<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>Anger Harmone Inside Body: कुछ लोगों को ज्यादा गुस्सा क्यों आता है, जानें उनके शरीर में क्या होता है?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/lifestyle/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Tue, 2 Jun 2026 19:10:11 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[Budget International Trip: सिर्फ 50 हजार में होगी ऊंची-ऊंची इमारतों से लेकर डिज्नीलैंड तक की सैर, iPhone भी मिलता है सस्ता]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/travel/spend-just-50000-to-explore-hong-kong-disneyland-stunning-skylines-and-affordable-shopping-3139140</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/travel/spend-just-50000-to-explore-hong-kong-disneyland-stunning-skylines-and-affordable-shopping-3139140#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 17:14:23 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ ट्रैवल ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/travel/spend-just-50000-to-explore-hong-kong-disneyland-stunning-skylines-and-affordable-shopping-3139140</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;International Trip Under 50000 Rupees From India:&lt;/strong&gt; विदेश घूमने का सपना देखने वाले ज्यादातर लोगों को लगता है कि इसके लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे. लेकिन अगर आपका बजट सिर्फ 50 हजार रुपये है, तब भी आप ऐसी जगह की सैर कर सकते हैं जहां ऊंची-ऊंची इमारतें, चमचमाती सड़कें, डिज्नीलैंड और सस्ती शॉपिंग सब कुछ एक साथ मिल जाता है. हम बात कर रहे हैं हॉन्ग कॉन्ग की, जो भारतीय पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हॉन्ग कॉन्ग बेहतरीन विकल्प?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हॉन्ग कॉन्ग को एशिया के सबसे आधुनिक और आकर्षक शहरों में गिना जाता है. यहां की शानदार स्काईलाइन दुनिया भर में मशहूर है. विक्टोरिया हार्बर के किनारे खड़े होकर रात में 'सिम्फनी ऑफ लाइट्स' शो देखना किसी सपने से कम नहीं लगता. गगनचुंबी इमारतों से सजा यह शहर हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. अगर आप डिज्नीलैंड के दीवाने हैं, तो हॉन्ग कॉन्ग आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यहां मौजूद हॉन्ग कॉन्ग डिज्नीलैंड बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को रोमांच से भर देता है. रंग-बिरंगी परेड, थीम राइड्स और डिज्नी कैरेक्टर्स के साथ बिताया गया समय यात्रा को यादगार बना देता है. यही वजह है कि परिवारों के बीच यह जगह काफी लोकप्रिय है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/travel-valley-of-flowers-2026-opening-date-announced-know-complete-travel-guide-and-details-3138177&quot;&gt;खुलने जा रही है फूलों की जन्नत! वैली ऑफ फ्लावर्स 2026 की तारीख घोषित, जानें पूरी ट्रैवल गाइड&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कितना होता है खर्च?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अलग- अलग ब्लागर इसको लेकर अपना अलग- अलग एक्सपीरियंस देते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि हॉन्ग कॉन्ग जाना अब पहले जितना महंगा नहीं रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से हॉन्ग कॉन्ग की रिटर्न फ्लाइट करीब 24 हजार रुपये से शुरू हो जाती है. यदि टिकट पहले से बुक कर लिया जाए और बजट होटल चुने जाएं, तो पूरा ट्रिप लगभग 50 हजार रुपये के भीतर प्लान किया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कहां घूम सकते हैं आप?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घूमने के लिए यहां विक्टोरिया पीक, बिग बुद्धा, नैन लियान गार्डन और मोंग कोक के स्ट्रीट मार्केट जैसे कई मशहूर आकर्षण मौजूद हैं. एक ही शहर में आधुनिकता, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का ऐसा संगम कम ही देखने को मिलता है. पर्यटक चाहें तो यहां से मकाऊ की छोटी ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं. शॉपिंग के शौकीनों के लिए भी हॉन्ग कॉन्ग किसी जन्नत से कम नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स और कई ब्रांडेड प्रोडक्ट्स यहां आकर्षक कीमतों पर मिल जाते हैं. यही कारण है कि कई भारतीय पर्यटक यहां से आईफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि कीमतें मॉडल और टैक्स नियमों के अनुसार बदल सकती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारतीयों के लिए नहीं दिक्कत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारतीय यात्रियों के लिए यह शहर और भी सुविधाजनक माना जाता है. यहां अंग्रेजी व्यापक रूप से बोली जाती है, भारतीय रेस्टोरेंट आसानी से मिल जाते हैं और कई पर्यटन स्थलों पर भारतीय पर्यटकों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाता है. ऐसे में अगर आप कम बजट में विदेश यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो हॉन्ग कॉन्ग आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें- &lt;a title=&quot;Gen-Z बदल रहे हैं घूमने का तरीका, लंबी छुट्टियों की जगह अब कर रहे शॉर्ट ट्रिप&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/travel/gen-z-travel-trends-india-airbnb-report-short-trips-know-details-in-hindi-3138701&quot; target=&quot;_self&quot;&gt;Gen-Z बदल रहे हैं घूमने का तरीका, लंबी छुट्टियों की जगह अब कर रहे शॉर्ट ट्रिप&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/02/5e9bc326161e8b14ef8012aacfae799517803986848711257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Infant Mortality In India: भारत में शिशु मृत्यु दर में सुधार, लेकिन अब भी हर 42 में से एक बच्चा नहीं मना पाता पहला जन्मदिन]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/srs-2024-india-records-major-drop-in-infant-mortality-but-challenges-persist-3139045</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/srs-2024-india-records-major-drop-in-infant-mortality-but-challenges-persist-3139045#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 16:32:15 