लेकिन एआई टेस्ट से जांच कराने से खर्च काफी कम हो जाएगा. साथ ही रीढ़ की हड्डी से लिक्विड निकालने वाले सुई वाले टेस्ट बहुत दर्दनाक होते हैं, लेकिन एआई टेस्ट में ऐसा कुछ नहीं होगा.
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