<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>Xप्लेन: 80% मांसाहार भारतीयों के भारत का 'असली खाना' क्या? BRICS डिनर से बवाल</title><atom:link href="https://www.abplive.com/lifestyle/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Tue, 15 Sep 2026 11:38:10 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[त्योहार का तेज शोर दिल के लिए भी खतरनाक, डॉक्टरों ने दी सलाह]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/loud-festival-noise-effect-on-heart-health-3188736</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/loud-festival-noise-effect-on-heart-health-3188736#respond</comments><pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:19:03 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/loud-festival-noise-effect-on-heart-health-3188736</guid><description><![CDATA[&lt;p&gt;भारत में त्योहारों के दौरान काफी उत्साह रहता है. त्योहारों का मतलब ही खुशी उत्साह और उमंग होता है और ऐसे माहोल में संगीत खासतौर पर रहता है. इस दौरान DJ, लाउडस्पीकर, ढोल और पटाखों की आवाज भी सुनाई देती है. पर ये आवाज आपकी सेहत पर भी असर डाल सकती है. त्योहार में तेज DJ और पटाखों की आवाज से दिल पर असर पड़ सकता है. इसलिए बहुत ज्यादा तेज आवाज को हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए सही नहीं है. डॉक्टरों के मुताबिक अचानक और तेज शोर शरीर के लिए तनाव की तरह काम कर सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;तेज आवाज से शरीर में बढ़ सकता है तनाव&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;त्योहारों पर कई ऐसे मौको पर अचानक बहुत तेज आवाज सुनने पर शरीर तुरंत अलर्ट हो जाता है. इस दौरान तनाव से जुड़े हार्मोन शरीर में बढ़ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए अचानक दिल की धड़कन तेज हो जाती है. और इसके कारण और ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है. अगर त्योहार के दौरान लगातार कई घंटे तक बहुत तेज आवाज में रहना पड़े तो शरीर पर इसका दबाव और बढ़ सकता है. इसलिए ऐसे मौको के दौरान आवाज को जरूरत से ज्यादा तेज नहीं रखना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;दिल की बीमारी वाले लोगों को ज्यादा सावधानी चाहिए&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, हार्ट फेलियर या दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या है, उन्हें खासकर तेज शोर से &amp;nbsp;बचना चाहिए उन्हें ज्यादा शोर से अधिक परेशानी हो सकती है. अचानक तेज DJ या पटाखों की आवाज ऐसे लोगों में तनाव बढ़ा सकती है और दिल पर काम का दबाव बढ़ सकता है. इसलिए ऐसे लोगों को बहुत ज्यादा शोर वाली जगह पर लंबे समय तक खड़े रहने से बचना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/heavy-period-cramps-endometriosis-causes-and-symptomps-endometriosis-treatment-3188260&quot;&gt;&lt;strong&gt;पीरियड में हो रहा सामान्य से तेज दर्द? एंडोमेट्रियोसिस के हो सकते हैं संकेत&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;रात का तेज शोर नींद भी बिगाड़ सकता है&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;त्योहारों में कई बार देर रात तक DJ, लाउडस्पीकर और पटाखों की आवाज आती रहती है. इससे लोगों की नींद भी अचानक बार-बार टूट जाती है या उन्हें ठीक से नींद ही नहीं आती. नींद पूरी न होने पर शरीर में तनाव बढ़ जाता है और ब्लड प्रेशर पर भी असर पड़ता है. लंबे समय तक नींद न आने पर दिल की सेहत पर भी इसका बुरा असर हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;बुजुर्गों और बीमार लोगों को शोर से रखें दूर&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;तेज आवाज का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. बुजुर्गों और पहले से दिल, ब्लड प्रेशर या दूसरी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है. ऐसे समय में उन्हें तेज DJ या पटाखों वाली जगह से थोड़ी दूरी पर रखना बेहतर है. अगर घर के आसपास बहुत ज्यादा शोर हो रहा है तो कुछ समय के लिए शांत कमरे में रहे.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&amp;nbsp;त्योहार मनाएं, लेकिन आवाज का रखें ध्यान&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;डॉक्टरों की सलाह का मतलब यह नहीं है कि त्योहारों पर संगीत बंद कर दिया जाए. जरूरत इस बात की है कि आवाज को इतना तेज न किया जाए कि आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होने लगे. DJ और लाउडस्पीकर की आवाज कम रखना, देर रात तक तेज शोर से बचना और अस्पतालों, बुजुर्गों के घरों जैसी जगहों के आसपास खास सावधानी रखना बेहतर है. इससे त्योहार की खुशी भी बनी रहेगी और दूसरे लोगों की नींद व सेहत पर भी कम असर पड़ेगा. लगातार या बहुत ज्यादा शोर से बचना दिल की सेहत के लिए भी अच्छा कदम है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/cancer-symptoms-in-young-adults-3188270&quot;&gt;&lt;strong&gt;20-30 की उम्र में भी कैंसर का खतरा, इन संकेतों को मामूली समझने की गलती न करें&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/3b4624bb17bf0e1d056a70ab8a7b071b17893834146841471_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[आलू के छिलके फेंकने की जरूरत नहीं, घर पर बनाएं कुरकुरा स्नैक]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/food/potato-peel-crispy-quick-snack-recipe-3188708</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/food/potato-peel-crispy-quick-snack-recipe-3188708#respond</comments><pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:15:46 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ फूड ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/food/potato-peel-crispy-quick-snack-recipe-3188708</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आलू लगभग हर घर में इस्तेमाल होता है. इसकी सब्जी, पराठे, टिक्की और कई दूसरी चीजें बनाई जाती हैं. लेकिन आलू छीलने के बाद ज्यादातर लोग उसके छिलके कूड़े में फेंक देते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अब ऐसा करने की जरूरत नहीं है. आलू के छिलकों को अच्छी तरह साफ करके उनसे एक स्वादिष्ट और कुरकुरा स्नैक तैयार किया जा सकता है. यह आसानी से झट पट बन कर तैयार हो जाता है और शाम की चाय का जायका बढ़ा देता है&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबसे पहले छिलकों को अच्छी तरह साफ करें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आलू के छिलकों से स्नैक बनाने के लिए सबसे पहले आलू को पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद छिलके उतारें और उन्हें एक बार फिर साफ पानी से धोएं. छिलकों पर मिट्टी या गंदगी बिल्कुल नहीं रहनी चाहिए. अब इन्हें कुछ देर के लिए साफ कपड़े या पेपर पर रखकर सुखा लें. अगर छिलकों में ज्यादा पानी रहेगा तो इन्हें कुरकुरा बनाने में परेशानी होगी . इसलिए इन्हें अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. आप चाहें तो छिलकों को थोड़ा मोटा भी रख सकते हैं , इससे स्नैक खाने में ज्यादा अच्छा क्रिस्पी लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/food/golden-modak-recipe-at-home-3186645&quot;&gt;घर में कैसे बनाएं गोल्डन मोदक? कमाल की है यह रेसिपी &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ऐसे बनाएं कुरकुरा स्नैक&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब एक कटोरी में आलू के सूखे छिलके लें. इसमें थोड़ा सा नमक, लाल मिर्च, चाट मसाला और अपनी पसंद के मसाले डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद एक पैन में थोड़ा तेल तेज आंच पर गर्म होने दें &amp;nbsp;और उसमें छिलकों को डालकर धीमी या मध्यम आंच पर भूनें. इन्हें लगातार चलाते रहें, ताकि छिलके नीचे से जलें नहीं. कुछ देर बाद छिलके सुनहरे और कुरकुरे होने लगेंगे. जब छिलके अच्छी तरह क्रिस्पी हो जाएं तो उन्हें प्लेट में निकाल लें. इसे हेल्थी बनाने के लिए आप &amp;nbsp;ओवन या एयर फ्रायर में भी इन्हे &amp;nbsp;कुरकुरा कर सकते हैं .