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/srs-2024-india-records-major-drop-in-infant-mortality-but-challenges-persist-3139045</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;States With Highest Infant Mortality Rate In India:&lt;/strong&gt; भारत में इन्फेंट फर्टिलिटी रेट में पिछले एक दशक के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर घटकर 24 रह गई है. साल 2019 में यह आंकड़ा 30 था. यह सुधार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी का परिणाम माना जा रहा है. हालांकि नेशनल लेवल पर तस्वीर बेहतर दिखती है, लेकिन राज्यों के बीच अब भी बड़ा अंतर मौजूद है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;42 में से एक बच्चे नहीं देख पाते पहला जन्मदिन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रिपोर्ट बताती है कि भारत में अब भी हर 42 में से एक शिशु अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाता. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है, जहां हर 37 में से एक शिशु की एक साल की उम्र से पहले मौत हो जाती है. शहरी इलाकों में यह अनुपात बेहतर है और वहां हर 59 में से एक शिशु की मृत्यु दर्ज की गई. एक्सपर्ट का मानना है कि संस्थागत प्रसव में वृद्धि ने शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्ष 2019 में जहां 83 प्रतिशत से कम प्रसव अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे थे, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 95 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया. इसके बावजूद रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि केवल अस्पताल में प्रसव कराने से ही समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि जन्म के बाद नवजात की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन राज्यों में स्थिति सबसे बेकार&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राज्यों की बात करें तो छत्तीसगढ़ सबसे चिंताजनक स्थिति में दिखाई देता है. यहां शिशु मृत्यु दर 36 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक है. इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का स्थान रहा, जहां यह आंकड़ा 35 रहा।.नवजात मृत्यु दर के मामले में भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर रहे, जबकि उत्तर प्रदेश भी चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन राज्यों में बेहतर है स्थिति&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके उलट गोवा और सिक्किम देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य बनकर उभरे हैं. दोनों राज्यों में शिशु मृत्यु दर केवल 7 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई. केरल 8 के साथ तीसरे स्थान पर रहा. तमिलनाडु और दिल्ली में यह आंकड़ा 11, जबकि त्रिपुरा में 12 दर्ज किया गया. महाराष्ट्र ने 14, कर्नाटक ने 15, पंजाब ने 16, तेलंगाना ने 17 और आंध्र प्रदेश ने 18 की दर दर्ज कर राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अब भी क्या है सबसे बड़ी चुनौती&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि सबसे बड़ी चुनौती अब भी नवजात शिशुओं की मौत है. &amp;nbsp;रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में होने वाली कुल शिशु मौतों में करीब 73 प्रतिशत मौतें जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर हुईं. एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले वर्षों में शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए गर्भावस्था के दौरान बेहतर देखभाल, मातृ पोषण, सुरक्षित प्रसव और जन्म के बाद नवजात की क्वालिटी मेडिकल सेवाओं पर अधिक ध्यान देना होगा. भारत ने इस दिशा में लंबी दूरी तय की है, लेकिन अभी भी कई राज्यों में सुधार की बड़ी गुंजाइश बनी हुई है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/02/5e5734942d17f0de51cb349628168baf17803908218201257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Fish & Milk Myth: क्या मछली खाने के बाद दूध पीने से सच में हो जाते हैं सफेद दाग? एक्सपर्ट से जानें]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/fish-after-milk-white-spots-myth-or-fact-3138578</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/fish-after-milk-white-spots-myth-or-fact-3138578#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 15:01:13 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/fish-after-milk-white-spots-myth-or-fact-3138578</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Fish &amp;amp; Milk Myth:&lt;/strong&gt; क्या मछली खाने के बाद आपके घर में भी दूध पीने से मना किया जाता है? अगर हां तो आप इकलौते नहीं है. ज्यादातर भारतीय घरों में मछली के बाद दूध पीने से मना किया जाता है. पुराने समय से ही इस फूड कॉम्बिनेशन को सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि मछली और दूध एक साथ खाने से स्किन पर सफेद दाग हो जाते हैं, तो कोई इस फूड कॉम्बिनेशन को गैस और अपच जैसी समस्याओं से जोड़ता है. इस मान्यता में कितनी सच्चाई है या यह महज एक अंधविश्वास है. आइए जानते हैं....&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सफेद दाग क्या होता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विटिलिगो (Vitiligo) एक त्वचा संबंधी बीमारी है, जिसमें त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग धीरे-धीरे सफेद पड़ने लगता है. यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब त्वचा में मेलानिन बनाने वाली कोशिकाएं जिन्हें मेलानोसाइट्स कहते हैं किसी कारण से नष्ट हो जाती हैं या सही ढंग से काम करना बंद कर देती हैं. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और शरीर के किसी भी हिस्से पर दिख सकती है. यह बीमारी कवक संक्रमण या मेलानोसाइट्स नामक वर्णक बनाने वाली कोशिकाओं के नष्ट होने का परिणाम होती है, केवल मछली और दूध के संयोजन से यह स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकती.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/kidney-damage-often-shows-no-symptoms-until-it-is-too-late-doctors-warn-3138053&quot;&gt;Kidney Health Tips: किडनी खराब होने से पहले शरीर नहीं देता बड़ा संकेत, डॉक्टर की चेतावनी- देर होने का न करें इंतजार&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&amp;nbsp;मछली और दूध को लेकर फैली मान्यता&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आयुर्वेद और लोक परंपराओं में मछली और दूध को &quot;विरुद्ध आहार&quot; माना गया है. यानी ऐसा भोजन जिनका एक साथ सेवन शरीर के लिए हानिकारक बताया गया है. इसी आधार पर पीढ़ियों से यह धारणा चली आ रही है कि दोनों को साथ खाने से त्वचा रोग विशेषकर सफेद दाग हो सकते हैं. यह मान्यता इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि लोग बिना किसी प्रमाण के इसे सच मान लेते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट क्या कहते हैं?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, मछली और दूध का एक साथ सेवन करने से सफेद दाग होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण आज तक सामने नहीं आया है. विशेषज्ञों के अनुसार, विटिलिगो का मुख्य कारण ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है,&amp;nbsp; जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपनी ही मेलानोसाइट कोशिकाओं पर हमला करने लगती है. इसके अलावा आनुवंशिक कारक और पर्यावरणीय तत्व भी इस बीमारी में भूमिका निभाते हैं. अब तक हुई किसी भी प्रमाणिक रिसर्च में मछली-दूध के संयुक्त सेवन और सफेद दाग के बीच कोई सीधा संबंध सिद्ध नहीं हुआ है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आयुर्वेद क्या कहता है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आयुर्वेद के अनुसार, दूध की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है. जबकि मछली की तासीर गर्म होती है और यह शरीर में गर्माहट बनाए रखता है. ऐसे में अगर मछली और दूध को एक साथ लिया जाता है तो पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. मछली और दूध को एक साथ लेने से पाचन-तंत्र गड़बड़ा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/govt-fixes-mrp-of-30-essential-medicines-nppa-diabetes-bp-india-3137924&quot;&gt;Medicine MRP rules India: सरकार ने तय किए 30 जरूरी दवाओं के दाम, अब MRP से ज्यादा नहीं वसूल सकेंगे दुकानदार&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/01/b88f4a5d9b093d742e9170bae1c27c0317803101173011429_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Maternal Health: मैटरनल मोर्टलिटी घटी, पर 57% महिलाओं में एनीमिया अब भी बड़ा खतरा, एक्सपर्ट ने किया अलर्ट]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/anaemia-remains-a-major-challenge-despite-india-sharp-decline-in-maternal-mortality-rate-3139015</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/anaemia-remains-a-major-challenge-despite-india-sharp-decline-in-maternal-mortality-rate-3139015#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 14:20:33 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/anaemia-remains-a-major-challenge-despite-india-sharp-decline-in-maternal-mortality-rate-3139015</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Safe Motherhood And Maternal Health Care:&lt;/strong&gt; भारत में मैटरनल हेल्थ के क्षेत्र में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है. 'द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनाकोलॉजी एंड वीमेन हेल्थ' में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, देश की मैटरनल हेल्थ दर वर्ष 2000 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 384 मौतों से घटकर 2023 में 88 रह गई है. यह गिरावट दुनिया में सबसे तेज सुधारों में से एक मानी जा रही है. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इस उपलब्धि को आगे भी बनाए रखने के लिए एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर विशेष ध्यान देना होगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मैटरनल हेल्थ में सुधार के क्या हैं रीजन?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;देश में महिलाओं की मैटरनल यात्रा अलग-अलग परिस्थितियों से गुजरती है. शहरी क्षेत्रों में कई महिलाएं शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए देर से परिवार बढ़ाने का निर्णय ले रही हैं. वहीं ग्रामीण इलाकों में महिलाएं कम उम्र में गर्भधारण तो कर लेती हैं, लेकिन उन्हें गर्भावस्था से पहले और बाद की नियमित हेल्थ सेवाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल पातीं. ऐसे में सुरक्षित मैटरनल हेल्थ सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;57 प्रतिशत महिलाएं इस दिक्कत से जूझ रहीं हैं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. पिछली सर्वे रिपोर्ट में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत था. एक्सपर्ट के अनुसार एनीमिया गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग, इंफेक्शन और समय से पहले प्रसव जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ा देता है. यही वजह है कि इसे ब्लीडिंग से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों में गिना जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आयरन की कमी के क्या हैं कारण?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि आयरन की कमी एक दिन में नहीं होता. भोजन में पोषक तत्वों की कमी, पर्याप्त आहार विविधता का अभाव और पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग के कारण शरीर में आयरन का स्तर धीरे-धीरे कम होता जाता है। .इसी वजह से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स को समय रहते महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी बताया गया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/morning-tea-vs-evening-tea-which-is-better-for-your-health-and-energy-3138539&quot;&gt;&lt;strong&gt;Best Time To Drink Tea: सुबह की चाय या शाम की चाय? जानिए आपकी सेहत के लिए कौन-सा समय है सबसे बेहतर&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;एनीमिया की दिक्कत से बचने के उपाय?