&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चाय के साथ खाएं और स्वाद बढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आलू के छिलकों से बना यह स्नैक शाम की चाय के साथ खाया जा सकता है. इसका स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से थोड़ा चाट मसाला या नींबू का रस डालें . इसमें आप अपनी पसंद के मासालें मिला कर नया फ्लेवर भी बना सकते हैं . यह &amp;nbsp;खाने की चीजों को बेकार जाने से बचाने का आसान तरीका है. ध्यान रखें की &amp;nbsp;स्नैक बनाने के लिए ताजे और अच्छी तरह साफ किए हुए आलू के छिलके ही इस्तेमाल करें. हरे पड़े, सड़े या खराब आलू के छिलकों का इस्तेमाल नहीं करें . इस तरह घर में बचने वाले छिलकों से एक आसान और कुरकुरा स्नैक तैयार किया जा सकता है&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/food/meerut-famous-nankhatai-recipe-at-home-3188353&quot;&gt;घर पर कैसे बनाएं मेरठ की मशहूर नानखटाई? जान लें रेसिपी &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/0ca61309909a57ab8504a288d415bdca17893821739481472_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Atta Dough: फ्रिज में आटा काला पड़ क्यों हो जाता है, जानें फ्रेश रखने का सही तरीका]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/why-does-atta-dough-turn-black-in-the-fridge-how-to-keep-it-fresh-3188793</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/why-does-atta-dough-turn-black-in-the-fridge-how-to-keep-it-fresh-3188793#respond</comments><pubDate>Tue, 15 Sep 2026 10:05:44 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ Home Tips ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/why-does-atta-dough-turn-black-in-the-fridge-how-to-keep-it-fresh-3188793</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;How To Store Kneaded Atta In Fridge Freshly:&lt;/strong&gt; रोटी या चपाती भारतीय घरों के खाने का अहम हिस्सा है. रोजाना रोटी बनाने के लिए ज्यादातर घरों में आटा गूंथा जाता है. कई बार समय बचाने के लिए लोग जरूरत से थोड़ा ज्यादा आटा गूंथ लेते हैं और बचे हुए आटे को फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन कुछ घंटों बाद जब यही आटा फ्रिज से बाहर निकाला जाता है, तो उसका रंग हल्का काला या ग्रे नजर आने लगता है. कई बार आटे की ऊपरी परत का रंग बाकी आटे से अलग दिखाई देता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर फ्रिज में रखने के बावजूद आटा काला क्यों पड़ गया? क्या यह सिर्फ रंग बदलने की वजह है या फिर ऐसा आटा खाना नुकसानदायक हो सकता है? साथ ही, आटे को किस तरह स्टोर किया जाए ताकि वह ज्यादा देर तक ताजा और इस्तेमाल करने लायक बना रहे? आइए जानते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आटा काला पड़ने की सबसे बड़ी वजह क्या है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गूंथे हुए आटे के रंग में बदलाव की सबसे आम वजह ऑक्सीडेशन मानी जाती है. जब गेहूं के आटे में पानी मिलाकर उसे गूंथा जाता है, तो वह हवा के संपर्क में आता है. हवा में मौजूद ऑक्सीजन आटे में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के साथ प्रतिक्रिया करती है. समय बीतने के साथ इस प्रक्रिया के कारण आटे का रंग हल्का गहरा या ग्रे दिखाई दे सकता है. गेहूं में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम भी इस बदलाव में भूमिका निभा सकते हैं. आटा गूंथने के बाद भी ये एंजाइम पूरी तरह खत्म नहीं होते और समय के साथ आटे के रंग और बनावट में बदलाव ला सकते हैं. फ्रिज का ठंडा तापमान इस प्रक्रिया को धीमा जरूर करता है, लेकिन हमेशा पूरी तरह रोक नहीं पाता.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/0b8a1e42167fc658538bf0f4bf4e038017893884364051257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ज्यादा पानी से भी बिगड़ सकता है आटा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आटा गूंथते समय पानी की मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है. जरूरत से ज्यादा पानी डालने पर आटा बहुत नरम और नम हो जाता है. अधिक नमी की वजह से उसमें होने वाली रासायनिक और जैविक प्रक्रियाएं तेजी से हो सकती हैं, जिससे रंग और टेक्सचर में बदलाव आने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा, अगर आटा बहुत देर तक रखा हुआ है, तो उसमें धीरे-धीरे खमीर उठने या फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. ऐसे में आटे का रंग थोड़ा गहरा होने के साथ उसमें हल्की खट्टी गंध भी आ सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/5a3c067bc49b7c197f6038646a1f2ad217893884816281257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कंटेनर की सफाई भी है जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गूंथे हुए आटे को जिस बर्तन में रखा जा रहा है, उसकी सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए. अगर कंटेनर साफ नहीं है या उसमें पहले से खाने के अवशेष और नमी मौजूद है, तो आटा जल्दी खराब हो सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ रंग बदलने के बजाय आटे में चिपचिपापन, असामान्य गंध या दूसरी खराबी के संकेत भी दिखाई दे सकते हैं. पुराने आटे से भी ऐसी समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है. इसलिए आटा खरीदते समय उसकी ताजगी और अच्छी क्वालिटी का ध्यान रखना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आटे को फ्रेश रखने के लिए ऊपर लगाएं थोड़ा तेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गूंथे हुए आटे को फ्रिज में रखने से पहले उसकी सतह पर तेल की बहुत पतली परत लगा सकते हैं. तेल आटे और हवा के सीधे संपर्क को कुछ हद तक कम करता है, जिससे ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. इसके साथ ही आटे की सतह सूखने से भी बचती है. ध्यान रखें कि तेल की बहुत ज्यादा मात्रा लगाने की जरूरत नहीं है. बस इतनी मात्रा पर्याप्त है कि आटे की पूरी सतह पर हल्की कोटिंग हो जाए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आटे को खुले बर्तन या बिना ढके फ्रिज में रखने से बचें. इसे अच्छी तरह बंद होने वाले एयरटाइट कंटेनर में रखना बेहतर होता है. इससे आटा फ्रिज की हवा, दूसरी चीजों की गंध और अनावश्यक नमी के संपर्क से बचा रहता है. कंटेनर में रखने से पहले यह भी सुनिश्चित करें कि वह पूरी तरह साफ और सूखा हो.