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हल्के और मध्यम एनीमिया के मामलों में आयरन की गोलियां उपचार का पहला विकल्प मानी जाती हैं क्योंकि वे सस्ती, सुलभ और प्रभावी हैं. हालांकि कई बार महिलाओं के लिए इन्हें नियमित रूप से लेना आसान नहीं होता या शरीर में इनका एब्जॉर्व पर्याप्त नहीं हो पाता. ऐसे मामलों में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज आईवी-एफसीएम जैसी नसों के माध्यम से दी जाने वाली आयरन थेरेपी महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है, विशेषकर उन गर्भवती महिलाओं के लिए जिन्हें गर्भावस्था के अंतिम महीनों में गंभीर एनीमिया का पता चलता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किस स्टेज में सबसे ज्यादा होते हैं मैटरनल मोर्टलिटी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत में प्रसव के बाद होने वाला अत्यधिक ब्लीडिंग यानी पोस्टपार्टम हेमरेज आज भी मैटरनल मोर्टलिटी के प्रमुख कारणों में शामिल है. इससे निपटने के लिए ई-मोटिव बंडल जैसे उपाय प्रभावी साबित हुए हैं. सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में दो लाख से अधिक प्रसवों पर किए गए परीक्षणों में इस मॉडल ने गंभीर ब्लीडिंग से जुड़ी दिक्कतों को 60 प्रतिशत तक कम किया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ेंः&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/himachal-man-dies-after-kurkura-choking-know-food-choking-risks-and-first-aid-steps-3138109&quot;&gt;&lt;strong&gt;Food Choking: कुरकुरे के टुकड़े ने ली युवक की जान! Food Choking कितना खतरनाक, कैसे बचाई जा सकती है जान?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/02/f1bef36cbbc39f258137d4e04f5955ef17803872742941257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[भीषण गर्मी को कैसे मात दे भारत, कौन चुका रहा इसकी सबसे ज्यादा कीमत?]]></title><link>https://www.abplive.com/blog/how-india-can-beat-severe-heatwave-climate-solutions-3139030</link><comments>https://www.abplive.com/blog/how-india-can-beat-severe-heatwave-climate-solutions-3139030#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 13:53:01 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ डॉ. अरुणाभा घोष ]]></dc:creator><category><![CDATA[ लाइफस्टाइल ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/blog/how-india-can-beat-severe-heatwave-climate-solutions-3139030</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आपने तपती गर्मी में आइसक्रीम खाने या छांव वाली जगह पर पहुंचने पर महसूस किया होगा कि गर्मी से राहत मिलना कैसा होता है. अब खुद से एक सवाल पूछिए, आपको ऐसी तमाम सेवाएं देने पहुंचाने वालों को क्या गर्मी से राहत मिल पाती है? गोवा के मिरामार बीच पर खड़े एक दुकानदार ने कहा, 'हम गर्मी में लोगों को सुकून पाने में मदद करते हैं, लेकिन हमारे पास अपनी मदद करने का कोई उपाय नहीं है.' कुल मिलाकर भीषण गर्मी अब वैश्विक औसत तापमान में सिर्फ अमूर्त की दिखने वाली बढ़ोतरी नहीं रह गई. यह भारत सहित संपूर्ण दक्षिण एशिया में गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुकी है. इसका सीधा असर मानव गरिमा, कार्यक्षमता और जीवन पर पड़ रहा है. इसकी सर्वाधिक कीमत रेहड़ी-पटरी वालों, गिग वर्कर्स, निर्माण श्रमिकों और किसानों को चुकानी पड़ रही है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत में लू के जोखिम वाले राज्यों की संख्या 23 है. इनमें से लगभग 57 प्रतिशत जिलों में तापमान का उच्च से बहुत उच्च जोखिम मौजूद है, जहां देश की तीन-चौथाई आबादी रहती है. अगर एशिया की बात करें तो यह वैश्विक औसत तापमान की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है. भले ही गर्मी अपने पीछे बाढ़ या चक्रवात जैसे तबाही के निशान नहीं छोड़ती है, लेकिन यह अदृश्य रहकर हमारी काम करने की क्षमता को घटा देती है, स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव डालती है और असमानता को बढ़ाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गर्मी का सामना करने के लिए देश में एक व्यवस्थित क्षमता बनाने की शुरुआत हो चुकी है. हालांकि, इसे पूर्ण रूप से विस्तार देने की जरूरत है. 2013 में अहमदाबाद में हीट एक्शन प्लान मॉडल लागू हुआ था, जो अब लगभग 23 राज्यों के 200 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है. इसे बनाने में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना और बजट आवंटन के जरिए इसे मजबूत बनाना बहुत जरूरी है. सामुदायिक नेतृत्व वाले 'कूल रूफ' कार्यक्रम और महिला श्रमिकों के लिए 'पैरामीट्रिक हीट इंश्योरेंस' जैसे उपाय बताते हैं कि गर्मी का सामना करने क्षमता (रेजिलियंस) तैयार की जा सकती है और इसके लिए वित्त भी जुटाया जा सकता है. ऐसा करने के लिए सभी जरूरी घटक मौजूद हैं. अगर कमी है तो उस राजनीतिक और संस्थागत इच्छाशक्ति की, जो सभी घटकों को मिलाकर इन्हें प्रभावी ढंग से लागू कर सके. इस दिशा में ये उपाय मददगार हो सकते हैं:&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सबसे पहले क्लाइमेट इंटेलिजेंस को एक सार्वजनिक ढांचे के रूप में विकसित करें और इसे दैनिक फैसलों का आधार बनाएं. इस काम में एआई प्लेटफॉर्म 'क्लाइमेट रेजिलिएंस एनालिटिक्स एंड विज़ुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम' (CRAVIS) मदद कर सकता है, जिसे सीईईडब्ल्यू ने &amp;lsquo;कोलैबोरेटिव डेटा कॉमन्स&amp;rsquo; के रूप में विकसित किया है. यह प्लेटफॉर्म 40 वर्षों से अधिक समय के जलवायु आंकड़ों का आकलन करता है और इसे 2070 तक के अनुमानों से जोड़ता है. इसका इस्तेमाल करके जिला मजिस्ट्रेट, शहरी नियोजक या जनस्वास्थ्य अधिकारी जैसे तमाम निर्णयनकर्ता सरल भाषा में अपने सवालों के जवाब पा सकते हैं. उदाहरण के लिए, यह बढ़ती गर्मी से बिजली की मांग पर क्या असर होगा, कहां पर असामान्य रूप से गर्म रातें होंगी या किन जिलों को लंबे सूखे का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कई सवालों के जवाब दे सकता है. क्रैविस ने अगले दो दशकों में भारत में प्रतिवर्ष 15 से 40 असामान्य रूप से गर्म दिन और 20 से 40 असामान्य रूप से गर्म रातें बढ़ने का अनुमान लगाया है. मौसम पूर्वानुमान की तरह ऐसी जानकारियों को नियमित बनाने से आपदा के बाद प्रतिक्रिया करने की जगह पर पूर्वानुमान आधारित पूर्व-सक्रिय उपायों को लाया जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरा, गर्मी और स्वास्थ्य के