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/squeaky-door-fix-without-calling-a-carpenter-3187611&quot;&gt;Squeaky Door: दरवाजे से आ रही चर्र-चर्र की आवाज, बढ़ई बुलाए बिना करें ठीक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;जरूरत के हिसाब से छोटे हिस्सों में रखें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपको पहले से आटा गूंथकर रखना ही है, तो उसे एक ही बड़े हिस्से में रखने के बजाय छोटी-छोटी मात्रा में बांटकर रख सकते हैं. इसका फायदा यह है कि हर बार पूरे आटे को बाहर निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जितना आटा चाहिए, उतना ही हिस्सा बाहर निकालें और बाकी को दोबारा फ्रिज में रख दें. इससे बार-बार होने वाले तापमान परिवर्तन और हवा के संपर्क को कम किया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आटा कितनी देर तक इस्तेमाल करना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फ्रिज में रखा आटा भी हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं रहता. बेहतर है कि गूंथे हुए आटे को करीब 12 से 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल कर लिया जाए. ज्यादा समय तक रखा हुआ आटा इस्तेमाल करने से पहले उसकी गंध, रंग और बनावट जरूर जांच लें. अगर आटे से असामान्य या तेज खट्टी गंध आ रही हो, वह जरूरत से ज्यादा चिपचिपा या स्लिमी हो गया हो, या उस पर फफूंदी जैसी कोई चीज दिखाई दे रही हो, तो उसे इस्तेमाल न करें और सुरक्षित तरीके से फेंक दें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/roti-not-puffing-up-dough-kneading-mistakes-3187631&quot;&gt;Roti Making Tips: रोटी नहीं फूल रही, कहीं आटा गूंथने में ये गलती तो नहीं कर रहे?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/8d23ace06ffc3e99153ae68243f0441817893888670331257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Mattress Care: गद्दे को साल में कितनी बार पलटना चाहिए? जान लीजिए सही जवाब]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/how-often-should-you-flip-your-mattress-in-a-year-3188789</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/how-often-should-you-flip-your-mattress-in-a-year-3188789#respond</comments><pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:34:31 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ Home Tips ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/how-often-should-you-flip-your-mattress-in-a-year-3188789</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Difference Between Flipping And Rotating Mattress:&lt;/strong&gt; हम अपनी जिंदगी का करीब एक-तिहाई हिस्सा सोने में बिताते हैं. ऐसे में जिस गद्दे पर हम रोजाना कई घंटे सोते हैं, उसकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है. लंबे समय तक एक ही गद्दे का इस्तेमाल करने पर उसकी सतह पर शरीर का दबाव लगातार एक ही जगह पड़ता रहता है. इससे कुछ समय बाद गद्दे पर गड्ढे पड़ने लग सकते हैं या उसकी सतह असमान हो सकती है. इसका असर नींद के साथ-साथ शरीर के आराम पर भी पड़ सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गद्दे की उम्र बढ़ाने और उसे लंबे समय तक आरामदायक बनाए रखने के लिए उसे समय-समय पर घुमाना या पलटना एक आसान तरीका माना जाता है. लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि हर गद्दे को पलटने की जरूरत नहीं होती. कुछ गद्दे सिर्फ एक तरफ इस्तेमाल करने के लिए बनाए जाते हैं, जबकि कुछ को दोनों तरफ से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए गद्दे को पलटने से पहले निर्माता की गाइडलाइन जरूर देखनी चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/128af10f3629c56f3d4a22013ef1953217893877367031257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गद्दे को साल में कितनी बार पलटना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपका गद्दा दोनों तरफ से इस्तेमाल किया जा सकता है, तो इसे आमतौर पर हर 3 से 6 महीने में पलटने की सलाह दी जाती है. इससे शरीर का दबाव एक ही हिस्से पर लगातार नहीं पड़ता और गद्दे पर असमान दबाव बनने की संभावना कम होती है. वहीं, अगर गद्दा सिर्फ एक तरफ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है, तो उसे पलटने के बजाय हर 3 से 6 महीने में घुमाया जा सकता है. यानी गद्दे का सिर वाला हिस्सा पैरों की तरफ और पैरों वाला हिस्सा सिर की तरफ कर दें. इससे गद्दे के एक ही हिस्से पर लगातार दबाव पड़ने से बचाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/a1777a754ef56e17053916c554f7a12b17893877670401257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गद्दे को पलटने से क्या फायदा होता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गद्दे को नियमित रूप से पलटने या घुमाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उस पर पड़ने वाला दबाव अलग-अलग हिस्सों में बंट जाता है. इससे एक ही जगह पर जल्दी गड्ढा बनने या सतह के दबने की समस्या कम हो सकती है. इसके अलावा, गद्दे की सतह लंबे समय तक एक जैसी बनी रह सकती है और सोते समय मिलने वाला सपोर्ट भी बेहतर तरीके से बना रहता है. खासकर उन लोगों के लिए यह आदत उपयोगी हो सकती है जो रोजाना एक ही जगह और एक ही पोजिशन में सोते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हर गद्दे को पलटना सही नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह सबसे जरूरी बात है जिसे ध्यान में रखना चाहिए. आजकल बाजार में कई ऐसे गद्दे उपलब्ध हैं जिनमें ऊपर और नीचे की परतें अलग-अलग तरीके से बनाई जाती हैं. ऐसे गद्दों को पलटने पर उनका सही सपोर्ट और आराम नहीं मिल सकता. मेमोरी फोम, ऑर्थोपेडिक और कुछ हाई-परफॉर्मेंस गद्दे एक खास साइड से इस्तेमाल करने के लिए बनाए जाते हैं. ऐसे गद्दों को पलटने के बजाय सिर्फ निर्माता के निर्देश के अनुसार घुमाना चाहिए. अगर गद्दे के दोनों तरफ अलग-अलग डिजाइन, कपड़ा या सपोर्ट लेयर दिखाई देती है, तो उसे बिना जानकारी के पलटने से बचें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/squeaky-door-fix-without-calling-a-carpenter-3187611&quot;&gt;Squeaky Door: दरवाजे से आ रही चर्र-चर्र की आवाज, बढ़ई बुलाए बिना करें ठीक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गद्दे की सफाई भी है जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सिर्फ गद्दे को पलटना ही उसकी देखभाल के लिए पर्याप्त नहीं है. समय-समय पर इसकी सतह की सफाई भी करनी चाहिए. गद्दे पर धूल, पसीना और दूसरी गंदगी जमा हो सकती है, इसलिए बेडशीट हटाकर उसे कुछ समय के लिए हवा लगने देना फायदेमंद हो सकता है. मैट्रेस प्रोटेक्टर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. यह गद्दे को पसीने, नमी और अचानक गिरने वाले तरल पदार्थ से बचाने में मदद करता है. इससे गद्दे की अंदरूनी परतों तक नमी पहुंचने की संभावना कम हो जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गद्दे की उम्र भी रखें ध्यान में&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गद्दे को सही तरीके से घुमाने और उसकी नियमित देखभाल करने से उसकी लाइफ बढ़ाने में मदद मिल सकती है, लेकिन कोई भी गद्दा हमेशा नहीं चलता. आमतौर पर गद्दे की उम्र करीब 7 से 10 साल मानी जाती है, हालांकि इसकी वास्तविक उम्र उसकी क्वालिटी, सामग्री, इस्तेमाल और रखरखाव पर निर्भर करती है. गर गद्दे पर लगातार गड्ढे पड़ गए हैं, उसकी सतह असमान हो गई है, स्प्रिंग से आवाज आने लगी है या उस पर सोने के बाद शरीर में दर्द और अकड़न महसूस होती है, तो सिर्फ उसे पलटना समाधान नहीं है. ऐसे संकेत बताते हैं कि गद्दे को बदलने का समय आ सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/roti-not-puffing-up-dough-kneading-mistakes-3187631&quot;&gt;Roti Making Tips: रोटी नहीं फूल रही, कहीं आटा गूंथने में ये गलती तो नहीं कर रहे?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/c03060d8214bef0091c76950cb870c1117893879589371257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Wall Paint: दीवार के नए पेंट पर दिखने लगे छोटे छेद? अपनाएं ये 3 उपाय]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/why-do-tiny-holes-appear-in-wall-paint-causes-and-solutions-3188775</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/why-do-tiny-holes-appear-in-wall-paint-causes-and-solutions-3188775#respond</comments><pubDate>Tue, 15 Sep 2026 06:51:04 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ Home Tips ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/why-do-tiny-holes-appear-in-wall-paint-causes-and-solutions-3188775</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Why Tiny Holes Appear On Painted Walls:&lt;/strong&gt; घर की दीवारों पर नया पेंट करवाने के बाद कुछ समय तक सबकुछ साफ-सुथरा और खूबसूरत नजर आता है. लेकिन कई बार कुछ महीनों बाद पेंट की सतह पर छोटे-छोटे छेद, बारीक गड्ढे या उभरे हुए निशान दिखाई देने लगते हैं. शुरुआत में ये इतने छोटे होते हैं कि इन पर किसी का ध्यान नहीं जाता. धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ने लगती है और दीवार की पूरी फिनिश खराब दिखने लगती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आमतौर पर ऐसे निशान देखते ही लोगों को लगता है कि दीवार में सीलन आ गई है. हालांकि, हर बार इसकी वजह सिर्फ सीलन नहीं होती. पेंट की सही तैयारी न होना, हवा का फंस जाना, नमी, खराब प्लास्टर और पेंट की परतों के बीच सही बॉन्डिंग न होना भी इसकी वजह बन सकता है. ऐसे में सिर्फ ऊपर से दोबारा पेंट कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दीवार पर छोटे-छोटे छेद क्यों बनने लगते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पेंट की सतह पर छोटे गड्ढे या छेद बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जब दीवार की सतह ठीक तरह से तैयार नहीं की जाती और उसके ऊपर सीधे पेंट कर दिया जाता है, तो पेंट दीवार के साथ मजबूत तरीके से चिपक नहीं पाता. दीवार पर मौजूद धूल, गंदगी या पुरानी कमजोर पेंट की परत नई पेंटिंग की पकड़ को प्रभावित कर सकती है. कई बार पेंट की परत के नीचे हवा भी फंस जाती है. समय के साथ ये छोटे एयर पॉकेट सतह पर बारीक गड्ढों या उभार के रूप में नजर आ सकते हैं. अगर पेंट करने से पहले दीवार पूरी तरह सूखी नहीं थी, तो समस्या और बढ़ सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/f5882b8dd8fe306b9becb5f146a8aef317893867932381257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीलन के अलावा नमी भी हो सकती है वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दीवार पर नमी होना छोटे छेद और पेंट की खराब फिनिश की एक बड़ी वजह है. जरूरी नहीं कि दीवार में हमेशा तेज सीलन ही हो. कमरे में ज्यादा नमी या भाप के कारण भी दीवार की सतह प्रभावित हो सकती है. किचन और बाथरूम जैसी जगहों पर यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, खासकर जब कमरे में हवा का सही वेंटिलेशन न हो. दीवार के अंदर या पेंट की परत के नीचे नमी फंसने पर धीरे-धीरे पेंट की पकड़ कमजोर हो सकती है. इसके बाद सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे, बुलबुले या उखड़ने के निशान नजर आने लगते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/3a768b1ec85e3e9821a83afee35078c417893868132261257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाइप या छत से पानी का रिसाव भी जांचें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कई बार दीवार पर दिखाई देने वाली खराबी का संबंध आसपास की पाइपलाइन से होता है. दीवार के अंदर पानी की पाइप में हल्का रिसाव हो, छत से पानी नीचे आ रहा हो या खिड़की और बालकनी के आसपास से नमी अंदर पहुंच रही हो, तो पेंट की सतह पर धीरे-धीरे असर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में केवल प्रभावित हिस्से पर नया पेंट लगाने से समस्या कुछ समय के लिए छिप सकती है, लेकिन रिसाव जारी रहने पर वही निशान दोबारा दिखाई दे सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खराब प्लास्टर भी हो सकता है कारण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर दीवार के नीचे का प्लास्टर कमजोर, पुराना या असमान है, तो उसके ऊपर किया गया पेंट भी ज्यादा समय तक अच्छी फिनिश नहीं दे पाता. प्लास्टर में मौजूद छोटे छेद, दरारें या ढीले हिस्से पेंट की सतह पर भी दिखाई देने लगते हैं. इसी तरह, अगर पेंट से पहले दीवार पर सही तरीके से पुट्टी और प्राइमर नहीं लगाया गया है, तो पेंट की परत दीवार से अच्छी तरह जुड़ नहीं पाती. कुछ समय बाद जगह-जगह छोटे गड्ढे या खुरदुरापन नजर आने लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पेंट की परतों के बीच सही बॉन्डिंग जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कभी-कभी पुरानी पेंट की परत के ऊपर नई पेंट की परत लगा दी जाती है, जबकि पुरानी सतह कमजोर होती है. अलग-अलग तरह के पेंट का इस्तेमाल करने पर भी दोनों परतों के बीच बॉन्डिंग कमजोर हो सकती है. इसलिए पेंट कराने से पहले पुरानी खराब परत को हटाना, दीवार को साफ करना और जरूरत के अनुसार प्राइमर लगाना जरूरी होता है. इससे नई पेंट की पकड़ बेहतर होती है और सतह पर गड्ढे या उखड़ने की समस्या कम हो सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें- &lt;a title=&quot;Floor Tile Care: फर्श की टाइल में क्यों आ जाती है दरार? घर पर ऐसे करें रिपेयर&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/floor-tile-joints-cracking-causes-and-prevention-tips-3187994&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;Floor Tile Care: फर्श की टाइल में क्यों आ जाती है दरार? घर पर ऐसे करें रिपेयर&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;छोटे छेद दिखें तो सिर्फ पेंट न करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर दीवार पर छोटे-छोटे छेद या गड्ढे नजर आने लगे हैं, तो सबसे पहले उनकी वजह समझने की कोशिश करें. दीवार को ध्यान से देखें कि कहीं उसके आसपास नमी, दाग, उभरी हुई पेंट की परत या दरार तो नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/squeaky-door-fix-without-calling-a-carpenter-3187611&quot;&gt;Squeaky Door: दरवाजे से आ रही चर्र-चर्र की आवाज, बढ़ई बुलाए बिना करें ठीक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/9b317ab1cbd5e2122c4fb6ca053ac8af17893873811201257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[केले के छिलके की सब्जी कैसे बनाते हैं, नोट कर लीजिए रेसीपी]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/food/banana-peel-tasty-easy-and-quick-sabji-banana-peel-dish-at-home-kitchen-recipes-3188606</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/food/banana-peel-tasty-easy-and-quick-sabji-banana-peel-dish-at-home-kitchen-recipes-3188606#respond</comments><pubDate>Mon, 14 Sep 2026 18:36:02 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ फूड ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/food/banana-peel-tasty-easy-and-quick-sabji-banana-peel-dish-at-home-kitchen-recipes-3188606</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;केला खाने के बाद ज्यादातर लोग उसका छिलका फेंक देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि केले के छिलके से भी स्वादिष्ट सब्जी बनाई जा सकती है? सही तरीके से साफ करके और मसालों के साथ पकाने पर केले के छिलके की सब्जी स्वाद में काफी अच्छी लगती है. यह रेसिपी खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जिन्हें कुछ नया बनाना और खाना पसंद है. केले के छिलके की सब्जी बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती. इसे घर में मौजूद सामान्य मसालों से