क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को संस्थागत रूप देना होगा, क्योंकि भीषण गर्मी सीमाओं से नहीं बंधी है और दक्षिण एशिया के सभी देशों में इसके जोखिम का पैटर्न भी एक जैसा है. क्षेत्रीय स्तर पर पहले से व्यावहारिक अनुभवों का खजाना मौजूद है. बस उसे एक ऐसे मंच की जरूरत है, जो इन्हें साझा मानकों, संयुक्त प्रशिक्षणों और सह-वित्तपोषित प्रयासों में बदल सकें. इसमें हाल ही में शुरू हुआ ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क (जीएचएचआईएन) का 'दक्षिण एशिया हब' अहम भूमिका निभा सकता है. यह प्रमुख अनुसंधान, नीति और विकास संगठनों का एक समूह है. इसका लक्ष्य 60 से अधिक संस्थानों को जोड़ना, स्वास्थ्य, जलवायु व शहरी लचीलेपन में 500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करना और कम से कम चार देशों में हीट एक्शन प्लान को मजबूती देना है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तीसरा, गर्मी को एक संरचनागत जोखिम मानकर, जो कि पहले ही बन चुका है, वित्तीय व्यवस्था को नए सिरे से ढालना होगा. अब तापमान एक सीमा से ऊपर जाने पर ऑटोमेटिक भुगतान करने वाला 'पैरामीट्रिक हीट इंश्योरेंस', बुनियादी ढांचे में जलवायु आधारित निवेश और नगर निगम के बजट में हीट रेजिलिएंस लाने की शर्तें जोड़ने जैसे काम सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रह सकते हैं. ये नए सामाजिक अनुबंधों की बुनियाद बनने चाहिए, जिसमें गर्मी को व्यक्तिगत समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाए और सार्वजनिक तंत्र को समाधान उपलब्ध कराने में सक्षम बनाया जाए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चूंकि, भीषण गर्मी के जोखिम पूर्वानुमान किया जा सकता है, इसलिए उचित संस्थागत व्यवस्थाओं के जरिए इसे रोका भी जा सकता है. अपने प्रयासों से भारत इस बात का उदाहरण पेश कर सकता है कि अगर योजनाबद्ध तरीके से नीतिगत प्रयास हो तो सबसे अधिक गर्मी वाली जगहें भी रेजिलिएंट (लचीले) बन सकती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;(लेखकों के विचार निजी हैं)&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/02/aa8820d83f5ae2111f473bc866bf4d0e1780388499430887_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Single Malt Whisky: कैसे पीनी चाहिए सिंगल मॉल्ट व्हिस्की, जानें क्या है इसे पीने का सबसे सही तरीका?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/how-to-drink-single-malt-whisky-the-right-way-expert-tips-for-the-perfect-sip-3138971</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/how-to-drink-single-malt-whisky-the-right-way-expert-tips-for-the-perfect-sip-3138971#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 13:15:52 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ लाइफस्टाइल ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/how-to-drink-single-malt-whisky-the-right-way-expert-tips-for-the-perfect-sip-3138971</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;How To Drink Single Malt Whisky Correctly:&lt;/strong&gt; सिंगल मॉल्ट व्हिस्की का नाम आते ही अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इसे पीने का सही तरीका क्या है. कई लोग इसे बिना कुछ मिलाए पीना पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग बर्फ या पानी के साथ इसका स्वाद लेना बेहतर मानते हैं. हालांकि व्हिस्की एक्सपर्ट का कहना है कि सिंगल मॉल्ट को एंजॉय करने का कोई एक तय नियम नहीं है, बल्कि सबसे जरूरी है कि आप इसके फ्लेवर और खुशबू को समझते हुए इसका आनंद लें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किस बात को समझना सबसे जरूरी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक्सपर्ट के मुताबिक, सिंगल मॉल्ट पीने से पहले उसकी खासियत जानना जरूरी है. यह किस तरह के बैरल में तैयार हुई है, उसकी उम्र कितनी है और उसमें किस तरह की खुशबू व स्वाद मौजूद हैं, इन बातों को समझने से टेस्टिंग का अनुभव और बेहतर हो जाता है. व्हिस्की चखते समय जल्दबाजी करने के बजाय छोटे-छोटे घूंट लेने की सलाह दी जाती है. धीरे-धीरे सिप लेने से व्हिस्की का स्वाद जीभ के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है और उसमें मौजूद मिठास, मसालेदार नोट्स या स्मोकी फ्लेवर को आसानी से महसूस किया जा सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खुशबू क्यों होती है जरूरी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खुशबू भी व्हिस्की टेस्टिंग का अहम हिस्सा मानी जाती है. जानकारों का कहना है कि घूंट लेने से पहले व्हिस्की को सूंघना चाहिए. ऐसा करने से उसके भीतर छिपे फ्लेवर और अरोमा को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. यही वजह है कि प्रोफेशनल टेस्टिंग के दौरान खुशबू पर विशेष ध्यान दिया जाता है. बहुत से लोग यह मानते हैं कि असली सिंगल मॉल्ट हमेशा नीट यानी बिना कुछ मिलाए पीनी चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं. उनके अनुसार व्हिस्की में कुछ बूंद पानी मिलाने से उसकी खुशबू और स्वाद खुलकर सामने आ सकते हैं. पानी अल्कोहल की तीव्रता को भी थोड़ा कम करता है, जिससे नए लोगों के लिए इसे पीना आसान हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या बर्फ डालकर पीना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;cotswoldsdistillery की रिपोर्ट के अनुसार, बर्फ डालकर पीने से व्हिस्की अधिक ठंडी और रिफ्रेशिंग लग सकती है, लेकिन इससे उसके कुछ फ्लेवर दब सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति ठंडी व्हिस्की पसंद करता है तो बड़े आइस क्यूब्स या व्हिस्की स्टोन्स का इस्तेमाल बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि इससे स्वाद पर कम असर पड़ता है. एक्सपर्ट का मानना है कि सिंगल मॉल्ट व्हिस्की का सबसे सही तरीका वही है जो आपको पसंद आए. चाहे आप इसे नीट पिएं, पानी की कुछ बूंदों के साथ लें या फिर किसी क्लासिक कॉकटेल में शामिल करें, सबसे महत्वपूर्ण बात इसका स्वाद और अनुभव लेना है. नए लोगों को &amp;nbsp;बताया जाता है कि वे अलग-अलग तरीकों से इसे आजमाएं और अपनी पसंद का तरीका खोजें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/02/fe5593cfb8e76a50e1277f767057686417803860024481257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Diabetes