आसानी से बनाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;छिलकों को करें साफ&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे पहले केले के छिलकों को अच्छी तरह साफ करें. केलों को पानी से अच्छी तरह धोने के बाद छिलका उतारें. छिलकों में से बचा हुआ केले का गुदा अच्छी तरह निकाल लें. इसके बाद छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. कटे हुए छिलकों को पानी में डालकर कुछ मिनट के लिए उबाल लें. इससे वे नरम हो जाएंगे और पकाने में आसानी होगी. उबालने के बाद पानी अच्छी तरह निकाल दें और छिलकों को अलग रख दें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/food/ganesh-chaturthi-modak-recipe-at-home-3188135&quot;&gt;&lt;strong&gt;गणेश चतुर्थी पर घर पर बनाएं बप्पा के फेवरेट मोदक, नोट कर लें रेसिपी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऐसे बनाएं केले के छिलके की सब्जी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब कड़ाही में तेल गर्म करें और इसमें जीरा और हींग डालें. बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भूनें. अगर आप प्याज और लहसुन डालना चाहते हैं तो इस स्टेज पर उन्हें डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालें. मसालों को धीमी आंच पर थोड़ी देर पकाएं. अब उबले हुए केले के छिलके कड़ाही में डाल दें. नमक डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. अब सब्जी को मीडियम आंच पर करीब 5-10 मिनट तक पकाएं और बीच-बीच में चलाते रहें. जब छिलके मसालों के साथ अच्छी तरह भुन जाएं और अतिरिक्त नमी खत्म हो जाए, तो गैस बंद कर दें. अंत में आप स्वाद बढ़ाने के लिए अमचूर पाउडर या थोड़ा नींबू का रस भी डाल सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऐसे परोसें सब्जी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;केले के छिलके की सब्जी को आप रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ परोस सकते हैं. इसका स्वाद मसालेदार और हल्का खट्टा होने पर यह खाने में और भी स्वादिष्ट लगती है. आप इसे कभी भी आसानी से और कम मेहनत कर बना सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/food/how-to-make-famous-indore-jalebi-at-home-easy-recipe-3186543&quot;&gt;&lt;strong&gt;Indore Jalebi Recipe: घर में कैसे बनाएं इंदौर की मशहूर जलेबी? इस आसान रेसिपी से मिलेगा गजब स्वाद&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/6937dd3fcc28b49f22e15533878d906a17893714589741473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[लंच बॉक्स में पड़ गए सब्जी के पीले दाग, ऐसे हो जाएंगे साफ]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/home-tips-lunch-box-yellow-stain-cleaning-tips-3188589</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/home-tips-lunch-box-yellow-stain-cleaning-tips-3188589#respond</comments><pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:34:47 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ निर्जला गौड़ ]]></dc:creator><category><![CDATA[ Home Tips ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/home-tips-lunch-box-yellow-stain-cleaning-tips-3188589</guid><description><![CDATA[लंच बॉक्स में पड़ गए सब्जी के पीले दाग, ऐसे हो जाएंगे साफ]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/4dc5ee97207e5f77d811845b4f24a55917893698708651472_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[How To Clean Brass: काले पड़ गए हैं पीतल के बर्तन? 2 मिनट में ऐसे लाएं नई चमक]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/brass-cleaning-at-home-remove-blackness-and-restore-shine-3188000</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/brass-cleaning-at-home-remove-blackness-and-restore-shine-3188000#respond</comments><pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:06:02 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ Home Tips ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/brass-cleaning-at-home-remove-blackness-and-restore-shine-3188000</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;How To Clean Blackened Brass Utensils:&lt;/strong&gt; घर में रखे पीतल के बर्तन और सजावटी सामान अपनी सुनहरी चमक की वजह से हमेशा खास नजर आते हैं. पूजा में इस्तेमाल होने वाला पीतल का दीया हो, त्योहारों पर निकाली जाने वाली पीतल की थाली हो या फिर सालों से संभालकर रखा कोई पुराना बर्तन, इन चीजों का रिश्ता सिर्फ घर की सजावट से नहीं बल्कि हमारी यादों और परंपराओं से भी जुड़ा होता है. लेकिन समय के साथ इनकी चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगती है और पीतल की सतह पर काली या भूरी परत जम जाती है. ऐसे में कई लोग इसे दोबारा चमकाने के लिए पॉलिश करवाने का सोचते हैं. हालांकि, हर बार ऐसा करने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ चीजों की मदद से पीतल के सामान की खोई चमक काफी हद तक वापस लाई जा सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आखिर पीतल काला क्यों पड़ जाता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पीतल मुख्य रूप से तांबे और जिंक से बना एक मिश्रधातु है. जब यह लगातार हवा, नमी, पानी या कुछ खाद्य पदार्थों के संपर्क में आता है, तो इसकी सतह पर धीरे-धीरे एक परत बनने लगती है. इसी वजह से कुछ समय बाद चमकदार पीतल काला, भूरा या धुंधला दिखाई देने लगता है. इसे टार्निशिंग कहा जाता है. यह कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन अगर पीतल की चीजों की नियमित सफाई और देखभाल न की जाए तो यह परत काफी जिद्दी हो सकती है. अच्छी बात यह है कि इसके लिए हमेशा महंगे क्लीनिंग प्रोडक्ट या प्रोफेशनल पॉलिश की जरूरत नहीं पड़ती. नींबू, नमक, सिरका, बेकिंग सोडा और इमली जैसी रोजमर्रा की चीजें पीतल की सफाई में मदद कर सकती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/12/e02533f649036cd01d137bf3d908a52d17892203522811257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;नींबू और नमक से लौटाएं चमक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पीतल की हल्की काली परत हटाने के लिए नींबू और नमक का तरीका काफी आसान है. इसके लिए एक नींबू को आधा काट लें और उसके कटे हुए हिस्से पर थोड़ा नमक लगा दें. अब इसे पीतल की सतह पर हल्के हाथ से रगड़ें. नींबू में मौजूद एसिड जमा हुई परत को ढीला करने में मदद करता है, जबकि नमक हल्के स्क्रबर की तरह काम करता है. यह तरीका पीतल की कटोरी, थाली, पूजा के सामान और रोजाना इस्तेमाल होने वाली छोटी चीजों की सफाई के लिए उपयोग किया जा सकता है. सफाई के बाद सामान को पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ज्यादा काले दाग के लिए सिरका और बेकिंग सोडा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर पीतल पर काले धब्बे ज्यादा हैं और सामान्य सफाई से नहीं निकल रहे हैं, तो सफेद सिरके और बेकिंग सोडा का मिश्रण आजमाया जा सकता है. दोनों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और इसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं. करीब 5 से 10 मिनट तक इसे लगा रहने दें. इसके बाद किसी मुलायम स्पंज या कपड़े से हल्के हाथ से साफ करें और पानी से धो लें. ध्यान रखें कि पीतल को साफ करते समय बहुत जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है. ज्यादा घर्षण से सतह पर खरोंच आ सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/12/fc40dcc7df3a05c594b5368f42a1ae9a17892203766811257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इमली या टमाटर भी आएंगे काम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पीतल की सफाई के लिए इमली और टमाटर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इमली के गूदे या टमाटर के रस को पीतल की काली पड़ी सतह पर लगाएं और कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. इनमें मौजूद प्राकृतिक एसिड टार्निश की परत को हटाने में मदद कर सकते हैं. कुछ देर बाद सामान को पानी से अच्छी तरह धो लें और सूखे मुलायम कपड़े से पोंछ दें. यह तरीका खासकर तब उपयोगी हो सकता है, जब पीतल की सतह पर हल्की से मध्यम परत जमा हो.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आटा, नमक और सिरके से बनाएं नेचुरल क्लीनिंग पेस्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बहुत ज्यादा टार्निश वाले पीतल के सामान के लिए आटा, नमक और सिरके का पेस्ट भी इस्तेमाल किया जा सकता है. तीनों चीजों को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे पीतल की सतह पर लगाएं. करीब 15 से 20 मिनट तक इसे लगा रहने दें. इसके बाद पानी से अच्छी तरह साफ कर लें. इस तरीके का इस्तेमाल पुराने पीतल के बर्तनों, घंटियों, पूजा के सामान और थालियों पर किया जा सकता है. हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को पूरी चीज पर लगाने से पहले एक छोटे और कम दिखाई देने वाले हिस्से पर टेस्ट करना बेहतर है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हल्के दाग के लिए टूथपेस्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर पीतल पर सिर्फ हल्की परत जमी है, तो थोड़ी मात्रा में साधारण सफेद टूथपेस्ट भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे मुलायम कपड़े पर लगाकर पीतल की सतह पर हल्के हाथ से रगड़ें. इसके बाद पानी से धोकर सामान को पूरी तरह सुखा दें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/roti-not-puffing-up-dough-kneading-mistakes-3187631&quot;&gt;Roti Making Tips: रोटी नहीं फूल रही, कहीं आटा गूंथने में ये गलती तो नहीं कर रहे?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सफाई के बाद ऐसे रखें पीतल को चमकदार&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पीतल की चीजों को बार-बार काला पड़ने से बचाने के लिए उनकी नियमित देखभाल जरूरी है. इस्तेमाल के बाद बर्तनों को ज्यादा देर तक गीला न छोड़ें और उन्हें हल्के साबुन से साफ करके तुरंत सुखा दें. सफाई के लिए बहुत तेज डिटर्जेंट या खुरदरे स्क्रबर का इस्तेमाल करने से बचें. पीतल के सामान को रखने की जगह भी सूखी होनी चाहिए. लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना है, तो इन्हें मुलायम कपड़े में लपेटकर रखें. इससे नमी और हवा के सीधे संपर्क को कम करने में मदद मिलेगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/squeaky-door-fix-without-calling-a-carpenter-3187611&quot;&gt;Squeaky Door: दरवाजे से आ रही चर्र-चर्र की आवाज, बढ़ई बुलाए बिना करें ठीक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/12/9c382c3a4323a9c432fea315c09693cd17892210478451257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Floor Tile Care: फर्श की टाइल में क्यों आ जाती है दरार? घर पर ऐसे करें रिपेयर]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/floor-tile-joints-cracking-causes-and-prevention-tips-3187994</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/floor-tile-joints-cracking-causes-and-prevention-tips-3187994#respond</comments><pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:42:35 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ Home Tips ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/floor-tile-joints-cracking-causes-and-prevention-tips-3187994</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Why Tile Grout Cracks And Crumbles:&lt;/strong&gt; घर में नई टाइल्स लगवाने के बाद फर्श काफी साफ और खूबसूरत नजर आता है. लेकिन कुछ समय बीतने के बाद अगर टाइल्स के बीच भरा हुआ मसाला या ग्राउट धीरे-धीरे टूटने, झड़ने या उसमें बारीक दरारें आने लगें, तो इसे सिर्फ खूबसूरती से जुड़ी छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार टाइल्स के जोड़ खराब होने के पीछे फर्श की बेस, नमी या टाइल्स लगाने के तरीके से जुड़ी वजहें हो सकती हैं. शुरुआत में ही इन संकेतों पर ध्यान दिया जाए, तो आगे होने वाली बड़ी परेशानी और बार-बार मरम्मत के खर्च से बचा जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;टाइल्स के बीच ग्राउट का क्या काम होता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टाइल्स के बीच जो खाली जगह दिखाई देती है, उसे भरने के लिए ग्राउट का इस्तेमाल किया जाता है. यह सिर्फ टाइल्स को एक साथ जोड़कर रखने का काम नहीं करता, बल्कि इनके बीच गंदगी और नमी को पहुंचने से रोकने में भी मदद करता है. फर्श को साफ-सुथरा फिनिश देने में भी इसकी अहम भूमिका होती है. हालांकि, ग्राउट इतना लचीला नहीं होता कि फर्श के नीचे होने वाली हर तरह की हलचल को सह सके. जब बेस या टाइल्स में जरूरत से ज्यादा मूवमेंट होता है, तो उसका दबाव जोड़ पर पड़ने लगता है. इसी वजह से ग्राउट में दरारें आने या वह झड़ने की शुरुआत हो सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/12/83757f3b616cbf6ad012b17dcb7507d817892197322691257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;फर्श की बेस में हलचल भी हो सकती है वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इमारत का फर्श पूरी तरह स्थिर नहीं रहता. &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; बदलने पर तापमान और नमी में होने वाले बदलाव से निर्माण सामग्री में हल्का फैलाव और सिकुड़न होती रहती है. नई बिल्डिंग में फर्श के बैठने की प्रक्रिया भी इसका एक कारण हो सकती है. अगर टाइल्स के नीचे की सतह कमजोर, असमान या ठीक से तैयार नहीं है, तो उस पर बिछी टाइल्स पर दबाव पड़ सकता है. कंक्रीट के ठीक से सूखने से पहले टाइल्स लगाना या लकड़ी जैसी सतह का फैलना-सिकुड़ना भी जोड़ में दरार पैदा कर सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर से नया ग्राउट भर देने से समस्या हमेशा के लिए खत्म नहीं होती.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ग्राउट तैयार करने में गलती पड़ सकती है भारी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टाइल्स के जोड़ जल्दी खराब होने की एक वजह ग्राउट तैयार करने का गलत तरीका भी हो सकता है. अगर इसमें जरूरत से ज्यादा पानी मिला दिया जाए, तो सूखने के बाद इसकी मजबूती कम हो सकती है. वहीं, पानी कम होने पर भी ग्राउट ठीक तरह से सेट और बॉन्ड नहीं हो पाता. ग्राउट को जोड़ में ठीक से भरना और दबाना भी जरूरी है. अगर बीच में खाली जगह रह जाए या उसे पर्याप्त समय दिए बिना इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जाए, तो वह कमजोर होकर जल्द टूट सकता है. इसलिए टाइल्स लगाते समय सिर्फ टाइल की क्वालिटी ही नहीं, बल्कि ग्राउट और उसके इस्तेमाल के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/12/d04e7ab4ffea41c511dee5a3b7b5a16817892197531601257_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;नमी से धीरे-धीरे खराब हो सकते हैं जोड़&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बाथरूम, किचन, बालकनी और घर के दूसरे ऐसे हिस्सों में जहां फर्श लगातार पानी के संपर्क में रहता है, वहां ग्राउट के खराब होने की संभावना ज्यादा होती है. बार-बार पानी लगने और सूखने से फर्श के जोड़ पर लगातार दबाव पड़ता रहता है. अगर टाइल्स के नीचे सही वॉटरप्रूफिंग नहीं की गई है, तो नमी अंदर तक पहुंच सकती है. ऐसे में ग्राउट का झड़ना सिर्फ ऊपर की समस्या नहीं रह जाता. इसलिए अगर किसी हिस्से में बार-बार ग्राउट खराब हो रहा है, तो सिर्फ उसे बदलने के बजाय नमी के स्रोत की जांच करना भी जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारी सामान और ज्यादा दबाव भी डालता है असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फर्श पर भारी फर्नीचर, मशीन या दूसरा सामान रखने से टाइल्स के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. ज्यादा आवाजाही वाले हिस्सों में लगातार पैरों का दबाव भी समय के साथ ग्राउट को कमजोर कर सकता है. इसके अलावा कोई भारी चीज सीधे फर्श पर गिरने से भी जोड़ में अचानक दरार आ सकती है. अगर टाइल खुद सही स्थिति में है और सिर्फ ग्राउट टूटा है, तो उसे बदलकर समस्या ठीक की जा सकती है. लेकिन टाइल हिल रही हो या नीचे से खोखली आवाज आ रही हो, तो मामला सिर्फ ग्राउट तक सीमित नहीं हो सकता.