Problems: यूपी में शुगर का कहर, हर 5वां पुरुष और 6ठी महिला चपेट में, सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/uttar-pradesh-sees-sharp-rise-in-diabetes-obesity-and-malnutrition-says-nfhs-6-3138956</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/uttar-pradesh-sees-sharp-rise-in-diabetes-obesity-and-malnutrition-says-nfhs-6-3138956#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 12:31:56 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/uttar-pradesh-sees-sharp-rise-in-diabetes-obesity-and-malnutrition-says-nfhs-6-3138956</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Obesity And Diabetes Rising Across India:&lt;/strong&gt; भारत इस समय एक ऐसे हेल्थ संकट का सामना कर रहा है, जहां एक तरफ मोटापा और डायबिटीड तेजी से बढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- एनएफएचएस-6, 2023-24 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में पोषण से जुड़ी दो विपरीत समस्याएं एक साथ मौजूद हैं. कई राज्यों में लोग अधिक वजन और मोटापे से जूझ रहे हैं, जबकि उसी आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी कुपोषण का शिकार है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोटापा के मामले में बढोतरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 30.7 प्रतिशत महिलाएं और 27.3 प्रतिशत पुरुष अब अधिक वजन या मोटापे की कैटेगरी में आते हैं. एनएफएचएस-5 की तुलना में यह वृद्धि काफी तेज है. खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर दिखाई दे रही है, जहां लगभग 43 प्रतिशत महिलाएं और 36.3 प्रतिशत पुरुष मोटापे या अधिक वजन से प्रभावित हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मैलोन्यूट्रिशन की समस्या भी बढ़ी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरी तरफ, कुपोषण की समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ती दिखाई दे रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग हर पांचवां एडल्ट अब भी कम वजन की श्रेणी में आता है. पुरुषों में कम वजन की दर 16.2 प्रतिशत से बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई है, जबकि महिलाओं में यह 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 19.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यह स्थिति बताती है कि पोषण संबंधी असमानताएं अभी भी बरकरार हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;डायबिटीज के मामले भी बढ़े&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एनएफएचएस-6 ने डायबिटीज को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है. 15 वर्ष से अधिक उम्र की 17.8 प्रतिशत महिलाओं में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया या वे डायबिटीज की दवा ले रही थीं. पुरुषों में यह आंकड़ा 20.9 प्रतिशत दर्ज किया गया, यानी हर पांचवां पुरुष डायबिटीज या उससे जुड़ी दवाओं पर निर्भर है. यह संख्या पिछले सर्वेक्षण की तुलना में काफी बढ़ी है. रिपोर्ट में कई राज्यों में स्थिति और अधिक चिंताजनक दिखाई दी. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में मोटापे के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं बिहार, झारखंड, राजस्थान, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कुपोषण की समस्या बढ़ती हुई दिखाई दी. उत्तर प्रदेश में भी मोटापा, कुपोषण और डायबिटीज तीनों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;उत्तर प्रदेश की क्या स्थिति&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राज्य में डायबिटीज की रफ्तार राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. हालात ऐसे हैं कि अब प्रदेश का लगभग हर पांचवां पुरुष और हर छठी महिला डायबिटीज से प्रभावित है. सर्वे के मुताबिक, पूरे देश में महिलाओं के बीच मधुमेह बढ़ने की दर 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई है, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 5.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. पुरुषों में भी स्थिति चिंताजनक है. जहां राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत है, वहीं उत्तर प्रदेश में यह करीब 8 प्रतिशत दर्ज की गई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाई बीपी के मामलों में गिरावट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बीपी के मामलों में कुछ राहत जरूर देखने को मिली है. महिलाओं और पुरुषों दोनों में हाई बीपी की समस्या की दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद देश का लगभग हर पांचवा एडल्ट अब भी हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित है. एक्सपर्ट के अनुसार यह हार्ट रोग, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का बड़ा जोखिम कारक बना हुआ है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/02/52c856c0fe0cc7c225e27fe4a658e83917803828136181257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Tea And Health: किस उम्र के लोगों को कितनी पीनी चाहिए चाय? बीमार होने से पहले जानें हिसाब-किताब]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-much-tea-should-people-of-different-ages-drink-know-the-right-limit-3132850</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-much-tea-should-people-of-different-ages-drink-know-the-right-limit-3132850#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 10:56:23 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सोनम ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-much-tea-should-people-of-different-ages-drink-know-the-right-limit-3132850</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;How Much Tea Should Different Age Groups Drink:&lt;/strong&gt; भारत में सुबह की शुरुआत अक्सर चाय के बिना अधूरी मानी जाती है. किसी को बेड टी पसंद होती है, तो कोई दिनभर में कई कप चाय पी जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी उम्र के हिसाब से कितनी चाय पीना सही है? क्योंकि जरूरत से ज्यादा चाय पीने की आदत धीरे-धीरे शरीर पर बुरा असर डाल सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चाय