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें : &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/squeaky-door-fix-without-calling-a-carpenter-3187611&quot;&gt;Squeaky Door: दरवाजे से आ रही चर्र-चर्र की आवाज, बढ़ई बुलाए बिना करें ठीक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुरुआत में ही कैसे बचाएं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर ग्राउट में छोटी दरार दिखाई दे रही है, तो पहले यह देखें कि सिर्फ ऊपर की परत प्रभावित है या टाइल भी हिल रही है. कमजोर और टूटा हुआ ग्राउट पूरी तरह हटाकर जोड़ को साफ करना बेहतर रहता है. धूल और पुराना मलबा निकालने के बाद ही नया ग्राउट भरें. पुराने टूटे ग्राउट के ऊपर सीधे नया ग्राउट लगाने से मरम्मत लंबे समय तक टिक नहीं सकती.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नया ग्राउट हमेशा निर्माता के निर्देश के अनुसार तैयार करें और उसे पर्याप्त समय तक सूखने दें. फर्श को जल्दी पानी या भारी वजन के संपर्क में लाने से बचें. बड़े फर्श एरिया में सही जगह पर एक्सपेंशन या मूवमेंट जॉइंट होना भी जरूरी है. ये जॉइंट फर्श में होने वाले फैलाव और सिकुड़न का दबाव कम करने में मदद करते हैं. टाइल्स लगवाते समय बेस की अच्छी तैयारी, सही एडहेसिव और बेहतर क्वालिटी के ग्राउट का इस्तेमाल करें. नमी वाले हिस्सों में वॉटरप्रूफिंग को नजरअंदाज न करें. अगर बार-बार एक ही जगह के जोड़ टूट रहे हैं, टाइल हिल रही है या फर्श के नीचे नमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो सिर्फ घरेलू मरम्मत करने के बजाय किसी विशेषज्ञ से जांच करवाना बेहतर है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें :&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/roti-not-puffing-up-dough-kneading-mistakes-3187631&quot;&gt;Roti Making Tips: रोटी नहीं फूल रही, कहीं आटा गूंथने में ये गलती तो नहीं कर रहे?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/12/79861af3f458b55407a7ae5011a610fd17892200740271257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Xप्लेन: 80% मांसाहार भारतीयों के भारत का 'असली खाना' क्या? BRICS डिनर से बवाल]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/food/what-is-real-indian-food-brics-sumit-2026-gala-dinner-menu-veg-and-non-vegetarian-history-rahul-gandhi-pm-modi-explained-3188607</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/food/what-is-real-indian-food-brics-sumit-2026-gala-dinner-menu-veg-and-non-vegetarian-history-rahul-gandhi-pm-modi-explained-3188607#respond</comments><pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:06:16 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ ज़ाहिद अहमद ]]></dc:creator><category><![CDATA[ फूड ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/food/what-is-real-indian-food-brics-sumit-2026-gala-dinner-menu-veg-and-non-vegetarian-history-rahul-gandhi-pm-modi-explained-3188607</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नई दिल्ली में 12 सितंबर 2026 को BRICS समिट के गाला डिनर में शाकाहारी मेन्यू परोसा गया. इसमें खांडवी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मरमिक, मिलेट पुलाव, खुंब गलौटी और जलेबी जैसे व्यंजन थे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'रिकॉर्ड के लिए, 80% भारतीय नॉनवेज खाते हैं. भारतीय नॉनवेज खाना बहुत स्वादिष्ट होता है.' राहुल ने प्रियंका गांधी वाड्रा के बनाए छोले-भटूरे की तस्वीर भी शेयर की. इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का मजा लिया. इस बहस को पश्चिम बंगाल में बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री के दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज पर रोक लगाने के बयान ने और भड़का दिया. &lt;em&gt;&lt;strong&gt;आखिर भारत का असली खाना है क्या...&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot;&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot; lang=&quot;en&quot;&gt;Here's the BRICS dinner menu with a photo next to each item. &lt;a href=&quot;https://t.co/iRLJbcCCMV&quot;&gt;pic.twitter.com/iRLJbcCCMV&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&amp;mdash; Grok (@grok) &lt;a href=&quot;https://x.com/grok/status/2098821074251071545?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;September 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;
&lt;script src=&quot;https://platform.x.com/widgets.js&quot; async=&quot;&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत का खाना सिर्फ शाकाहारी नहीं, वह कभी था भी नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर इतिहास में झांकें तो पता चलता है कि भारत में मांस खाने की परंपरा हजारों साल पुरानी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हिस्टोरिसिटी रिसर्च जनरल की रिपोर्ट &lt;strong&gt;'द इवेल्युशन ऑफ नॉन-वेजिटेरियनिज्म एंड वेजिटेरियनिज्म ऑफ इंडिया इन द पास्ट'&lt;/strong&gt; में लिखा है कि सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में गाय, भेड़, कछुआ, मछली और मुर्गे की हड्डियां मिली हैं, जो साफ बताती हैं कि उस दौर के लोग मांस खाते थे. यही नहीं, वैदिक काल के आर्यों के बारे में कई इतिहासकारों का मानना है कि वे गोमांस भी खाते थे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मार्क्सवादी इतिहासकार आर.एस. शर्मा ने 1977 में अपनी किताब &lt;strong&gt;'India's Ancient Past'&lt;/strong&gt; में लिखा कि 'पशुपालन की वजह से वैदिक काल में गोमांस खाना प्रचलित था.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस (UCLA) ने भारत में शाकाहारी भोजन पर रिसर्च स्टडी की. इसके मुताबिक, शाकाहार का असली उदय बौद्ध और जैन धर्म के आने के बाद हुआ. छठी शताब्दी ईसा पूर्व में महावीर और बुद्ध ने अहिंसा पर जोर दिया, जिससे शाकाहार को बढ़ावा मिला. UCLA ने रिपोर्ट में दावा किया कि बुद्ध खुद शाकाहारी नहीं थे, कहा जाता है कि उनका आखिरी भोजन सूअर का मांस था. यानी शाकाहार भारत में शुरू से नहीं था, बल्कि एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के तहत आया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस पर भारत के फूड क्रिटिक और हिस्टोरियन पुष्पेश पंत का कहना है कि ऐसी कहानियां हैं कि गौतम बुद्ध कमंडल में से खाना खाते थे. जो व्यक्ति कमंडल में जिस भी तरह का खाना खाता था, गौतम बुद्ध खा लेते थे. इस वजह से मांस खाने वाली बात प्रचलित हुई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस्लामिक शासन यानी मुगलों के दौरान कबाब, बिरयानी, कोरमा और निहारी जैसे नॉनवेज व्यंजन भारतीय रसोई का हिस्सा बने. मुगलों ने पर्शियन और तुर्किये तकनीकों को भारतीय मसालों के साथ मिलाकर मुगलई खाना बनाया. हालांकि, यह समझना गलत होगा कि मुगलों से पहले भारत में नॉनवेज नहीं था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;वरिष्ठ पत्रकार वीर संघवी ने लिखा है, 'हिंदू समुदायों में नॉनवेज परंपरा हमारे शुरुआती दर्ज इतिहास तक जाती है.' मौर्य साम्राज्य (321-185 ईसा पूर्व) के समय भी भारतीय सांप, खरगोश और मेंढक खाते थे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;figure class=&quot;image&quot;&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/f0837231c208733bb4eb5d7178452a8517893706485551317_original.jpg&quot; alt=&quot;लंदन स्थित ब्रिटिश लाइब्रेरी में पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध के ग्रंथ निमतनामा में 15वीं शताब्दी में आलू-मांस के समोसे बनाते पुर्तगाली.&quot; /&gt;
&lt;figcaption&gt;लंदन स्थित ब्रिटिश लाइब्रेरी में पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध के ग्रंथ निमतनामा में 15वीं शताब्दी में आलू-मांस के समोसे बनाते पुर्तगाली.&lt;/figcaption&gt;
&lt;/figure&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तो फिर राहुल गांधी का 80% वाला दावा कितना सही?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राहुल गांधी का 80% का आंकड़ा पूरी तरह सटीक नहीं है, लेकिन इसके करीब जरूर है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5, 2019-2021) के मुताबिक, 15-49 साल के 87% पुरुष और 75% महिलाएं मीट, मछली या अंडा खाती हैं. औसतन यह आंकड़ा करीब 80% बैठता है. 2006 में यह 74% था, जो 2021 में बढ़कर 80% हो गया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राज्यों की बात करें तो तस्वीर बहुत साफ है. नागालैंड में 99.8% लोग मांस खाते हैं, जबकि राजस्थान में सबसे ज्यादा 71.17% लोग शाकाहारी हैं. सिर्फ तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में शाकाहारी लोग बहुमत में हैं. केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में 95% से ज्यादा लोग मांस खाते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, धार्मिक आंकड़ों की बात करें तो मुस्लिम (99%), ईसाई (99%) और बौद्ध (97%) आबादी लगभग पूरी मांस खाती है. हिंदुओं में भी तीन-चौथाई से ज्यादा लोग मांस खाते हैं. सबसे ज्यादा शाकाहारी जैन हैं. इनमें सिर्फ एक-चौथाई लोग कभी मांस खा चुके हैं. यानी धार्मिक पहचान और खाने की आदत का सीधा रिश्ता है, लेकिन यह रिश्ता उतना सरल नहीं जितना लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शाकाहार की 'ऊंची जगह' कैसे बनी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका जवाब जाति व्यवस्था में छिपा है. भीमराव आंबेडकर और गेल ओमवेट जैसे विद्वानों ने तर्क दिया है कि ब्राह्मणवादी विचारधारा ने खाने की आदतों को सामाजिक नियंत्रण के औजार के तौर पर इस्तेमाल किया. शाकाहार को शुद्धता, आध्यात्मिकता और ऊंचे सामाजिक दर्जे से जोड़ा गया, जबकि नॉनवेज को अपवित्र और नीच माना गया. सांस्कृतिक सिद्धांतकार अर्जुन अप्पडुराई ने इसे 'गैस्ट्रो-पॉलिटिक्स' कहा, यानी खाना ताकत और पहचान का जरिया बन जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसी वजह से आज भी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, दफ्तरों और रिहायशी सोसाइटियों में शाकाहारी और नॉनवेज के लिए अलग बैठने की जगह होती है. किराए के मकानों में अक्सर शाकाहारी होने की शर्त रखी जाती है, जिसे कुछ विद्वान 'फूड-बेस्ड अपार्थीड' कहते हैं. त्योहारों के दौरान मीट की बिक्री पर रोक भी लगाई जाती है, जिसे धार्मिक भावनाओं का सम्मान बताया जाता है. यह बहुसंख्यकवाद का एक रूप है जो अल्पसंख्यकों की पसंद को दबाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तो फिर भारत का असली खाना क्या है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुष्पेश पंत ने कहा, 'जिसे हम 'असली भारतीय खाना' मान लेते हैं, वह पूरे भारत के हर वर्ग का खाना नहीं है, बल्कि समाज के कुछ खास और बड़े लोगों की पसंद है. भारतीय खाना किसी एक व्यंजन या एक शैली का नाम नहीं है. यह 5,000 साल पुरानी बातचीत है जमीन, भाषा, संस्कृति और जलवायु के बीच. पंजाब में सरसों का साग और मक्की की रोटी से लेकर केरल में मछली और नारियल करी तक, राजस्थान में दाल-बाटी-चूरमा से लेकर बंगाल में मछली और मिठाई तक, हर राज्य की अपनी कहानी है. तटीय इलाकों में नारियल, समुद्री भोजन और चावल प्रमुख हैं, जबकि अंदरूनी मैदानी इलाकों में गेहूं की रोटी, डेयरी और धीमी आंच पर पके मांस पसंद किए जाते हैं.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुष्पेश पंत ने आगे कहा, 'दक्षिण भारत में चेट्टीनाड क्यूजीन अपने मसालेदार नॉनवेज के लिए मशहूर है, तो उत्तर प्रदेश की रसोई हल्के मसालों वाली शाकाहारी है. गोवा में पुर्तगाली प्रभाव से विंदालू और शकुती बने, तो कश्मीर में वाजवान नाम का 36-व्यंजनों का भोज परोसा जाता है. यह विविधता ही भारत की असली पहचान है.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/4b3e37d1d94fa81393d9f651e2d8489c17893733895661317_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सियासत और थाली का रिश्ता&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाने की सियासत सिर्फ BRICS डिनर तक सीमित नहीं है. असम सरकार ने होटलों, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक जगहों पर बीफ की सेवा और खपत पर प्रतिबंध लगा दिया है. &lt;a title=&quot;लखनऊ&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/lucknow&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;लखनऊ&lt;/a&gt; के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने हॉस्टल परिसर में नॉनवेज पकाने पर रोक लगा दी, जिस पर समाजवादी पार्टी ने इसे 'तुगलकी फरमान' कहा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरी तरफ बीजेपी के अंदर भी अलग-अलग आवाजें हैं. वेंकैया नायडू ने खुद को नॉनवेज बताया और कहा कि 'खाना निजी पसंद है.' बंगाल में बीजेपी विधायक सुवेंदु अधिकारी ने मंदिर में नॉनवेज भोग खाया, जिस पर पार्टी ने कहा कि बंगाल की संस्कृति में यह सामान्य है. यानी खाने की सियासत में पार्टी की एकरूपता भी नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस पूरी बहस से एक बात साफ होती है कि भारत का असली खाना शाकाहारी या नॉनवेज में से कोई एक नहीं है. भारत का असली खाना विविधता है. यहां राजस्थान में जहां 71% लोग शाकाहारी हैं, वहीं नागालैंड में 99.8% लोग मांस खाते हैं. यहां जैन भोजन में प्याज-लहसुन भी नहीं डाला जाता, तो कश्मीरी वाज़वान में 36 तरह के नॉनवेज व्यंजन परोसे जाते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;BRICS डिनर पर बहस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह दिखाती है कि खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि पहचान, ताकत और सियासत का मैदान है. सच यह भी है कि जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बात हो, तो उसकी थाली में सबके लिए जगह होनी चाहिए. भारत की ताकत उसकी विविधता में है और उसकी थाली उसी विविधता का आईना है.&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/14/dd6bd82e0e775d60b7ed66e7dad43ddb17893711250881317_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>