में हेल्दी विकल्प&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट healthline के अनुसार, चाय में मौजूद कैफीन और दूसरे कंपाउंड्स शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ नुकसान भी पहुंचा सकते हैं, खासकर तब जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाए. हाल के वर्षों में ग्रीन टी को हेल्दी ड्रिंक के तौर पर काफी लोकप्रियता मिली है, क्योंकि इसमें कैटेचिन नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. रिसर्च में इन्हें हार्ट डिजीज, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ तरह के कैंसर के खतरे को कम करने से जोड़ा गया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्टडीज के मुताबिक, ग्रीन टी मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और फैट बर्निंग में भी मदद कर सकती है. रिसर्च में पाया गया कि नियमित रूप से ग्रीन टी पीने वाले लोगों में वजन कंट्रोल और ओवरऑल हेल्थ बेहतर देखी गई.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक दिन में कितना चाय पीना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लेकिन सवाल यह है कि कितनी चाय सही मानी जाती है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह उम्र, हेल्थ कंडीशन और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है. आमतौर पर किशोरों और युवाओं को दिनभर में 1 से 2 कप से ज्यादा कैफीन वाली चाय नहीं पीनी चाहिए. वहीं स्वस्थ वयस्कों के लिए 3 से 5 कप ग्रीन टी तक फायदेमंद मानी गई है. कई स्टडीज में यह मात्रा हेल्थ बेनिफिट्स के लिए बेहतर बताई गई है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें -&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-summer-fatigue-warning-signs-dehydration-anemia-thyroid-diabetes-health-tips-doctor-health-advice-3129734&quot;&gt;Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हमें क्या हो सकता है नुकसान?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि जरूरत से ज्यादा चाय पीना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. बहुत अधिक कैफीन लेने से बेचैनी, नींद की कमी, सिरदर्द, पेट में गड़बड़ी और एंग्जायटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. &amp;nbsp;प्रेग्नेंट महिलाओं को खासतौर पर कैफीन की मात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है. रिसर्च के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा कैफीन गर्भावस्था के दौरान जोखिम बढ़ा सकती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पूरे दिन में 300 मिलीग्राम से ज्यादा कैफीन नहीं लेना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि चाय पीने का समय भी मायने रखता है. खाली पेट ज्यादा चाय पीने से एसिडिटी और डइजेशन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं खाने के तुरंत बाद चाय पीने से शरीर में आयरन का अब्जार्व कम हो सकता है. डॉक्टर्स के मुताबिक, चाय पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा और समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इसे भी पढ़ें &amp;nbsp;-&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/home-tips/side-effects-of-dirty-pots-and-sink-how-to-keep-it-clean-diseases-spread-from-sink-maintain-hygiene-3129616&quot;&gt;जहां बन रहा खाना वहीं पनप रही बीमारी, क्या आपके बच्चों को भी बीमार कर रही किचन की सिंक?&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/20/a743cf55d09ca8434f1f7d49af721e2e17792759352791257_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Egg Yolk Good Or Bad: किन लोगों को नहीं खाना चाहिए अंडे की जर्दी, जानें इससे क्या हो सकता है नुकसान?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/who-should-eat-egg-yolk-and-what-caused-by-eating-it-3138771</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/who-should-eat-egg-yolk-and-what-caused-by-eating-it-3138771#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 10:21:58 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/who-should-eat-egg-yolk-and-what-caused-by-eating-it-3138771</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Egg Yolk Good Or Bad:&lt;/strong&gt; अंडा हम सभी को बहुत पसंद होता है. सुबह के नाश्ते में अंडा खाना सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. अंडे के दो भाग होते हैं. बाहर का हिस्सा सफेद होता है और अंदर का हिस्सा पीला होता है. इस पीले हिस्से को 'अंडे की जर्दी' कहते हैं. अंडे का सफेद हिस्सा सबको फायदा करता है. लेकिन पीले हिस्से में फैट और कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होता है. इसलिए यह पीला हिस्सा कुछ लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है. आइए समझते हैं कि किन लोगों को इसे नहीं खाना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हो&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हमारे शरीर में एक तरह का फैट होता है जिसे कोलेस्ट्रॉल कहते हैं. अंडे के पीले हिस्से में यह कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा होता है. जिन लोगों के शरीर में पहले से ही कोलेस्ट्रॉल ज्यादा है, उन्हें यह पीला हिस्सा नहीं खाना चाहिए. इसे खाने से खून की नसें बंद हो सकती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दिल की बीमारी वाले लोग&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जिन लोगों को दिल की बीमारी होती है, उन्हें डॉक्टर कम फैट वाला खाना खाने को कहते हैं. अंडे की जर्दी में फैट बहुत ज्यादा होता है. इसे खाने से दिल पर दबाव बढ़ता है. इसलिए दिल के मरीजों को सिर्फ सफेद हिस्सा ही खाना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुगर या डायबिटीज के मरीज&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;शुगर की बीमारी वाले लोगों को मीठे के साथ-साथ फैट वाले खाने से भी बचना चाहिए. ज्यादा जर्दी खाने से शुगर के मरीजों को दिल की बीमारी होने का डर रहता है. डॉक्टर हमेशा शुगर के मरीजों को सोच-समझकर अंडा खाने की सलाह देते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सेहत और वजन का ध्यान रखने वाले लोग&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अंडे का पीला हिस्सा ऊर्जा से भरपूर होता है. जो लोग अपनी सेहत का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं, वे अक्सर इसे कम मात्रा में खाते हैं क्योंकि इसमें कैलोरी ज्यादा होती है. वजन को सही रखने के लिए सफेद और पीला हिस्सा सही तालमेल में खाना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/do-not-take-lightly-your-heel-pain-3137772&quot;&gt;Heel Pain Is A Big Problem: सुबह उठते ही एड़ियों में होता है तेज दर्द, जानें यह किस बीमारी का संकेत?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पेट और पाचन की बात&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कुछ लोगों का पेट बहुत नाजुक होता है और उन्हें भारी खाना पचाने में थोड़ी मुश्किल होती है. अंडे का पीला हिस्सा सफेद हिस्से के मुकाबले थोड़ा भारी होता है. इसलिए, जिन बच्चों या बड़ों का पेट जल्दी खराब हो जाता है, उन्हें इसे कम मात्रा में लेना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एएक स्वस्थ बच्चे या बड़े इंसान के लिए रोज एक पूरा अंडा खाना आमतौर पर अच्छा होता है क्योंकि इसमें बहुत सारे विटामिन होते हैं. लेकिन अगर किसी को कोई बीमारी है, तो उन्हें अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-detox-your-body-and-clean-it-from-inside-3138089&quot;&gt;Detox Your Body Tips: क्या आपका शरीर Detox मांग रहा है? पहचानें संकेत और जानें उपाय&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/01/4bec0087805f015637d083671c73808c17803325492621424_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Anger Harmone Inside Body: कुछ लोगों को ज्यादा गुस्सा क्यों आता है, जानें उनके शरीर में क्या होता है?]]></title><link>https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-all-time-you-got-angry-know-the-facts-3138513</link><comments>https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-all-time-you-got-angry-know-the-facts-3138513#respond</comments><pubDate>Tue, 2 Jun 2026 10:05:06 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ हेल्थ ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-all-time-you-got-angry-know-the-facts-3138513</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Anger Harmone Inside Body:&lt;/strong&gt; हमने देखा है कि कुछ लोग बहुत शांत रहते हैं, जबकि कुछ लोगों को बात-बात पर बहुत तेज गुस्सा आ जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? गुस्सा सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारे दिमाग और शरीर से है. जब किसी को गुस्सा आता है, तो उसके शरीर के अंदर एक पूरा उथल पूथल मच जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आइए जानते हैं कि ज्यादा गुस्सा आने के पीछे का वैज्ञानिक सच क्या है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दिमाग का यह छोटा सा हिस्सा ही है कारण&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हमारे दिमाग में एमिग्डाला नाम का एक छोटा सा हिस्सा होता है. इसे हमारे शरीर का खतरे का अलार्म भी कह सकते हैं. जब भी हमें कोई बात बुरी लगती है, तो यह अलार्म तुरंत बज जाता है. ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगों में यह हिस्सा बहुत ज्यादा एक्टिव होता है. यह दिमाग के सोचने-समझने वाले हिस्से को ब्लॉक कर देता है, जिससे इंसान बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल या कर देता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गुस्सा आते ही शरीर में होने लगता है यह बदलाव&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जैसे ही एमिग्डाला एक्टिव होता है, वह शरीर में एड्रेनालिन और कोर्टिसोल नाम के स्ट्रेस हार्मोन रिलीज कर देता है. इन हार्मोन के निकलते ही शरीर में ये बड़े बदलाव होते हैं:&lt;/p&gt;
&lt;ul style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;li&gt;दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है.&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है.&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;मांसपेशियां एकदम खिंच जाती हैं.&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;सांसें बहुत तेज और उथली होने लगती हैं.&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;चेहरे और हाथों में खून का बहाव बढ़ जाता है, जिससे चेहरा लाल हो जाता है.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-to-detox-your-body-and-clean-it-from-inside-3138089&quot;&gt;&lt;strong&gt;Detox Your Body Tips: क्या आपका शरीर Detox मांग रहा है? पहचानें संकेत और जानें उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या ज्यादा गुस्सा आना किसी बड़ी बीमारी का संकेत है?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बार-बार और बहुत ज्यादा गुस्सा आना सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. लगातार गुस्सा करने से शरीर हर वक्त तनाव में रहता है. इससे दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक और अनिद्रा &amp;nbsp;जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. कुछ लोगों में मानसिक तनाव, डिप्रेशन या नींद की कमी के कारण भी गुस्सा ज्यादा आता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस गुस्से के तूफान को शांत कैसे करें?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गुस्से को काबू करना नामुमकिन नहीं है. जब भी गुस्सा आए, तो तुरंत लंबी और गहरी सांसें लें. 1 से 10 तक उल्टी गिनती गिनें. उस जगह से थोड़ी देर के लिए हट जाएं और ठंडा पानी पिएं. रोजाना योग और ध्यान करने से दिमाग शांत रहता है और एमिग्डाला कंट्रोल में रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/lifestyle/health/himachal-man-dies-after-kurkura-choking-know-food-choking-risks-and-first-aid-steps-3138109&quot;&gt;Food Choking: कुरकुरे के टुकड़े ने ली युवक की जान! Food Choking कितना खतरनाक, कैसे बचाई जा सकती है जान?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/01/805f6c815c69bbf5a3e68cf08e6d8c1b17803098166301424_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>